निर्यार्त व्यार्पार्र क्यार् है ?
किसी अन्य देश को मार्ल बेचनार् निर्यार्त व्यार्पार्र कहलार्तार् है। देश को समृद्धशार्ली बनार्ने के लिए निर्यार्त में वृद्धि आवश्यक है। आयार्तों के मूल्य क भुगतार्न निर्यार्त करते हैं अत: निर्यार्त द्वार्रार् ही विदेशी मुद्रार् अर्जित की जार् सकती है और इस अर्जित मुद्रार् से ही आवश्यक वस्तुए मशीन, दवार्इयॉं, कच्चार् मार्ल आदि विदेशों से मॅंगार्यार् जार् सकतार् है, इसलिए निर्यार्त को प्रोत्सार्हन देनार् ही देश क सच्चार् विकास करनार् है।

निर्यार्त व्यार्पार्र की आवश्यकतार्

  1. अतिरिक्त उत्पार्दन क विक्रय कने के लिए।
  2. आयार्तों क भुगतार्न करने के लिए। 
  3. औद्योगीकरण को प्रोत्सार्हन देने के लिए। 
  4. विदेशी मुद्रार् अर्जित करने के लिए। 
  5. देश के सम्पूर्ण विकास के लिए। 

निर्यार्त व्यार्पार्र के मध्यस्थ

  1. निर्यार्त प्रतिनिधि 
  2. प्रेषण प्रतिनिधि
  3. जहार्जी कम्पनियॉं 
  4. बैंक
  5. बीमार् कम्पनियॉं

मार्ल निर्यार्त करने की विधि

विदेशों को मार्ल विक्रय करके भेजनार् ही निर्यार्त व्यार्पार्र कहलार्तार् है। अधिकांश निर्यार्त व्यार्पार्र निर्यार्त एजेंट के मार्ध्यम से ही होतार् है। वही मार्ल के निर्यार्त की व्यवस्थार् करतार् है। मार्ल के निर्यार्त की विधि निम्नार्नुसार्र है-

1. विदेशी व्यार्पार्र की खोज – 

अपने देश में निर्मित मार्ल की मॉंग कौन से देश में अधिक है तथार् कौन से देश में मॉंग पैदार् करके उसमें वृद्धि की जार् सकती है, इस हेतु विदेशों में रहने वली जनतार् की रूचि, स्वभार्व एवं उनकी परम्परार्ओं क अध्ययन करनार् जरूरी है। विदेशी व्यार्पार्र के लिए ऐसे देशों क चुनार्व करनार् चार्हिए जिन देशों में अपने देश द्वार्रार् उत्पार्दित मार्ल की खपत बढ़ाइ जार् सकती है। इसलिए विज्ञार्पन विदेशी एजेन्ट, यार्त्री व्यक्तिगत एजेंट आदि द्वार्रार् अपनार् मार्ल भेजने क आदेश प्रार्प्त करनार् आवश्यक है।

2. इन्डेन्ट प्रार्प्त करनार् – 

निर्यार्त व्यार्पार्र इन्डेन्ट प्रार्प्त करने पर प्रार्रम्भ होतार् है। विदेशी व्यार्पार्री सीधार् उत्पार्दक से मार्ल खरीदने की इच्छार् रखतार् है तो वह उत्पार्दक को आदेश देकर मार्ल प्रार्प्त कर सकतार् है। इन्डेन्ट निर्यार्त प्रतिनिधि को भेजार् जार्तार् है। इन्डेन्ट में यदि मार्ल भेजने सम्बन्धी जार्नकारी आयार्तकर्तार् द्वार्रार् भेजी जार्ती है तो उसे पूर्ण इन्डेन्ट कहते हैं, किन्तु यदि इन्डेन्ट में मार्ल की मार्त्रार् मार्ल के प्रकार की जार्नकारी को छोड़कर श्शेष जार्नकारी निर्यार्त प्रतिनिधि के विवेक पर छोड़ दी जार्ती है तो उसे खुलार् इन्डेन्ट कहते हैं जैसार् कि आयार्त व्यार्पार्र प्रणार्ली।

