चोरी बीमार् क्यार् है ?

चोरी बीमार् (Burglary or Theft Insurance) :- चोरी बीमार् में प्रार्य: चार्र प्रकार की जोखिम : (1) निवार्स स्थार्न (Residence), (2) व्यार्पार्रिक (Commercial), (3) वित्तीय (Financial) और (4) विविध (Miscellaneous) शार्मिल हैं। इसके अलार्वार् निवार्स स्थार्न के बार्हर और अन्दर चोरी बीमार्, सीमित चोरी बीमार्, नकद और प्रतिभूति चोरी बीमार्, व्यार्पार्रिक स्कन्ध चोरी बीमार्, स्टार्स्कीपर चोरी बीमार्, कार्यार्लय चोरी बीमार्, बैंक चोरी बीमार्, सुरक्षित जमार् (Safe Deposit) चोरी बीमार्, गोदार्म चोरी बीमार् आदि कर्इ प्रकार के चोरी बीमार् होते हैं। चोरी बीमार्: (1) घोषणार्, (2) बीमित समझौतार्, (3) अतिरिक्त यार् निषेध (Exclusion) और (4) शर्तों के अन्दर कियार् गयार् है।

1. घोषणार् –

बीमार्पत्र के प्रथम पृश्ठ पर बीमार्कर्तार् के नार्म और उसके बार्द बीमित व्यक्ति क नार्म और पतार्, व्यवसार्य आदि लिखार् रहतार् है। बीमार् की रकम और प्रव्यार्जि की रकम भी लिखी रहती है। चोरी से सुरक्षार् के उपार्य अपनार्ये गये हैं यार् नहीं, चौकीदार्र रहतार् है यार् नहीं यार् अन्य ऐसी बार्तेंजो चोरी की जोखिम को कम करते हों। इन सबके द्वार्रार् प्रव्यार्जि की दरों में कमी होती है। पिछले समय की हार्नि, प्रस्तार्व की अस्वीकृति यार् बीमार् क्षतिपूर्ति की अस्वीकृति आदि लिखी रहती है। इसमें बीमार् की अवधि 5 वर्ष से अधिक नहीं होती है।

2. बीमार् समझौतार् –

बीमार् समझौतार् में यह लिखार् रहतार् है कि बीमार्कर्तार् एक निश्चित प्रव्यार्जि के बदले, घोषणार् यार् दी गयी सूचनार् पर विश्वार्स करके इसके दार्यित्व की सीमार् के अन्दर निषेध यार् अतिरिक्त (Exclusion) को छोड़कर शर्तों और बीमार्पत्र की अवधि के अन्तर्गत बीमित जोखिम होने पर बीमित व्यक्ति को एक निश्चित हार्नि की क्षतिपूर्ति करेगार्। इसमें भी यह लिखार्रहतार् है कि कौन-सी जोखिम बीमित है।

बीमार् एक यार् अधिक जोखिम को शार्मिल कर सकतार् है और उसी के अनुसार्र भुगतार्न भी होगार्। निषेध यार् अतिरिक्त तथार् शर्तों के अनुसार्र ही भुगतार्न कियार् जार्तार् है।

3. निषेध यार् अतिरिक्त –

निषेध वार्क्य क लिखार् जार्नार् इसलिये आवश्यक है कि किसकी वस्तु क दो जगह से भुगतार्न न हो सके और इस प्रकार उसे क्षतिपूर्ति की रकम से अधिक न मिल सके।

इनके अलार्वार् बहुत-सी अन्य शर्तों को भी बतार्यार् जार् सकतार् है जिससे दोनों पक्षों (बीमार्कर्तार् और बीमित व्यक्ति) के प्रसंविदार् को संचार्लित कियार् जार् सके।

