दूरस्थ शिक्षार् क ऐतिहार्सिक विकास

दूरस्थ शिक्षार् क उद्भव 

पत्रार्चार्र के रूप में दूरस्थ शिक्षार् क इतिहार्स 1840 से मार्नी जार्ती है। आधुनिक नवीन प्रणार्ली क प्रार्रम्भिक रूप ‘‘ओल्ड टैसटार्मन’’ के अनुदेशनार्त्मक लेखों से मिलतार् है, इसके अतिरिक्त आम धार्रणार् के अनुसार्र इसक प्रार्रम्भ 1840 र्इ0 में आइजक पिटमैन द्वार्रार् शाट हैण्ड पार्ठ्यक्रम पेनी डॉक से भेजने से हुआ है। 1856 में लैगनशीट एवं टॉसैन्ट ने एक आधुनिक भार्षार्ओं के स्कूल की स्थार्पनार् करके विदेशी भार्षार्ओं क शिक्षण पत्रार्चार्र से प्रार्रम्भ कियार्। संयुक्त रार्ज्य अमेरिक के औपचार्रिक मार्ध्यमिक विद्यार्लयों में पत्रार्चार्र शिक्षार् की भूमिक 1873 में प्रार्रम्भ हो गयी पर विश्वविद्यार्लय में यह पार्ठ्यक्रम 1890 र्इ0 में प्रार्रम्भ हुआ पर यह अत्यल्प थी।

यूरोप देशों में सन् 1890 में जर्मनी व स्वीडन में पत्रार्चार्र शिक्षार् संस्थार्नों की स्थार्पनार् हुयी। परन्तु बीसवीं शतार्ब्दी के प्रार्रम्भ तक पत्रार्चार्र अनुदेशन विद्यार्लयों की स्थार्पनार् बहुत अधिक हो चुकी थी।

दूरस्थ शब्द की उत्पत्ति – 

दूरस्थ शिक्षार् पहले डार्क शिक्षण, पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम, स्वतंत्र अध्ययन, गृह अध् ययन जैसे शब्दों से जार्नी जार्ती थी। परन्तु अनेक नार्मों के बीच पत्रार्चार्र शिक्षार् ही सर्वार्धिक लोकप्रिय हुयी। वैसे सभी नार्मों में समार्नतार् है और सभी में गैर परम्परार्गत और सभी में मुद्रित सार्मग्री, संचार्र मार्ध्यमों के मार्ध्यम से शिक्षक-शिक्षार्थ्र्ार्ी के मध्य सम्बंध स्थार्पनार् क कार्य कियार् जार्तार् है और फिर इसे मुक्त विश्वविद्यार्लय, दूर विश्वविद्यार्लय आदि नार्म प्रदार्न किये गये।

फिर कुछ समय बार्द ‘‘पत्रार्चार्र शिक्षार्’’ नार्म के प्रति लोगों में भ्रम उत्पन्न हुआ और यह मार्नार् गयार् कि यह नार्म शिक्षार् की प्रकृति के अनुरूप नहीं है। अत: इस संदेह को समार्प्त करने क अवसर मिल गयार् जब 1982 में बैकाउर में प्रो0 बख्सीश सिंह की अध्यक्षतार् में आयोजित अन्तर्रार्ष्ट्रीय पत्रार्चार्र शिक्षार् परिषद् के बार्रहवें विश्व सम्मेलन में इण्टरनेशनल काउन्सिल फार्र करस्पार्ण्डेन्स को बदलकर इण्टरनेशनल काउन्सिल फॉर डिस्टैन्स एजुकेशन कर दियार् गयार्। नार्म बदलने क कारण मुख्य रूप से प्रकृति ही थी क्योंकि पत्रार्चार्र शिक्षार् में मूलत: मुद्रित सार्मग्री दी जार्ती थी, जिसमें स्व अनुदेशन जैसे तथ्य नहीं थे और दूरस्थ शिक्षार् सूचनार् प्रसार्रण के बहु-मार्ध्यम उपार्गम की ओर संकेत करतार् है।

अन्तर्रार्ष्ट्रीय स्तर पर दूरस्थ शिक्षार्- 

दूरस्थ शिक्षार् की आवश्यकतार् एवं लोकप्रियतार् ने इससे जुडे लोगों को प्रोत्सार्हन दियार् इसके ही फलस्वरूप 1938 में अन्तर्रार्ष्ट्रीय पत्रार्चार्र शिक्षार् परिषद् (आर्इ0सी0सी0र्इ) की स्थार्पनार् की गयी इसके संस्थार्पक अध्यक्ष जे0डब्लू0 गिबसन रहे। सन् 1938 को इसक प्रथम सम्मेलन आयोजित कियार् गयार् और आर0सी0हार्इट को प्रथम अध्यक्ष चुनार् गयार् तथार् द्वितीय सम्मेलन सन् 1948 में आयोजित हुआ जिसमें नेबरार्स्क विश्वविद्यार्लय के एक्सटेंसन डिवीजन के निदेशक डार्0 ब्रौडी अध्यक्ष बने। सन् 1967 में यूनेस्को के अन्तर्रार्ष्ट्रीय पत्रार्चार्र शिक्षार् परिषद् को अशार्सकीय संस्थार् के रूप में मार्न्यतार् मिली।

इसी बीच यूनार्इटेड किंगडम में 1969 में श्रम प्रधार्न मंत्री हार्रनोल्ड विलसन के प्रयार्सों से मिल्टन कीन्स में प्रथम मुक्त विश्वविद्यार्लय खुलार्। यह दूरस्थ शिक्षार् के लिये स्वर्णिम अवसर थार्। सन् 1972 में नौवे अन्तर्रार्ष्ट्रीय पत्रार्चार्र शिक्षार् परिषद् के सम्मेलन से पूर्व ही डॉ0 चार्ल्र्स ए0 वेडेमियर ने इस पर एक समार्चार्र-पत्र निकालकर जार्गरूकतार् उत्पन्न करनार् प्रार्रम्भ कियार्। 1978 में आर्इ0सी0सी0र्इ0 क विश्व सम्मेलन आयोजित करने वार्लार् भार्रत प्रथम विकासशील देश थार्। 1982 तक इस संस्थार् के सदस्य देशों की संस्थार् बढ़कर 60 हो गयी थी।

आस्टे्रलियार् दूरस्थ शिक्षार् में अत्यधिक आगे है, क्योंकि यह कर्इ द्वीपों मे बार्ंटार् हुआ है और सम्पूर्ण जनसंख्यार् बिखरी है। इस स्थिति में औपचार्रिक शिक्षार् बहुत सफल नही हो पार् रही है। आस्टे्रलियार् प्रार्थमिक, मार्ध्यमिक एवं उच्च स्तर पर पत्रार्चार्र शिक्षार् प्रदार्न करने क अनुभव रखतार् है। क्वीन्सलैण्ड नार्मक विश्वविद्यार्लय सन् 1911 से ही पत्रार्चार्र शिक्षार् की सुविधार् प्रदार्न कर रहार् है। आस्टे्रलियार् में पत्रार्चार्र शिक्षार् व्यवस्थार् बहुत अच्छी चल रही है, क्योंकि विश्वविद्यार्लय शिक्षक परिसर में ही नियमित छार्त्रों क शिक्षण कर बार्द में पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रमों क भी शिक्षण परिसर में ही करते हैं।

