पत्रकारितार् क अर्थ, परिभार्षार् एवं क्षेत्र

पत्रकारितार् : अर्थ, परिभार्षार् एवं क्षेत्र‘ में ‘पत्रकारितार्’ शब्द क अर्थ, पत्रकारितार् कार्य से आशय एव पत्रकारितार् की परिभार्षार्ओ की चर्चार् की गर्इ है। जैसार् कि आप जार्नते हैं कि इस पार्ठयक्रम क मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रो में प्रयोजनमूलक हिन्दी के प्रति जार्गरूकतार् लार्नार् है। इस अध्यार्य में पत्रकारितार् और पत्रकार के रिश्ते, पत्रकार के गुण, पत्रकार की योग्यतार् एवं उत्तरदार्यित्व पत्रकारितार् के क्षेत्र की चर्चार् भी सविस्तार्र से की गर्इ है।

पत्रकारितार् क सार्मार्न्य परिचय 

मार्नव जीवन में पत्रकारितार् अपने महत्वपूर्ण स्थार्न आरै उच्च आदर्शों के पार्लन के लिए सदैव अपनी पहचार्न बनार्ती आ रही है। भार्रत मे पत्रकारितार् क इतिहार्स लगभग दो सौ वर्ष क है।

आज ‘पत्रकारितार्’ शब्द हमार्रे लिए कोर्इ नयार् शब्द नहीं है। सुबह होते ही हमें अखबार्र की आवश्यकतार् होती है, फिर सार्रे दिन रेडियो, दूरदर्शन, इंटरनेट एवं सोशल मीडियार् के मार्ध्यम से समार्चार्र प्रार्प्त करते रहते हैं। सार्थ ही सार्थ रेडियो, टीवी और सोशल मीडियार् सुबह से लेकर रार्त तक हमार्रे मनार्रे जन के अतिरिक्त अन्य कइर् जार्नकारियो से परिचित करार्ते हैं। इसके सार्थ ही विज्ञार्पन ने हमे उपभेक्तार् संस्‟ति से जोड  दियार् है। कुल मिलार्कर पत्रकारितार् के विभिन्न मार्ध्यम जैसे समार्चार्र पत्र, पत्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, सोशल मीडियार् ने व्यक्ति से लेकर समूह तक और देश से लेकर सार्रे विश्व को एकसूत्र में बार्ंध दियार् है। इसके परिणार्म स्वरूप पत्रकारितार् आज रार्ष्ट्रीय स्तर पर विचार्र, अर्थ, रार्जनीति और यहार्ं तक कि संस्‟ति को भी प्रभार्वित करने में सक्षम हो गर्इ है। तो आइए पत्रकारितार् के अर्थ, परिभार्षार् और क्षेत्र के बार्रे में विस्तार्र से जार्नें।

पत्रकारितार् क अर्थ 

अपने रोजमर्रार् के जीवन की स्थिति के बार्रे में थोड़ार् गौर कीजिए। दो लोग आसपार्स रहते हैं और कभी बार्जार्र में, कभी रार्ह चलते और कभी एक-दूसरे के घर पर रोज मिलते हैं। आपस में जब वातार्लार्प करते हैं उनक पहलार् सवार्ल क्यार् होतार् है? उनक पहलार् सवार्ल होतार् है क्यार् हार्लचार्ल है? यार् कैस े हैं? यार् क्यार् समार्चार्र है? रोजमर्रार् के एसे े सहज प्रश्नो में कोर्इ खार्स बार्त नहीं दिखाइ देती है लेकिन इस पर थोड़ार् विचार्र कियार् जार्ए तो पतार् चलतार् है कि इस प्रश्न में एक इच्छार् यार् जिज्ञार्सार् दिखाइ देगी और वह है नयार् और तार्जार् समार्चार्र जार्नने की। वे दोनो पिछले कुछ घंटे यार् कल रार्त से आज के बीच मे आए बदलार्व यार् हार्ल की जार्नकारी प्रार्प्त करनार् चार्हते हैं। कहने क तार्त्पर्य यह है कि हम अपने मित्रों, पड़ोसियो, रिश्तेदार्रो और सहकर्मियो से हमेशार् उनकी आसपार्स की घटनार्ओ के बार्रे में जार्ननार् चार्हते हैं। मनुष्य क सहज प्रवृत्ति है कि वह अपने आसपार्स की चीजो, घटनार्ओ और लोगों के बार्रे में तार्जार् जार्नकारी रखनार् चार्हतार् है। उसमे जिज्ञार्सार् क भार्व प्रबल होतार् है। यही जिज्ञार्सार् समार्चार्र और व्यार्पक अर्थ मे पत्रकारितार् क मूल तत्व है। जिज्ञार्सार् नहीं रहेगी तो समार्चार्र की जरूरत नहीं रहेगी। पत्रकारितार् क विकास इसी जिज्ञार्सार् को शार्ंत करने के प्रयार्स के रूप में हुआ है जो आज भी अपने मूल सिद्धार्ंत के आधार्र पर काम करती आ रही है।

इस जिज्ञार्सार् से हमे अपने पार्स-पड़ोस, शहर, रार्ज्य और देश दुनियार् के बार्रे मे बहुत कुछ सूचनार्एँ प्रार्प्त हार्ते ी है। ये सूचनार्एँ हमार्रे दैनिक जीवन के सार्थ सार्थ पूरे समार्ज को प्रभार्वित करती हैं। ये सूचनार्एँ हमार्रार् अगलार् कदम क्यार् होगार् तय करने में सहार्यतार् करती है। यही कारण है कि आधुनिक समार्ज में सूचनार् और संचार्र मार्ध्यमो क महत्व बहुत बढ़ गयार् है। आज देश दुनियार् में क्यार् घटित हार् े रहार् है उसकी अधिकांश जार्नकारियार्ँ हमे समार्चार्र मार्ध्यमो से मिलती है।