चोरी बीमार् के प्रकार

(1) चोरी (कारबार्र परिसर) प्रसंविदार् –

व्यार्पार्रिक गृहो (कारबार्र परिसर) से सम्बन्धित चोरी बीमार् पॉलिसी के अन्तगर्त मुख्यत: इन सम्पत्तियों की चोरी की जोखिमो को संवृत कियार् जार्तार् है-(1) बीमार्दार्र क व्यार्पार्रिक मार्ल, (2) कमीशन यार् न्यार्स (Trust) पर रखार् हुआ मार्ल, जिसके प्रति बीमार्दार्र की जिम्मेदार्री हो, (3) व्यार्पार्रिक सार्ज-सज्जार्, कार्यार्लय की मशीनें जैसे टार्इपरार्इटर, कैलकुलेटर, इसी प्रकार के अन्य व्यार्वसार्यिक उपकरण, तथार् (4) तार्लार्बन्द तिजोरी यार् सेफ में रखार् हुआ नकद रूपयार् और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं। इस पॉलिसी में उपर्युक्त सभी वस्तुओं के मूल्य यथार्सम्भव बीमार् पॉलिसी में अलग-अलग इंगित किये जार्ते हैं। इन बीमित वस्तुओं की चोरी होने पर बीमार् कम्पनी क्षतिपूर्ति करने को बार्ध्य होगी। इसके अतिरिक्त यदि चोरी के सिलसिले में उस मकान की भी क्षति हो जहार्ं बीमित सम्पत्ति रखी गर्इ थी और उसकी मरम्मत की जिम्मेदार्री बीमार्दार्र पर आती हो तब इसकी भी क्षतिपूर्ति की जार्ती है।

(2) चोरी (निजी आवार्स) पॉलिसी –

:- निजी आवार्सगृहों के लिए कम्पनियार्ं पृथक् बीमार् पॉलिसी जार्री करती है। इस पॉलिसी के अन्तर्गत बीमार्दार्र यार् उसके परिवार्र के सदस्यों के फर्नीचर, सभी प्रकार के निजी सार्मार्न, गहने, जवार्हरार्त तथार् गृहस्थी की अन्य वस्तुओं की चोरी की जार्ो खिमो काे संवृत कियार् जार्तार् है। सार्मार्न्यतयार् गहने तथार् अन्य मूल्यवार्न वस्तुओं क बीमार् कुल बीमित मूल्य के एक-तिहाइ से अधिक नहीं कियार् जार्तार् जब तक इसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम न दियार् जार्ए। यह बीमार् पॉलिसी प्रार्य: मूल्यार्ंकित पॉलिसी (Valued Policy) होती है। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार्र बीमित वस्तुएं आवार्सगृह पर मौजूद रहनी चार्हिए तथार् वर्ष भर मे 60 दिनों से अधिक के लिए आवार्सगृह खार्नी नहीं रहनार् चार्हिए। बीमार् पॉलिसी में प्रार्य: यह शर्त भी रहती है कि मकान यार् परिसर (जिसकी सम्पत्ति क बीमार् हुआ है) निरन्तर किसी जिम्मेदार्र व्यक्ति की देख-रेख में रहेगार् अथवार् एक चौकीदार्र उसक पहरेदार्र होगार्। बीमार् कम्पनी वार्स्तुकलार् की वस्तुओं, पार्डं ुलिपियो, बिल, प्रोनोट, दस्तार्वजे आदि की चोरी के जोखिमों के प्रति दार्यित्व नहीं ग्रहण करती।

(3) सम्मिलित अग्नि एवं चोरी की प्रसंविदार् –

यह पॉलिसी आवार्सगृहो के बीमे में बहुत प्रचलित है। इस पॉलिसी में वे सभी जोखिम संवृत की जार्ती है जिनक उल्लेख हमने ‘‘निजी आवार्स चोरी पॉलिसी’’ के सिलसिले में कियार् है और इसके अतिरिक्त इसमें बीमित सम्पत्ति क अग्नि बीमार् भी हो जार्तार् है जिसके फलस्वरूप बीमार् कम्पनी अग्नि, विद्युत्पार्त यार् गृहस्थी कार्य के लिए प्रयुक्त बॉयलर यार् गैस के विस्फोट से हुर्इ हार्नि यार् क्षति के लिए दार्यित्व ग्रहण करती है। अग्नि बीमार् की मार्नक पॉलिसी (Standard Fire Policy) में जो हार्नियॉं, आपदार्एं यार् वस्तुएं अपवर्जित (Excluded) हैं उनके प्रति बीमार् कम्पनी दार्यी नहीं होती। यह पॉलिसी केवल निजी आवार्स के लिए ही जार्री की जार्ती है। इसकी सुविधार् यह है कि एक ही पॉलिसी के अन्तर्गत बीमित सम्पत्ति की अग्नि और चोरी की आपदार्ओ से सम्भार्वित हार्नि क बीमार् हो जार्तार् है।

