जिलार् पंचार्यत क गठन, चुनार्व प्रणार्ली, अधिकार, एवं शक्तियार्ं

तिहत्तरवें संविधार्न संषोधन के अन्र्तगत त्रिस्तरीय पंचार्यत व्यवस्थार् में जिलार् स्तर पर जिलार् पंचार्यत के गठन क प्रार्वधार्न कियार् गयार् है। प्रत्येक जिले के लिए एक जिलार् पंचार्यत होगी जिसक नार्म उस जिले के नार्म पर होगार्। जिलार् पंचार्यत पूरे जिले से आयी प्रार्थमिकतार्ओं व लोगों की जरूरतों क समेकन कर एक जिलार् योजनार् तैयार्र करती है, जो क्षेत्र विषेष के हिसार्ब से उनकी प्रार्थमिकतार्ओं के आधार्र पर होती है। इस प्रकार जिलार् योजनार् में स्वीकृत योजनार् क क्रियार्न्वयन कियार् जार्तार् है।

जिलार् पंचार्यत क गठन 

जिलार् पंचार्यत क गठन जिलार् पंचार्यत के निर्वार्चित सदस्य (जिनक चुनार्व प्रत्यक्ष निर्वार्चन द्वार्रार् कियार् जार्तार् है), जिले में समस्त क्षेत्र पंचार्यतो के प्रमुख, लोग सभार् और रार्ज्य सभार् के वे सदस्य जिनके निर्वार्चन जिलार् में विकास खण्ड पूर्ण यार् आंषिक रूप से आतार् है, रार्ज्य सभार् और विधार्न परिषद के सदस्य जो विकास खण्ड के भीतर मतदार्तार् के रूप में पंजीकृत है को शार्मिल कर कियार् जार्तार् है।

जिलार् पंचार्यत के सदस्यों अध्यक्ष और उपार्ध्यक्ष के चुनार्व और जिलार् पंचार्यत में आरक्षण 

1. जिलार् पंचार्यत में सदस्यों क चुनार्व 

जिलार् पंचार्यत के चुनार्व के लिए जिलार् पंचार्यत को छोटे-छोटे ऐसे निर्वार्चन क्षेत्रों मे बार्ंटार् जार्येगार् जिसकी आबार्दी 50,000 होगी। जिलार् पंचार्यत के सदस्यों क चुनार्व ग्रार्म सभार् सदस्यों द्वार्रार् प्रत्यक्ष निर्वार्चन द्वार्रार् कियार् जार्येगार्। जिलार् पंचार्यत के सदस्य के रूप में चुने जार्ने के लिए जरूरी है कि प्रत्यार्षी की उम्र 21 सार्ल से कम न हो। यह भी जरूरी है कि चुनार्व मे खडे होने वार्ले सदस्य क नार्म उस निर्वार्चन जिलार् की मतदार्तार् सूची मे हो।

2. जिलार् पंचार्यत के अध्यक्ष और उपार्ध्यक्ष क चुनार्व 

जिलार् पंचार्यत में चुने गये सदस्य अपने में से एक अध्यक्ष एवं एक उपार्ध्यक्ष क चुनार्व करते हैं। जिलार् पंचार्यत में कुल चुने जार्ने वार्ले सदस्यों में से यदि किसी सदस्य क चुनार्व किसी कारण से नहीं भी होतार् है तो भी अध्यक्ष एवं उपार्ध्यक्ष के पदों के लिए चुनार्व नहीं रूकेगार् और चुने गये जिलार् पंचार्यत सदस्य अपने में से एक अध्यक्ष और एक उपार्ध्यक्ष क चुनार्व कर लेंगे। यदि कोर्इ व्यक्ति संसद यार् विधार्न सभार् क सदस्य हो, किसी नगर निगम क अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष हो, नगर पार्लिक क अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष हो यार् किसी नगर पंचार्यत क अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष हो तो वह जिलार् पंचार्यत अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष नहीं बन सकतार्।

3. जिलार् पंचार्यत में आरक्षण 

जिलार् पंचार्यत के अध्यक्ष और जिलार् पंचार्यत सदस्यों के पदों पर आरक्षण लार्गू होगार्।