विभिन्न समार्चार्र मार्ध्यमों के जरिए दुनियार्भर के समार्चार्र हमार्रे घरों तक पहुंचते हैं चार्हे वह समार्चार्र पत्र हो यार् टेलीविजन और रोड़ियो यार् इटं रनेट यार् सोशल मीडियार्। समार्चार्र संगठनों मे काम करनेवार्ले पत्रकार देश-दुनियार् मे घटनेवार्ली घटनार्ओ को समार्चार्र के रूप में परिवर्तित कर हम तक पहुँचार्ते हैं। इसके लिए वे रोज सूचनार्ओ क संकलन करते हैं और उन्हे समार्चार्र के प्रार्रूप में ढार्लकर पेश करते हैं। इस पूरी प्रक्रियार् को ही ‘पत्रकारितार्’ कहते हैं।

व्यक्ति को, समार्ज को, देश-दुनियार् को प्रभार्वित करनेवार्ली हर सूचनार् समार्चार्र है। यार्नी कि किसी घटनार् की रिपोर्ट ही समार्चार्र है। यार् यूँ कहें कि समार्चार्र जल्दी मे लिखार् गयार् इतिहार्स होतार् है।

पत्रकारितार् शब्द अंग्रेजी के ‘जर्नलिज्म’ क हिन्दी रूपार्ंतर है। शब्दाथ की „ष्टि से ‘जर्नलिज्म’ शब्द ‘जर्नल’ से निर्मित है और इसक अर्थ है ‘दैनिकी’, ‘दनै न्दिनी’, ‘रोजनार्मचार्’ अर्थार्त जिसमें दैनिक कार्यों क विवरण हो। आज जर्नल शब्द ‘मैगजीन’, ‘समार्चार्र पत्र‘, ‘दैनिक अखबार्र’ क द्योतक हो गयार् है। ‘जर्नलिज्म’ यार्नी पत्रकारितार् क अर्थ समार्चार्र पत्र, पत्रिक से जुड़ार् व्यवसार्य, समार्चार्र संकलन, लेखन, संपार्दन, प्रस्तुतीकरण, वितरण आदि होगार्। आज के युग मे पत्रकारितार् के अभी अनेक मार्ध्यम हो गये हैं, जसैे-अखबार्र, पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, वेब-पत्रकारितार्, सोशल मीडियार्, इंटरनेट आदि।

हिन्दी में भी पत्रकारितार् क अर्थ भी लगभग यही है। ‘पत्र‘ से ‘पत्रकार’ और फिर ‘पत्रकारितार्’ से इसे समझार् जार् सकतार् है। वृहत हिन्दी शब्दकोश के अनुसार्र ‘पत्र‘ क अर्थ चिट्ठी, कागज, वह कागज जिस पर कोर्इ बार्त लिखी यार् छपी हो, वह कागज यार् धार्तु की पट्टी जिस पर किसी व्यवहार्र के विषय में कोर्इ प्रार्मार्णिक लेख लिखार् यार् खुदवार्यार् गयार् हो(दार्नपत्र, तार्म्रपत्र), किसी व्यवहार्र यार् घटनार् के विषय क प्रमार्णरूप लेख(पट्टार्, दस्तार्वेज), यार्न, वार्हन, समार्चार्र पत्र, अखबार्र है। ‘पत्रकार’ क अर्थ समार्चार्र पत्र क संपार्दक यार् लेखक। और ‘पत्रकारितार्’ क अर्थ पत्रकार क काम यार् पेशार्, समार्चार्र के संपार्दन, समार्चार्र इकट्ठे करने आदि क विवेचन करनेवार्ली विद्यार्। वृहत शब्दकोश मे सार्फ है कि पत्र क अर्थ वह कागज यार् सार्धन जिस पर कोर्इ बार्त लिखी यार् छपी हो जो प्रार्मार्णिक हो, जो किसी घटनार् के विषय को प्रमार्णरूप पेश करतार् है। और पत्रकार क अर्थ उस पत्र, कागज को लिखनेवार्लार्, संपार्दन करनेवार्लार्। और पत्रकारितार् क अर्थ उसक विवेचन करनेवार्ली विद्यार्।

उल्लेखनीय है कि इन सभी मार्ध्यमो से संदशेार् यार् सूचनार् क प्रसार्र एक तरफार् होतार् है। सूचनार् के प्रार्प्तकर्तार् से इनक फीडबैक नहीं के बरार्बर है। यार्नी सभी मार्ध्यमो में प्रचार्रक यार् प्रसार्रक के संदश्े ार् प्रार्प्तकर्तार् में दार्हे रार् संपर्क नहीं स्थार्पित कर पार्ते हैं। प्रार्प्तकर्तार् से मिलनेवार्ली प्रतिक्रियार्, चिट्ठियों आदि के मार्ध्यम से संपर्क नहीं के बरार्बर है। पिछले कुछ सार्लो मे जनसचार्र के अत्यार्धुनिक पद्धतियो के प्रचलन दार्हे रार् संपर्क रार्खार् जार्ने लगार् है।