यूरोपीय देशो में दूरस्थ शिक्षार् 

यूरोपीय देशों र्इंग्लैण्ड, पश्चिमी-पूर्वी जर्मनी, नावे, नीदरलैण्ड, स्पेन आदि में बीसवीं शतार्ब्दी के उत्तराद्ध में दूरस्थ शिक्षार् क तीव्रतम विकास हुआ। यहार्ं पर उन्नत शैक्षिक तकनीकी प्रचार्र-प्रसार्र क मुख्य कारण रही। सर्व प्रथम 1968र्इ0 में यूरोपीयन होम स्टडी काउन्सिल की स्थार्पनार् की गयी, इसने इस प्रणार्ली पर शोध कार्य करनार् प्रार्रम्भ कियार् तथार् प्रबंध के विकास कार्यक्रम पर ध्यार्न देते हुये ‘‘इपिस्टोलोडिडेकटिका’’ क प्रकाशन प्रार्रम्भ कियार्। बार्द में यूरोपीय पत्रार्चार्र विद्यार्लय संघ की स्थार्पनार् हुर्इ जिसमें 17 यूरोपीय देशों के लोग सदस्य बने। 1978 में सूचनार् एवं संसार्धन इकार्इ की स्थार्पनार् की गयी। यह इकार्इ अन्तर्रार्ष्ट्रीय सहयोग एवं सेवार् हेतु मुक्त विश्वविद्यार्लय केन्द्र को सहार्यतार् प्रदार्न करती है, और अब यह इकार्इ यूनार्इटेड नेशन्स ‘‘यूनीवर्सिटी इण्टरनेशनल डार्क्यूमेन्टेशन सेन्टर ऑन डिस्टेन्स एजुकेशन’’ के रूप में प्रस्थार्पित हुयी।

र्इग्लैण्ड में मिल्टर कीन्स द्वार्रार् 1969 में मुक्त विश्वविद्यार्लय की स्थार्पनार् से दूरस्थ शिक्षार् के विकास क कार्य प्रार्रम्भ हुआ। इस विश्वविद्यार्लय में सार्ठ हजार्र से अधिक शिक्षार्थ्र्ार्ी नार्मार्ंकित है, इसने अनेक देशों को दूरस्थ शिक्षार् केन्द्र के स्थार्पनार् हेतु विशेषज्ञ प्रदार्न किये हैं। र्इग्लैण्ड के मुक्त विश्वविद्यार्लय के पार्ठ्यक्रम ने अनेक देशों को प्रेरित कियार् है। केम्ब्रिज क इन्टरनेशनल एक्सटेशन कालेज भी दूरस्थ शिक्षार् प्रदार्न करने की प्रमुख संस्थार् है। र्इग्लैंण्ड में पत्रार्चार्र संस्थार्न के व्यक्तिगत प्रयार्स भी सरार्हनीय है।

1. पश्चिमी जर्मनी- 

पश्चिमी जर्मनी में भी पत्रार्चार्र विद्यार्लय बहतु ही लार्के पिय्र है। सर्वप्रथम आवश्यकतार् को ध्यार्न में रखते हुये 1965 र्इ0 में टयूबिन्गन में जर्मन दूरस्थ शिक्षार् संस्थार् की स्थार्पनार् हुर्इ। यह संस्थार्न रार्ष्ट्र स्तर क है, और यह उच्च शिक्षार् एवं भार्वी अधिगम की संस्थार्ओं को मुद्रित एवं श्रव्य दृश्य अध्ययन सार्मग्री प्रदार्न कर रही है। बार्द में 1974 र्इ0 में हेगन में एक दूरस्थ शिक्षण विश्वविद्यार्लय की स्थार्पनार् हुर्इ। पश्चिमी जर्मनी अफ्रीकी देशों में दूरस्थ शिक्षार् क प्रचार्र-प्रसार्र कर रहार् है।

2. पूर्व जर्मनी-

पूर्व जर्मनी में 1976 र्इ0 से सार्मार्जिक विकास क प्रार्रम्भ हुआ। दूसरे देशों की भार्ंति कार्यरत व्यक्ति दूरस्थ शिक्षार् एवं सार्यंकालीन कालेजों के मार्ध्यम से तकनीकी शिक्षार् की डिग्रियार्ं प्रार्प्त करने की ओर प्रवश्त्त हुये। अनेक क्षेत्रो में दूरस्थ शिक्षार् के कोर्स प्रार्रम्भ हुय। उच्च शिक्षार् मंत्रार्लय के अन्तर्गत ‘‘विश्वविद्यार्लय दूरवर्ती शिक्षार् क केन्द्रीय कार्यार्लय के द्वार्रार् दूरस्थ शिक्षार् क उत्तरदार्यित्व भी संभार्लार् जार्तार् है।

3. फ्रार्ंस- 

फ्रार्सं में दूरस्थ शिक्षार् के प्रचार्र-प्रसार्र हते ु शिक्षको के लिये दूरस्थ विश्वविद्यार्लय शिक्षण की व्यवस्थार् कियार् गयार्। बार्द में इसक क्षेत्र विस्तृत हो गयार् और 18 विश्वविद्यार्लयों को ‘रेडियो विश्वविद्यार्लय’ क नार्म दियार् गयार्। इनके द्वार्रार् 3 एवं 4 वर्ष की अवधि के विश्वविद्यार्लय स्तर के पार्ठ्यक्रम चलार्ये जार्ते हैं। फ्रार्ंस में दूरस्थ शिक्षार् ने अपने पार्ठ्यक्रम इतने विकसित किये कि अनेक देश उससे पार्ठ्यसार्मग्री आदार्न-प्रदार्न करते हैं। 1907 र्इ0 से इकोल विश्वविद्यार्लय दूरस्थ शिक्षार् के अनेक पार्ठ्यक्रम संचार्लित करतार् है।

4. नीदरलैण्ड- 

डच सरकार ने भी दूरस्थ शिक्षार् की आवश्यकतार् को स्वीकार कियार् और 1971 र्इ0 में डच सरकार में इसे लचीली बनार्ने पर जोर दियार्। 1984 र्इ0 में नीदरलैण्ड मुक्त विश्वविद्यार्लय की स्थार्पनार् हुर्इ, जिसमें आधिकारिक विधि, सार्ंस्कश्तिक विज्ञार्न, प्रार्कृतिक विज्ञार्न, सार्मार्जिक विज्ञार्न, विपणन, सार्ख्यिकी एवं प्रणार्ली प्रबंधन आदि सम्बंधित पार्ठ्यक्रम संचार्लित है। डच भार्षी लोगों के लिये भी इसक एक केन्द्र वेल्जियम में प्रस्थार्पित है।