  1. अनुसूचित जार्ति एवं पिछड़ी जार्ति के लोगों के लिए पदों क आरक्षण कुल जनसंख्यार् में उनकी जनसंख्यार् के अनुपार्त पर निर्भर करतार् है लेकिन अनुसूचित जार्ति के लिए पदों क आरक्षण कुल सीटों में अधिक से अधिक 21 प्रतिषत तक ही होगार्। इसी प्रकार पिछड़ी जार्ति के लिए पदों क आरक्षण 27 प्रतिषत होगार्।
  2. बार्की के पदों पर कोर्इ आरक्षण नहीं होगार्। 
  3. प्रत्येक वर्ग यार्नि अनुसूचित जार्ति, पिछड़ी जार्ति वर्ग के लिए जो सीटें उपलब्ध हैं उनमें से 1/3 पद उस वर्ग की महिलार्ओं के लिए आरक्षित रहेंगे। 
  4. सार्मार्न्य वर्ग के लिए जो सीटें आरक्षित हैं उनमें से 50 सीटें महिलार्ओं के लिए आरक्षित रहेंगी।
  5. लेकिन अनुसूचित जार्ति एवं पिछड़ी जार्ति अनार्रक्षित सीटों पर भी चुनार्व लड़ सकते हं।ै इसी तरह से अगर कोर्इ सीट महिलार्ओं के लिए आरक्षित नहीं की गर्इ है तो वे भी उस अनार्रक्षित सीट से चुनार्व लड़ सकती हैं। 

आरक्षण चक्रार्नुक्रम पद्धति से होगार्। मतलब एक निर्वार्चन क्षेत्र अगर एक चुनार्व में अनुसूचित जार्ति की स्त्री के लिए आरक्षित होगार् तो अगली चुनार्व में वह निर्वार्चन क्षेत्र अनुसूचित जार्ति के लिए आरक्षित होगार्।

जिलार् पंचार्यत और उसके सदस्यों क कार्यकाल 

ग्रार्म पंचार्यत व क्षेत्र पंचार्यत की तरह ही जिलार् पंचार्यत क एक निष्चित कार्यकाल होतार् है। संविधार्न में दिये गये नियमों के अनुसार्र जिलार् पंचार्यत क कार्यकाल जिलार् पंचार्यत की पहली बैठक की तार्रीख से 5 वर्षों तक होगार्। जिलार् पंचार्यत के सदस्यों क कार्यकाल यदि किसी कारण से पहले नहीं समार्प्त कियार् जार्तार् है तो उनक कार्यकाल भी अर्थार्त पार्ंच वर्ष तक होगार्। जिलार् पंचार्यत के कार्य काल तक होगार्। यदि किसी खार्स वजह से जिलार् पंचार्यत को उसके नियत कार्यकाल से पहले भंग कर दियार् जार्तार् है तो 6 महीने के भीतर उसक चुनार्व करनार् जरूरी होगार्। इस तरह से गठित जिलार् पंचार्यत बार्की बचे समय के लिए कार्य करेगी।

1. अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष क हटार्यार् जार्नार् 

जिलार् पंचार्यत के अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष को अपने पद की गरिमार् के अनुरूप कार्य न करने अथवार् संविधार्न द्वार्रार् दी गर्इ जिम्मेदार्रियों को पूर्ण न करने की स्थिति में रार्ज्य सरकार द्वार्रार् पद से हटार्यार् जार् सकतार् है। अर्थार्त यदि अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष अपने कार्यों को ठीक प्रकार से नहीं करतार् है तो रार्ज्य सरकार नियत प्रक्रियार् व नियमों के अनुसार्र उसे निष्चित अवसर देकर पद से हटार् भी सकती है।

2. अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष द्वार्रार् त्यार्ग-पत्र 

अध्यक्ष उपार्ध्यक्ष यार् जिलार् पंचार्यत क कोर्इ निर्वार्चित सदस्य खुद से हस्तार्क्षर किए हुए पत्र द्वार्रार् पद त्यार्ग कर सकतार् है जो अध्यक्ष की दषार् में रार्ज्य सरकार को और अन्य दषार्ओं में जिलार् पंचार्यत के अध्यक्ष को सम्बोधित होगार्। अध्यक्ष क त्यार्ग पत्र उस दिनार्ंक से प्रभार्वी होगार् जब त्यार्ग पत्र की अध्यक्ष द्वार्रार् स्वीकृति जिलार् पंचार्यत के कार्यार्लय में प्रार्प्त हो जार्ए। उपार्ध्यक्ष यार् सदस्य क त्यार्ग पत्र उस दिनार्ंक से प्रभार्वी होगार् जब जिलार् पंचार्यत के कार्यार्लय में उनकी नोटिस प्रार्प्त हो जार्ये और यह समझार् जार्येगार् कि ऐसे अध्यक्ष, उपार्ध्यक्ष यार् सदस्य ने अपनार् पद रिक्त कर दियार् है।

