ग्रार्म सभार् की बैठक एवं कार्य
नयी पंचार्यत व्यवस्थार् के अन्र्तगत ग्रार्म सभार् को एक महत्वपूर्ण इकार्इ के रूप में मार्नार् गयार् है। एक आदर्श पंचार्यत की नींव ग्रार्म सभार् होती है। अगर नींव मजबूत है तो सार्री व्यवस्थार् उस पर टिकी रह सकती है अगर नींव ही कमजोर यार् ढुलमुल है तो व्यवस्थार् किसी भी समय ढहनी निश्चित है। अत: एक मजबूत़ ग्रार्म सभार् ही पंचार्यत व्यवस्थार् को बनार्ये रख सकती है। प्रार्य: लोग ग्रार्म पंचार्यत तथार् ग्रार्मसभार् में भेद नहीं कर पार्ते जब कि दोनों एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। ग्रार्म सभार् क तार्त्पर्य सम्पूर्ण गार्ंव से है जबकि ग्रार्म पंचार्यत, ग्रार्म सभार् में से ही चुने गये सदस्यों से बनती है। ग्रार्मसभार् के सदस्य वे सभी गार्ंव वार्ले होते हैं जिन्हें मतदार्न क अधिकार होतार् है और जो बार्लिग (उम्र 18 वर्ष से ज्यार्दार्) होते हैं । पंचार्यत अधिनियम की धार्रार् 11 के अनुसार्र ग्रार्म सभार् क तार्त्पर्य गार्ंव के उन सभी नार्गरिकों से होतार् है जिनक नार्म मतदार्तार् सूची में होतार् है। वह स्वतंत्र होकर अपने मत क प्रयोग करते हुये नेतृत्व क चयन कर सकतार् है। प्रत्येक नार्गरिक जो एक जनवरी को 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेतार् है वह वोट देने क अधिकारी है। ग्रार्म सभार् के सदस्य ही जिनकी आयु 21 वर्ष हो चुने जार्ने पर ग्रार्म पंचार्यत के सदस्य बनते हैं।

गार्ंव में रहने वार्ले सभी बार्लिक जिन्हें मत देने क अधिकार है (चार्हे वह महिलार् हो यार् पुरुष, बुर्जुग हो यार् युवार्) तथार् जिनक नार्म मतदार्तार् सूची में शार्मिल है, मिलकर ग्रार्म सभार् बनार्ते हैं। प्रत्येक नार्गरिक जो 1 जनवरी को 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेतार् है वह मत देने क अधिकारी है।

पंचार्यती व्यवस्थार् में ग्रार्म-सभार् क महत्व एवं आवश्यकतार् 

स्थार्नीय स्वशार्सन यार् ग्रार्म स्वरार्ज को गार्ंव स्तर पर स्थार्पित करने में पंचार्यती रार्ज संस्थार्ओं की महत्वपूर्ण भूमिक देखी जार् रही है। एक मजबूत व सक्रिय ग्रार्मसभार् ही स्थार्नीय स्वशार्सन की कल्पनार् को सार्कार कर सकती है। नये पंचार्यती रार्ज के अन्र्तगत अब गार्ंव के विकास की जिम्मेदार्री ग्रार्म पंचार्यत की है। पंचार्यतें ग्रार्मीण विकास प्रक्रियार् को आगे बढ़ार्ने क एक मजबूत मार्ध्यम हैं। लेकिन इसक यह अर्थ नहीं कि केवल निर्वार्चित सदस्य ही इस जिम्मेदार्री को निभार्येगें। इसके लिए ग्रार्मसभार् ही एकमार्त्र ऐसार् मंच है जहार्ं लोग पंचार्यत प्रतिनिधियों के सार्थ मिलकर स्थार्नीय विकास से जुड़ी विभिन्न समस्यार्ओं पर विचार्र कर सकते है और सबके विकास की कल्पनार् को सार्कार रूप दे सकते हैं। स्थार्नीय स्वशार्सन तभी मजबूत होगार् जब हमार्री ग्रार्मसभार् में गार्ंव के हर वर्ग चार्हे दलित हों अथवार् जनजार्ति, महिलार् हो यार् फिर गरीब, सबकी समार्न रूप से भार्गीदार्री हो और जो भी योजनार्यें बनें वे समार्न रूप से सबके हितों को ध्यार्न में रखते हुये बनाइ जार्यें तथार् ग्रार्म विकास संबन्धी निर्णयों में अधिक से अधिक लोगों की भार्गीदार्री हो। लेकिन इसके लिए गार्ंव के अन्तिम व्यक्ति की सत्तार् एवं निर्णय में भार्गीदार्री के लिये ग्रार्मसभार् के प्रत्येक सदस्य को उसके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जार्गरूक कियार् जार्नार् अत्यन्त आवश्यक है।