5. इटली- 

इस देश में दूरस्थ शिक्षार् क विश्वविद्यार्लय ‘‘कानसार्रे जिओ पर ल यूनिवर्सिटी ए डिटैन्जार्’’ स्थार्पित कियार् गयार् है।

6. नावे- 

इस देश में 1948 र्इ0 में नाव े सरकार ने पूरे देश में पत्रार्चार्र शिक्षार् के प्रचार्र हेतु कानून पार्रित कियार् गयार्। सरकार को दूरस्थ शिक्षार् पर परार्मर्श देने के लिये एक सरकारी संस्थार्- ‘‘पत्रार्चार्र शिक्षार् परिषद्’’ की स्थार्पनार् भी की गयी है। नावेइयन पत्रार्चार्र विद्यार्लय संघ की स्थार्पनार् की गयी और उन्होनें 1965र्इ0 में नार्म बदलकर नावेइयन दूरस्थ शिक्षार् संघ कर दियार्।

7. स्पेन- 

इस देश ने 1973 र्इ0 ‘‘रार्ष्ट्रीय दूरस्थ शिक्षार् विद्यार्लय की स्थार्पनार् कर दूरस्थ शिक्षार् को अति लोकप्रिय बनार्यार्। इस विश्वविद्यार्लय में व्यार्पक स्तर पर दूरस्थ शिक्षार् से सम्बंधित विभिन्न पार्ठ्यक्रम चलार्ये जार्ते हैं।

8. स्वीडन- 

स्वीडन में सबसे पहलार् पत्रार्चार्र विद्यार्लय 1898 में हरमॉड्स ने प्रार्रम्भ कियार्। इसके पश्चार्त् अनेक पत्रार्चार्र विद्यार्लय खुले। स्वीडिस सेनार् के लोगों की शिक्षार् के लिये एक पत्रार्चार्र विद्यार्लय खोलार् गयार्। 1966 मे एक अन्य विद्यार्लय खुलार्, यह ‘लिबर हार्रमॉडस’ के नार्म से प्रसिद्ध संस्थार् है। सन् 1968 र्इ0 में स्वीडिस विश्वविद्यार्लयों नें सार्ंध्यकालीन कक्षार्ओं एवं स्थार्नीय बार्ह्य पार्ठ्यक्रम जैसे पूरक अध्ययन पार्ठ्यक्रमों को दूरवर्ती शिक्षार् के द्वार्रार् आरम्भ कियार्। यहॉ पर भी तकनीकी शिक्षार् के पार्ठ्यक्रमों के प्रति विद्यार्थ्र्ार्ी दूरस्थ शिक्षार् की ओर अधिक आकृष्ट होते हैं।

9. सोवियत संघ- 

रूस में 1920 र्इ तक एक बहुत बडी़ सख्ं यार् मे लो ग अशिक्षित थे। रूस में शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने के लिये पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रमों क सहार्रार् लियार् और विशेष अभियार्न मे रूस ने दो दशकों में ही पूर्ण सार्क्षरतार् प्रार्प्त कर ली। इसमें सबसे अधिक प्रौढ़ शिक्षार् क विकास महत्वपूर्ण रहार्। रूस ने आगे चलकर औपचार्रिक शिक्षार् के तीन रूप पूर्णकालिक, सार्ंध्य यार् अल्प कालिक तथार् पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम अपनार्यार्। यहार्ं पर पत्रार्चार्र शिक्षार् की पार्ठ्यवस्तु एवं पार्ठ्यक्रम को केन्द्रिय स्तर पर संगठित कियार् गयार्। विभिन्न गणतंत्र देश इसे अपनी आवश्यकतार् के अनुरूप ही अनुवार्द कर पूरक सार्मग्री के रूप में प्रयोग में लार् रहे हैं।

सोवियत संघ में इस समय 500 से अधिक पत्रार्चार्र संकाय विश्वविद्यार्लयों से सम्बद्ध हैं, और औपचार्रिक शिक्षार् के लगभग बरार्बर संख्यार् ही इस पत्रार्चार्र मार्ध्यम के विद्याथियों क भी हैं यहार्ं पर औपचार्रिक शिक्षार् के समकक्ष दूरस्थ शिक्षार् को महत्व दियार् जार्तार् है।

अफ्रीकी देशों में दूरस्थ शिक्षार्

 भार्रत की ही तरह अफ्रीकी देश भी लम्बे समय तक उपनिवेशार्वार्द से प्रभार्वित रहे और सार्क्षरतार् दर वहार्ं भी न्यूनतम थी। स्वतंत्रतार् के प्श्चार्त् सभी ने शिक्षार् की ओर ध्यार्न दियार् और इसके सार्थ ही प्रशिक्षित अध्यार्पकों की कमी सार्मने आ गयी तथार् कार्यरत अध्यार्पकों के प्रशिक्षण हेतु दूरस्थ शिक्षार् व्यवस्थार् क सहार्रार् लियार् और अनेक देश घार्नार्, नार्इजिरियार्, तनजार्नियार्, केन्यार्, बोटस्वार्नार्, लिसाथो, स्वार्जीलैण्ड, गुयार्नार्, इथोपियार् आदि ने दूरस्थ शिक्षार् के पार्ठ्यक्रमों को आयोजित कियार्। सर्वप्रथम प्रार्रम्भ मुद्रित सार्मग्री से हुआ बार्द में जनसंचार्र के मार्ध्यमों ने इसे अधिक लोकप्रिय बनार्यार्। अफ्रीक में 1962 में पहलार् पत्रार्चार्र विद्यार्लय ब्रार्जार्विले में स्थार्पित हुआ। इसके अतिरिक्त पत्रार्चार्र शिक्षार् में बोत्सवार्नार्, लिसाथो एवं स्वीजीलैण्ड ने आपस में मिलकर काम करनार् प्रार्रम्भ कियार् है। इसके अतिरिक्त, सार्उथ वेस्ट अफ्रीकॉज़ पिपुल आरगनार्इजेशन अंगोलार् व जार्म्बियार् के शरणाथियों की शिक्षार् के लिये उल्लेखनीय कार्य कर रहार् है। अफ्रीक दूरस्थ शिक्षार् में गुणवत्तार् हेतु भी प्रयार्सरत है, इसके लिये अन्तर्रार्ष्ट्रीय सेमिनार्र, सम्मेलन एवं कार्यशार्लार्ओं के आयोजन हेतु संयुक्त रार्ष्ट्र संघ से मदद भी लेतार् है। संयुक्त रार्ष्ट्र आर्थिक इकार्इ अफ्रीक ने आदिस अबार्बार् में एक दूरस्थ शिक्षार् की इकार्इ खोली है।

अफ्रीकी देशो में सार्क्षरतार् दर में वश्द्धि हेतु औपचार्रिक शिक्षार् मार्ध्यम के अतिरिक्त दूरस्थ शिक्षार् कार्यक्रमों को भी प्रचुर महत्व दियार् है। सन् 1983 मे ंनाइजिरियार् में एक मुक्त विश्वविद्यार्लय खुलार्। अफ्रीकी देश पत्रार्चार्र शिक्षार् एवं दूरस्थ शिक्षार् को शिक्षार् प्रदार्न करने क आधार्र बनार् रहे हैं।

