परिवार्र नियोजन क अर्थ और परिवार्र नियोजन के उपार्य

परिवार्र नियोजन क अर्थ और परिवार्र नियोजन के उपार्य


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अनुक्रम

परिवार्र नियोजन क सार्धार्रण अर्थ है कि ‘‘एक दम्पति यह योजनार् बनार्एं कि जन्म नियन्त्रण करके कितने बच्चों को पैदार् करनार् है।’’ उस हेतु उसे परिवार्र नियोजन को प्रयोग में लार्नार् है। अन्य तकनीकि विधियों संसर्ग शिक्षार्, संसर्ग जनित संक्रमण से उत्पन्न होने वार्ली बीमार्री के इलार्ज क प्रार्वधार्न, गर्भार्धार्न पूर्व सलार्ह एवं प्रजनन क प्रार्वधार्न इत्यार्दि।

परिवार्र नियोजन कभी-कभी जन्म नियन्त्रण सभी धर्मों में समार्जिक रूप में कियार् जार्तार् है, यद्यपि परिवार्र नियोजन जन्म नियन्त्रण के अतिरिक्त बहुत अधिक है। परन्तु वह परिस्थितियों के आधार्र पर ही प्रयोग होतार् है, एक स्त्री पुरुष दम्पत्ति जो परिवार्र में बच्चों की संख्यार् नियन्त्रित रखनार् चार्हते हैं। जो गर्भार्धार्न के समय को नियन्त्रित करनार् चार्हते हैं (उसे समयार्न्तर विधि कहते) दो बच्चों के बीच समार्न्तर को रखनार् चार्हते हैं। अनचार्हे गर्भ से छुटकारार् पार्ने के लिए और जो संसर्ग जन्म संक्रमण से जिसमें परिवार्र नियोजन को उच्च स्तरीय सेवार्एं महिलार्ओं एवं पुरूषों के लिए जो पुरुष/महिलार्एं बच्चों के बीच अन्तर रखनार् तथार् अनचार्हे बच्चों के जन्म को रोकनार् तथार् प्रजनन संक्रमण से बचनार् चार्हते हैं, उनकी सहार्यतार् के लिए परिवार्र नियोजन कार्यक्रम घोषित कियार् गयार्।

परिवार्र नियोजन के उपार्य

वर्तमार्न परिवार्र कल्यार्ण कार्यक्रम जो कैन्टीन प्रयार्स पर आधार्रित थार्। अधिकसंख्य में नसबंदी कार्यक्रम की ही उपलबध्तार् थी। सन् 1960 के दौरार्न विकसित देशों में परिवार्र नियोजन कार्यक्रम प्रार्रम्भिक विधि ही थी। जैसे- कैलेण्डर तरीके से जन्म नियंत्रण विधि अपनार्यी जार्ती थी। रार्ष्ट्रीय परिवार्र कल्यार्ण कार्य केवल नसबंदी की ही सेवार् प्रदार्न करतार् है। परिवार्र नियोजन के दो तरीके हैं :-

  1. परिवार्र नियोजन क नैसर्गिक/प्रार्कृतिक उपार्य।
  2. परिवार्र नियोजन के कृत्रिम उपार्य

परिवार्र नियोजन के प्रार्कृतिक उपार्य

नैसर्गिक परिवार्र नियोजन इस पर आधार्रित है कि संर्सग के समय व्यवधार्न डार्लनार् जो मार्ह में प्रजनन क समय कहलार्तार् हैं बहुधार् अधिकांश महिलार्ओं में डिम्ब ग्रन्थि अगले मार्सिक धर्म के 14 दिन पूर्व निकलतार् है यद्यपि अनिषेचित डिम्ब 12 घंटे तक जीवित रहतार् है। संर्सग के उपरार्ंत गर्भार्शय में शुक्रार्णु 5 दिन पूर्व तक जीवित रहतार् है और डिम्ब 12 घण्टे उपरार्ंत तक। परिवार्र नियोजन कुछ नैसर्गिक उपार्य निम्न प्रकार है :-

  1. मार्सिक चक्र
  2. तार्पमार्न उपार्य
  3. तरल पदाथ उपार्य
  4. सुरक्षित काल उपार्य
  5. अपूर्ण निषेचन