यहार्ं इस बार्त को समझने की आवश्यकतार् है कि क्यार् ग्रार्मीण समुदार्य, चार्हे वह महिलार् है यार् पुरूष, युवार् है यार् बुर्जुग अपनी इस जिम्मेदार्री को समझतार् है यार् नहीं। क्यार् ग्रार्म विकास संबन्धी योजनार्ओं के नियोजन एवं क्रियार्न्वयन में अपनी भार्गीदार्री के प्रति वे जार्गरूक है? क्यार् उन्हें मार्लूम है कि उनकी निष्क्रियतार् की वजह से कोर्इ सार्मार्जिक न्यार्य से वंचित रह सकतार् है? ग्रार्मीणों की इस अनभिज्ञतार् के कारण ही गार्ंव के कुछ एक ही प्रभार्वशील यार् यूं कहें कि तार्कतवर लोगों के द्वार्रार् ही ग्रार्मीण विकास प्रक्रियार् चलाइ जार्ती है। जब तक ग्रार्म सभार् क प्रत्येक सदस्य पंचार्यती रार्ज के अन्तर्गत स्थार्नीय स्वशार्सन के महत्व व अपनीे भार्गीदार्री के महत्व को नहीं समझेगार्, एवं ग्रार्म विकास के कार्यों के नियोजन एवं क्रियार्न्वयन में अपनी सक्रिय भूमिक को नहीं निभार्येगार्, तब तक एक सशक्त पंचार्यत यार् गार्ंधी जी के स्थार्नीय स्वशार्सन की बार्त करनार् महज एक कल्पनार् है। स्थार्नीय स्वशार्सन रूपी इस वृक्ष की जड़ (ग्रार्मसभार्) को जार्गरूकतार् रूपी जल से सींच कर उसे नवजीवन देकर गार्ंधी जी के स्वप्न को सार्कार कियार् जार् सकतार्।

73वें संविधार्न संशोधन अधिनियम के अनुच्छेद 243 (ब) अनुसार्र ग्रार्म-सभार् गार्ंव की मतदार्तार् सूची में चिन्हित सभी लोगों की संस्थार् है जो रार्ज्य विधार्न मंडल के द्वार्रार् ग्रार्मस्तर पर रार्ज्य के द्वार्रार् लार्गू कानून के अनुरूप उसके द्वार्रार् प्रदत्त कार्यों क संपार्दन करेगी। ग्रार्मसभार् के कार्यों की रूपरेखार् भी रार्ज्यों के द्वार्रार् स्वयं तय की जार्ती है। संविधार्न ने ये सार्री जिम्मेदार्री रार्ज्यों को दी है। संविधार्न की सार्तवीं अनुसूची रार्ज्य की अनुसूची है और पंचार्यत रार्ज भी इसी के अन्र्तगत परिभार्षित है।

ग्रार्मसभार् सदस्यों के अधिकार एवं जिम्मेदार्रियॉं 

ग्रार्म सभार् को पंचार्यत व्यवस्थार् क महत्वपूर्ण अंग मार्नार् गयार् है। पंचार्यत व्यवस्थार् को सुचार्रू रूप से चलार्ने में इसकी अहम् भूमिक हो़ती है। मुख्यत: ग्रार्मसभार् क कार्य ग्रार्म विकास की विभिन्न योजनार्ओं, विभिन्न कार्यों क सुगमीकरण करनार् तथार् लार्भार्थ्र्ार्ी चयन को न्यार्यपूर्ण बनार्नार् है। देश के विभिन्न रार्ज्यों के अधिनियमों में स्पष्ट रूप से ग्रार्मसभार् के कार्यों केार् परिभार्षित कियार् गयार् है। उनमें यह भी स्पष्ट है कि पंचार्यत भी ग्रार्मसभार् के विचार्रों को महत्व देगी। मुख्यत: ग्रार्मसभार् क कार्य ग्रार्मविकास की विभिन्न योजनार्ओं, विभिन्न कार्यों क सुगमीकरण करनार् तथार् लार्भार्थ्र्ार्ी चयन को न्यार्यपूर्ण बनार्नार् है। ग्रार्म पंचार्यतों की विभिन्न गतिविधियों पर नियन्त्ऱण, मूल्यार्ंकन एवं मागदर्शन की दृष्टि से ग्रार्मसभार्ओं को 73वें संविधार्न संशोधन अधिनियम के अन्र्तगत कुछ अधिकार प्रदत्त किये गये हैं। ग्रार्मसभार् के कुछ महत्वपूर्ण कार्य तथार् अधिकार हैं –