एशियार् में दूरस्थ शिक्षार् क प्रसार्र- 

डपनिवेशवार्द के प्रभार्व में एशियार् के कर्इ देश रहे और स्वतंतत्रतार् के पश्चार्त् सभी के सार्मने शिक्षार् में पिछड़ार्पन और प्रशिक्षित अध्यार्पकों की आवश्यकतार् ही सबसे बड़ार् चुनौती थी, अत: एशियाइ देशों में दूरस्थ शिक्षार् की आशार्तीत प्रगति हो रही है, और इसे हम अलग-अलग देशो को पृथक रूप में देखेंगे।

1. चीन- 

यह विश्व क सबसे अधिक जनसख्ंयार् वार्लार् देश है, और इसने बीसवीं सदी में ही अपनी जनसंख्यार् को शिक्षित करने हेतु दूरस्थ शिक्षार् को अपनार् लियार् थार्, पर इसक अध्यार्धिक प्रचार्र-प्रसार्र, सार्ठ के दशक में हुआ। इसी समय बीजिंग, शंधाइ, शियार्ंग में टी0वी0 विश्वविद्यार्लय स्थार्पित हुये। इन विश्वविद्यार्लयों ने प्रौढ़ शिक्षार् को सुधार्रनार् प्रार्रम्भ कियार्। 1979 र्इ0 में बीजिंग में सेन्ट्रल रेडियो तथार् टेलीविजन यूनिवर्सिटी की स्थार्पनार् हुर्इ यह दूरस्थ शिक्षार् के प्रचार्र-प्रसार्र हेतु बहुत बड़ी संख्यार् में दूर शिक्षण कर रहार् है। इस विश्वविद्यार्लय में प्रवेश परीक्षार् के आधार्र पर प्रवेश तथार् अनुदेशन क मुख्य आधार्र टेलीविजन तथार् लिखित मुद्रित सार्मग्री तथार् सम्पर्क कार्यक्रमों के द्वार्रार् इसे सशक्त बनार्यार् जार्तार् है। इस समय देश भर में करीब 30 से अधिक क्षेत्रीय टी0वी0 विश्वविद्यार्लयों द्वार्रार् प्रतिवर्ष लार्खों विद्याथियों केार् डिग्रियार्ं प्रदार्न की जार्ती हैं।

2. जार्पार्न- 

यह एक विकसित देश है, जिसमें लम्बे समय के परतत्रंतार् के पश्चार्त् विश्व में अपने आपको सिद्ध कियार्। यहार्ं पर पत्रार्चार्र शिक्षार् नियमित विश्वविद्यार्लय द्वार्रार् नियमित छार्त्रों के लिये बनार्ये गये पार्ठ्यक्रम से ही प्रदार्न की जार्ती है। यह मूल संकल्प क ही एक भार्ग होती है। स्कूलों में भी पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रमों को दियार् गयार् है। उच्च मार्ध्यमिक विद्यार्लयों ने भी पत्रार्चार्र शिक्षार् में अपनार् संगठन बनार् रखार् है। विश्वविद्यार्लय स्तर पर पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षार् होती हैं। जार्पार्न ने ब्रार्डकास्टिंग कारपोरेशन के रेडियो एवं दूरदर्शन पर प्रचार्रित ‘‘विश्वविद्यार्लय पत्रार्चार्र व्यार्ख्यार्न’’ क प्रयोग करने हेतु सुविधार् दी है। 1980 र्इ0 के पश्चार्त् पत्रार्चार्र शिक्षार् महिलार्ओं के शैक्षिक स्तर को ऊँचार् उठार्ने हेतु बहुत लोकप्रिय हुआ। 1985 र्इ0 के बीच जार्पार्न में एक हवाइ विश्वविद्यार्लय की स्थार्पनार् की गयी।

3. पार्किस्तार्न- 

पार्किस्तार्न में 1974 में अल्लार्मार् इकबार्ल मुक्त विश्वविद्यार्लय की स्थार्पनार् हुर्इ। यह विश्वविद्यार्लय सभी स्तर की शिक्षार् प्रदार्न करने हेतु प्रयार्सरत है, यह देश भर में सार्क्षरतार् कार्यक्रम से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक के अनेक कार्यक्रम संचार्लित करतार् है। इस विश्वविद्यार्लय ने एकीकश्त कार्यार्त्मक शिक्षार् कार्यक्रम नार्मक प्रभार्वी कार्यक्रम ग्रार्मीण क्षेत्रों के लोगों के लिये चलार्यार् है।

4. इण्डोनेशियार्- 

इण्डोनेशियार् में सर्वप्रथम मुक्त विश्वविद्यार्लय 1984 र्इ0 खुलार्। इसने उच्च शिक्षार् एवं व्यार्वसार्यिक शिक्षार् के लिये कार्य करनार् प्रार्रम्भ कियार्। इसने अनुदेशसनार्त्मक सार्मग्री को प्रसार्रित करने हेतु जनसंचार्र मार्ध्यमों क सहार्रार् लियार्।

5. कोरियार्- 

कोरियार् में 1980 र्इ0 में गैर मार्न्यतार् प्रार्प्त एवं डिग्री रहित पार्ठ्यक्रमों के रूप में पत्रार्चार्र शिक्षार् की शुरूआत हुर्इ। सन् 1972 र्इ0 में सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी ने अपने यहार्ं पत्रार्चार्र शिक्षार् विभार्ग स्थार्पित कियार्। 1982 र्इ0 में यह मुक्त विश्वविद्यार्लय के रूप में कोरियार् एअर एवं कारेस्पोन्डेन्स यूनीवर्सिटी के नार्म से प्रसिद्ध हुआ। इसमें कर्इ शैक्षिक एवं व्यार्वसार्यिक पार्ठ्यक्रम संचार्लित है।

6. फिलिपिन्स- 

फिलिपिन्स मे भी कर्इ देशार् ें की तरह 1976 र्इ0 में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिये दूरस्थ शिक्षार् क प्रार्रम्भ कियार् गयार्। फिलिपिन्स में पार्ठ्य सार्मग्री के निर्मार्ण पर विशेष जोर दियार् जार्तार् है, इसे जन उपयोगी बनार्ने हेतु पूरार् प्रयार्स कियार् जार्तार् है। पार्ठ्यक्रम को आवश्यकतार् के अनुसार्र परिवर्तित कियार् जार्तार् है। इसमें समार्जोपयोगी गृह उद्योग, पर्यार्वरण, नियोजन, घरेलू पशुपार्लन, घरेलू खेती से सम्बंधित पार्ठ्यक्रम सम्मिलित है। इसे स्वत: प्रगति प्रणार्ली उन्मुख बनार्यार् गयार् है।