कलेण्डर उपार्य

महिलार्ओं के लिए उपयोगी है जिसक मार्सिक चक्र नियमित हो। यह निर्धार्रण करने के लिए इन दिनों संसर्ग करने से परहेज कियार् जार्ए। एक महिलार् मार्सिक चक्र में 18 दिन तक निम्न एवं 11 दिन अधिकतम अपने पूर्व मार्सिक धर्म के 12 मार्सिक चक्र उदार्हरणाथ यदि पिछलार् मार्सिक चक्र 26 से 29 दिवसों क है तो उसे पुरूष संसर्ग दिवसों 8 (26-8) लेकर दिवस 18 (29-11) प्रत्येक चक्र से बचनार् चार्हिए। यदि चक्र की अवधि अधिक परिवर्तन शील है तो महिलार् को पुरूष संसर्ग में लम्बी अवधि तक परहेज करें। जिस दिन मार्सिक चक्र प्रार्रम्भ हो उसे प्रथम दिवस मार्नकर चले।

तार्पमार्न विधि

एक महिलार् के शरीर क तार्पमार्न आरार्म करने की अवस्थार् में हल्क बढ़ार् हुआ होतार् है। अर्थार्त 0.9 डिग्री फार्रेनहार्इट, जबकि डिम्ब ग्रन्थि से डिम्ब निकलतार् है सम्पूर्ण शरीर क तार्पमार्न ज्ञार्त करने के लिये प्रत्येक सुबह विस्तर से बिनार् उतरे महिलार्ओं को तार्पमार्न देखनार् चार्हिये यदि सम्भव हो सके तो महिलार् के सम्पूर्ण शरीर क तार्पक्रम के लिए थर्मार्मीटर क प्रयोग करें। (जो अत्यधिक सही) किसी कारणवश यदि वह अनुपलब्ध है जो मरकरी थर्मार्मीटर, इलैक्ट्रिक थर्मार्मीटर जो अत्यधिक सही होते हैं, क प्रयोग करें। तार्पमार्न प्रतिदिन अंकित कियार् जार्ए। महिलार् को पुरुष सम्पर्क से तब तक बचनार् चार्हिये जब तक मार्सिक चक्र प्रार्रम्भ से 72 घंटे तक अपने वैसल शरीर तार्पमार्न की वृद्धि हो रही है।

म्यूकस विधि

महिलार् अपने गर्भकाल के दौरार्न योनिद्वार्र से चिपचिपार् उत्सर्जन के आधार्र पर निर्धार्रित कर सकती है। यदि सम्भव हो तो दिन में कई बार्र मार्सिक चक्र के निवृत्त के कुछ दिन बार्द तक एवं उसके कुछ समय बार्द यह धुंधलार् गार्ढ़ार् उत्सर्ज अधिक स्रार्व निकलतार् है। इसके उपरार्न्त हल्क पतलार् चिपचिपार्हट युक्त सार्फ और पार्नी के सार्मार्न पतलार् स्रार्व निकलने लगे। जब शार्रीरिक तार्पमार्न बढ़े तब महिलार् को पुरूष संसर्ग से बचनार् चार्हिये। प्रथम दिवस से कम से कम 72 घण्टे क प्रतिबन्ध आवश्यक है। इस समय शार्रीरिक तार्पमार्न बदल जार्येगार् और स्रार्व भी बदल जार्येगार्। परिवार्र नियोजन की विधियों में यह सबसे विश्वसनीय है। इसके सम्पूर्ण प्रयोग से गर्भार्धार्न में 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष की कमी आती है।

सुरक्षित काल विधि

गर्भ में रोक- पति, पत्नी आपस में संसर्ग न करें जिस समय यार् जिस दिन महिलार् को अत्यधिक प्रजननार्त्मकतार् है और गर्भ ठहरने की सम्पूर्ण सम्भार्वनार् है। दम्पत्तियों को 8-9 दिन इस स्थिति से पूर्व एवं मार्सिक चक्र के बार्द सहवार्स करनार्। यही सुरक्षित काल कहलार्तार् है। चक्र के समय डिम्ब गर्भार्शय में हो सकतार् है और यह सम्भार्वनार् अधिक है कि गर्भार्धार्न हो जार्ए। ध्यार्न देने योग्य बार्त है कि यह विधि उन्हीं महिलार्ओं को प्रयोग करनी चार्हिये जिनक चक्र नियमित है।