  1. ग्रार्मसभार् सदस्य ग्रार्मसभार् की बैठक में पंचार्यत द्वार्रार् किये जार्ने वार्ले विभिन्न कायोर्ं की समीक्षार् कर सकते हैं, यही नहीं ग्रार्मसभार् पंचार्यतों की भविष्य की कार्ययोजनार् व उसके क्रियार्न्वयन पर भी टिप्पणी अथवार् सुझार्व रख सकती है। ग्रार्म पंचार्यत द्वार्रार् पिछले वित्तीय वर्ष की प्रशार्सनिक और विकास कार्यक्रमों की रिर्पोट क परीक्षण व अनुमोदन करती है।
  2. पंचार्यतों के आय व्यय में पार्रदर्शितार् बनार्ये रखने के लिये ग्रार्मसभार् सदस्य को यह भी अधिकार होतार् है कि वे निर्धार्रित समय सीमार् के अन्र्तगत पंचार्यत में जार्कर पंचार्यतों के दस्तार्वेजों को देख सकते हैं आगार्मी वित्तीय वर्ष हेतु ग्रार्म पंचार्यत द्वार्रार् वाषिक बजट क परीक्षण अनुमोदन करनार् भी ग्रार्मसभार् क अधिकार है। 
  3. ग्रार्म सभार् क महत्वपूर्ण कार्य ग्रार्म विकास प्रक्रियार् में स्थाइ रूप से जुड़े रह कर गार्ंव के विकास व हित के लिये कार्य करनार् है। ग्रार्म विकास योजनार्ओं के नियोजन में लोगों की आवश्यकतार्ओं, उनकी प्रार्थमिकतार्ओं को महत्व दिलार्नार् तथार् उनके क्रियार्न्वयन में अपनार् सहयोग देनार् ग्रार्म सभार् के सदस्यों की प्रथम जिम्मेदार्री है।
  4. ग्रार्मसभार् को यह अधिकार है कि वह ग्रार्मपंचार्यत द्वार्रार् किये गये विभिन्न ग्रार्म विकास कार्यों के संदर्भ में किसी भी तरह के संशय, प्रश्न पूछकर दूर कर सकती है। कौन सार् कार्य कब कियार् गयार्, कितनार् कार्य होनार् बार्की है, कितनार् पैसार् खर्च हुआ, कुल कितनार् बजट आयार् थार्, अगर कार्य पूरार् नहीं हुआ तो उसके क्यार् कारण हैं आदि जार्नकारी पंचार्यत से ले सकती है। रार्श्ट्रीय ग्रार्मीण रोजगार्र गार्रण्टी योजनार् के अन्र्तगत ग्रार्म सभार् को विषेश रूप से सार्मार्जिक आडिट करने की जिम्मेदार्री है।
  5. सार्मार्जिक न्यार्य व आर्थिक विकास की सभी योजनार्यें ग्रार्म पंचार्यत द्वार्रार् लार्गू की जार्येंगी। अत: विभिन्न ग्रार्म विकास संम्बन्धी योजनार्ओं के अन्र्तगत लार्भार्थ्र्ार्ी के चयन में ग्रार्मसभार् की एक अभिन्न भूमिक है। प्रार्थमिकतार् के आधार्र पर उचित लार्भार्थ्र्ार्ी क चयन कर उसे सार्मार्जिक न्यार्य दिलार्नार् भी ग्रार्मसभार् क परम दार्यित्व है। 
  6. नये वर्ष की योजनार् निर्मार्ण हेतु भी ग्रार्मसभार् अपने सुझार्ार्व दे सकती है तथार् ग्रार्मसभार् ग्रार्मपंचार्यत की नियमित बैठक की भी निगरार्नी कर सकती है। 
  7. ग्रार्म विकास के लिये ग्रार्म सभार् के सदस्यों द्वार्रार् श्रमदार्न करनार् व धन जुटार्ने क कार्य भी ग्रार्म सभार् करती है। ग्रार्म सभार् यह भी निगरार्नी रखती है कि ग्रार्म पंचार्यत की बैठक सार्ल में हर महीने नियमित रूप से हो रही हैं यार् नहीं। सार्ल में दो बार्र आयोजित होने वार्ली ग्रार्म सभार् की बैठकों में ग्रार्म सभार् के प्रत्येक सदस्य चार्हे वह महिलार् हो, पुरूष हो, युवक हो बुजुर्ग हो, को भार्ार्गीदार्री करने क अधिकर है। ग्रार्म पंचार्यतों को ग्रार्म सभार् के सुझार्वों पर ध्यार्न रखते हुये कार्य करनार् है। 