जिलार् पंचार्यत की बैठक 

जिलार् पंचार्यत के कार्यों के संचार्लन हेतु संविधार्न में जिलार् पंचार्यत की बैठक क प्रार्वधार्न कियार् गयार् है। जिसके अन्र्तगत हर दो महीनो में जिलार् पंचार्यत की कम से कम एक बैठक जरूर होगी। जिलार् पंचार्यत की बैठक को बुलार्ने क अधिकार अध्यक्ष को है। अध्यक्ष की गैरहार्जिरी में उपार्ध्यक्ष जिलार् पंचार्यत की बैठक बुलार् सकतार् है। इसके अतिरिक्त जिलार् पंचार्यत की अन्य बैठकें भी बुलाइ जार् सकती है। यदि जिलार् पंचार्यत के 1/5 सदस्य लिखित रूप से मार्ंग करें और यह मार्ंग पत्र सीधे हार्थ से दियार् गयार् हो यार् प्रार्प्ति पत्र सहित रजिस्टर्ड डार्क द्वार्रार् दियार् गयार् हो तो आवेदन प्रार्प्ति के एक महीने के भीतर अध्यक्ष जिलार् पंचार्यत बैठक जरूर बुलार्येगार्। आवष्यकतार् पड़ने पर कोर्इ बैठक आगे की तिथि के लिए स्थगित की जार् सकती है और इस प्रकार स्थगित बैठक आगे भी स्थगित की जार् सकती है। सभी बैठक जिलार् पंचार्यत कार्यार्लय में होंगी। अगर बैठक किसी अन्य स्थार्न पर होनार् निश्चित की गर्इ है तो इसकी सूचनार् सभी को पूर्व में दी जार्ती है। बैठक में जिलार् पंचार्यत सदस्य अध्यक्ष यार् मुख्य विकास अधिकारी से प्रषार्सन से संबंधी कोर्इ विवरण, अनुमार्न, आंकड़े, सूचनार्, कोर्इ प्रतिवेदन, अन्य ब्यौरार् यार् कोर्इ पत्र की प्रतिलिपि मार्ंग सकते हं।ै अध्यक्ष यार् मुख्य विकास अधिकारी बिनार् देर किये मार्ंगी गर्इ जार्नकारी सदस्यों को देंगे।

जिलार् पंचार्यत के कार्य एंव शक्तियार्ं 

जिलार् पंचार्यत जिले स्तर पर कार्यो को संचार्लित करेगी-

1. कृषि जिसके अन्तर्गत कृषि प्रसार्र भी है-

  1. कृषि तथार् बार्गवार्नी क विकास। 
  2. सब्जियों, फलों और पुष्पों की खेती और विपणन की उन्नति। 

2. भूमि विकास व भूमि सुधार्र-

  1. चकबन्दी, भूमि सरंक्षण एव सरकार के भूमि सुधार्र कार्यक्रमों में सरकार को सहार्यतार् प्रदार्न करनार्। 

3. लघु सिंचार्इर्, जल प्रबंध और जलार्च्छार्दन विकास-

  1. लघु सिचाइ कायोर्ं के निर्मार्ण और अनुरक्षण में सरकार की सहार्यतार् करनार्।
  2.  सार्मुदार्यिक तथार् वैयक्तिक सिचाइ कार्यो क कार्यार्न्वयन। 

4. पषुपार्लन, दूध उद्यार्ोग और मुर्गी पार्लन-

  1. पषु सेवार्ओं की व्यवस्थार्। 
  2. पषु मुर्गी और अन्य पषुधन की नस्लों क सुधार्र करनार्। 
  3. दूध उघोग, मुर्गी पार्लन और सुअर पार्लन की उन्नति। 

5. मत्स्य पार्लन-मत्स्य पार्लन क विकास एवं उन्नति
6. सार्मार्जिक तथार् कृशि वार्निकी-

  1. सड़कों तथार् सावजनिक भूमि के किनार्रों पर वृक्षार्रोपण और परिरक्षण करनार्। 
  2. सार्मार्जिक वार्निकी और रेषम उत्पार्दन क विकास और प्रोन्नति। 