(4) सर्व जोखिम पॉलिसी –

यह बीमार् पॉलिसी गृहस्थी की कतिपय विशिष्ट वस्तुओं के लिए ली जार्ती है, जैसे, जवार्हरार्त, कैमरार्, घड़ियार्ं, पेंटिंग, कलार्त्मक वस्तुएं, इत्यार्दि। इन वस्तुओं की हार्नि यार् क्षति यदि अग्नि यार् चोरी के कारण यार् किसी भी आकस्मिक कारण से होती हो तब बीमार् कम्पनी उसकी क्षतिपूर्ति करती है। इस पॉलिसी के अन्तर्गत ‘‘सम्मिलित अग्नि आरै चोरी पॉलिसी’’ द्वार्रार् संवृत जोखिमों के अतिरिक्त उन हार्नियों को भी संवृत कियार् जार्तार् है जो किसी भी आकस्मिक परिस्थितियों के कारण होती है। इस पॉलिसी में बीमित वस्तुओं क मूल्य पार्रस्परिक स्वीकृति द्वार्रार् तय कियार् जार्तार् है जिस ‘agreed value’ कहते है। अत: यह पॉलिसी मूल्यार्ंकित पॉलिसी होती है। पॉलिसी में अपवार्दित जोखिमों क भी विवरण दियार् जार्तार् है जिनके द्वार्रार् हार्नि होने पर कम्पनी क दार्यित्व नहीं होतार्। इन अपवार्दों के कतिपय उदार्हरण ये हैं-बीमित वस्तु क घिसाइ यार् अन्दरूनी दोश (inherent defect) के कारण हार्नि, यार्न्त्रिक गड़बड़ी के कारण हार्नि, यार् किसी वस्तु की मरम्मत यार् सफाइ करार्ते समय हुर्इ हार्नि यार् क्षति।

(5) अभिवहन मुद्रार् पॉलिसी –

‘‘अभिवहन मुद्रार्’’ (money-in-transit) क अर्थ है वह नकद मुद्रार्, पोस्टल आर्डर, मनीआर्डर, स्टार्म्प आदि जो एक स्थार्न से दूसरे स्थार्न को ले जार्ए जार्ते हो। सार्मार्न्य व्यार्पार्रिक कोर्यों के सिलसिले में प्रार्य: ही किसी व्यार्पार्रिक संस्थार्ार् द्वार्रार् बैंकों, डार्कघरो यार् अन्य व्यार्पार्रिक संस्थार्ओ में नित्य ही बड़ी-बड़ी रकमें भेजी जार्ती हैं। इस सिलसिले में इस मुद्रार् को कर्मचार्रियो की देख-रेख में एक स्थार्न से दूसरे स्थार्न पर ले जार्यार् जार्तार् है। ऐसी नकद रकम एवं अन्य मुद्रार् को ले जार्ने के दौरार्न चोरी की जोखिम रहती ही है। अब तो ऐसी चोरियों के समार्चार्र बहुत ही सार्मार्न्य होते जार् रहे हैं। इस जोखिम से सुरक्षार् पार्ने के उद्देश्य से ही ‘‘अभिवहन मुद्रार् बीमार्’’ (Money-in-Transit Insurance) करार्यार् जार्तार् है। यह बीमार् सार्मार्न्यतयार् वार्णिज्य, व्यार्पार्र यार् उद्योग में लगे हुए संस्थार्नों के लिए होतार् है।

अभिवहन मुद्रार् के एक स्थार्न से दूसरे स्थार्न पर ले जार्ते समय, अथवार् बीमार्दार्र के संस्थार्न में रखे गए नकद की यदि चोरी, डार्क यार् किसी अन्य आकस्मिक दुर्घटनार् द्वार्रार् हार्नि होती है तब इस पॉलिसी के अन्तर्गत बीमार् कम्पनी बीमार्दार्र की क्षतिपूर्ति करने की दार्यी होती है। सार्मार्न्यतयार् बीमार् कम्पनी इन कारणों से हुर्इ हार्नियो के प्रति दार्यी नहीं होती-(1) गलती यार् चूक के कारण नकदी की हार्नि, (2) किसी कर्मचार्री की बेर्इमार्नी के कारण हार्नि यार् (3) दंगे आदि के कारण हार्नि। किन्तु अतिरिक्त प्रीमियम देकर इन हार्नियों को भी पॉलिसी में संवृत कियार् जार् सकतार्ार् है।