3. सार्ख पत्रों की मॉंग एवं आवश्यक जॉंच-पड़तार्ल – 

इन्डेन्ट के प्रार्प्त होते ही निर्यार्तक की आर्थिक स्थिति, बैकिंग व्यवहार्र एवं ख्यार्ति की जार्नकारी, बैंक एवं व्यार्पार्रिक संघों द्वार्रार् प्रार्प्त कर लेतार् है।

4. निर्यार्त लार्यसेन्स की प्रार्प्ति – 

इन्डेन्ट के प्रार्प्त होते ही उसमें दर्शार्ए मार्ल क निर्यार्त करने के लिए निर्यार्त लार्यसेंस लेनार् जरूरी है। निर्यार्तकर्तार् अपने देश के आयार्त-निर्यार्त नियंत्रण को आवश्यक श्शुल्क के सार्थ एक आवेदन पत्र प्रस्तुत करतार् है, जिसमें निर्यार्त लार्यसेंस (आज्ञार् पत्र) देने की प्राथनार् की जार्ती है। इस प्राथनार् पत्र के आधार्र पर उसे निर्यार्त लार्यसेंस दियार् जार्तार् है। निर्यार्त आज्ञार् पत्र निर्गमन की तिथि से तीन मार्ह तक वैध रहतार् है। इसके सार्थ ही उसे कोटार् पत्र भी प्रार्प्त कर लेनार् चार्हिए।

5. इन्डेन्ट की स्वीकृति – 

इन्डेन्ट प्रार्प्त होने के पश्चार्त् मार्ल के एकत्रीकरण क कार्य प्रार्रम्भ कर देनार् चार्हिए एवं आयार्तकर्तार् को इन्डेन्ट की स्वीकृति की सूचनार् दे देनार् चार्हिए।

6. विदेशी मुद्रार् सम्बन्धी घोषणार् – 

निर्यार्तक देश के केन्द्रीय बैंक द्वार्रार् विदेशी मुद्रार् सम्बन्धी बनार्ए नियमों क पार्लन करने के लिए उसे एक विदेशी मुद्रार् सम्बन्धी घोषणार् पत्र प्रस्तुत करनार् पड़तार् है। यह केन्द्रीय (रिजर्व बैंक) बैंक उसके दिए हुए कथन से संतुष्ट हो जार्तार् है तो निर्यार्त की अनुमति दे देतार् है।

7. मार्ल क संग्रह – 

निर्यार्त आज्ञार् पत्र, निर्यार्त अनुमति मिल जार्ने के बार्द निर्यार्त प्रतिनिधि स्वयं यार् कर्मचार्रियों की सहार्यतार् से इन्डेन्ट में वर्णित मार्ल क संग्रह एवं एकत्रीकरण क कार्य प्रार्रम्भ कर देतार् है। यदि व्यार्पार्रियों से उचित मूल्य पर मार्ल खरीदतार् है एवं मार्ल के संग्रह हो जार्ने पर उसक इन्डेन्ट से मिलार्न कर लेतार् है।

8. मार्ल की पैकिंग करनार् एवं चिन्ह डार्लनार् – 

मार्ल एकत्रित कर लेने के पश्चार्त् निर्यार्त प्रतिनिधि उसक आयार्तकर्तार् के निर्देशार्नुसार्र पैकिंग करार्तार् है। प्रत्येक पैकिंग पर आयार्तकर्तार् क नार्म, पतार् एवं आयार्तकर्तार् द्वार्रार् बतार्यार् गयार् विशेष चिन्ह अंकित करतार् है। यदि आयार्तक द्वार्रार् पैकिंग के सम्बन्ध के निर्देश न दिए हों तो प्रचलित प्रथार् के अनुसार्र कार्य करनार् चार्हिए। इस प्रकार उचित पैकिंग करके मार्ल को बंदरगार्ह तक भेजने की व्यवस्थार् करनार् चार्हिए।