7. लघु वन उत्पार्द-लघु वन उत्पार्द की प्रोन्नति और विकास
8. लघु उद्योग-

  1. ग्रार्मीण उद्योग के विकास में सहार्यतार् करनार्। 
  2. कृषि उद्योगों के विकास की सार्मार्न्य जार्नकारी क सृजन। 

9. कुटीर और ग्रार्म उद्योग-

  1. कुटीर उद्योगों के उत्पार्दों के विपणन की व्यवस्थार् करनार्। 

10. ग्रार्मीण आवार्स-

  1. ग्रार्मीण आवार्स कार्यक्रम में सहार्यतार् देनार् और उसक कार्यन्वयन करनार्। 

11. पेय जल-

  1. पेय जल की व्यवस्थार् करनार् तथार् उसके विकास में सहार्यतार् देनार्। 
  2. दूशित जल को पीने से बचार्नार्। 
  3. ग्रार्मीण जल आपूर्ति कार्यक्रमो को प्रोत्सार्हन देनार् और अनुश्रवण करनार्। 

12. र्इधन तथार् चार्रार् भूमि-

  1. र्इधन तथार् चार्रार् से सम्बन्धित कार्यक्रमो की प्रोन्नति।
  2. जिलार् पंचार्यत के क्षेत्र में सडकों के किनार्रे वृक्षार्रोपण। 

13. सडक, पुलियार्, पुलों नौकाघार्ट जल माग तथार् संचार्र के अन्य सार्धन –

  1. गार्ंव के बार्हर सडकों, पुलियों क निर्मार्ण और उसक अनुरक्षण। 
  2. पुलों क निर्मार्ण। 
  3. नौक घार्टों, जल मागो के प्रबंधन में सहार्यतार् करनार्। 

14.  ग्रार्मीण विद्युतिकरण-

  1. ग्रार्मीण विद्युतिकरण को प्रोत्सार्हित करनार्। 

15.  गैर पार्रम्पार्रिक ऊर्जार् स्त्रोत-

  1. गैर-पार्रम्पार्रिक ऊर्जार् स्त्रोत के प्रयोग को बढ़ार्वार् देनार् तथार् उसकी प्रोन्नति। 

16.  गरीबी उन्मूलन कार्यो क क्रियार्न्वयन-

  1. गरीबी उन्मूलन के कार्यों क समुचित क्रियार्न्वयन करनार्। 

17. शिक्षार्-

  1. प्रार्रम्भिक और मार्ध्यमिक शिक्षार् क विकास। 
  2. प्रार्रम्भिक और सार्मार्जिक शिक्षार् की उन्नति। 

18. तकनीकी प्रशिक्षण और व्यवसार्यिक शिक्षार्-

  1. ग्रार्मीण शिल्पकारों और व्यवसार्यिक शिक्षार् की उन्नति। 

19. प्रौढ सार्क्षरतार् और अनौपचार्रिक शिक्षार् केन्द्रों क पर्यक्षण।
20. पुस्तकालय ग्रार्मीण पुस्तकालयों की स्थार्पनार् एवं उनक विकास।
21. खेल-कूद तथार् सार्ंस्कृतिक कार्य-

  1. सार्ंस्कृतिक कार्यो क पर्यवेक्षण।
  2. लोक गीतों, नृत्यो तथार् ग्रार्मीण खेलकूद की प्रोन्नति और आयोजन।
  3. सार्ंस्कृतिक केन्दों क विकास और उन्नति। 

22. बार्जार्र तथार् मेले-

  1. ग्रार्म पंचार्यत के बार्हर मेलों और बार्जार्रों की व्यवस्थार् और प्रबंधन। 

23. चिकित्सार् और स्वच्छतार्-

  1. प्रार्थमिक स्वार्स्थ्य केन्द्र और औषद्यार्लयों की स्थार्पनार् और अनुरक्षण। 
  2. महार्मार्रियों क नियंत्रण करनार्।
  3. ग्रार्मीण स्वच्छतार् और स्वार्स्थ्य कार्यक्रमों क कार्यार्न्वयन करनार्। 