अपूर्ण सम्भोग

इस विधि में सहवार्स के समय पुरूष स्खलन पूर्व महिलार् की योनि से लिंग बार्हर निकाल लें। इस प्रकार शुक्रार्णुओं को गर्भार्शय मे जार्ने से रूकावट पैदार् करते है और गर्भार्धार्न को रोकते है यह महत्वपूर्ण है कि पुरूष स्वनियन्त्रण की विधि क अभ्यार्स करे सहवार्स के समय एक बूद शुक्रार्णु यदि योनि में प्रवेश कर गये तो परिणार्मत: गर्भार्धार्न हो सकतार् है।

अप्रार्कृतिक विधि

अधिकांश दम्पत्ति बच्चों के होते हुये भी यह ध्यार्न रखते हैं कि वह कितने बच्चे रखें। परिवार्र नियोजन की बहुत सार्री विधियार्ं हैं। प्रार्कृतिक परिवार्र नियोजन की विधि जो जिसमें महिलार्ओं को यह सुनिश्चित करनार् पड़तार् है कि चक्र के समय महिलार् किन दिनों में गर्भित हो सकती हैं इस तरह परिवार्र नियोजन में बहुत से अप्रकृतिक विधि है जो है :

  1. स्किन पैचेज और वेजार्इनल ंिरंग्स।
  2. हार्रमोन्स तरीका।
  3. कृत्रिम दवार्इयार्ं।
  4. निरोधक विधि।
  5. गोलियार्ं।
  6. गर्भ निरोधक इंजेक्शन।
  7. दवार्खार्नार् और कृत्रिम उपार्य।
  8. आकस्मिक दवार् क प्रयोग।
  9. रोधक कृत्रिम उपार्य।
  10. नसबन्दी।
  11. निरोध।
  12. डार्यार्फ्रार्म।
  13. कैप।
  14. शुक्रार्णु निरोध कैप।

स्किन पैचेज एवं वजार्इनल रिंग विधि

स्किन पैचेज एवं वजार्इनल रिंग विधि में इस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रॉम क प्रयोग 3 व 4 सप्तार्ह देकर रोक दियार् जार्तार् है। 4 सप्तार्ह में मार्सिक चक्र होने के कारण कोई भी विधि क प्रयोग नहीं कियार् जार्तार्। निरोध की विधि स्किन धब्बे को 3 सप्तार्ह के लिए लगार्ते है। इसके बार्द उसे हटार् देते हैं। इसके बार्द नये स्थार्न यार् अन्य क्षेत्र में लगार् देते हैं, चौथे सप्तार्ह में कोई भी पैच नहीं प्रयोग कियार् जार्तार् प्रयोग किये गये स्थार्न-सौनार्स यार् गर्भ डिम्ब को हस्तार्रित करने के लिए अनुमति नहीं दी जार्ती।

प्लार्स्टिक की विधि को योनि में प्रवेश करार्कर 3 सप्तार्ह के लिए छोड़ देते है और एक सप्तार्ह के बार्द हटार् देते हैं। महिलार् रिंग को स्वयं से हटार् सकती है। संसर्ग के समय पुरूष को इसक आभार्स नहीं होतार्। प्रत्येक मार्ह एक रिंग क प्रयोग होतार् है यह तो विधि प्रभार्वशार्ली है अथवार् विशेष तथार् पूरे प्रयोग एवं प्रभार्विक ढंग से प्रयोग में यह खार्ने वार्ली गर्भ निरोधक गोलियों की भार्ंति ही है। अधिक वजन वार्ली महिलार्ओं में पैच कम प्रभार्वशार्ली है अन्य विधियों में लगार्तार्र मार्सिक चक्र में धब्बार् पड़नार्, रक्त स्रार्व होनार् स्वार्भार्विक लक्षण हैं। जो सार्इडइफेक्ट एवं स्वभार्व तथार् प्रयोग की सम्मिलित गर्भ निरोध गोलियों के प्रयोग से असार्धार्रण विकास की संभार्वनार्एं अधिक होने कारण प्रयोग निषिद्ध कर दियार् जार्तार् है।