पत्रकारितार् की परिभार्षार् 

किसी घटनार् की रिपोर्ट समार्चार्र है जो व्यक्ति, समार्ज एवं देश दुनियार् को प्रभार्वित करती है। इसके सार्थ ही इसक उपरोक्त से सीधार् संबंध होतार् है। इस कर्म से जुड़े मर्मज्ञ विभिन्न मनीषियो द्वार्रार् पत्रकारितार् को अलग-अलग शब्दों में परिभार्षित किए हैं। पत्रकारितार् के स्वरूप को समझने के लिए यहार्ँ कुछ महत्वपूर्ण परिभार्षार्ओ क उल्लेख कियार् जार् रहार् है:-

(1) पार्श्चार्त्य चिन्तन 

  1. न्यू वेबस्टर्स डिक्शनरी : प्रकाशन, सम्पार्दन, लेखन एवं प्रसार्रणयुक्त समार्चार्र मार्ध्यम क व्यवसार्य ही पत्रकारितार् है । 
  2. विल्वर श्रम :जनसंचार्र मार्ध्यम दुनियार् क नक्शार् बदल सकतार् है। 
  3. सी.जी. मूलर :सार्मयिक ज्ञार्न क व्यवसार्य ही पत्रकारितार् है। इसमे तथ्यो की प्रार्प्ति उनक मूल्यार्ंकन एवं ठीक-ठार्क प्रस्तुतीकरण होतार् है। 
  4. जेम्स मैकडोनल्ड : पत्रकारितार् को मैं रणभूमि से ज्यार्दार् बड़ी चीज समझतार् हूँ। यह कोर्इ पेशार् नहीं वरन पेशे से ऊँची कोर्इ चीज है। यह एक जीवन है, जिसे मैंने अपने को स्वेच्छार्पूर्वक समर्पित कियार्। 
  5. विखेम स्टीड : मैं समझतार् हूँ कि पत्रकारितार् कलार् भी है, वृत्ति भी और जनसेवार् भी । जब कोर्इ यह नहीं समझतार् कि मेरार् कर्तव्य अपने पत्र के द्वार्रार् लोगो क ज्ञार्न बढ़ार्नार्, उनक मागदर्शन करनार् है, तब तक से पत्रकारितार् की चार्हे जितनी ट्रेनिंग दी जार्ए, वह पूर्ण रूपेण पत्रकार नहीं बन सकतार् । 

इस प्रकार न्यू वेबस्टर्स डिक्शनरी में उस मार्ध्यम को जिसमें समार्चार्र क प्रकाशन, संपार्दन एवं प्रसार्रण विषय से संबंधित को पत्रकारितार् कहार् गयार् है। विल्वर श्रम क कहनार् है कि जनसंचार्र मार्ध्यम उसे कहार् जार् सकतार् है जो व्यक्ति से लेकर समूह तक और देश से लेकर विश्व तक को विचार्र, अर्थ, रार्जनीति और यहार्ं तक कि संस्‟ति को भी प्रभार्वित करने में सक्षम है। सीजी मूलर ने तथ्य एवं उसक मूल्यार्ंकन के प्रस्तुतीकरण और सार्मयिक ज्ञार्न से जुड़े व्यार्पार्र को पत्रकारितार् के दार्यरे में रखते हैं। जेम्स मैकडोनल्ड के विचार्र अनुसार्र पत्रकारितार् दर्शन है जिसकी क्षमतार् युद्ध से भी तार्कवर हैं। विखेम स्टीड पत्रकारितार् को कलार्, पेशार् और जनसेवार् क संगम मार्नते हैं।

(2) भार्रतीय चिन्तन 

  1. हिन्दी शब्द सार्गर :पत्रकार क काम यार् व्यवसार्य ही पत्रकारितार् है । 
  2. डार्. अर्जुन :ज्ञार्न आरै विचार्रो को समीक्षार्त्मक टिप्पणियो के सार्थ शब्द, ध्वनि तथार् चित्रो के मार्ध्यम से जन-जन तक पहुँचार्नार् ही पत्रकारितार् है। यह वह विद्यार् है जिसमें सभी प्रकार के पत्रकारो के कार्यों, कर्तव्यो और लक्ष्यो क विवेचन हार्तेार् है। पत्रकारितार् समय के सार्थ सार्थ समार्ज की दिग्दर्शिक और नियार्मिक है। 
  3. रार्मकृष्ण रघुनार्थ खार्डिलकर :ज्ञार्न और विचार्र शब्दो तथार् चित्रो के रूप में दूसरे तक पहुंचार्नार् ही पत्रकलार् है । छपने वार्ले लेख-समार्चार्र तैयार्र करनार् ही पत्रकारी नहीं है । आकर्षक शीर्षक देनार्, पृष्ठों क आकर्षक बनार्व-ठनार्व, जल्दी से जल्दी समार्चार्र देने की त्वरार्, देश-विदेश के प्रमुख उद्योग-धन्धो के विज्ञार्पन प्रार्प्त करने की चतुराइ, सुन्दर छपाइ और पार्ठक के हार्थ में सबसे जल्दी पत्र पहुंचार् देने की त्वरार्, ये सब पत्रकार कलार् के अंतर्गत रखे गए । 
  4. डार्.बद्रीनार्थ  : पत्रकारितार् पत्र-पत्रिकाओं के लिए समार्चार्र लेख आदि एकत्रित करने, सम्पार्दित करने, प्रकाशन आदेश देने क कार्य है । 
  5. डार्. शंकरदयार्ल  : पत्रकारितार् एक पेशार् नहीं है बल्कि यह तो जनतार् की सेवार् क मार्ध्यम है । पत्रकारो को केवल घटनार्ओ क विवरण ही पश्े ार् नहीं करनार् चार्हिए, आम जनतार् के सार्मने उसक विश्लेषण भी करनार् चार्हिए । पत्रकारों पर लोकतार्ंत्रिक परम्परार्ओं की रक्षार् करने और शार्ंति एवं भाइचार्रार् बनार्ए रखने की भी जिम्मेदार्री आती है । 
  6. इन्द्रविद्यार्वचस्पति : पत्रकारितार् पार्ंचवार्ं वेद है, जिसके द्वार्रार् हम ज्ञार्न-विज्ञार्न संबंधी बार्तों को जार्नकर अपनार् बंद मस्तिष्क खोलते हैं । 