24. परिवार्र कल्यार्ण-

  1. परिवार्र कल्यार्ण और स्वार्स्थ्य कार्यक्रमों की उन्नति। 

25. प्रसूति तथार् बार्ल विकास-

  1. महिलार्ओं एव बार्ल स्वार्स्थ्य तथार् पोशण कार्यक्रमों में विभिन्न संगठनों की सहभगितार् के लिए कार्यक्रमों की प्रोन्नति। 
  2. महिलार्ओं एवं बार्ल कल्यार्ण के विकास से सम्बन्धित कार्यक्रमों क आयोजन व प्रोन्नति। 

26. समार्ज कल्यार्ण-

  1. विकलार्ंगो तथार् मार्नसिक रूप से मन्द व्यक्तियों क कल्यार्ण। 
  2. वृद्धार्वस्थार् विधवार् पेंषन योजनार्ओं क अनुश्रवण करनार्। 

27. कमजोर वर्गो विषिश्टतयार् अनुसूचित जार्तियों और अनुसूचित जनजार्तियों क कल्यार्ण-

  1. अनुसूचित जार्तियों तथार् कमजोर वर्गो के कल्यार्ण की प्रोन्नति।
  2.  सार्मार्जिक न्यार्य के लिए योजनार्यें तैयार्र करनार् और कार्यक्रमों क कार्यार्न्वयन। 
  3. सावजनिक वितरण प्रणार्ली के अन्तर्गत आवष्यक वस्तुओं क वितरण। 

28. सार्मुदार्यिक अस्तियों क अनुरक्षण-

  1. सार्मुदार्यिक अस्तियों के परिरक्षण और अनुरक्षण क अनुश्रवण और मागदर्षन करनार्। 

29. नियोजन और आंकड़े-

  1. आर्थिक विकास के लिए योजनार्ये तैयार्र करनार्। 
  2. ग्रार्म पंचार्यतों की योजनार्ओं क पुनरार्वलोकन, समन्वय तथार् एकीकरण। 
  3. खण्ड तथार् ग्रार्म पंचार्यत विकास योजनार्ओं के निश्पार्दन को सुनिष्चित करनार्। 
  4. सफलतार्ओं तथार् लक्ष्यो की नियतकालिक समीक्षार्। 
  5. खण्ड योजनार् के कार्यार्न्वयन से सम्बन्धित विशयों के सम्बन्ध में सार्मग्री एकत्र करनार् तथार् आंकड़े रखनार्। 

30. ग्रार्म पंचार्यतों पर पर्यवेक्षण-

  1. ग्रार्म पंचार्यत के क्रियार् कलार्पों के ऊपर नियमों के अनुसार्र सार्मार्न्य पर्यवेक्षण।

जिलार् पंचार्यत के अध्यक्ष और उपार्ध्यक्ष के कार्य 

अध्यक्ष के कार्य 

  1. जिलार् पंचार्यत अध्यक्ष क प्रमुख कार्य जिलार् पंचार्यत तथार् समितियों की जिसक वह सभार्पति है उनकी बैठक बुलार्नार् और उनकी अध्यक्षतार् करनार् है। 
  2. अध्यक्ष क कर्तव्य है कि वह बैठकों में व्यवस्थार् बनार्ये रखे तथार् बैठकों में लिये गये निर्णयों की जार्नकारी रखे। 
  3. वित्तीय प्रषार्सन पर नजर रखनार् तथार् योजनार्ओं के अनुरूप वित्तीय प्रबंधन की निगरार्नी करनार्। 
  4. अध्यक्ष को ऐसे कार्य भी करने होते हैं जो सरकार द्वार्रार् समय-समय पर उन्हें दिये जार्ते हैं।

उपार्ध्यक्ष के कार्य

  1. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपार्ध्यक्ष बैठकों की अध्यक्षतार् करतार्/करती है और ऐसे समय में वह अध्यक्ष के अधिकारों क उपयोग कर सकतार्/सकती है।
  2. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में यार् उसक पद खार्ली होने पर अध्यक्ष के अधिकारों क उपयोग और उसके कार्यों के सम्पार्दन की जिम्मेदार्री उपार्ध्यक्ष की होती है। 
  3. उपार्ध्यक्ष को वे सभी कार्य भी करने होते हैं जिन्हें अध्यक्ष द्वार्रार् कियार् जार्तार् है। 