9. प्रेषण प्रतिनिधि की नियुक्ति – 

निर्यार्त प्रतिनिधि मार्ल के निर्यार्त सम्बन्धी श्शेष कार्यों को करने के लिए प्रेषण प्रतिनिधि की नियुक्ति करतार् है। यह निर्यार्त प्रतिनिधि के स्थार्न से लेकर जहार्ज द्वार्रार् मार्ल रवार्नगी तक के सम्पूर्ण कार्यों को सम्पन्न करतार् है। वह इन कार्यों के लिए निर्यार्त प्रतिनिधि से अपनार् कमीशन प्रार्प्त करतार् है। प्रेषण प्रतिनिधि के प्रमुख कार्य निम्नार्नुसार्र हैं-

  1. जहार्ज की व्यवस्थार् तथार् भार्ड़ार् सम्बन्धी कार्य – प्रेषण प्रतिनिधि मार्ल भेजने के लिए जहार्जी कम्पनियों से बार्तचीत करके मार्ल ले जार्ने के लिए आवश्यक स्थार्न क आरक्षण करवार् लेतार् है। जहार्जी भार्ड़ार् सम्बन्धी अनुबंध भी कर लेतार् है।
  2. जहार्जी आज्ञार् पत्र प्रार्प्त करनार् – जहार्जी भार्ड़े तय हो जार्ने के बार्द प्रेषण प्रतिनिधि जहार्ज कम्पनी से मार्ल ले जार्ने के लिए जहार्जी आज्ञार् पत्र प्रार्प्त करतार् है। इसके लिए उसे निर्यार्त अनुज्ञार् पत्र की प्रमार्णित प्रतिलिपि, विदेशी मुद्रार् सम्बन्ध् ार्ी घोषणार्-पत्र की प्रमार्णित प्रतिलिपि जहार्जी कम्पनी कार्यार्लय में देनी पड़ती है। इसके आधार्र पर कम्पनी, कप्तार्न को जहार्ज पर मार्ल लार्ने के लिए जहार्जी आज्ञार् पत्र जार्री कर देती है। जहार्जी आज्ञार् पत्र दो प्रकार क होतार् है- 
    1. तैयार्र आज्ञार् पत्र 
    2. अग्रिम आज्ञार् पत्र। तैयार्र आज्ञार् पत्र जिस जहार्ज के लिए तैयार्र है, उसक नार्म दे दियार् जार्तार् है। अग्रिम आज्ञार् पत्र में कौन-सार् जहार्ज जार्वेगार्, यह तय न होने के कारण जहार्ज क नार्म नही दियार् जार्तार् है। आज्ञार् पत्र प्रार्प्त होने के बार्द यदि किसी कारणवश निर्यार्तकर्तार् मार्ल भेजने में असमर्थ है तो चुकायार् गयार् भार्ड़ार् डूब जार्तार् है जिसे मृत भार्ड़ार् कहार् जार्तार् है।
  3. विदेशी चुंगीघर की अनुमति – मार्ल को निर्यार्त करने के लिए विदेशी चंगुीघर अधिकारियों से आज्ञार् पत्र लेनार् पड़तार् है। यदि मार्ल भेजने पर सरकार द्वार्रार् कोर्इ प्रतिबंध नहीं लगार्यार् गयार् है तो मार्ल भेजने की अनुमति प्रार्प्त हो जार्ती है। इस अनुमति को विदेशी चुंगीघर यार् परमिट भी कहते हैं।
  4. निर्यार्त कर चुकानार् – प्रेषण प्रतिनिधि निर्यार्त कर चुकाने के लिए मार्ल के चार्लार्न की तीन प्रतियॉं भरकर चुंगी गृह को दे देतार् है। चुंगी अधिकारी इनके आधार्र पर निर्यार्त कर तय करके दो प्रतियॉं प्रेषक प्िरतनिधि को लार्टैार् देतार् है जिसके आधार्र पर पेरषक प्रतिनिधि को निर्यार्त कर क भुगतार्न करनार् पड़तार् है। निर्यार्त कियार् जार्ने वार्लार् मार्ल तीन प्रकार क (1) कर मुक्त (2) कर देय और (3) तटीय हो सकतार् है। जिन पर कर लगतार् है, उन्हें कर देय मार्ल तथार् जिन पर कर नहीं लगतार् है, उन्हें कर मुक्त मार्ल कहते हैं। तीनों प्रकार के मार्ल पर कर चुकाने के लिए विभिन्न रंगों के चार्लार्न प्रयोग में लार्ये जार्ते हैं।
