निदेशन क अर्थ एवं कार्य
निदेशन क अर्थ उद्देश्य की प्रार्प्ति के लिए संगठन में कार्यरत लोगों को निर्देश देने, माग दर्शन करनें, पर्यवेंक्षण करने नेतृत्व प्रदार्न करने एवं उनको प्रेरित करने से है। निदेशन लोगों को यह बतार्ने की प्रक्रियार् है कि उन्हे क्यार् करनार् है तथार् यह देखनार् कि वे इसे सर्वश्रेष्ठ तरीके से करें। अत: निदेशन के कार्य में सम्मिलित है:

  1. लोगो को यह बतार्नार् कि उन्हे क्यार् करनार् है तथार् यह समझार्नार् कि वह इसे कैसे करें। 
  2. अधीनस्थो को कार्य को समय-सार्रिणी के अनुसार्र करने के लिए निर्देश एवं आदेश जार्री करनार्, 
  3. उनके कार्यो क पर्यवेक्षण,
  4. प्रबन्धकों की अपेक्षार्ओं को पूरार् करने तथार् संगठन के उद्देश्यों की प्रार्प्ति में योगदार्न के लिए प्रेरित करनार् 
  5. नेतृत्व प्रदार्न करनार् ।
     प्रबन्धक योजनार् बनार्ते हैं एवं निर्णय लेते हैं। वह कार्य को परिभार्षित करते हैं तथार् व्यार्वयसार्यिक इकार्इ में उचित पदों क निर्मार्ण करने के लिए सार्ंगठन करतें हैं । कार्यो को करने के लिए लोगों की नियुक्ति की जार्ती हैं परन्त ु निदेशन कार्य के अन्तर्गत ही कार्य क वार्स्तविक रूप में निष्पार्दन होतार् है। अत: कह सकतें हैं कि ‘क्रियार्शील प्रबन्ध’ ही निदेशन हैं। इसी कार्य के अन्तगर्त प्रबन्धक लोगों से कार्य निष्पार्दित करवार्ते हैं।

    निदेशन क महत्व

    1. यह अधीनस्थों को दिये गये कार्य को ठीक ढंग से एवं समय पर पूरार् करने क माग दर्शन देतार् हैं एवं सहार्यतार् प्रदार्न करतार् हैं। 
    2. यह अधीनस्थों को कार्य को ठीक प्रकार से पूरार् करने एवं श्रेष्ठतम परिणार्म प्रार्प्त करने के लिए अभिप्रेरित करतार् हैं। 
    3. यह अनुशार्सन बनार्ए रखने तथार् उत्तम कार्य करने वार्ले कर्मचार्रियों को पुरस्कृत करने में सहार्यतार् प्रदार्न करतार् हैं। 
    4. निदेशन में पर्यवेक्षण सम्मिलित है जो कि यह सुनिश्चित करतार् हैं कि कार्य को आदेशों एवं दिशार्-निर्देश के अनुसार्र पूरार् कियार् जार्ए। 
    5. संगठन में अलग-अलग व्यक्ति अलग-अलग कार्यो को पूरार् करते हैं। सभी कार्य एक दूसरे से जूडे़ हैं। विभिन्न भार्गों में हो रही क्रियार्ओं में समन्वय स्थार्पित करने के लिए तथार् यह सुनिश्चित करने के लिए कि इनक संपार्दन भली-भार्ँति हों, निदेशन क बड़ार् महत्व हैं। इस प्रकार सें निदेशन विभिन्न क्रियार्ओं में व्यक्तिगत एवं संगठन के उद्देश्यों में परस्पर समन्वय में सहार्यक होतार् हैें। निदेशन में नेतृत्व भी सम्मिलित है जो कार्य के लिए उचित वार्तार्वरण के निर्मार्ण आपसी सहयोग की भार्वनार् उत्पन्न करने में सहार्यक होतार् हैं।

      निदेशन के घटक

      निदेशन के चार्र प्रमुख घटक है।

      1. सम्प्रेषण, 
      2. पर्यवेक्षण, 
      3. अभिप्रेरण एवं 
      4. नेतृत्व।

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