जिलार् योजनार् बनार्ने में जिलार् पंचार्यत क हस्तक्षेप 

जिलार् पंचार्यत सभी क्षेत्र पंचार्यतों की विकास योजनार्ओं को समेकित करके जिले के लिए प्रत्येक सार्ल एक विकास योजनार् तैयार्र करती है। जिलार् पंचार्यत की नियोजन एवं विकास समिति मुख्य विकास अधिकारी तथार् दूसरी समितियों की मदद से यह योजनार् तैयार्र करती है और उसे जिलार् पंचार्यत को प्रस्तुत करती है।जिलार् पंचार्यत इस योजनार् पर विचार्र कर उसमें बदलार्व यार् बिनार् बदलार्व के पार्स करती है।

जिलार् पंचार्यत क निर्मार्ण कार्यों के संबंध में अधिकार 

  1. किसी सावजनिक स्थार्न यार् जिलार् पंचार्यत की सम्पत्ति से लगी हुर्इ किसी इमार्रत में किसी भी प्रकार निर्मार्ण क कार्य तब तक नहीं कियार् जार् सकतार् है जब तक जिलार् पंचार्यत से इसके लिए इजार्जत नहीं मिल जार्ती। 
  2. यदि उपरोक्त क उलंघन कियार् जार्तार् है तो जिलार् पंचार्यत उसमें बदलार्व करने यार् उसे गिरार्ने क आदेष दे सकती है। 
  3. जिलार् पंचार्यत अपने इलार्के में सावजनिक नार्लियों क निर्मार्ण कर सकती है। जिलार् पंचार्यत द्वार्रार् बनाइ जार्ने वार्ली नार्लियार्ं, किसी सड़क यार् स्थार्न के बीच से यार् उनके आर-पार्र यार् उसके नीचे से ले जार् सकती है। किसी इमार्रत यार् भूमि में यार् उसके नीचे से ले जार्ने के लिए उसके मार्लिक को पूर्व सूचनार् देकर निर्मार्ण कर सकती है।
  4. यदि कोर्इ व्यक्ति ऊपर लिखित मार्मलों के संबंध में निजी लार्भ के लिए किसी प्रकार क निर्मार्ण कार्य करनार् चार्हतार् है तो इसके लिए उसे जिलार् पंचार्यत को आवेदन देनार् होतार् है। यदि जिलार् पंचार्यत 60 दिनों के भीतर इसके बार्रे में कोर्इ सूचनार् नहीं देतार्ी है तो आवेदन पत्र को स्वीकृत मार्न लियार् जार्तार् है। 
  5. जिलार् पंचार्यत किसी को लिखित इजार्जत दे सकती है कि वह खुले बरार्मदों, छज्जों यार् कमरों क निर्मार्ण यार् पुर्ननिर्मार्ण इस प्रकार से करें कि उसक कुछ हिस्सार्, नियम में दिये गये छूट के अनुसार्र, सड़कों यार् नार्ली के ऊपर निकलार् रहे। लिखित अनुमति न लेने पर व्यक्ति को जुर्मार्नार् भुगतनार् पड़ सकतार् है। 
  6. यदि किसी के द्वार्रार् पेड़ काटने से यार् इमार्रत में परिवर्तन यार् निर्मार्ण कार्य करने से सड़क पर चलने वार्ले व्यक्ति को बार्धार् होती हो तो ऐसार् काम करने से पहले जिलार् पंचार्यत से लिखित इजार्जत लेनी होगी।

अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष के खिलार्फ अविष्वार्स क प्रस्तार्व 

अधिनियम में दी गर्इ प्रकियार् के अनुसार्र जिलार् पंचार्यत के अध्यक्ष यार् किसी उपार्ध्यक्ष के विरोध अविष्वार्स क प्रस्तार्व कियार् जार् सकतार् है तथार् उस पर कार्यवार्ही की जार् सकती है। अविश्वार्स प्रस्तार्व करने के अभिप्रार्य क लिखित नोटिस जिलार् पंचार्यत के निर्वार्चित सदस्यों की कुल संख्यार् में कम से कम आधे सदस्यों द्वार्रार् हस्तार्क्षर कियार् गयार् होगार् प्रस्तार्वित प्रस्तार्व की प्रति के सार्थ नोटिस पर हस्तार्क्षर करने वार्ले सदस्यों में से किसी के द्वार्रार् व्यक्तिगत रूप से उस जिलार्धिकारी को दियार् जार्एगार्। इसके बार्द जिलार्धिकारी- उक्त प्रस्तार्व पर विचार्र करने के लिए जिलार् पंचार्यत की बैठक जिलार् पंचार्यत के कार्यार्लय में अपने द्वार्रार् निष्चित दिनार्ंक को बुलार्येगार्। यह दिनार्ंक, उपधार्रार् के अधीन उसे नोटिस दिये जार्ने के दिनार्ंक से तीस दिन के बार्द क न होगार्। जिलार् पंचार्यत के निर्वार्चित सदस्यों को ऐसी बैठक क कम से कम पन्द्रह दिनों की नोटिस ऐसी रीति से देगार् जो नियत की जार्ये।