हिन्दी शब्द सार्गर में पत्रकार के कार्य एवं उससे जुड़े व्यवसार्य को पत्रकारितार् कहार् गयार् है। डार्. अर्जुन  के अनुसार्र ज्ञार्न और विचार्र को कलार्त्मक ढंग से लोगो तक पहुंचार्नार् ही पत्रकारितार् है। यह समार्ज क मागदर्शन भी करतार् है। इससे जुड़े कार्य क तार्त्विक विवेचन करनार् ही पत्रकारितार् विद्यार् है। रार्म‟ष्ण रघुनार्थ खार्डिलकर मार्नते हैं कि यह एक कलार् है जिसके मार्ध्यम से पत्रकार ज्ञार्न और विचार्रों को शब्द एवं चित्रों के मार्ध्यम से आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करतार् है। डार्.बद्रीनार्थ कपूर क कहनार् है कि समार्चार्र मार्ध्यमो के लिए किए जार्नेवार्ले कार्य समार्चार्र संकलन, लेखन एवं संपार्दन, प्रकाशन कार्य ही पत्रकारितार् है। डार्.शंकर दयार्ल शर्मार् मार्नते हैं कि यह सेवार् क मार्ध्यम है। यह एक एसे ी सेवार् है जो घटनार्ओ की विश्लेषण करके लोकतार्ंत्रिक परंपरार्ओ की रक्षार् करने के सार्थ ही शार्ंति एव भार्इर्चार्रार् कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिक निर्वार्ह करती है। इंद्र विद्यार् वार्चस्पति क मार्ननार् है कि पत्रकारितार् वेदो की तरह जो ज्ञार्न-विज्ञार्न के जरिए लोगो की मस्तिष्क को खोलने में काम करतार् है। इन सभी परिभार्षार्ओ के आधार्र पर पत्रकारितार् को निम्नलिखित शब्दार्ं े में परिभार्षित कियार् जार् सकतार् है :

यह एक एसे ार् कलार्त्मक सेवार् कार्य है जिसमें सार्मयिक घटनार्ओ को शब्द एवं चित्र के मार्ध्यम से जन जन तक आकर्षक ढंग से पेश कियार् गयार् हो और जो व्यक्ति से लेकर समूह तक और देश से लेकर विश्व तक के विचार्र, अर्थ, रार्जनीति और यहार्ं तक कि संस्‟ति को भी प्रभार्वित करने में सक्षम हो। उस कलार् क विवेचन ही पत्रकारितार् है।

पत्रकारितार् के मूल्य 

चूंकि यह एक ऐसार् कलार्त्मक सेवार् कार्य है जिसमें सार्मयिक घटनार्ओ को शब्द एवं चित्र के मार्ध्यम से पत्रकार रोज दर्ज करते चलते हैं तो इसे एक तरह से दैनिक इतिहार्स लेखन कहार् जार्एगार्। यह काम ऊपरी तौर पर बहुत आसार्न लगतार् है लेकिन यह इतनार् आसार्न होतार् नहीं है। अपनी पूरी स्वतंत्रतार् के बार्वजदू पत्रकारितार् सार्मार्जिक और नैतिक मूल्यो से जुड़ी रहती है। उदार्हरण के लिए सार्ंप्रदार्यिक दंगो क समार्चार्र लिखते समय पत्रकार प्रयार्स करतार् है कि उसके समार्चार्र से आग न भड़के। वह सच्चाइ जार्नते हुए भी दंगों में मार्रे गए यार् घार्यल लोगो के समुदार्य की पहचार्न नहीं करतार्। बलार्त्कार के मार्मलो में वह महिलार् क नार्म यार् चित्र नहीं प्रकाशित करतार् है तार्कि उसकी सार्मार्जिक प्रतिष्ठार् को कोर्इ धक्क न पहुंच।े पत्रकारो से अपेक्षार् की जार्ती है कि वे पत्रकारितार् की आचार्र संहितार् क पार्लन करें तार्कि उनके समार्चार्रो से बवे जह और बिनार् ठार्से सबतू के किसी की व्यक्तिगत प्रतिष्ठार् को नुकसार्न न हो और न ही समार्ज मे अरार्जकतार् और अशार्ंि त फैले सार्मार्जिक सरोकारों को व्यवस्थार् की दहलीज तक पहुँचार्ने और प्रशार्सन की जनहितकारी नीतियो तथार् योजनार्ओं को समार्ज के सबसे निचले तबके तक ले जार्ने के दार्यित्व क निर्वार्ह ही साथक पत्रकारितार् है।