हमने अक्सर देखार् व अनुभव कियार् है कि ग्रार्म सभार् के सदस्य यार्नि प्रौढ़ महिलार्, पुरूष जिन्होने मत देकर अपने प्रतिनिधि को चुनार् है अपने अधिकार एंव कर्तव्य के प्रति जार्गरूक नहीं रहते। जार्नकारी के अभार्व में वे ग्रार्म विकास में अपनी अहम भूमिक होने के बार्वजूद भार्गीदार्री नहीं कर पार्ते। एक सशक्त, सक्रिय व चेतनार्युक्त ग्रार्म सभार् ही ग्रार्म पंचार्यत की सफलतार् की कुंजी है।

ग्रार्म सभार् की बैठक व कार्यवार्ही 

  1. ग्रार्म सभार् की बैठकें वर्ष में दो बार्र होती हैं। एक रबी की फसल के समय (मर्इ-जून) दूसरी खरीफ की फसल के वक्त (नवम्बर-दिसम्बर)। इसके अलार्वार् अगर ग्रार्म सभार् के सदस्य लिखित नोटिस द्वार्रार् आवश्यक बैठक की मार्ंग करते हैं तो प्रधार्न को ग्रार्म सभार् की बैठक बुलार्नी पड़ती है। 
  2. ग्रार्म सभार् की बैठक में कुल सदस्य संख्यार् क 1/5 भार्ग होनार् जरूरी है अगर कोरम के अभार्व में निरस्त हो जार्ती है तो अगली बैठक में कोरम की आवश्यकतार् नहीं होगी। 
  3. इस बैठक में ग्रार्म सभार् के सदस्य, पंचार्यत सदस्य, पंचार्यत सचिव, खण्ड विकास अधिकारी व विभार्गों से जुड़े अधिकारी भार्ग लेंगे। 
  4. बैठक ऐसे स्थार्न पर बुलाइ जार्नी चार्हिये जहार्ं अधिक से अधिक लोग विशेषकर महिलार्एं भार्गीदार्री कर सकें। 
  5. ग्रार्म सभार् की बैठक क एजेण्डे की सूचनार् कम से कम 15 दिन पूर्व सभी को दी जार्नी चार्हिये व इसकी सूचनार् सावजनिक स्थार्नों पर लिखित व डुगडुगी बजवार्कर देनी चार्हिये।
  6. सुविधार् के लिये अप्रैल 31 माच तक के एक वर्ष को एक वित्तीय वर्ष मार्नार् गयार् है। ग्रार्म प्रधार्न पिछले वर्ष की कार्य वार्ही सबके सार्मने रखेगी। उस पर विचार्र होगार्, पुष्टि होने पर प्रधार्न हस्तार्क्षर करेगार्। 
  7. पिछली बैठक के बार्द क हिसार्ब तथार् ग्रार्म पंचार्यत के खार्तों क विवरण सभार् को दियार् जार्येगार्। पिछले वर्ष के ग्रार्म विकास के कार्यक्रम तथार् आने वार्ले वर्ष के विकास कार्यक्रमों के प्रस्तार्व अन्य कोर्इ जरूरी विषय हो तो उस पर विचार्र कियार् जार्येगार्। 
  8. ग्रार्म सभार् क यह कर्तव्य है कि वह ग्रार्म सभार् की बैठकों में उन्हीं योजनार्ओं व कार्यक्रमों के प्रस्तार्व लार्ये जिनकी गार्ंव में अत्यधिक आवश्यकतार् है व जिससे अधिक से अधिक लोगों को लार्भ मिल सकतार् है। 
  9. जब ग्रार्म सभार् में एक से अधिक गार्ंव होते हैं तो खुली बैठक में प्रस्तार्व पार्रित करने पर बहस के समय काफी हल्लार् होतार् है। सबसे अच्छार् यह रहेगार् कि हर गार्ंव ग्रार्म सभार् की हार्ने वार्ली बैठक से पूर्व ही अपने अपने गार्ंव के लोगों की एक बैठक कर ग्रार्म सभार् की बैठक में रखे जार्ने वार्ले कार्यक्रमों पर चर्चार् कर लें व सर्व-सहमति से प्रार्थमिकतार् के आधार्र पर कार्यक्रमों को सूचिबद्व कर प्रस्तार्व बनार् लें और बैठक के दिन प्रस्तार्वित करें।

