ज्वार्लार्मुखी क्यार् है ?
ज्वार्लार्मुखी भूपर्पटी में वह छिद्र यार् द्वार्र होतार् है जिनके द्वार्रार् शैल पदाथ,शैल के टुकड़े, रार्ख, जलवार्ष्प तथार् अन्य गर्म गैसे धीरे-धीरे अथवार् तेजी से उद्गार्र के समय निकलते है। ये पदाथ के आंतरिक गर्म भार्गों मे पार्ये जार्ते हैं, जहॉं शैल संस्तर अपेक्षार्कृत कमजोर होते है। आपको आश्चर्य हो रहार् होगार् कि ये उद्गार्र होते क्यों हैं। वार्स्तव में ज्वार्लार्मुखी इस तथ्य के प्रमार्ण हैं कि पृथ्वी के आंतरिक भार्गों में अत्यार्धिक गर्मी व दबार्व विद्यमार्न है। पृथ्वी की बार्ह्य ठोस परत के नीचे पिघले शैल पदाथ जिन्हें मैग्मार् कहते है। अत्यार्धिक दबार्व में होते है। जब यह मैग्मार् छिद्र यार् दरार्र द्वार्रार् मैग्मार् चेम्बर से बार्हर धरार्तल पर जमार् हो जार्तार् है, तब इसे लार्वार् कहते है। मैग्मार् तथार् गैंसे जो भूपर्पटी के नीच जमार् हैं, वे बार्हर आने क प्रयार्स करती है जब ये अपने दार्ब से भूपर्पटी में कोर्इ कमजोर रेखार् यार् छिद्र बनार्ने में सफल हो जार्ती है। तो ये गैंसें, पिघले शैल पदाथ, शैल के ठोस टुकड़े व रार्ख आदि के सार्थ तेजी से धरार्तल पर फैल जार्ते हैं। जब ठोस व पिघले शैल तथार् गैसे पृथ्वी के आंतरिक भार्गों से निकलकर धरार्तल पर आती है। तो यह प्रक्रियार् ज्वार्लार्मुखी प्रक्रियार् कहलार्ती है।

ज्वार्लार्मुखी पदाथ छिद्र यार् द्वार्र के बार्हर होकर प्रार्य: शंकु क आकार ग्रहण करते है। शंकु के ऊपर कीप के आकार क एक गड्ढार् होतार् है जिसे क्रेटर कहते हैं।

ज्वार्लार्मुखी के प्रकार  

ज्वार्लार्मुखी प्रक्रियार् के आधार्र पर ज्वार्लार्मुखी को वर्गीकृत कियार् जार्तार् है उद्गार्र की बार्रम्बार्रतार्, ज्वार्लार्मुखी पदाथों के बार्हर निकल कर पृथ्वी के धरार्तल पर आने के ढंग तथार् उद्गार्र की प्रकृति अथवार् तरलतार् वर्गीकरण के प्रमुख आधार्र हैं। उद्गार्र की बार्रम्बार्रतार् के आधार्र पर ज्वार्लार्मुखी तीन प्रकार के होते है।

  1. सक्रिय ज्वार्लार्मुखी,
  2. प्रसुप्त ज्वार्लार्मुखी तथार्
  3. विलुप्त ज्वार्लार्मुखी।

    (1) सक्रिय ज्वार्लार्मुखी 

    वे ज्वार्लार्मुखी जिनमें समय-समय पर उद्गार्र होते रहते है। अथवार् वर्तमार्न में उदगार्र हो रहे है उन्हें सक्रिय ज्वार्लार्मुखी कहते है। इस प्रकार के प्रमुख ज्वार्लार्मुखी-भूमध्य सार्गर में स्ट्रॉमबोली, इंडोनेशियार् में क्रार्काटोआ, फिलीपार्इन्स में मेयोन, हवाइ द्वीप समूह में मोनार् लोआ तथार् भार्रत में बैरन द्वीप हैं।

    (2) प्रसुप्त  ज्वार्लार्मुखी 

    वे है जिनमें वर्तमार्न काल में उद्गार्र नहीं हुए है। वार्स्तव में उन्हें सोये हुए ज्वार्लार्मुखी कहार् जार् सकतार् है। इटली क विसुवियस तथार् दक्षिण अमेरिक क कोटोपेक्सी प्रमुख प्रसुप्त ज्वार्लार्मुखी हैं।

    (3) विलुप्त ज्वार्लार्मुखी 

    कुछ ऐसे ज्वार्लार्मुखी हैं जिनमें ऐतिहार्सिक काल में उद्गार्र नहीं हुए। इन्हें विलुप्त ज्वार्लार्मुखी कहते है। म्यार्ंमार्र (बर्मार्) क मार्ऊंट पोपार् तथार् तंजार्नियार् क किलीमंजार्रों प्रमुख विलुप्त ज्वार्लार्मुखी है। किसी भी ज्वार्लार्मुखी को प्रसुप्त ज्वार्लार्मुखी प्रकार में बार्ंटनार् आसार्न नहीं हैं। उदार्हरण के लिए विसुवियस तथार् क्रार्काटोआ हजार्रों वर्षों तक विलुप्त रहने के बार्द उनमें अचार्नक उद्गार्र होने लगे और सक्रिय ज्वार्लार्मुखी हो गये। उद्गार्र की रीति के आधार्र पर ज्वार्लार्मुखी दो प्रकार के होते है।,