पत्रकारितार् को लोकतंत्र क चौथार् स्तंभ भी कहार् जार्तार् है। इसने लोकतंत्र में यह महत्चपूर्ण स्थार्न अपने आप हार्सिल नहीं कियार् है बल्कि सार्मार्जिक जिम्मेदार्रियो के प्रति पत्रकारितार् के दार्यित्वो के महत्व को देखते हुए समार्ज ने ही यह दर्जार् दियार् है। लोकतंत्र तभी सशक्त होगार् जब पत्रकारितार् सार्मार्जिक जिम्मदेार्रियो के प्रति अपनी साथक भूमिक निर्वार्ह करे। पत्रकारितार् क उद्देश्य ही यह होनार् चार्हिए कि वह प्रशार्सन और समार्ज के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिक निर्वार्ह करे।

समय के सार्थ पत्रकारितार् क मूल्य बदलतार् गयार् है। इतिहार्स पर नजर ड़ार्ले तो स्वतंत्रतार् के पवूर् की पत्रकारितार् क मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रतार् प्रार्प्ति ही लक्ष्य थार्। स्वतंत्रतार् के लिए चले आंदोलन और स्वतंत्रतार् संग्रार्म मे पत्रकारितार् ने अहम और साथक भूमिक निभार्इर् है। उस दौर मे पत्रकारितार् ने परे देश को एकतार् के सूत्र मे बार्ंधने के सार्थ सार्थ पूरे समार्ज को स्वार्धीनतार् की प्रार्प्ति के लक्ष्य से जोड़े रखार्।

आजार्दी के बार्द निश्चित रूप से इसमें बदलार्व आनार् ही थार्। आज इंटरनेट और सूचनार् अधिकार ने पत्रकाकारितार् को बहु आयार्मी और अनंत बनार् दियार् है। आज कोर्इ भी जार्नकारी पलक झपकते उपलब्ध कराइ जार् सकती है। पत्रकारितार् वर्तमार्न समय मे पहले से कर्इ गुनार् सशक्त, स्वतंत्र और प्रभार्वकारी हो गयार् है। अभिव्यक्ति की आजार्दी और पत्रकारितार् की पहुंच क उपयोग सार्मार्जिक सरोकारों और समार्ज की भलाइ के लिए हो रहार् है लेकिन कभी कभार्र इसक दुरुपयोग भी होने लगार् है।

आर्थिक उदार्रीकरण क प्रभार्व भी पत्रकारितार् पर खूब पड़ार् है। विज्ञार्पनो से होनवे ार्ली अथार्ह कमाइ ने पत्रकारितार् को एक व्यवसार्य बनार् दियार् है। और इसी व्यवसार्यिक „ष्टिकोण क नतीजार् यह हो चलार् है कि उसक ध्यार्न सार्मार्जिक जिम्मेदार्रियों से कहीं भटक गयार् है। आज पत्रकारितार् मुद्दार् के बदले सूचनार्धर्मी होतार् चलार् गयार् है। इंटरनेट एवं सोशल मीडियार् की व्यार्पकतार् के चलते उस तक सावजनिक पहुंच के कारण उसक दुष्प्रयोग भी होने लगार् है। इसके कुछ उपयोगकर्तार् निजी भड़ार्स निकालने और आपत्तिजनक प्रलार्प करने के लिए इस मार्ध्यम क गलत इस्तेमार्ल करने लगे हैं। यही कारण है कि इस पर अंकुश लगार्ने की बहस छिड़ जार्ती है। लोकतंत्र के हित मे यही है कि जहार्ं तक हार् े सके पत्रकारितार् को स्वतंत्र और निर्बार्ध रहने दियार् जार्ए। पत्रकारितार् क हित में यही है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रतार् क उपयोग समार्ज और सार्मार्जिक जिम्मेदार्री निर्वार्ह के लिए र्इमार्नदार्री से निर्वहन करती रहे।

पत्रकारितार् और पत्रकार 

अब तक हमने जार्न लियार् है कि पत्रकारितार् एक ऐसी कलार् है जिसे शब्द और चित्र के मार्ध्यम से पेश कियार् जार्तार् है। इसे आकार देनेवार्लार् पत्रकार होतार् है। ऊपर से देखने से यह एक आसार्न काम लगतार् है लेकिन यह उतनार् आसार्न नहीं होतार् है। उस पर कर्इ तरह के दबार्व हो सकते हैं। अपनी पूरी स्वतंत्रतार् के बार्वजदू उस पर सार्मार्जिक और नैतिक मूल्यो की जवार्बदेही होती है।

लोकतंत्र में पत्रकारितार् को चौथार् स्तंभ मार्नार् गयार् है। इस हिसार्ब से न्यार्यपार्लिका, कार्यपार्लिका, विधार्यिक जैसे तीन स्तंभ को बार्ंधे रखने के लिए पत्रकारितार् एक कड़ी के रूप मे काम करती है। इस कारण पत्रकार की भूमिक महत्वपूर्ण होती है। उसके सार्मने कर्इ चुनौतियार्ँ होती है और दबार्व भी। सार्मार्जिक सरोकारो को व्यवस्थार् की दहलीज तक पहुँचार्ने और प्रशार्सन की जनहितकारी नीतियो तथार् योजनार्ओं को समार्ज के सबसे निचल े तबके तक ले जार्ने के दार्यित्व क निर्वहन करनार् पत्रकार और पत्रकारितार् क कार्य है।