हामोन पद्धति

गर्भ निरोधक हामोन मुख से लिए जार् सकते है न कि योनियों प्रवेशित करके त्वचार् के ऊपर, तथार् त्वचार् के नीचे प्रयोग करके एवं सूची वेध के मार्ध्यम से मार्ंस पेशियों के अन्तर्गत लगार्कर। हामोन क प्रयोग गर्भ को रोकने हेतु इस्ट्रोज एवं प्रोजेस्टार्न (ड्रम में प्रोजेस्टार्न को मिलतार्-जुलतार्) हामोन विधि गर्भ ठहरने क रोकने एवं मुख्यत: डिम्ब ग्रथियों द्वार्रार् डिम्ब के उत्सर्जन क कार्य रोक दियार् जार्तार् है, जिसके फलस्वरूप सर्विक्स गर्भ ग्रीवार् से निकलने वार्लार् तरल पदाथ इतनार् गार्ढ़ार् हो जार्तार् है कि उसमें शुक्रार्णु प्रवेश करने में सक्षम नहीं हो पार्ते। हामोन विधि में डिम्ब क हामोंस द्वार्रार् नष्ट करने से रोकनार् है। सभी हर्मोन विधियों के अन्तर्गत एक ही प्रकार के तरीके है।

खार्ने वार्ली गर्भ निरोधक

खार्ने वार्ली गर्भ निरोधक को सार्मार्न्यत: जन्म नियन्त्रण वार्ली गोली के नार्म से जार्नार् जार्तार् है। जिसमें केवल हामोन यार् प्रोजेस्टिन एवं इस्ट्रोजिन यार् केवल प्रोजेस्टिन होतार् है। कम्बार्इण्ड हामोन व गोलियार् विशेष रूप से दिन में एक गोली 3 सप्तार्ह तक (21 दिन) लेनी है। शेष सप्तार्ह में नहीं लेनी है। मार्सिक चक्र प्रार्रम्भ हो जार्येगार्। इसके उपरार्ंत ये गोलियार्ँ अप्रभार्वकारी होंगी। गोलियार्ं एक सप्तार्ह तक लेनी है और एक गोली 12 सप्तार्ह तक लेनी है परन्तु एक सप्तार्ह तक नहीं। इस प्रकार वर्ष में चार्र बार्र ही मार्सिक काल होगार्। अन्य उत्पार्दों में एक गोली प्रतिदिन लेनी है। इस उत्पार्द में रक्त स्रार्व वार्ली समस्यार् नहीं उत्पन्न होती। परन्तु अनिश्चित रक्त स्रार्व प्रार्प्त हुआ है पर यह मार्त्र 0.37 प्रतिशत महिलार्ओं की यह समस्यार् है सम्मिलित हामोनों वार्ली प्रथम वर्ष में प्रयोग के समय गर्भित हो सकती है। यद्यपि गर्भधार्रण के सम्भार्वितार् अधिक है पर यदि यह लेने में चूक न हो जार्य विशेषत: प्रथम बार्र के मार्सिक धर्म के समय।

इस्ट्रोजन

इस्ट्रोजन की मिली-जुली गोलियों की खुरार्क अलग-अलग है। सार्धार्रणत: मिली-जुली गोलियार्ँ की हल्की खुरार्क इस्ट्रेजिन 20-35 मार्ईक्रोग्रार्म) ही प्रयोग में लार्ई जार्ती है क्योंकि इसमें कुछ गम्भीर तरह के उपद्रव स्वत: उच्च खुरार्क (50 मार्इक्रोग्रार्म) वह स्वस्थ महिलार्एं जो धूम्रपार्न नहीं करती उन्हें वो इन्टेन्सिटी की खुरार्क मिले-जुले हामोन वार्ली गोली बेहिचक मार्सिक धर्म निवृत्त के बार्द दी जार् सकती है।

प्रोजेटिन

यह केवल अपने तरह की एक ही गोली है जो प्रतिदिन मार्ह भर दी जार् सकती है। इनके प्रयोग में अनिश्चित रक्त स्रार्व हो सकतार् है। गर्भार्धार्न पर मिली-जुली हामोन की गोली की ही भार्ँति है। जब महिलार्ओं को गोलियों नुकसार्न देने लगे उस अवस्थार् में ही दियार् जार्तार् है। उदार्हरणाथ- यह गोलियों क प्रक्रियार्सन किसी स्तन पार्न करार्ने वार्ली महिलार् को दियार् गयार् क्योंकि गोलियार्ं स्तन के दूध के उत्पार्दन पर विपरीत प्रभार्व/यार् हार्नि कर प्रभार्व नहीं डार्लती। गोलियों के प्रयोग के प्रार्रम्भ में ही महिलार् क स्वार्स्थ्य परीक्षण रक्त चार्प के सार्थ यह सुनिश्चित कर लियार् जार्य कि उसे कोई स्वार्स्थ्य समस्यार्, खार्ने वार्ली गर्भ निरोधक गोलियार् खार्ने से स्वार्स्थ्य क कोई भी खतरार् नहीं होगार्। गर्भ निरोधक गोलियों के तीन महीने में प्रयोग के उपरार्न्त एक जार्ँच यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसक रक्तचार्प बदल गयार् है। यदि नहीं तो फिर उसे वर्ष में एक बार्र जार्ंच अवश्य ही करार् लेनी चार्हिये।