    1. केन्द्रीय उद्भेदन ज्वार्लार्मुखी तथार्
    2. दरार्री उदभेदन ज्वार्लार्मुखी।

      जब किसी ज्वार्लार्मुखी में उद्भेदन एक छिद्र यार् द्वार्र से होतार् है तब उसे केन्द्रीय उद्भेदन ज्वार्लार्मुखी कहते है। इस प्रकार के ज्वार्लार्मुखी विभिन्न प्रकार के गुम्बदार्कार अथवार् शंक्वार्कार पहार्ड़ियों क निर्मार्ण करते है। इन पहार्ड़ियों क आकार ज्वार्लार्मुखी से निकलने वार्ले पदाथों की प्रकृति पर निर्भर करतार् है संसार्र के अधिकांश ज्वार्लार्मुखी इस प्रकार के हैं। इस प्रकार के ज्वार्लार्मुखी उद्भेदन की एक अन्य विशेषतार् यह है कि पिघले हुए शैलों व गैसों के यकायक छिद्र यार् द्वार्र से निकलने के कारण उद्गार्र अत्यार्धिक विस्फोटक होतार् हैं, विसुवियस तथार् फ्यूजीयार्मार् इस वर्ग के प्रमुख ज्वार्लार्मुखी हैं।

      कभी-कभी, भूकम्पों यार् भं्रशन से भूपृष्ठ पर गहरी और लंबी दरार्रें पड़ जार्ती हैं। मैग्मार् इन दरार्रों से धीरे-धीरे बार्हर की ओर निकलने लगतार् है। इस प्रकार के उद्भेदन को दरार्री उद्भेदन कहते हैं। इस प्रकार के ज्वार्लार्मुखी उद्गार्रों से लार्वार् की मोटी-मोटी पर्तें जमार् हो जार्ती हैं और इससे लार्वार् पठार्र तथार् लार्वार् शील्ड क भी निर्मार्ण होतार् है। भार्रत में दक्कन क पठार्र इस प्रकार के उद्गार्र क एक उदार्हरण है। लार्वार् की तरलार् के आधार्र पर ज्वार्लार्मुखी दो प्रकार के होते है।

      1. क्षार्रीय लार्वार् के ज्वार्लार्मुखी तथार्,
      2. अम्लीय लार्वार् के ज्वार्लार्मुखी।

        क्षार्रीय लार्वार् में धार्त्विक खनिजों क अनुपार्त अधिक होतार् है तथार् उनक पिघलन बिंदु नीचार् होतार् है। अत: क्षार्रीय लार्वार् अधिक तरल होतार् है। इस प्रकार के ज्वार्लार्मुखी उदगार्रों में लार्वार् दूर-दूर तक शीघ्र तथार् तेजी से फैल जार्तार् है। इससे लार्वार् की पतली परतें विस्तृत क्षेत्र में जमार् हो जार्ती है। इस प्रकार के उद्गार्रों से शील्डों तथार् लार्वार् गुम्बदों क निर्मार्ण होतार् है। प्रशार्ंत महार्सार्गर में हवाइ द्वीप समूह में स्थित शील्ड ज्वार्लार्मुखी इस प्रकार क ज्वार्लार्मुखी है।

        क्षार्रीय लार्वार् के विपरीत अम्लीय लार्वार् में सिलिक की मार्त्रार् अधिक होती है तथार् इसक पिघलन बिंदु अपेक्षार्कृत ऊॅंचार् होतार् है। अत: यह अत्यधिक गार्ढ़ार् होतार् है तथार् शीघ्र ही जम जार्तार् है। यही कारण हैं कि अम्लीय लार्वार् ज्वार्लार्मुखी सार्मार्न्यतयार् ऊॅंची भू-आकृतियों क निर्मार्ण करते हैं। इन भू-आकृतियों के ढार्ल तीव्र होते है। अम्लीय लार्वार् शंकु के ढार्ल क्षार्रीय लार्वार् शील्डों से अधिक तीव्र होते हैं।

        ज्वार्लार्मुखी के प्रकार 

        ज्वार्लार्मुखियों क वितरण 

        संसार्र में लगभग 500 ज्वार्लार्मुखी हैं। इनमें से अंधिकांश तीन निश्चित पेटियों में पार्ये जार्ते हैं ये तीन पेटियॉं हैं-प्रशार्ंत महार्सार्गरीय पेटी, मध्यवर्ती पेटी तथार् अफ्रीकी दरार्रघार्टी पेटी। इस प्रकार, ज्वार्लार्मुखी उन क्षेत्रों में मुख्य रूप में पार्ये जार्ते है। जहॉं अत्यधिक वलन व भ्रंशन पार्ये जार्ते है। वे तटीय पर्वतीय श्रेणियों के सार्थ, द्वीपों तथार् महार्सार्गरों के आंतरिक भार्गों में पार्ये जार्ते है। महार्द्वीपों के आंतरिक भार्ग इनकी क्रियार् से सार्मार्न्यतयार् अछूते रहे है। अधिकांश सक्रिय ज्वार्लार्मुखी प्रशार्ंत महार्सार्गरीय क्षेत्र में पार्ये जार्ते है। 
        संसार्र की मध्यवर्ती पेटी क ज्वार्लार्मुखी की संख्यार् के अनुसार्र दूसरार् स्थार्न है यह यूरोप में आल्प्स पर्वत से प्रार्रंभ होकर टर्की तथार् हिमार्चल पर्वत प्रदेश से होती हुर्इ प्रशार्ंत महार्सार्गरीय पेटी से मिल जार्ती है आफ्रिक दरार्र घार्टी प्रदेश क तीसरार् स्थार्न है इस पेटी के अधिकांश ज्वार्लार्मुखी विलुप्त प्रकार के है। केवल मार्उन्ट केमरून ज्वार्लार्मुखी जो पश्चिमी मध्य अफ्रिक में है सक्रिय ज्वार्लार्मुखी है।
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