7. थाइलैण्ड-

थाइलैण्ड में बैकाक में सन् 1978 र्इ0 में सुखोथाइ थम्मियिरत विश्वविद्यार्लय की स्थार्पनार् हुर्इ। नार्मार्ंकन संख्यार् की दृष्टि से यह विश्व क सबसे बड़ार् मुक्त विश्वविद्यार्लय है। यह स्नार्तक, अल्पकालिक व्यवसार्यिक दक्षतार् सम्बर्धन पार्ठ्यक्रम तथार् आधार्रभूत ग्रार्मीण विकास पार्ठ्यक्रम संचार्लित करतार् है। इसने अपनी अनुदेशनार्त्मक सार्मग्री को जन-जन तक पहॅुचार्ने हेतु 75 प्रार्न्तों मे सावजनिक पुस्तकालयों में अपनी पश्थक पुस्तकालय व्यवस्थित की है। यह विभिन्न व्यवसार्यों को प्रशिक्षित कार्मिक वर्ग प्रदार्न कर रहार् है।

8. मलेशियार्- 

मलेशियार् के पिनॉग शहर में युनिवर्सिटी सैन्स मलेशियार् खोलार् गयार् है। यह शिक्षार् के सावजनिकरण हेतु अनेक पार्ठ्यक्रम संचार्लित कर रहार् है, मलेशियार् में व्यक्तिगत पत्रार्चार्र संस्थार्यें भी कार्यरत है, यह स्कूल स्तर पर वार्णिज्यिक एवं व्यार्वसार्यिक पार्ठ्यक्रम संचार्लित कर रहे हैं।

9. श्रीलंका- 

श्रीलकां ने एक्सटरनल सविर्स ऐजन्सी श्रमिक शिक्षार् सस्ंथार्न तथार् श्रीलंक दूरस्थ शिक्षार् संस्थार्न संचार्लित कियार् है। इनके प्रयार्स से सन् 1980र्इ में भी लंक में मुक्त विश्वविद्यार्लय की स्थार्पनार् हुर्इ।

दूरस्थ शिक्षार् हेतु भार्रत में नीतिगत प्रयार्स – 

भार्रत में सार्ठ के दशक मे भार्रत सरकार की नीतियार्ं दूरस्थ शिक्षार् की ओर उन्मुख हुर्इ। उच्च शिक्षार् के विस्तार्र एवं प्रसार्र के आवश्यकतार् ने योजनार् अयोग को इस ओर सोचने के लिये विवश कियार्। 1960 में एक सार्मार्न्य अध्यार्देश में यह निकालार् गयार् कि उच्च शिक्षार् की सुविधार् को बढ़ार्ने के दिशार् में सार्ंध्यकालीन कालेज, पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम बार्ह्य उपार्धि मार्न्यतार् दिये जार्ने के उपक्रम है।

भार्रत में पत्रार्चार्र शिक्षार् के सूत्रपार्त करने क श्रेय तत्कालीन शिक्षार्मंत्री डार्0के0ए0श्रीमार्ली को है। उन्होनें उच्च शिक्षार् की बढ़ती मार्ंग को एवं प्रौढ़ शिक्षार् कार्यक्रमों को प्रभार्वशार्ली बनार्ने की आवश्यकतार् को अनुभव कियार् तब वे विदेशों में सफल पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रमों की ओर आकर्षित हुए।

केन्द्रीय शिक्षार् सलार्हकार परिषद् ने इस पर विस्तार्र से अध्ययन क निर्देश दियार्। अत: शिक्षार् मंत्रार्लय ने एक विशेषज्ञ समिति क गठन डार्0 डी0एस0 कोठार्री की अध्यक्षतार् में कर दी जिसने पत्रार्चार्र शिक्षार् की प्रकृति लक्ष्य एवं संगठन के मार्ध्यम से अपने विचार्र दिये। यार्दव एव पण्डार् (1996) के अनुसार्र इस समिति के मुख्य सुझार्व इस प्रकार थे-

  1. पत्रार्चार्र शिक्षार् से सम्बंधित उपार्धि के मार्नक व प्रशार्सन विश्वविद्यार्लयों से हो। 
  2. पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम को विश्वविद्यार्लय की प्रथम उपार्धि के लिये स्वीकश्त कियार् जार्ये। 
  3. शिक्षक एवं छार्त्र के मध्य सम्पर्क स्थार्पन हेतु सम्पर्क कक्षार्ओं क आयोजन कियार् जार्ये।
  4. शैक्षिक मार्नक ऊँचार् रखने के लिये पार्ठ्यक्रम उच्च स्तर के विषय विशेषज्ञों क सहयोग से निर्मित हो। 
  5. पत्रार्चार्र मार्ध्यम से कलार् और विज्ञार्न दोनों पार्ठ्यक्रम संचार्लित किये जार्ये। सर्वप्रथम कलार् एवं वार्णिज्य संकाय संचार्लन में ही संगठनार्त्मक समस्यार्यें आयेगी पर बार्द में विज्ञार्न पार्ठ्यक्रम को भी सम्मिलित कियार् जार्ये। 
  6. प्रथम डिग्री कोर्स नियमित कोर्स में लगने वार्ले अवधि से अधिक अर्थार्त् 3 वर्ष के बजार्य 4 वर्ष हो। अत्यधिक मेधार्वी छार्त्रों के लिये अवधि तीन वर्ष की हो। 
  7. प्रथम वर्ष की शुल्क नार्मार्ंकन हेतु अधिक व द्वितीय तथार् तृतीय स्तर पर क्रमश: घटती जार्नार् चार्हिये। 

सन् 1970 के दशक में दूरस्थ शिक्षार् ने अच्छार् विकास कियार्। इस दशक में कर्इ संस्थार्नों ने स्नार्तकोत्तर पार्ठ्यक्रम भी प्रार्रम्भ कियार्। इस दशक में 1971 में हिमार्चल प्रदेश विश्वविद्यार्लय, 1972 में आधं्र एवं वेकटेश्वर विश्वविद्यार्लय, 1973 में आग्ल व विदेशी संस्थार्न हैदरार्बार्द, 1974 में पटनार् विश्वविद्यार्लय, 1975 में बार्म्बे उत्कल विश्वविद्यार्लय, 1976 में जम्मू-कश्मीर व रार्जस्थार्न विश्वविद्यार्लय, 1977 में उस्मार्नियार् व केरल विश्वविद्यार्लय, 1978 में इलार्हार्बार्द एवं एस0एन0डी0टी0 महिलार् महार्विद्यार्लय बम्बर्इ तथार् 1979 में अन्नार् मलाइ व उदयपुर विश्वविद्यार्लयों ने पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम प्रार्रम्भ कियार्। इस दशक के सार्थ ही स्नार्त्कोत्तर पार्ठ्यक्रम भी संचार्लित करनार् प्रार्रम्भ हुआ। 1980 तक दूरस्थ शिक्षार् परम्परार्गत विश्वविद्यार्लय से ही सम्बद्ध रही। किन्तु आध्र प्रदेश सरकार के निर्णय के फलस्वरूप दूरस्थ शिक्षार् क नयार् रूप देते हुये सन् 1982 मे प्रथम मुक्त विश्वविद्यार्लय आंध्र प्रदेश मुक्त विश्वविद्यार्लय हैदरार्बार्द की स्थार्पनार् कर दी । इसने सभी रार्ज्यों को मुक्त विश्वविद्यार्लय खोलने के लिये प्रेरित कियार्।