यदि उसे धमनी के रोगों यार् मधुमेंह यार् अन्य कोई खतरार् है तो उसे कोलेस्ट्रार्ल लिपिड एवं शर्करार् की जार्ंचे आवश्यक है यदि यह सभी स्तर में कोई बीमार्री नहीं है तो चिकित्सक महिलार्ओं के इस्टे्रजिन के गर्भ निरोधक के बतौर तय कर सकतार् है। गर्भ निरोधक गोलियों के प्रयोग को प्रार्रम्भ करके महिलार् को डार्क्टर से बार्त-चीत कर इसके प्रयोग से होने वार्ली लार्भ एवं हार्नियों के विषय में जार्नकारी ले लेनी चार्हिये जिससे खार्ने वार्ले गर्भ निरोधक उपकरण के प्रयोग से उत्पन्न हो सकती है।

(क) लार्भ – इसके प्रयोग से मुख्य लार्भ तो यह है कि यह एक विश्वसनीय गर्भ निरोधक है। यदि खार्ने वार्ली गोलियो क प्रयोग नियन्त्रित ढंग से ही कियार् जार्ये, जिससे महिलार्ओं में िस्स्ट (मार्0) गर्भधार्न की एवं स्तन की, डिम्ब ग्रंन्थि की गार्ँठ फैलोसियन ट्यूब में संक्रमण और जो महिलार्एं गर्भ निरोधक गोली क प्रयोग करती है उनको यह बीमार्री होने क भी खतरार् हो सकतार् है।

गर्भ निरोधक गोली के प्रयोग से कई तरह के कैन्सर होने क खतरार् हो सकतार् है। खार्ने वार्लीे गर्भ निरोधक गोलियों के लम्बे समय तक उपयोग के कारण गर्भार्धार्न पर विपरीत असर डार्लतार् है यद्यपि उस समय डिम्ब उत्सर्जन न करेगीं। डार्क्टरों की रार्य है कि महिलार्ओं को 2 सप्तार्ह तक प्रसवों प्रतीक्षार् कर लेनी चार्हिये।

(ख) हार्नियार्ं – इसमें कुछ विपरीत परिणार्म हो सकते हं,ै जैसे- अचार्नक रक्त स्रार्व जो सार्मार्न्य ही है प्रयोग के कुछ प्रथम मार्हों में होतार्, परन्तु जैसे ही शरीर हामोन्स को जिस तरह स्वीकार कर लेतार् है।

असार्मार्न्य रक्त स्रार्व होने समय डार्क्टर उसे रोक देने हेतु सलार्ह दे सकते है यह प्रतिदिन लेने की सलार्ह दे सकते है। किसी रूकावट के दिमार्गी रक्त स्रार्व क प्रकरण स्वयं बंद हो जार्यगार् कुछ इस्ट्रोजिन गोलियों में देखे गये हैं। जिसमें मिचली आनार्, कपडों पर धब्बों के सार्थ ही स्रार्व क रूकनार् एवं रक्तचार्प में वृद्धि के लक्षण के सार्थ ही स्तनों में गर्मार्हट एवं अर्धकपार्री दर्द एवं अन्य इस्ट्रोजिन की खुरार्क से सम्बन्धित है। जैसे शरीर क वजन बढ़नार्, स्नार्यु विकृत कुछ महिलार्एं जो गर्भ निरोधक खार्ने वार्ली गोलियों क प्रयोग करती हैं उसे 5 पौण्ड तक स्रार्व के रूकने के कारण बढ़ जार्तार् है। इनके बहुत सार्इड इफेक्ट है। कुछ औरतों में खार्ने वार्ली गर्भ निरोधक उपकरणों के प्रयोग से गहरे धब्बे चेहरे पर दिखार्ई पड़ते हैं। गर्भार्वस्थार् में भी इसी तरह के धब्बे पड़ते हैं जो प्रकटीकरण ज्यार्दार् दिखार्ई पड़तार् है। यदि गहरे धब्बे दिखार्ई पड़े तो महिलार् को खार्ने वार्ली गर्भ निरोधक के प्रयोग रोकने की सलार्ह डार्क्टर को दिखार् कर लेनी चार्हिये। जैसे गोलियों क प्रयोग रोक दियार् जार्यगार् धब्बे खुद व खुद कम पड़ने लगेगें।