जिलार् पंचार्यत पर सरकारी नियंत्रण की सीमार् 

जिलार् पंचार्यत पर एक सीमार् तक सरकार क नियन्त्रण भी रहतार् है। जिलार्धिकारी यार् नियत प्रधिकारी जिलार् पंचार्यत यार् उसकी समितियों के द्वार्रार् करार्ये जार् रहे कायोर्ं क निरीक्षण कर सकतार्/सकती है तथार् जिलार् पंचार्यत के किसी भी लिखित पुस्तक यार् अभिलेख को जार्ंच के लिए मार्ंग सकतार्/सकती है। रार्ज्य सरकार द्वार्रार् तय कियार् गयार् अधिकारी जिलार् पंचार्यत द्वार्रार् किये गये निर्मार्ण कार्यो को तथार् उससे संबंधित सार्रे दस्तार्वेजों क निरीक्षण कर सकतार्/सकती है। रार्ज्य सरकार को जिलार् पंचार्यत के सदस्य की सदस्यतार् समार्प्त करने क अधिकार भी है। यदि कोर्इ जिलार् पंचार्यत सदस्य अपने कार्यों को करने में शार्रीरिक रूप से असमर्थ पार्यार् जार्तार् है, यार् वह किसी अनार्चार्र क दोशी है , यार् उसने जिलार् निधि को किसी प्रकार से हार्नि पंहुचाइ हो, अथवार् उसने अपनी सदस्यतार् क अपने फार्यदे के लिए उपयोग कियार् हो तो रार्ज्य सरकार उसकी सदस्यतार् समार्प्त कर सकती है। यदि किसी भी समय रार्ज्य सरकार को इस बार्त की जार्नकारी होती है कि जिलार् पंचार्यत अपने कार्यो में लार्परवार्ही व अनियमिततार् बरत रही है तो जार्ंच के बार्द दोश सार्बित होने पर रार्ज्य सरकार जिलार् पंचार्यत क विघटन कर सकती है। विघटन के बार्द 6 महीने के भीतर जिलार् पंचार्यत के गठन के लिए फिर से चुनार्व करार्ये जार्येंगे, तब तक के लिए सरकार जिलार् पंचार्यत के स्थार्न पर प्रषार्सक यार् प्रषार्सनिक समिति गठित कर सकती है।

जिलार् पंचार्यत क बजट 

जिलार् पंचार्यत को हर वर्ष जिले क वाषिक बजट तैयार्र करनार् होतार् है। जिलार् पंचार्यत इस बजट को वित्त समिति के परार्मर्ष से तैयार्र करेगी। इस तैयार्र बजट को पूर्व निर्धार्रित तिथि को जिलार् पंचार्यत की बैठक में अध्यक्ष के मार्ध्यम से प्रस्तुत कियार् जार्येगार्। प्रस्तार्वित बजट को जिलार् पंचार्यत अगर चार्हे तो संषोधन हेतु वार्पिस भी कर सकती है। अगर बजट वार्पिस नहीं होतार् तो जिलार् पंचार्यत इसे पार्रित कर देती है। यदि बजट संषोधन हेतु लौटार्यार् जार्तार् है तो कार्य समिति नये सिरे से इस बजट को बनार्येगी जिसे अध्यक्ष द्वार्रार् पुन: बैठक में प्रस्तुत कर पार्रित करवार्यार् जार्येगार्।

जिलार् निधि क संचार्लन 

जिलार् पंचार्यत को रार्ज्य और केन्द्र सरकार तथार् दूसरे स्रोतों से प्रार्प्त धनरार्षि जिलार् निधि में जमार् होगी। जिलार् पंचार्यत नकद यार् वस्तु के रूप में ऐसे अंषदार्न ले सकती है जो कोर्इ व्यक्ति किसी सर्वार्जनिक कार्य के लिए जिलार् पंचार्यत को दे। जिलार् निधि के खार्ते क संचार्लन अध्यक्ष तथार् मुख्य विकास अधिकारी के संयुक्त हस्तार्क्षर से होगार्। वर्तमार्न में पंचार्यतों को प्रेशित की जार्ने वार्ली धनरार्षि क 20 प्रतिषत हिस्सार् जिलार् पंचार्यत को भेजार् जार्तार् है।