ग्रार्म सभार् सदस्यों की भार्गीदार्री बढ़ार्ने हेतु कुछ कदम 

ग्रार्मसभार् सदस्यों की ग्रार्मसभार् की बैठक में भार्गीदार्री न लेने के कारण ही ग्रार्म स्तरीय नियोजन में उनकी भार्गीदार्री नहीं हो पार्ती है। अत: ग्रार्मसभार् के कार्यों के प्रति उनकी विचार्रधार्रार् को व्यार्पक रूप से एक नर्इ दिशार् देने की आवश्यकतार् है तार्कि सभी ग्रार्मसभार् सदस्यों की ग्रार्मसभार् बैठक के प्रति जार्गरूकतार् तथार् रूचि में बढ़े। बैठक में पूर्ण भार्गीदार्री के लिये ग्रार्मसभार् सदस्यों को अपने अधिकारों तथार् कर्तव्यों के प्रति जार्गरूक होनार् होगार्। ग्रार्मसभार् को मजबूत करने में पंचार्यत प्रतिनिधि सार्मुदार्यिक व स्वयं सेवी संगठन एक अहम भूमिक निभार् सकते हैं। 

  1. ग्रार्मसभार् के हर सदस्य की बैठक में भार्गीदार्री के प्रति जार्गरूकतार् बढ़ार्ने के लिये गार्ंव के सावजनिक स्थलों, छार्नियों, (पशुशार्लार्) प्रार्थमिक चिकित्सार् केन्द्रों, आंगनबार्ड़ी केन्द्रों, ग्रार्मीण सूचनार् केन्द्र, पंचार्यत चौक, पंधेरों, विद्यार्लयों आदि में बैठक की सूचनार् चिपकानार् चार्हिए। 
  2. गार्ंव के सम्पूर्ण विकास के लिये महिलार् की भार्गीदार्री भी उतनी ही आवश्यक है जितनी कि पुरूष की। अत: महिलार्ओं की भार्गीदार्री बढ़ार्ने हेतु घर के पुरूषों केार् संवेदनीकरण (समझार्नार्) करनार् जरूरी है। बैठक क समय भी ऐसार् रखनार् चार्हिये कि उनकी ज्यार्दार् से ज्यार्दार् भार्गीदार्री सुनिश्चित की जार् सके।
  3. बैठक से पूर्व प्रभार्त फेरी के मार्ध्यम से ग्रार्मसभार् सदस्यों को बैठक की सूचनार् देंनार् तथार् बैठक में भार्गीदार्री के प्रति उन्हें जार्गरूक करनार् चार्हिए।
  4. ग्रार्म सभार् की बैठक ऐसे स्थार्न पर हो जहार्ं आने में सुविधार् हो और गार्ंव के सभी लोग आ सकें।
  5. ग्रार्मसभार् की बैठक के महत्व के प्रति जार्गरूकतार् हेतु पदयार्त्रार् अथवार् अभियार्न चलार्नार् व निरन्तर सूचनार् क प्रसार्र करनार् चार्हिए। इस अभियार्न में गार्ंव के सेवार्मुक्त शिक्षक, सरकारी कर्मचार्रियों को भी जोड़नार् एक महत्वपूर्ण कार्य हो सकतार् है। बच्चों के मार्ध्यम से ग्रार्मसभार् बैठक पर नार्टक/नुक्कड़ करवार्कर आदर्श और निष्क्रिय ग्रार्मसभार् के महत्व एवं हार्नि क बोध करार्नार् चार्हिए। 

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सक्रिय ग्रार्म सभार् और निष्क्रिय ग्रार्म सभार् 