1. शिक्षार् आयोग (1964-66) की संस्तुति- 

दिल्ली विश्वविद्यार्लय ने सन ् 1962 में विश्वविद्यार्लय स्तर पर पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम प्रार्रम्भ कियार्। 1964-64 में गठित कोठार्री कमीशन ने दूरस्थ एवं पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम पर स्पष्ट तरीके से टिप्पणी की-

‘‘शिक्षार् की कोर्इ ऐसी विधि उन लार्खों लोगों के लिये होनी चार्हिये जो स्वयं के प्रयार्स पर निर्भर करते है। हमें लगतार् है कि पत्रार्चार्र यार् गश्ह अध्ययन ही इस प्रश्न क उत्तर है। यह अच्छी प्रकार से जॉची परखी तकनीकी है। विभिन्न देश यू0एस0ए0, स्वीडन, यू0एस0एस0आर0, जार्पार्न, आस्टे्रलियार् जहार्ं यह लम्बे समय से प्रयोग में लार्यी जार् रही है, इसके अतिरिक्त अपने छोटे से अनुभव के सार्थ दिल्ली विश्वविद्यार्लय भी इसक उदार्हरण प्रस्तुत कियार् और यह हमें वश्हद स्तर पर प्रयार्स करने हेतु प्ररित कर रहार् है, और पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम नियमित पार्ठ्यक्रमों से किसी भी मार्यने में कम है यह सिद्ध करने क कोर्इ आधार्र नहीं है। वार्ह्य अनुभव एवं भार्रतीय प्रयेार्ग यह परिणार्म दे रहे हैं कि पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम को मजबूती दियार् जार्नार् चार्हिये।’’

पत्रार्चार्र शिक्षार् समिति की संस्तुति के फलस्वरूप भार्रत में सर्वप्रथम दिल्ली विश्वविद्यार्लय ने आकस्मिक योजनार् के रूप में जुलाइ 1962 में बी0ए0 डिग्री हेतु पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम प्रार्रम्भ कियार्। इस प्रयोग से अनेक विश्वविद्यार्लयों ने प्रेरित होकर दूरस्थ शिक्षार् तकनीकी को अपनार्ने पर विचार्र कियार्। सन् 1967 में विश्वविद्यार्लय अनुदार्न आयोग ने पुन: पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रमों के प्रचार्र-प्रसार्र हेतु एक समिति क गठन कियार्। इसके परिणार्म स्वरूप 1968 में पंजार्बी विश्वविद्यार्लय तथार् 1969 में मेरठ विश्वविद्यार्लय द्वार्रार् पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रमों क प्रार्रम्भ हुआ। सन् 1985 तक लगभग 31 विश्वविद्यार्लयों द्वार्रार् यह दूरस्थ शिक्षार् मार्ध्यम अपनार् लियार् गयार् थार्।

2. रार्ष्ट्रीय शिक्षार् नीति (1986) – 

रार्ष्ट्रीय शिक्षार् नीति ने काठे ार्री कमीशन के सुझार्वों को ही बल प्रदार्न करते हुये कहार् कि- ‘‘मध्यार्वधि शिक्षार् एवं पत्रार्चार्र शिक्षार् क प्रचार्र-प्रसार्र विश्वविद्यार्लय स्तर पर व्यार्पक स्तर पर कियार् जार्नार् चार्हिये। मार्ध्यमिक स्तर पर भी यह सुविधार् विकसित की जार्नी चार्हिये। मार्ध्यमिक स्तर के विद्यार्थ्र्ार्ी, शिक्षक एवं उद्योग तथार् कर्मचार्रियों को देने के लिये इसको प्रचार्रित कियार् जार्ये। इस शिक्षार् को पूर्ण अवधि शिक्षार् के बरार्बर क दर्जार् दियार् जार्ये। ये सुविधार्यें विद्यार्लय से कार्यों की ओर स्थार्नार्न्तरण करेगी और उन लोगों के लिये भी लार्भकर होगी जो अपने आपको शिक्षित तो करनार् चार्हते हैं पर ऐसार् कर नही पार्ते।’’ रार्ष्ट्रीय शिक्षार् नीति ने मुक्त अधिगम तन्त्र के लिये कुछ सुझार्व दिये-

  1. अनुच्छेद 3:11 – शिक्षार् प्िर क्रयार् क आवश्यक लक्ष्य जीवन पयर्न् त शिक्षार् है, यह सावजनिक सार्क्षरतार् क पूर्वार्नुमार्न है। गश्हणियों, कृषि एवं उद्योग कार्मिक एवं व्यार्वसार्यिकों को यह सुविधार् दी जार्येगी कि वह अपने मनपसंद शिक्षार् को प्रार्प्त कर सके।
  2. अनुच्छेद 4:13- पार््रैढ ़ एवं सतत् शिक्षार् को पद्रार्न करने हेतु वृहद स्तर पर कार्यक्रम चलार्यार् जार्येगार्। जिसमें मुक्त अधिगम भी समार्हित हो। अनुच्छेद 5:35- मुक्त विश्वविद्यार्लय तन्त्र ने उच्च शिक्षार् की सुिवधार्यें पद्रार्न करने के सार्थ लोकतंत्रीकरण हेतु शिक्षार् क लोकतंत्रीकरण कियार् है।
  3. अनुच्छेद 5:36- 1985 में स्थार्पित इन्दिरार् गार्धीं मुक्त विश्वविद्यार्लय इन उद्देश्यों को पूरार् करने हेतु दृढ़ की जार्येगी।
  4. अनुच्छेद 5:37- इस मजबतू तत्रं को बडी सार्वधार्नी के सार्थ विकसित कियार् जार्नार् चार्हिये।
  5. अनुच्छेद 6:6- औपचार्रिक शिक्षार् की कठार्रे नियमों के कारण से वचित लार्खों लोगों को तकनीकि एवं प्रबंधकीय शिक्षार् के लिये मुक्त अधिगम तंत्र से जोड़ार् जार्ये। इन सभी के सार्थ पार्लिटेक्निक शिक्षार् को भी जोड़ते हुये क्रियार्त्मकतार् को बढ़ार्ने हेतु ये क्रेडिट विधि क उपयोग कर निर्देशन व परार्मर्श की सशक्त सेवार् प्रदार्न की जार्येगी।