  5. बंदरगार्ह पर मार्ल भिजवार्नार् यार् डार्क चार्लार्न प्रार्प्त करनार् – निर्यार्त कर चुकाने के पश्चार्त् मार्ल को बंदरगार्ह पर भेज दियार् जार्तार् है। इसके लिए डार्क अधिकारियों की अनुमति प्रार्प्त करनी पड़ती है। अनुमति प्रार्प्त करने तथार् डार्क व्यय चुकाने हेतु डार्क चार्लार्न दो प्रतियों में भरकर डार्क व्यय की रकम सहित डार्क अधिकारियों के पार्स जमार् करार् देतार् है। डार्क अधिकारी एक प्रति हस्तार्क्षर कर प्रेषण प्रतिनिधि को लौटार् देते हैं।
  6. जहार्ज पर मार्ल लार्दनार् – उपर्युक्त कार्यवार्ही करने के पश्चार्त् प्रेषण प्रतिनिग्रिार् समस्त आवश्यक प्रपत्र जैसे- निर्यार्त आज्ञार् पत्र, जहार्जी आज्ञार् पत्र, जहार्जी बिल आदि की एक-एक प्रति डार्क के अधिकारियों को देकर मार्ल की जॉंच करवार्कर मार्ल को जहार्ज पर लदवार्ने की कार्यवार्ही करतार् है।
  7. कप्तार्न की रसीद प्रार्प्त करनार् – जहार्जी आज्ञार् पत्र को देखकर जहार्ज क कप्तार्न मार्ल जहार्ज पर लार्दने की अनुमति दे देतार् है तथार् मार्ल लद जार्ने पर एक मार्ल प्रार्प्ति की रसीद दे देतार् है, जिसे कप्तार्न रसीद कहते हैं। यदि मार्ल क पैकिंग खरार्ब है तो रसीद पर इस बार्त क उल्लेख कर देतार् है। इसे दूषित रसीद कहते हैं और यदि पैकिंग अच्छार् है तो स्वच्छ रसीद दी जार्ती है।
  8. जहार्जी बिल्टी प्रार्प्त करनार् – प्रेषण प्िरतनिधि कप्तार्न की रसीद लेकर जहार्जी कम्पनी में जार्तार् है तथार् वहॉं से जहार्जी बिल्टी के तीन प्रपत्र लेकर उनकी पूर्ति करके कप्तार्न की रसीद सहित उन्हें जहार्जी कप्तार्न के कार्यार्लय में जमार् करार् देतार् है। जहार्जी कम्पनी के अधिकारी कम्पनी की रसीद को देखकर जहार्जी बिल्टी की एक प्रति प्रेषण प्रतिनिधि को, दूसरी प्रति जहार्ज के कप्तार्न को दे देतार् है एवं तीसरी प्रति कम्पनी कार्यार्लय में भविष्य के हवार्ले के लिए सुरक्षित रख ली जार्ती है और दूषित होने पर जहार्जी बिल्टी दी जार्ती है।
  9. मार्ल क बीमार् करनार् – जहार्जी बिल्टी प्रार्प्त करने के बार्द प्रेषण प्रतिनिधि मार्ल क बीमार् करवार्तार् है। विदेशी व्यार्पार्र में समुद्र से मार्ल मॅंगार्ने के कारण सार्मुद्रिक संकटों से बीमार् करवार्यार् जार्तार् है। मार्ल के मूल्य के सार्थ लार्भ की सुरक्षार् के लिए 10 से 15 प्रतिशत तक अधिक रार्शि जोड़कर बीमार् करार्यार् जार् सकतार् है।