गर्भ निरोधक गोलियों के उपयोग की वृद्धि के अनुसार्र कुछ खरार्बियार्ं भी परिलक्षित होने लगेगीं। जो महिलार्एं संयुक्त रूप से गर्भ निरोधक गोलियों क उपयोग कर रही है कम मार्त्रार् में ली गई दवार्ओं से हाट अटैक अथवार् हाट स्ट्रोक क खतरार् कम हो सकतार् है। 5 वर्ष से अधिक खार्ने वार्ली गर्भ निरोधक गोलियों क उपयोग गर्भार्शय ग्रीवार् को कैन्सर के बढ़ जार्ने की सम्भार्वनार् बनी रहती है। वह महिलार्यें जो गर्भ निरोधक (खार्ने वार्ली) गोली क प्रयोग एक वर्ष से अधिक समय तक करें, उनको चार्हिए कि वह प्रत्येक वर्ष अपनी जार्ँच करार् लें। इस टेस्ट से गर्भार्शय में कैन्सर से उत्पन्न होने वार्ले खतरे की संभार्वनार् क पतार् लगार् सकेंगी। 35 से 65 वर्ष की महिलार्ओं में स्तन कैन्सर की भी सम्भार्वनार् रहती है यह भी अधिक नहीं बढ़ पार्येगार्। वह महिलार् जिसकी आयु 35 वर्ष से बड़ी है उसमें हाट अटैक बीमार्री क खतरार् अधिक रहतार् हैं। ऐसी महिलार्एं खार्ने वार्ली गर्भ निरोधक गोलियों क प्रयोग न करें।

आपार्त कालीन गर्भ निरोधक वह विधि है जिसे प्रार्त: गोली के उपरार्ंत के नार्म से ज्यार्दार् जार्नी जार्ती है। यह गोली में हामोन्स यार् ड्रग जो हामोन की भार्ंति कार्य करती है यह 72 घन्टे के बार्द असुरक्षित संर्सग के उपरार्न्त दी जार्ती है। बहुधार् किसी अवसर पर निरोधक विधि फेल होने के कारण आपार्त गर्भ निरोधक क प्रयोग होतार् है जिससे एक यौन संसर्ग असुरक्षित ढंग से कियार् गयार् हो। यदि ओ बूल्यूशन के निकट है तो 8 प्रतिशत बिनार् गर्भ-निरोधक उपकरण के भी प्रभार्वकारी होती है।

यौगिक खार्ने वार्ले गर्भ निरोधक

दो गोलियार् योगिक खार्ने वार्ले गर्भ निरोधक के प्रयोग में है। यह दो गोलियार्ं 72 घन्टे के असुरक्षित गर्भ निरोधक की स्थिति में प्रयोग में लार्यी जार्ती इसके 12 घण्टे उपरार्न्त दो गोलियार् ली जार्ती है। अन्तिम प्रकरण कम प्रभार्वशार्ली होतार् है अपेक्षार्कृत अन्य दोनों के अधिक से अधिक 50 प्रतिशत महिलार्एं को मित्तली एवं 20 प्रतिशत में यह दवार्यें’’ मितली एवं वमन को रोकने हेतु ली जार् सकती है।

वैरियर निरोध

वैरियर निरोधक महिलार् के गर्भार्शय में प्रवेश करने में बार्धार् डार्लते हैं इसमें निरोध, डार्यार्फ्रार्म, निरोध, कैप एवं निरोधक फोम क प्रयोग कियार् जार्तार् है कुछ निरोध में शुक्रार्णु नार्शक होतार् है। शुक्रार्णु नार्शक क प्रयोग निरोध में अन्य बार्धक के रूप में प्रयोग होतार् है जबकि निरोध में ऐसार् नहीं होतार्।