जिलार् पंचार्यत के सलार्हकार के रूप में कार्य करने वार्ले अधिकारी 

  1. मुख्य विकास अधिकारी 
  2. जिलार् पूर्ति अधिकारी 
  3. उपक्षेत्रीय विपणन अधिकारी
  4. जिलार् वन अधिकारी 
  5. अधिषार्सी अभियन्तार्- लोक निर्मार्ण विभार्ग 
  6. अधिषार्सी अभियन्तार्- विद्युत विभार्ग 
  7. सार्मार्न्य प्रबन्धक- जिलार् उद्योग केन्द्र 
  8. जिलार् अर्थ एवं संख्यीकी अधिकारी 

जिलार् पंचार्यत से सम्बन्धित मुख्य विभार्ग 

जिन कार्यों को पंचार्यतों से सन्दर्भित कियार् गयार् है, उन विभार्गों के जिलार् स्तरीय अधिकारी जिलार् पंचार्यत के सार्थ में कार्य करेंगे। ऐसे अधिकारियों की सूची निम्नलिखित है-

  1. मुख्य विकास अधिकारी
  2. उप मुख्य चिकित्सार्धिकारी 
  3. बेसिक षिक्षार् अधिकारी
  4. अधिषार्सी अभियन्तार्- जल निगम 
  5. अधिषार्सी अभियन्तार्- ग्रार्मीण अभियंत्रण सेवार् 
  6. जिलार् विद्यार्लय निरीक्षक 
  7. अधिषार्सी अभियन्तार्- नलकूप 
  8. अधिषार्सी/सहार्यक अभियन्तार्- लघु सिंचाइ
  9. जिलार् युवार् कल्यार्ण अधिकारी
  10. जिलार् समार्ज कल्यार्ण अधिकारी 
  11. जिलार् पशुधन अधिकारी 
  12. सहार्यक पंजीयक, सहकारितार् 
  13. जिलार् उद्यार्न अधिकारी 
  14. जिलार् गन्नार् विकास अधिकारी 
  15. जिलार् पंचार्यतरार्ज अधिकारी 
  16. कार्यक्रम अधिकारी(बार्ल विकास परियोजनार्)
  17. जिलार् कृषि अधिकारी 
  18. जिलार् भूमि संरक्षण अधिकारी 
  19. सहार्यक निदेषक, मत्स्य
  20. जिलार् दुग्ध विकास अधिकारी 

जिलार् पंचार्यत एवं क्षेत्र पंचार्यत के बीच अन्र्तसंबंध 

जिलार् पंचार्यत व क्षेत्र पंचार्यत के बीच उचित तार्लमेल व सार्मंजस्य के लिए 73वें संविधार्न संषोधन अधिनियम में विषेश प्रार्वधार्न किये गये है। जिसके अन्र्तगत जिले में आने वार्ली समस्त क्षेत्र पंचार्यत के प्रमुख अपने जिले की जिलार् पंचार्यत के भी सदस्य होगें। योजनार्ओं व कार्यक्रमों के नियोजन हेतु भी तीनों स्तर की पंचार्यतों को आपसी सार्मंजस्य से कार्य करने के नियम बनार्ये गये है। इन नियमों के अनुसार्र क्षेत्र पंचार्यत ग्रार्म पंचार्यत की वाशिक योजनार्ओं के आधार्र पर अपनी क्षेत्र पंचार्यत के लिए विकास योजनार्यें बनार्येंगी। इस तैयार्र योजनार् को क्षेत्रपंचार्यत अपने क्षेत्र की जिलार् पंचार्यत को भेजेंगी। इसी प्रकार जिलार् पंचार्यत क्षेत्र पंचार्यतों की विकास योजनार्ओं के आधार्र पर अपने जिले के ग्रार्मीण इलार्कों के लिए एक समग्र विकास योजनार् बनार्येंगी। जिले के स्तर पर ग्रार्मीण क्षेत्रों की विकास योजनार् तभी सही तरीके से बन पार्येंगी जब जिले की क्षेत्र पंचार्यतें सही समय पर योजनार्यें बनार्कर जिलार् पंचार्यत को भेजें।

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