  10. निर्यार्त प्रतिनिधि को सूचनार् – प्रेषण प्रतिनिधि उपरोक्त कार्यों को सम्पार्दित करने के बार्द अपने सार्रे खर्चों क एक लेखार् बनार्तार् है। जिसमें खर्च की रकमों के सार्थ अपनार् कमीशन भी जोड़ देतार् है। इस लेखे क सार्थ समस्त कागज पत्र जैसे जहार्जी बिल की दो प्रतियॉं, एक चार्लार्न, जहार्जी बिल्टी, बीमार् पत्र आदि निर्यार्त प्रतिनिधि को भेज देतार् है। निर्यार्त प्रतिनिधि, प्रेषण प्रतिनिधि द्वार्रार् किए गए समस्त व्यय और उसके कमीशन क भुगतार्न कर देतार् है।
  11. आवश्यक प्रलेखों की तैयार्री – समस्त निर्यार्त सम्बन्धी कागजार्त प्रार्प्त होने के बार्द निर्यार्त प्रतिनिधि निम्नलिखित प्रलेख तैयार्र करतार् है-
  12. निर्यार्त बीजक – जो मार्ल निर्यार्त कियार् जार्तार् है, उसके लिए निर्यार्त बीजक बनार्यार् जार्तार् है उसे मार्ल क मूल्य-दर, मार्ल क विवरण, सम्बन्धित व्यय जैसे-संवष्े ठन व्यय, बंदरगार्ह तक क भार्ड़ार्, बीमार् व्यय तथार् स्वयं क कमीशन आदि को श्शार्मिल कर देय रार्शि निकाल ली जार्ती है। यदि कोर्इ अग्रिम रार्शि प्रार्प्त हुर्इ हो तो उसको घटार् दियार् जार्तार् है। इसकी तीन प्रतियॉं तैयार्र की जार्ती हैं।
  13. वार्णिज्य दूतार्वार्स क प्रमार्ण-पत्र – कभी-कभी आयार्तक देशों में मार्ल आने के पूर्व वार्णिज्य दूतार्वार्स से बीजक क प्रमार्णीकरण करवार्नार् जरूरी हो जार्तार् है। वह अपने देश के हितों को देखकर बीजक प्रमार्णित करके लौटार् देतार् है। इसे भी बीजक के सार्थ भेजनार् पड़तार् है।
  14. उत्पत्ति यार् मूल स्थार्न क प्रमार्ण पत्र – जैसार् कि पूर्व में वर्णन कियार् जार् चुक है कि जब पार्रस्परिक समझौते के अनुसार्र मित्र रार्ष्ट्र एक-दूसरे के देश में निमिर्त किये मार्ल पर आयार्त कर में कुछ छूट देते हैं, ऐसी स्थिति में उन्हें मार्ल की उत्पत्ति क एक प्रमार्ण पत्र देनार् पड़तार् है जिसके आधार्र पर करों में छूट प्रार्प्त हो जार्ती है।
  15. विपत्र तैयार्र करनार् – भुगतार्न के श्शर्तों के अनुसार्र निर्यार्तक डी. ए. यार् डीपी. विपत्र तीन प्रतियों में तैयार्र करतार् है।
  16. क्रेतार् को सूचनार् – उपरोक्त प्रलेखों के सार्थ बीजक, जहार्जी बिल्टी, बीमार् पत्र, विनिमय विपत्र आदि को बैंक में सौंप देतार् है और आयार्तिक इस आशय की सूचनार् देतार् है तार्कि आयार्तक निर्देशार्नुसार्र प्रपत्रों को तैयार्र कर मार्ल की सुपुर्दगी ले सके।
  17. मूल्य की प्रार्प्ति – आयार्तकर्तार् विपत्र द्वार्रार्, बैंक ड्रार्फ्ट, विदेशी तार्र अथवार् नकद रूप में मूल्य क भुगतार्न कर देतार् है। इस प्रकार निर्यार्त व्यार्पार्र की क्रियार् सम्पन्न होती है।

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