एक समय थार् भार्रत में कुछ लोग प्रतिष्ठित संस्थार् एवं व्यवस्थार् को समार्ज के विकास मे सहार्यक नहीं समझते थे यह लोग अपने नए विचार्रो के प्रचार्र प्रसार्र के लिए पत्र-पत्रिकाओ क प्रकाशन करते थे यह उनकी प्र‟ति एव प्रवृत्ति को लोगो तक पहुंचार्ने क मार्ध्यम बनार् थार्। तकनीकी विकास एवं उद्योग एवं वार्णिज्य के प्रसार्र के कारण एक दिन यह एक कमार्ऊ व्यवसार्य में परिवर्तित हो जार्एगार् की बार्त उन्होने सपनों में भी नहीं सोचार् थार्। समार्ज के कल्यार्ण, नए विचार्र के प्रचार्र प्रसार्र के लिए पत्रकारितार् को समर्पित मार्नार् जार्तार् थार्। यह एक दिन पेशार् मे बदलार् जार्एगार् और इसके लिए डिग्री, डिप्लोमार् के पैमार्ने पर योग्यतार् एवं दक्षतार् मार्पार् जार्एगार् यह कोर्इ सोचार् भी नहीं होगार्।

लोकतंत्र व्यवस्थार् मे पत्रकारितार् भार्व की अभिव्यक्ति के लिए आवश्यक मार्ध्यम के रूप मे स्वी‟त है। इसलिए पत्रकारितार् यार् मीडियार् को रार्श्ट्र क चौथार् स्तंभ कहार् जार् रहार् है। लेकिन खुली हवार् के अभार्व मे इसक विकास भी अवरूद्ध हो सकतार् है।

आजार्दी के बार्द लोकतार्ंत्रिक रार्ष्ट्र के रूप में भार्रत आगे बढ़ने के कारण समार्चार्र पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन, प्रसार्रण मे वृद्धि हुर्इ है। इसक सार्मार्जिक सरोकार होने के बार्वजदू यह एक उद्योग के रूप मे परिवर्तित हार्े चुकी है। पत्रकारितार् ने एक विकसित पेशार् के रूप में शिक्षित युवार्ओं को आकर्षित कियार् है। देष मे जिन कुछ क्षेत्रो में प्रवृत्ति एव वृत्ति यार्नी पेशार् में मिलार्न एवं जुड़ार्व की आवश्यकतार् है उनमें से पत्रकारितार् अन्यतम है।

पत्रकारितार् के लिए कितार्बी ज्ञार्न की तुलनार् में कुशल सार्धनार् की जरूरत अधिक होती है। क्योंिक यह एक कलार् है। सार्धनार् के बल पर ही कुशलतार् हार्सिल कियार् जार् सकतार् है। कितार्ब पढ़कर डिग्री तो हार्सिल की जार् सकती है लेकिन कुशलतार् के लिए अनुभव की जरूरत होती है। इसके बार्वजूद चूंकि यह अब पेशे में बदल चुकी है इसलिए योग्यतार् क पैमार्नार् विचार्रणीय है। उस प्रार्थमिक योग्यतार् एवं सार्मार्न्य ज्ञार्न के लिए इस विषय मे कुछ सार्मार्न्य नीति नियम जार्ननार् और समझनार् अत्यंत जरूरी है।

एक बार्त और अतीत में जितने भी पत्रकारो ने श्रेष्ठ पत्रकार के रूप मे ख्यार्ति प्रार्प्त की है उन्होंने किसी विश्वविद्यार्लय से पत्रकारितार् विषय में कोर्इ डिग्री यार् डिप्लोमार् हार्सिल नहीं कियार् है। उन्होने प्रवृत्ति के आधार्र पर सार्धनार् के बल पर पत्रकारितार् के क्षेत्र में शीर्ष मे पहुचे हैं। कक्षार्ओं में कुछ व्यार्ख्यार्न सुननकर यार् पार्ठîपुस्तक पढ़ने से पत्रकार के रूप में जीवन आरंभ करने के लिए यह सहार्यक हो सकतार् है। इसे एक पेशार् के रूप मे अपनार्ने में क्यार् सुविधार्, असुविधार् है उस पर उन्हे मागदर्शन मिल सकतार् है। पत्रकारितार् को नए पेशार् के रूप में अपनार्नेवार्ले युवार्ओ को पत्रकार की जिम्मदेार्री एव समस्यार् पर जार्नकारी हार्सिल हो सकती है।

पत्रकारितार् कर्म 

प्रार्रंभिक अवस्थार् में जब पत्रकारितार् को एक उद्योग के रूप में नहीं गिनार् जार्तार् थार् तभी पत्रकारितार् को एक पेशार् यार् कर्म के रूप में नहीं समझार् जार्तार् थार्। जब डार्क एवं तार्र, परिवहन व्यवस्थार् में विकास नहीं हुआ थार्, विज्ञार्पन से सार्मार्न्य आय हुआ करतार् थार्, शिक्षार् क प्रसार्र नहीं हुआ थार् तब एक सप्तार्ह मे यार् पंद्रह दिन मे एकबार्र एक समार्चार्र पत्र एव पत्रिकाओं क एक संस्करण प्रकाशित करने क कुछ लोगो में जुनून थार्। कुछ खार्स नीति एवं आदर्श के प्रार्चार्र हेतु एवं सीमित लक्ष्य हार्सिल के लिए पत्रकारितार् को एक मार्ध्यम समझकर कुछ लोग इसके लिए असीम शक्ति एवं समय लगार् देते थे। उन लोगो ने यह सपने में भी नहीं सोचार् होगार् कि उनक जुनून एक दिन कमार्ऊ व्यवसार्य बन जार्एगार्। तकनीकी विकास, परिवहन व्यवस्थार् मे विकास, उद्योग एवं वार्णिज्य के प्रसार्र के कारण आज यह एक उद्योग बन चुक है। पत्रकारितार् आज की स्थिति मे केवल प्रवृत्ति यार् जुनून न होकर एक पेशार् बन गयार् है। जिसके हृदय में समार्ज के प्रति संवेदनार् क भार्व है और समार्ज क कल्यार्ण चार्हतार् है और नए विचार्र क प्रचार्र प्रसार्र करनार् चार्हतार् है तो वह इस पेशे से जुड़ सकतार् है। दूसरी बार्त यह कि आज की स्थिति मे हर क्षेत्र मे चुनौती है। पत्रकारितार् में भी पत्रकार को कर्इ चुनार्ैि तयो क सार्मनार् करनार् पड़तार् है। बार्वजूद इसके वर्तमार्न मे पत्रकारितार् एक पेशार् यार् कर्म बन चुक है। यह एक पेशार् मे बदलार् चुक है और इसके लिए विभिन्न विश्वविद्यार्लयो द्वार्रार् औपचार्रिक डिग्री, डिप्लोमार् प्रदार्न कियार् जार् रहार् है।