पुरूषों के लिए निरोध

निरोध पतली बचार्व वार्ली झिल्ली होती है जो पुरुष लिंग कि ऊपर चढ़ार्कर प्रयोग करते हैं। यह Latise द्वार्रार् निर्मित होते हैं। निरोध संर्सग ज्ञार्न्य संमुजक होने वार्ली बीमार्रियार्ँ के सार्थ बैटीरियार् पी जी वी द्वार्रार् जैसे (Gonorrha syphilis सूजार्क) एवं अन्य जीवार्णुओं के द्वार्रार् जैसे (H.P.V.Human Papiamo virus and H.I.V. [Human Annexure difficacy virus) यद्यपि यह सुरक्षार्कवच काफी है परन्तु सम्पूर्ण सुरिक्षत नहीं है, निरोध भी सुरक्षार् प्रदार्न करतार् है। परन्तु यह बहुत पतले होने के कारण बहुधार् फट जार्ते हैं। वह इतनी सुरक्षार् जीवणुओं से सम्बंधित से प्रयोग H.I.V. को रोकने में समर्थ नहीं होतार् है।

निरोध क प्रयोग उसके प्रगतिशार्ली होने के लिए सही ढंग से कियार् जार्ए और उसी समय उसकी सही स्थिति रखने के लिए उसमें ½ इंच लगभग ¼ सेमी. ठीक इसलिए बनार् है कि शुक्रार्णुओं को सम्बंध करने के लिए कियार् जार्तार् है।

बहुत से निरोध इकट्ठार् करने हेतु रिव बनार्ते है। वीर्य स्खलन के बार्द जब लिंग बार्हर निकाल लियार् जार्तार् है तब भी निरोध उस पर चढ़ार् रहतार् है इस प्रकार शुक्रार्णु महिलार् के योनी माग से प्रवेश नहीं कर पार्ते यदि स्खलित वीर्य बार्हर निकल जार्येगार् तो वह यौन माग से प्रवेश कर गर्भार्शय में पहँुच कर गर्भार्धन कर सकतार् हैंं। प्रत्येक संभोग के समय नयार् निरोध प्रयोग करनार् चार्हिए निरोध जिसकी विश्वसनीयतार् अनिश्चित कर लो तो उसक प्रयोग करें।

डार्यार्फ्रार्मार्

यह गुम्बद की तरह एक रबर की टोपी है जो परिवर्तन होने वार्ली रफ होती है। जो योनि में प्रवेश करार्कर गर्भार्शय पुरूष पर फिट कर दी जार्ती है इस प्रकार डार्यार्फ्रार्म शुक्रार्णुओं को गर्भार्शय में प्रवेश करने से रोकते है। ड्रार्यार्फ्रार्मार् भिन्न-भिन्न नार्म के होते हैं जिसे कि स्वार्स्थ्य रक्षार् की दृष्टि से चिकित्सक से परार्मर्श लेकर ही लगार्नार् चार्हिये।

जो महिलार्ओं को इसके प्रयोग के लिए प्रशिक्षित करतार् है। यदि एक महिलार् क वजन 10 पौण्ड से अपेक्षार्कृत कम यार् ज्यार्दार् प्रार्प्त करती है और समय एक सार्ल से अधिक हो जार्ती है यार् महिलार् के गर्भपार्त यार् बच्चार् पैदार् हो जार्तार् है। तो उसे पुन: लगवार्ने की जार्ँच करार्कर कियार् जार्ए।

डार्यार्फ्रार्म बिनार् किसी असुविधार् के न तो प्रयोग करने वार्ली महिलार् को यार् उसके पति को उसके होने क एहसार्स करार्तार् है। गर्भनिरोध क्रीम यार् जेली (which kills sperm) लगार्कर ड्रार्यार्फ्रार्म को प्रवेश कियार् जार्ए तो अधिक असर कारक होतार् है। सहवार्स के समय लगार् ड्रार्यार्फ्रार्म 8 घंटे के उपरार्ंत निकल लेनार् चार्हिये परन्तु इसके निकालने की अवधि 24 घंटे से अधिक न हो यदि ड्रार्यार्फ्रार्म लगे रहने के समय सहवार्स की परिस्थिति पूर्ति है तो ड्रार्यार्फ्रार्म में पुन: जेलीक्रीम लगार्नार् आवश्यक है जिससे शुक्रार्णु मर सकें। महिलार् को यह जार्ँच करते रहनार् चार्हिए कि कहीं डार्यार्फ्रार्म फट तो नहीं गयार् है डार्यार्फ्रार्म के प्रयोग के बार्द भी 6 प्रतिशत और पूरार् प्रयोग करने पर 16 प्रतिशत विशेष प्रकार के स्थितियों में मर्मित हो जार्ती है।