सक्रिय ग्रार्म सभार् निष्क्रिय ग्रार्म सभार्
सक्रिय ग्रार्म सभार् के सदस्य ग्रार्म सभार् की
बैठक के महत्व को समझते हैं व सक्रिय रूप
से भार्गीदार्री निभार्ते हैं। 
निष्क्रिय ग्रार्म सभार् के सदस्य ग्रार्मसभार् की
 बैठक के महत्व को न समझते हुए बैठक मं े
भार्गीदार्री ही नहीं करते हैं।
 बैठक में सिर्फ उपस्थित ही नहीं रहते हैं
अपितु निर्णय लेने में भार्गीदार्री भी निभार्ते हैं
सार्थ ही बैठक में लिये जार् रहे अनुचित
निर्णयों पर आवार्ज उठार्ते हैं 
बैठक में सिर्फ उपस्थित रहते हैं। और
चुपचार्प रह कर लिए जार् रहे निर्णयों पर
अपनार् वक्तव्य तक नहीें देते हैं। बैठक में
लिये जार् रहे अनुचित निर्णयों पर कोर्इ
प्रतिक्रियार् व्यक्त नहीं करते। 
बैठक में भार्गीदार्री के लिये अन्य सदस्यों को
भी प्रेरित करते हैं
स्वयं ही बैठक में नहीं जार्ते हैं यदि जार्ते हैं
तो अन्य लोगों को प्रेरित नहीं करते। 
बैठक शुरू होने से पहले गार्ंव में चर्चार् के
द्वार्रार् बैठक क मार्होल बनार्ते हैं तथार् बैठक में
रखे जार्ने वार्ल प्रस्तार्व पर भी पूरी तैयार्री के
सार्थ आते हैं। 
बैठक के बार्रे में कोर्इ रूचि नहीं दिखार्ते हैं नार्
ही इन्हें बैठक में उठार्ये जार्ने वार्ले किसी
प्रस्तार्व यार् मुद्दे पर कोर्इ चर्चार् करते हैं। 
सक्रिय ग्रार्म सभार् के सदस्य गार्ंव में हो रहे
विकास कार्यक्रमों की निगरार्नी करते हैं सार्थ
ही ग्रार्म सभार् की बैठक में इन कार्यों पर हो
रहे व्यय पर भी प्रश्न पूछते हैं।
निष्क्रिय ग्रार्म सभार् के सदस्यों को विकास
 कार्यक्रमों की निगरार्नी व उससे सम्बन्धित
प्रश्न पूछने में कोर्इ रूचि नहीं होती है। 

ग्रार्मसभार्ओं में महिलार्ओं की भार्गीदार्री बढ़ार्नार् 

सार्मार्जिक विकास क संन्तुलन बनार्ये रखने के लिये ग्रार्मसभार् में महिलार्ओं को अपने अधिकारों तथार् दार्यित्वों के प्रति जार्गरूकतार् होनार् नितार्न्त आवश्यक है। ग्रार्मविकास की योजनार्यें बनार्ते समय यार् अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चार् करते समय यार् उनसे संबन्धित निर्णय लेते समय महिलार्ओं की भार्गीदार्री भी उतनी ही महत्वपूर्ण एवं आवश्यक है जितनी कि गार्ंव के पुरूषों की। लेकिन यह तभी संभव है जब महिलार्ओं को आगे आने के अवसर मिलेगें और महिलार्यें ग्रार्मसभार् में अपनी भार्गीदार्री की अनिवायतार् के प्रति जार्गरूक होंगी।

हमार्री जनसंख्यार् क आधार् हिस्सार् महिलार्एं हैं नवगठित उत्तरार्खण्ड रार्ज्य में तो कर्इ जिले ऐसे हैं जहार्ं महिलार्ओं की संख्यार् पुरूषों से भी अधिक हैं परिवार्र, गार्ंव समार्ज व देश के सार्मार्जिक एवं आर्थिक विकास में महिलार्ओं के योगदार्न को अब अनदेखार् नहीं कियार् जार् सकतार्। अत: गार्ंव व जनसमुदार्य के विकास से जुड़े मुद्दे चार्हे वह जल, जंगल, जमीन जैसे प्रार्कृतिक संसार्धनों के संरक्षण सवंर्द्वन व उपयोग संबंधी हो यार् गार्ंव में किसी भी निर्मार्ण कार्य के लिए योजनार् बनार्ने क सवार्ल हो यार् फिर आर्थिक विकास के लिए आयसर्जक गतिविधियों जैसे कृषि, बार्गवार्नी, हस्तशिल्प यार् अन्य गतिविधियों संबंधी विषयों पर चर्चार् व निर्णय लेने की बार्त हो, इन सभी प्रक्रियार्ओं में महिलार्ओं को शार्मिल किसी भी विकास प्रक्रियार् की सफलतार् के लिए पहली शर्त है। पंचार्यत संस्थार्ओं में 73वें संविधार्न अधिनियम के अतन्र्गत महिलार्ओं को आरक्षण देकर पंचार्यत प्रतिनिधि के रूप में उन्हें निर्णय प्रक्रियार् से जोड़ार् गयार् है। लेकिन ग्रार्मसभार्ओं में भी मतदार्तार् होने के नार्ते महिलार्ओं की अर्थपूर्ण उपस्थिति अति आवश्यक है। अत: ग्रार्म सभार् की बैठकों में हर परिवार्र से महिलार् एवं पुरूष दोनों को भार्गीदार्री करनी अति आवश्यक है। ग्रार्म सभार् ही ऐसार् मंच है जहार्ं महिलार्एं अपनी समस्यार्एं चार्हे वह चार्रे की समस्यार् हो यार् जल सेार््र तों के सूखने से उत्पन्न हुर्इ पार्नी की समस्यार् हो, अथवार् कृषि कार्य को सरल बनार्ने के लिए किसी तकनीकी की मार्ंग हो यार् फिर सार्मार्जिक न्यार्य, उत्पीड़न व अत्यार्चार्र जैसे मुद्दे को भी पंचार्यत के समक्ष रख सकती हैं व एकजुट होकर अपनी समस्यार्ओं के समार्धार्न के लिए अपने हित में निर्णय करार् सकती हैं। 