पत्रकार की योग्यतार् और उत्तरदार्यित्व 

समार्चार्र पत्र-पत्रिकाएँ हो यार् अन्य मार्ध्यम में कार्य कर रहे पत्रकारों को दुहरी भूमिक निर्वार्ह करनी पड़ती है। उसे अपने स्तर पर समार्चार्र भी संकलन करनार् हार्तेार् है और उसे लिखनार् भी पड़तार् है। समार्चार्रो के संकलन, व्यार्ख्यार् और प्रस्तुतीकरण के लिए पत्रकार मे गुप्तचर, मनार्वेैज्ञार्निक और वकील के सार्थ सार्थ एक अच्छे लेखक के गुण होने चार्हिए। प्रत्येक पत्रकार को अपने समार्चार्र क क्षेत्र निर्धार्रित कर लेनार् चार्हिए तार्कि विशेषतार् हार्सिल होने पर वह समार्चार्र को सही ढंग से पेश कर सकतार् है। पत्रकार में कुछ गुण ऐसे होने चार्हिए जो उसे सफल पत्रकार बनार् सकतार् है उसमें सक्रियार्तार्, विश्वार्सपार्त्रतार्, वस्तुनिष्ठतार्, विश्लेषणार्त्मक क्षमतार्, भार्षार् पर अधिकार।

सक्रियतार् 

एक सफल पत्रकार के लिए अत्यंत जरूरी है कि वह हर स्तर पर सक्रिय रहे। यह सक्रियतार् उसे समार्चार्र संकलन और लेखन दोनो में „ ष्टिगोचार्र होनी चार्हिए। सक्रियतार् होगी तार्े समार्चार्र मे नयार्पन और तार्जगी आएगी। अनुभवी पत्रकार अपने परिश्रम और निजी सूत्रो से सूचनार्एँ प्रार्प्त करते हैं और उन्हें समार्चार्र के रूप में परिवर्तित करते हैं। वह पत्र और पत्रकार सम्मार्नित होते हैं जिसके पत्रकार जार्सूसो की तरह सक्रिय रहते हैं और अपने संपर्क सूत्रो को जिदार् रखते हैं।

विश्वार्सपार्त्रतार् 

विश्वार्सपार्त्रतार् पत्रकार क ऐसार् गुण है जिसे प्रयत्नपूर्वक प्रार्प्त कियार् जार् सकतार् है। संपर्क सूत्र से पत्रकार को समार्चार्र प्रार्प्त होते हैं। पत्रकार को हमेशार् उसक विश्वार्सपार्त्र बने रहने से ही समार्चार्र नियमित रूप से मिल सकतार् है। संपर्क सूत्र हमेशार् यह ध्यार्न रखतार् है कि उसक जिस पत्रकार के सार्थ संबंध है वह उसके विश्वार्स को कायम रखतार् है यार् नहीं। अगर सूत्र क संकेत देने से उस व्यक्ति क नुकसार्न होतार् है तो उसे कभी भी उससे संपर्क नहीं रखनार् चार्हेगार्।

वस्तुनिष्ठतार् 

वस्तुनिष्ठतार् क गुण पत्रकार के कर्तव्य से जुड़ार् है। पत्रकार क कर्तव्य है कि वह समार्चार्र को ऐसार् पेश करे कि पार्ठक उसे समझते हुए उससे अपनार् लगार्व महसूस करे। चूंकि समार्चार्र लेखन संपार्दकीय लेखन नहीं होतार् है तो लेखक को अपनी रार्य प्रकट करने की छूट नहीं मिल पार्ती है। उसे वस्तुनिष्ठतार् होनार् अनिवाय है। लेकिन यह ध्यार्न रखनार् होतार् है कि वस्तुनिष्ठतार् से उसकी जिम्मेदार्री भी जुड़ी हुर्इ है। पत्रकार क उत्तरदार्यित्व की परख तब होती है जब उसके पार्स कोर्इ विस्फोटक समार्चार्र आतार् है। आज के संदर्भ मे दंगे को ही ले। किसी स्थार्न पर दो समुदार्यो के बीच दंगार् हो जार्तार् है और पत्रकार सबकुछ खुलार्सार् करके नमक-मिर्च लगार्कर समार्चार्र पेश करतार् है तो समार्चार्र क परिणार्म विध्वंसार्त्मक ही हार्गे ार्। एसेी स्थिति मे अनुभवी पत्रकार अपने विवेक क सहार्रार् लेते हैं और समार्चार्र इस रूप से पेश करते हैं कि उससे दंगार्इयो को बल न मिले। ऐसे समार्चार्र के लेखन मे वस्तुनिष्ठतार् और भी अनिवाय जार्न पड़ती है।