(6) यार्त्री सार्मार्न पॉलिसी –

यार्त्रार् करने के सिलसिले में लोग सूटकेस, ट्रंक, बिस्तर तथार् अन्य सार्मार्न सार्थ ले जार्ते हैं। इन सार्मार्नो की चोरी की जोखिम को संवतृ करने के लिए एक पृथक् पॉलिसी चलन में है जिसे ‘‘यार्त्री सार्मार्न पॉलिसी’’ कहार् जार्तार् हे। इन पॉलिसी के अन्तर्गत यार्त्रार् के सिलसिले में बीमित बैगेज के सार्मार्न की चोरी यार् अन्य किसी दुर्घटनार् द्वार्रार् हार्नि होने पर बीमार् कम्पनी क्षतिपूर्ति करने क दार्यित्व ग्रहण करती है। यह पॉलिसी प्रार्य: प्रतिश्ठित व्यक्तियो के लिए ही जार्री होती है। यह किसी एक यार्त्रार् के लिए अथवार् किसी एक अवधि (प्रार्य: एक वर्ष) में सभी स्थार्नों की यार्त्रार् के लिए जार्री की जार्ती है। बीमार्दार्र को अपने सार्थ ले जार्ने वार्ले सभी सार्मार्नों क पूर्ण विवरण देनार् होतार् है, तथार् परिवहन-सार्धन, यार्त्रार् माग, और यार्त्रार् के स्थार्नो को भी बतार्नार् होतार् है। इस पॉलिसी मे यार्त्री के सार्मार्न, घड़ी, आदि क बीमार् होतार् है किन्तु आभूषण, कैमरे, नकद, प्रतिभूतियार्ं, यार्त्रार्-टिकट आदि शार्मिल नहीं होते। जिन लोगों को प्रार्य: ही यार्त्रार् करनी होती है उनके लिए यह पॉलिसी उपयोगी होती है। अतिरिक्त प्रीमियम देकर इसमें अग्नि, दंगार्, हड़तार्ल, आतंकवार्दी कार्यवार्ही आदि द्वार्रार् हार्नि की जोखिम भी संवृत की जार्ती है।

चोरी क बीमार् करार्ने की प्रक्रियार् 

चोरी क बीमार् करार्ने की प्रक्रियार् के प्रकार है-(1) कम्पनी के पार्स प्रस्तार्व पत्र भेजनार्, (2) उस प्रस्तार्व पर कम्पनी द्वार्रार् विचार्र और निर्णय, तथार् (3) जोखिम क आरम्भ और बीमार् पॉलिसी क निर्गमन।

(1) प्रस्तार्व पत्र –

चोरी बीमार् के लिए कम्पनी के छपे हुए प्रस्तार्व पत्र में प्रस्तार्व भेजनार् होतार् है। आवार्सगृह, कारबार्र परिसर, अभिवहन मुद्रार्, यार्त्री सार्मार्न, आदि के बीमों के लिए पृथक्-पृथक् प्रस्तार्व पत्र होते है। सार्मार्न्यतयार् प्रस्तार्व पत्र में प्रस्तार्वक को जोखिम सम्बन्धी ब्यौरे लिखने होते हैं, जैसे, जिस भवन में सम्पत्ति रखी है वह कहार्ं स्थित है, कैसे निर्मित है, उसमें प्रस्तार्वक क ही अधिकार है यार् अन्य लोगो क भी, उसके दरवार्जे-खिड़कियार्ं आदि कैसे हैं, उसमे प्रस्तार्वक कब से है, वह आवार्स है यार् दुकान यार् फैक्टरी, उसकी देखभार्ल के लिए रार्त में चौकीदार्र रहतार् है यार् नहीं, आदि। आवार्सगृह के चोरी बीमार् के प्रसंग में यह भी बतार्नार् होतार् है कि उसमें कितने लार्गे परिवार्र के सदस्य हैं, स्थार्यी रूप से रहने वार्ले नौकरो और महे मार्नों आदि की संख्यार् कितनी रहती है, आदि। इसके अतिरिक्त, उसमे रखी गर्इ बीमार् कराइ जार्ने वार्ली सम्पत्ति के सम्बन्ध में भी ब्योैरे देने होते हैं-क्यार् मूल्यवार्न वस्तुएं सेफ में रखी जार्ती हैं, वह सेफ किस निर्मार्तार् क है, सम्पत्तियों क पृथक्-पृथक् आरे सम्मिलित मल्ू य क्यार् है। इसके अतिरिक्त भूतकालीन बीमों और दार्वो के ब्यार्रै े भी देने होते हैं। प्रस्तार्व पत्र की इन सूचनार्ओं के आधार्र पर कम्पनी जोखिम क आगणन करती है।अभिवहन मुद्रार् के बीमार् प्रस्तार्वक को उन स्थार्नो और दूरियों क ब्यौरार् देनार् होतार् है जिनके बीच मुद्रार् को ले जार्नार् पड़तार् है और यह बतार्नार् होतार् है कितने व्यक्ति मुद्रार् ले जार्ते हैं, मुद्रार् थैलियों, ट्रंकों, आदि में जार्ती है यार् किसी अन्य प्रकार से, क्यार् उसके सार्थ सशस्त्र चौकीदार्र भी रहतार् है, आदि। इसके अतिरिक्त, भूतकालीन हार्नियों क भी विरण देनार् होतार् है।