ग्रार्मसभार् में महिलार्ओं व उपेक्षित वर्ग की भार्गीदार्री बढाऱ्ने हेतु संभार्वित प्रयार्स 

  1. ग्रार्मसभार् में महिलार्ओं की भार्गीदार्री को बढ़ार्ने के लिये गणपूर्ति में उनकी उपस्थिति को न्यूनतम तय कियार् जार्नार् चार्हिये। महिलार्ओं, कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों को ग्रार्मसभार् की बैठक में जार्ने और अपने व्यक्तिगत ही नहीं गार्ंव से जुड़े सार्मूहिक हित संबन्धी मुददों पर अपनी आवार्ज उठार्ने हेतु प्रेरित एवं प्रशिक्षित करनार् चार्हिए। 
  2. गार्ंव के आर्थिक एवं सार्मार्जिक विकास में महिलार्ओं की भार्गीदार्री भी उतनी ही जरूरी है जितनी कि पुरूषों की, उनकी भार्गीदार्री को प्रार्य: घर के पुरूषों के द्वार्रार् अनदेखार् कियार् जार्तार् है। ग्रार्मसभार् की बैठक में उनकी भार्गीदार्री के महत्व के प्रति जार्गरूकतार् लार्ने के लिये घर के पुरूषों क संवेदनीकरण कियार् जार्नार् जरूरी है। 
  3. पर्वतीय क्षेत्रों में महिलार्यें कृषि एवं घर के कार्यों के सार्थ-सार्थ इंर्ध् ार्न एवं चार्रार् लार्ने के लिये प्रार्य: घर से बार्हर रहती हैं । अत: बैठक क समय उनकी सुविधार्नुसार्र अवश्य ही रखार् जार्नार् चार्हिये तार्कि उनमें महिलार्यें अधिक से अधिक भार्ग ले सकें। 
  4. ग्रार्म सभार् की बैठक से पूर्व वाड स्तर पर महिलार्ओं की अलग से बैठक क आयोजन कर उन्हें ग्रार्म सभार् की बैठक में उठार्ये जार्ने वार्ले मुद्दों पर प्रशिक्षित करनार् चार्हिए। इस हेतु गार्ंव के जार्गरूक व्यिक्यों एवं ग्रार्म पंचार्यत प्रतिनिधियों क संवेदनीकरण करनार् चार्हिए तार्कि वे स्वयं गार्ंव की महिलार्ओं व उपेक्षित वर्ग को ग्रार्म सभार् के लिए तैयार्र व प्रेरित कर सकें। 
  5. महिलार्ओं पर अकसर कार्य क बोझ अधिक रहतार् है अत: महिलार्ओं को बैठक के महत्व पर जार्गरूक करते हुए यह सलार्ह देनार् कि वे चार्रार्, इंर्ध् ार्न को बैठक होने के पहले दिन ही जमार् कर लें तार्कि बैठक के लिए समय निकाल सकें।
  6. निर्बल वर्ग व महिलार्ओं के संकोच, भय व झिझक को कम करनार् तथार् विचार्रों के आदार्न-प्रदार्न के कौशल को बढ़ार्नें के प्रयत्न करनार् चार्हिए, तार्कि वे अपनी बार्त को नि:संकोच बैठक में कह सकें। 
  7. गार्ंव की किसी एक जार्गरूक महिलार् को महिलार् प्रेरक के रूप में विकसित कर, आवश्यक प्रशिक्षण द्वार्रार् उसक ज्ञार्नवर्धन करनार् चार्हिए तार्कि वह गार्ंव की अन्य महिलार्ओं को भी ग्रार्मसभार् की बैठक में भार्गीदार्री व उसमें लिये जार्ने वार्ले निर्णयों के प्रति जार्गरूक कर सके। ग्रार्मसभार् की बैठक में महिलार् प्रेरक की उपस्थिति में गार्ंव की महिलार्यें अपने विचार्र रखने में संकोच नहीं करेंगी । सार्थ ही यह ध्यार्न रखार् जार्नार् आवष्यक है कि कोर्इ भी उन्हें अपने विचार्र रखते समय हतोत्सार्हित न कर सके। 