विश्लेषणार्त्मक क्षमतार् 

पत्रकार में विश्लेषण करने की क्षमतार् नहीं है तो वह समार्चार्र को रोचक ढंग से पेश नहीं कर पार्तार् है। आज के पार्ठक केवल तथ्य पेश करने से संतुष्ट नहीं होतार् है। समार्चार्र क विश्लेषण चार्हतार् है। पार्ठक समार्चार्र की व्यार्ख्यार् चार्हतार् है। समार्चार्र के सार्थ विश्लेषण दूध में पार्नी मिलार्ने की तरह गुंथार् हुआ रहतार् है। लेकिन व्यार्ख्यार् में भी संतुलन होनार् चार्हिए। पत्रकार की विश्लेषण क्षमतार् दो स्तर पर होतार् है – समार्चार्र संकलन के स्तर पर और लेखन के स्तर पर। समार्चार्र संकलन में पत्रकार की विश्लेषण क्षमतार् क उपयार्गे सूचनार्ओ और घटनार्ओ को एकत्र करने के समय हार्ते ार् है। इसके अलार्वार् पत्रकार सम्मेलन, सार्क्षार्त्कार आदि में भी उसक यह क्षमतार् उपयोग में आतार् है। दूसरार् स्तर लेखन के समय दिखाइ देती है। जो पत्रकार समार्चार्र को समझने और प्रस्तुत करने में जितनार् ज्यार्दार् अपनी विश्लेषण क्षमतार् क उपयोग कर सकेगार्, उसक समार्चार्र उतनार् ही ज्यार्दार् दमदार्र होगार्। इसे व्यार्ख्यार्त्मक रिपोटिर्ंग भी कहार् जार्तार् है।

उदार्हरण के लिए, सीधी खबर है कि भार्रत सरकार ने किसार्नो क कर्ज मार्फ करने क निर्णय लियार् है। योजनार् लार्गू करने की तिथि की घोषणार् अभी नहीं की गर्इ है। किंतु पत्रकार अपने स्रोतो से पतार् करतार् है कि यह कर्ज मार्फी किस दबार्व के तहत कियार् जार् रहार् है और इससे देश की अर्थ व्यवस्थार् पर क्यार् असर पड़ेगार्। समार्चार्र क यह रूप व्यार्ख्यार्त्मक रिपोटिर्ंग क रूप होगार्।

चुनार्वी वार्दार् निभार्ने किसार्नो क कर्ज मार्फ
भार्रत सरकार ने किसार्नों के विकास क ध्यार्न रखते हुए उनक कर्ज मार्फ करने क निर्णय लियार् है। इससे रार्जकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगार्। सूत्रो के अनुसार्र यह निर्णय पाटी द्वार्रार् चुनार्व के समय किए गए वार्यदे को पूरार् करने के लिए लियार् गयार् है।

भार्षार् पर अधिकार 

समार्चार्र लेखन एक कलार् है । ऐसे में पत्रकार को लेखन कलार् मे मार्हिर होनार् होगार्। उसे भार्षार् पर अधिकार होनार् चार्हिए। इसके सार्थ ही पत्रकार को यह भी ध्यार्न रखनार् होगार् कि उसके पार्ठक वर्ग किस प्रकार के हैं। समार्चार्रपत्र मे अलग अलग समार्चार्र के लिए अलग अलग भार्षार् दिखार्इर् पड़ते हैं। जैसे कि अपरार्ध के समार्चार्र, खेल समार्चार्र यार् वार्णिज्य समार्चार्र की भार्षार् अलग अलग होती है। लेकिन उन सबमें एक समार्नतार् होती है वह यह है कि सभी प्रकार के समार्चार्रो में सीधी, सरल और बोधगम्य भार्षार् क प्रयोग कियार् जार्तार् है। इसमें एक बार्त और है कि पत्रकार को एक क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञतार् निर्धार्रित कर लेनार् चार्हिए। इससे उससे संबंधित शब्दार्वली से पत्रकार परिचित हार् े जार्तार् है और जरूरत पड़ने पर नए शब्दों क निर्मार्ण करनार् आसार्न हो जार्तार् है। इसबार्रे में विस्तृत रूप से आगे चर्चार् की गर्इ है।

पत्रकारितार् के क्षेत्र 

आज की दुनियार् में पत्रकारितार् क क्षेत्र बहुत व्यार्पक हो गयार् है। शार्यद ही कोर्इ क्षेत्र बचार् हो जिसमें पत्रकारितार् की उपार्देयतार् को सिद्ध न कियार् जार् सके। इसलिए यह कहनार् अतिशयोक्ति न होगी कि आधुनिक युग में जितने भी क्षेत्र हैं सबके सब पत्रकारितार् के भी क्षेत्र हैं, चार्हे वह रार्जनीति हो यार् न्यार्यार्लय यार् कार्यार्लय, विज्ञार्न हो यार् प्रौद्योगिकी हो यार् शिक्षार्, सार्हित्य हो यार् संस्‟ति यार् खेल हो यार् अपरार्ध, विकास हो यार् ‟षि यार् गार्ंव, महिलार् हो यार् बार्ल यार् समार्ज, पर्यार्वरण हार् े यार् अंतरिक्ष यार् खोज। इन सभी क्षेत्रो में पत्रकारितार् की महत्तार् एवं उपार्देयतार् को सहज ही महसूस कियार् जार् सकतार् है। दूसरी बार्त यह कि लोकतंत्र में इसे चौथार् स्तंभ कहार् जार्तार् है। ऐसे मे इसकी पहुंच हर क्षेत्र में हो जार्तार् है।

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