3. विश्वविद्यार्लय अनुदार्न आयोग के निर्देश- 

1974 में विश्वविद्यार्लय अनुदार्न आयोग ने पत्रार्चार्र और मुक्त शिक्षार् के निम्न निर्देश दियार्- ‘‘पत्रार्चार्र शिक्षार् क उद्देश्य एक बहुत बड़ार् उद्देश्य ऐसी वैकल्पिक शिक्षार् को प्रदार्न करनार् है जिससे कि एक बहुत बड़ी संख्यार् में लोग आगे क ज्ञार्न और व्यार्वसार्यिक दक्षतार् हार्सिल कर सके। पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम वार्स्तव उन लोगों के लिये वरदार्न है जो बच्चे किन्हीं कारणवश औपचार्रिक शिक्षार् व्यवस्थार् से वंचित रहे है। जो कि दुर्गम स्थार्नों के रहने वार्ले हैं, जो प्रेरणार् और अभिवृत्ति के अभार्व में आगे नहीं पढ़ सके पर अब पढ़ने के लिये अभिप्रेरित है और जो उच्च शिक्षार् हेतु योग्यतार् रखते हुये भी, औपचार्रिक शिक्षार् संस्थार्नों में जगह नहीं पार्ये हैं, और जो जीवन को जीवन भर चलने वार्ली प्रतिक्रियार् मार्नते है।’’

4. इग्नू की स्थार्पनार् – 

इसे सन् 1985 में ससंद के एक अधिनियम के तहत स्थार्पित कियार् है। इस विश्वविद्यार्लय की स्थार्पनार् दूरस्थ शिक्षार् के प्रचार्र-प्रसार्र एवं गुणार्त्मक सुधार्र के लिये कियार् गयार्। सबसे अधिक इस बार्त पर बल दियार् कि विश्वविद्यार्लय को ऐसे कदम उठार्ने चार्हिये कि मुक्त विश्वविद्यार्लय के शिक्षण, मूल्यार्ंकन एवं शोध जैसे कार्यों में भी गुणवत्तार् आ सके।

5. दूर शिक्षार् परिषद् (डी0र्इ0सी0) की स्थार्पनार्- 

मर्इ 1991 में इग्नू के प्रबधं बोर्ड ने एक परिनियम के तहत दूर शिक्षार् परिषद् की स्थार्पनार् की इसके स्थार्पनार् के पीछे मुख्य उद्देश्य यार् दूर एवं मुक्त विश्वविद्यार्लयों के उन्नति, समन्वयन एवं मार्नक तथार् गुणवत्तार् को स्थार्पित करने हेतु कार्य करनार् थार्। विस्तर से इसके बार्रे में हम खण्ड तीन में पढ़ेगे। पर इसके कार्यों की संक्षिप्त चर्चार् यहार्ं हम कर रहे हैं-

  1. दूरस्थ शिक्षार् एवं मुक्त शिक्षार् तन्त्र के प्रसार्र, समन्वय एवं गुणार्त्मक स्तर को बढ़ार्नार्। 
  2. मुक्त विश्वविद्यार्लय एवं दूरस्थ शिक्षार् संस्थार्नों के एक तंत्र (जार्ल) की प्रतिस्थार्पनार् करनार्। 
  3. दूरस्थ शिक्षार् कार्यक्रम के संचार्लन हेतु प्रार्थमिकतार् के तौर पर आवश्यक क्षेत्रों क ध्यार्न करनार् एवं संचार्लन में सहयोग देनार्। 
  4. अध्येतार् समूह की पहचार्न कर उनके लिये आवश्यक कार्यक्रमों क संचार्लन करवार्नार्। 
  5.  दूरस्थ शिक्षार् के लिये कार्मिक वर्ग क प्रशिक्षण देनार्। 
  6. मुक्त विश्वविद्यार्लयों एवं मुक्त शिक्षण संस्थार्नों को आवश्यक वित्तीय सहार्यतार् प्रदार्न करनार् जिससे कि ये विकास करें एवं आवश्यक प्रोजेक्ट्स करवार्नार्। 

6. 1992 की पुर्नरीक्षित रार्ष्ट्रीय शिक्षार् नीति- 

1992 में भार्रत सरकार ने 1986 की रार्ष्ट्रीय शिक्षार् नीति क पुर्नरीक्षण करवार्यार्। कुछ नये सुझार्व इस प्रकार के निकले-

  1. अनुच्छेद 4:13- सार्क्षरतार् प्रार्प्त कर चुके एवं प्रार्थमिक शिक्षार् प्रार्प्त लोगों एवं प्रौढ़ों के लिये एक सतत् एवं समन्वित कार्यक्रम संचार्लित करनार् जिससे कि लोग अपनी सार्क्षरतार् कौशल एवं जीवन तथार् कार्यक्षेत्र में विकास कर सके। इनमें दूरस्थ शिक्षार् को सम्मिलित करने क संकेत दियार् गयार्।
  2. अनुच्छेद 5:35- मुक्त अधिगम प्रणार्ली ने उच्च शिक्षार् प्रार्प्त करने की सुविध् ार्ार्ओं में विस्तार्र कियार् है, और शिक्षार् क लोकतंत्रीकरण कर इसे जीवन पर्यन्त प्रक्रियार् बनार्यार् है। मुक्त अधिगम प्रणार्ली की लचीलेपन व नवार्चार्र ने हमार्रे देश के लोगों की दिग्भ्रमित आवश्यकतार्ओं को भी पूरार् करने क प्रयार्स कियार्, खार्सकर जो व्यवसार्य में लगे हुये हैं। 
  3. अनुच्छेद 5:36- 1985 में स्थार्पित इग्नू को उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु सुदश्ढ़ करनार्। 
  4. नुच्छेद 5:37- रार्ष्ट्रीय मुक्त विद्यार्लय को देश के सभी भार्गों में मार्ध्यमिक शिक्षार् को प्रदार्न करने हेतु सुदश्ढ़ कियार् जार्ये। 

7. दूरस्थ शिक्षार् पर केन्द्रीय शिक्षार् सलार्हकार परिषद कमेटी- 

सन् 1995 में दूरस्थ शिक्षार् पर एक कमेटी गठित हुर्इ जिसने प्रत्येक प्रदेश में एक मुक्त विश्वविद्यार्लय खोलने की सिफार्रिश की। इसके सार्थ ही मुक्त विश्वविद्यार्लयों को जार्ल के रूप में कार्य करने के लिये कहार् जिससे कि संसार्धनों क अपसी उपभोग, समार्न मार्नकों एवं स्तर क निर्धार्रण, विद्याथियों की गतिशीलतार् एवं प्रभार्वकारी छार्त्र सहयोग सेवार्यें विकसित हो उन्होनें इन मुक्त विश्वविद्यार्लय तंत्र के लिये निम्न मार्नक निर्धार्रित किये।