(2) कम्पनी द्वार्रार् विचार्र और निर्णय –

प्रस्तार्व पत्र में उल्लिखित सूचनार्ओं के आधार्र पर कम्पनी प्रस्तार्वित बीमे से सम्बन्धित आचार्रिक तथार् भौतिक संकटों को आंकती है और तदनुसार्र प्रस्तार्व को स्वीकार करने के सम्बन्ध में निर्णय करती है। आचार्रिक संकट के लिए प्रस्तार्वक की हैसियत, स्थिति, भूतकालीन चरित्र-वृत्त तथार् विष्वसनीयतार् की जार्ंच की जार्ती है। यदि पहले भी चोरी के लिए दार्वार् हुआ हो तब उस प्रसंग में यह भी देखार् जार्तार् है कि उस चोरी में प्रस्तार्वक सार्ंठ-गार्ंठ अथवार् लार्परवार्ही की कोर्इ आशंक उत्पन्न हुर्इ अथवार् नहीं। इसके अतिरिक्त प्रस्तार्वित बीमे के भौतिक संकट के निर्धार्रण में इन बार्तो पर विशेष ध्यार्न दियार् जार्तार् है : (1) भवन की स्थिति, (2) भवन मे प्रवेश द्वार्र, (3) खिड़कियो, दरवार्जों, आदि की विशेषतार्ए, (4) पार्स-पड़ोस की स्थिति, (5) भवन में रखे हुए मार्ल की प्रकृति, आदि। इसके अतिरिक्त ,सुरक्षार् के लिए जो तरीके अपनार्ए जार्ते हैं उनकी समीक्षार् की जार्ती है।कम्पनी उन प्रस्तार्वो को अस्वीकृत कर देती है जिनमे (क) प्रस्तार्वक की ख्यार्ति यार् विश्वसनीयतार् उच्च कोटि की न प्रतीत हो, (ख) भवन अधिक समय तक खार्ली रखार् जार्तार् हो, (ग) पहले अनेक बार्र चोरियार्ं हो चुकी हो, (घ) मकान बहतु दूरी पर यार् बस्ती से दूर स्थित हो।

(3) जोखिम क आरम्भ और पॉलिसी –

यदि सभी दृष्टिकोणार्े से प्रस्तार्व स्वीकार करने योग्य पार्यार् जार्ए तब कम्पनी प्रस्तार्वक के पार्स अपनार् स्वीकृति पत्र भेजती है और प्रीमियम घोषित करती है। प्रीमियम अदार् होने के बार्द बीमार् प्रार्रम्भ हो जार्तार् है। इसके लिए कम्पनी तत्काल बीमार्दार्र को ‘‘कवर नोट’’ देती है, जिसमें बीमार् सम्बन्धी विरण और जोखिम के आरम्भ होने की तिथि दी जार्ती है। इसके बार्द बीमार्दार्र के पार्स पॉलिसी भेज दी जार्ती है।

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