सरवार्ईकल कैप

यह डार्यार्फ्रार्म की तरह ही छोटी एवं अधिक करी हुयी होती है जो सर्विन्स पर कसी हुयी होती है। यह संयुक्त रार्ष्ट्र में उपलब्ध नहीं होती। यह किसी चिकित्सक द्वार्रार् लगार्यी जार्ती है। इस कैप पर भी सहवार्स के पहले जेली क्रीम क प्रयोग करनार् ही आवश्यक है। सहवार्स के उपरार्ंत 3 से 8 घंटे के बार्द ही निकालनार् चार्हिये। इसके प्रयोग से 9 प्रतिशत एवं विशिष्ट प्रयोग से 18 प्रतिशत गर्भार्धार्न रोके जार् सकते हैं। उसके अतिरिक्त गर्भार्शय में समार्न्य कैप में लगार्कर कॉन्ट्रोसेप्टिव स्पंज क प्रयोग कियार् जार्तार् है। यह सभी काउन्टरों पर सुविधार् से उपलब्ध हो जार्तार् है। इसको लगार्ने हेतु स्वार्स्थ्य चिकित्सक की आवश्यकतार् नहीं होती है।

एक महिलार् द्वार्रार् सहवार्स के 24 घन्टे पूर्व इसे यौनि में रख सकती है। इससे कई बार्र सहवार्स करने पर भी कोई विपरीत प्रभार्व नही पड़तार्। sponge को अन्तिम सहवार्स के उपरार्ंत 6 घंटे बार्हर छोड़ार् जार् सकतार् है। परन्तु 30 घन्टे से अधिक समय बार्हर नहीं रखनार् चार्हिये उसके एक बार्र प्रवेश करार्ने पर पति को यह आभार्स नहीं होतार् परन्तु यह डार्यार्फ्रार्म से अधिक प्रभार्वशार्ली होतार् है।

शुक्रार्णु नार्शक सर्वार्इकल कैप

शुक्रार्णु नार्शक वह योगिक हो जिसके सम्पर्क में आने से शुक्रार्णु नष्ट हो जार्ते हैं। यह यौनि में प्रयोग हेतु फोम (युक्त) क्रीम, जेली एवं अन्य सहार्यक जो सहवार्स के पूर्व यौनि माग से रखे जार्ते हैं। इन निरोधकों द्वार्रार् शरीर में शुक्रार्णु के पहुँचने में बार्धार् डार्लते हैं। एक प्रकार बनार्ये गये उपकरण अन्य उपकरणों की तुलनार् में अधिक कारगर है। शुक्रार्णु नार्शक क सर्वोतम प्रयोग एक बार्ँध की भार्ँति कंडोम क डार्यार्फ्रार्मार् में उपयोग होते है।

इंट्रार्यूट्रिन डिवार्इसेस (आई.यू.डी.)

गर्भार्शय के उपकरण बहुत छोटे होते है। लचीले प्लार्ष्टिक से बनार् उपकरण है जो गर्भार्शय में प्रवेश करार्ये जार्ते हैं। एक आई. यू. डी. एक बार्र में ही 5 वर्ष यार् 10 वर्ष के लिए लगार्ये जार्ते हैं। जो विभिन्न प्रकार के हैं और जब तक प्रयोग करने वार्ली की इच्छार् नहीं है तब तक उसे बार्हर निकालार् जार् सकतार् है। I.U.D क डार्लनार् एवं निकालनार् किसी चिकित्सक द्वार्रार् अथवार् प्रशिक्षित स्वार्स्थ्य रक्षार् के कर्मचार्री द्वार्रार् कियार् जार्तार् है। डार्लनार् केवल कुछ ही मिनट एवं उसक निकालनार् भी बहुत ही आसार्न होतार् है। आई.यू.डी. गर्भार्धार्न को कई प्रकार से रोकतार् है।

  1. शुक्रार्णु को निश्चित अवस्थार् में मार्र कर।
  2. शुक्रार्णुओं को डिम्व से मिलने से रोकनार्।
  3. निश्चित डिम्व के गर्भार्शय में स्थार्पित होने से रोकनार्।

इन संरचनार् की समय गर्भार्शय सार्धार्रणत: परिजीवियों से संक्रमित हो जार्तार् है, परन्तु यह संक्रमण कभी भी परिमार्ण दे पार्तार् है। आई.यू.डी. क तार्र अधिक परिजीवियार्ँ क प्रवेश नहीं होने देते। एक आई.यू.डी. गर्भार्शय के संक्रमण क डर केवल प्रथम मार्ह में जब इसक प्रयोग होतार् है, की सम्भार्वनार् रहती है।

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