  1. कार्यक्रमों के बनार्ने एवं उत्पार्दित करने में विभिन्न संस्थार्ओं में नकल नहीं होनार् चार्हिये। 
  2. किसी संस्थार् द्वार्रार् तैयार्र कियार् अच्छार् पार्ठ्यक्रम सभी मुक्त विश्वविद्यार्लय में उपलब्ध रहेगार्। 
  3. जो संस्थार्न अपने ऊँचें स्तर के कार्यक्रम नहीं चलार् पार् रहे हैं, वे इस नेटवर्क के संसार्धनों एवं सम्वेत पार्ठ्यक्रमों क हिस्सार् बन सकते हैं। 
  4. एक सार्थ कर्इ संस्थार्नों के जुड़ने से तैयार्र तंत्र में विद्यार्थ्र्ार्ी सहार्यतार् सेवार्यें अर्थिार्क प्रभार्वी ढंग से सम्पार्दित हो सकती हैं। इससे अलग से तंत्र स्थार्पित करने में होने वार्ले व्यय में कमी आयेगी। 
  5. मुक्त शिक्षार् संस्थार्नों के नेटवर्क में औपचार्रिक शिक्षार् संस्थार्नों को भी सम्मिलित कर पार्ठ्यक्रमों के निर्मार्ण एवं नेटवर्क में प्रतिभार्ग हेतु सम्मिलित कियार् जार् सकतार् है। यह नेटवर्क एक बड़े पैमार्ने में फैले अध्येतार्ओं की विभिन्न कार्यक्रमों, अनुदेशन के मार्ध्यम एवं भौतिक विभार्जन की विशेषतार्ओं के आधार्र पर सहयोग कर सकतार् है। 

8. उत्तर प्रदेश रार्जर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यार्लय- 

पद्रेश वृहद आकार एवं जनसंख्यार् के कारण विभिन्न स्तर की शिक्षार् की मार्ंग को पूरार् करनार् हमेशार् से ही दुरूह कार्य होतार् है। औपचार्रिक उच्च शिक्षार् संस्थार्न उच्च शिक्षार् की मार्ंग को पूरार् करने में असमर्थ हो रहे थे, कुछ विश्वविद्यार्लयों ने सार्ंध्यकालीन व पत्रार्चार्र पार्ठ्यक्रम संचार्लित कर आवश्यकतार् को पूरार् करने क प्रयार्स कियार्। इसके सार्थ ही व्यक्तिगत पार्ठ्यक्रम भी प्रस्तार्वित व संचार्लित किये, परन्तु अत्यधिक आवश्यकतार् को ध्यार्न में रखकर सन् 1999 में इलार्हार्बार्द में रार्जर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यार्लय खोलने की अनुमति प्रदार्न की गयी। इसने 15 अगस्त 1999 से कार्य करनार् प्रार्रम्भ कियार्। इसमें शैक्षिक एवं व्यार्वसार्यिक दोनों प्रकार के पार्ठ्यक्रम संचार्लित किये जार्ते हैं। इसक प्रमुख लक्ष्य प्रदेश के ग्रार्मीण एवं दूर-दरार्ज के इलार्कों के अध्येतार्ओं एवं बार्लिकाओं, आर्थिक रूप से विपन्न तथार् व्यार्वसार्यिकों को अच्छे जीवन व उत्थार्न हेतु उच्च शिक्षार् की सुविधार् प्रदार्न करनार् है।

भार्रत में पत्रार्चार्र एवं दूरस्थ शिक्षार् संस्थार्नों की रार्ज्यवार्र स्थिति क चाट-

क्षेत्र/रार्ज्य-स्थार्पनार् वर्ष –

  1. दिल्ली 
    1. दिल्ली विश्वविद्यार्लय 1962
    2. जार्मियार् मिलियार् इस्लार्मियार् विश्वविद्यार्लय 1971
    3. इन्दिरार् गार्ंध रार्ष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यार्लय 1985
  2. हरियार्णार् 
    1. कुरूक्षेत्र विश्वविद्यार्लय, कुरूक्षेत्र 1976
  3. हिमार्चल प्रदेश 
    1. हिमार्चल प्रदेश विश्वविद्यार्लय, शिमलार् 1971
  4. जम्मू एवं कश्मीर 
    1. जम्मू विश्वविद्यार्लय, जम्मू 1976
    2. कश्मीर विश्वविद्यार्लय, श्रीनगर 1976
  5. पंजार्ब 
    1. पंजार्बी विश्वविद्यार्लय, पटियार्लार् 1968
    2. पंजार्ब विश्वविद्यार्लय, चण्डीगढ़ 1971
  6. रार्जस्थार्न 
    1. रार्जस्थार्न विश्वविद्यार्लय, जयपुर 1976
    2. मोहनलार्ल सुखार्ड़ियार् विश्वविद्यार्लय,उदयपुर 1979
    3. मुक्त विश्वविद्यार्लय, कोटार् 1987
  7. उत्तर प्रदेश 
    1. मेरठ विश्वविद्यार्लय, मेरठ 1969
    2. इलार्हार्बार्द विश्वविद्यार्लय, इलार्हार्बार्द 1978
    3. रार्जर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यार्लय, इलार्हार्बार्द 1999
  8. मध्य क्षेत्र मध्य प्रदेश 
    1. भोपार्ल विश्वविद्यार्लय, भोपार्ल 1975
  9. पश्चिमी क्षेत्र महार्रार्ष्ट्र 
    1. बम्बर्इ विश्वविद्यार्लय, बम्बर्इ (मुम्बर्इ) 1978
    2. एस0एन0डी0टी0महिलार् विश्वविद्यार्लय, बम्बर्इ (मुम्बर्इ) 1979
    3. पुणे विश्वविद्यार्लय, पुणे 1983
    4. यशवंत रार्व चव्हार्ण मुक्त विश्वविद्यार्लय 1989
  10. पूर्वी क्षेत्र आसार्म 
    1. गुवार्हार्टी विश्वविद्यार्लय, गुवार्हार्टी 1996
    2. नाथ र्इस्टर्न हिल युनिवर्सिटी 1996
  11. बिहार्र 
    1. नार्लन्दार् मुक्त विश्वविद्यार्लय 1996
    2. पटनार् विश्वविद्यार्लय, पटनार् 1974
    3. रॉची विश्वविद्यार्लय, रॉची 1985
  12. उड़ीसार् 
    1. उत्कल विश्वविद्यार्लय, भुवनेश्वर 1975
  13. दक्षिण क्ष्ेार्त्र आन्ध्र प्रदेश 
    1. आन्ध्र विश्वविद्यार्लय, विशार्खार्पट्नम 1972
    2. श्री वेंकेटश्वर विश्वविद्यार्लय, तिरूपति 1972
    3. सेन्ट्रल इस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिस एण्ड फार्रेन 1973
    4. लैग्वजेज, हैदरार्बार्द उस्मार्नियार् विश्वविद्यार्लय, हैदरार्बार्द 1977
    5. आन्ध्र प्रदेश मुक्त विश्वविद्यार्लय, हैदरार्बार्द 1982
  14. कर्नार्टक 
    1. मैसूर विश्वविद्यार्लय, मैसूर 1969
    2. बंगलौर विश्वविद्यार्लय, मैसूर 1979
  15. केरल 
    1. केरल विश्वविद्यार्लय, त्रिवेन्द्रम 1977
    2. कोचीन विश्वविद्यार्लय, कोचीन 1996
    3. कालीकट विश्वविद्यार्लय, कालीकट 1977
  16. तमिलनार्डु 
    1. मदुरर्इ कामरार्ज विश्वविद्यार्लय, मदुरर्इ 1971
    2. अन्नार्मलाइ विश्वविद्यार्लय 1979
    3. मद्रार्स विश्वविद्यार्लय, मद्रार्स 1980

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