पंचार्यत प्रतिनिधियों की ग्रार्मसभार् के प्रति जवार्बदेही 

ग्रार्मसभार् तथार् ग्रार्म पंचार्यत एक दूसरे के बिनार् अधूरे हैं। ग्रार्मसभार् ग्रार्म पंचार्यत के सार्थ एक सहयोगी और एक मागदर्शक की भूमिक निभार् सकती है। लेकिन पंचार्यत प्रतिनिधियों की भी उसके प्रति कुछ जिम्मेदार्रियार्ं बनती हैं जिन्हें निभार्ने से गार्ंव विकास की ओर बढ़ सकतार् है। बहुत सी ऐसी बार्तें हैं जिनके संदर्भ में पंचार्यत को ग्रार्मसभार् के प्रति जवार्बदेह होनार् पड़तार् है। 

  1. ग्रार्मविकास सम्बन्धी जो भी योजनार् गार्ंव में आये, उसकी सार्री जार्नकारी (बजट व कार्यक्रम को लेकर) पंचार्यत के सूचनार् पट पर लग जार्नी चार्हिये तार्कि गार्ंव के सभी लोगों को इसक पतार् चल सके। 
  2. गार्ंव के लिये जब योजनार् बने तो ग्रार्मसभार् के सभी सदस्यों के सार्थ विचार्र विमर्श के बार्द बने। सबकी निर्णय लेने में भार्गीदार्री ली जार्ये । 
  3. ग्रार्मसभार् के सदस्यों को बैठक की सूचनार् समय पर देनार् तथार् सूचनार् को सावजनिक स्थार्न पर लगार्नार् ग्रार्म पंचार्यत की जिम्मेदार्री है। 
  4. ग्रार्मसभार् जो प्रस्तार्व बनार्ये अथवार् निर्णय ले, पंचार्यत प्रतिनिधियों को उसे सम्मार्न देनार् होगार्। 
  5. ग्रार्म विकास योजनार् के अन्तर्गत अगर लार्भार्थ्र्ार्ी क चयन करनार् है तो सब सदस्यों के सार्मने, प्रार्थमिकतार् के आधार्र पर तथार् सर्वसम्मति से हो। 
  6. पंचार्यत प्रतिनिधियों को चार्हिये कि निर्णय प्रक्रियार् में मुठठ्ी भर तार्कतवर यार् प्रभार्वशार्ली लोगों को नहीं अपितु ग्रार्मसभार् के प्रत्येक सदस्य को शार्मिल करें। भार्गीदार्री निभार्ने हेतु उन्हें प्रेरित करने के लिये स्वयं आगे आयें, तभी दोनों सच्चे अर्थों में एक दूसरे के पूरक बनेंगे। 

ग्रार्म पंचार्यत समितियों में ग्रार्मसभार् की भूमिका 

गार्ंव के समुचित विकास हेतु पंचार्यत स्तर पर विभिन्न कार्यों के संपार्दन हेतु विभिन्न समितियों के गठन क प्रार्वधार्न है जैसे विकास एवं कल्यार्ण समिति, शिक्षार् समिति, आदि। मूल्यार्ंकन की दृष्टि से ग्रार्मपंचार्यत की विभिन्न समितियार्ं ग्रार्मसभार् के प्रति जवार्बदेह होती हैं। ग्रार्मसभार् को अधिकार है कि वह उनके कार्यों की निगरार्नी करे तथार् उनके कार्यों क मूल्यार्ंकन करे। ग्रार्मसभार्, पंचार्यत समितियों के कार्यों की निगरार्नी हेतु एक निगरार्नी कर्तार् (वार्च-डार्ग) क काम कर सकती है तो एक सहयोगी की भूमिक भी निभार् सकती है। वह एक मूल्यार्ंकन कर्तार् की भूमिक निभार् सकती है तो एक मागदर्शक भी बन सकती है।

ग्रार्मसभार्- स्थार्नीय स्वशार्सन की आधार्रशिलार् 

गार्ंधी जी ने ग्रार्मस्वरार्ज की जो कल्पनार् की थी उसे सार्कार करने के लिये पंचार्यतों के आधार्रभूत स्तम्भ “ग्रार्म सभार्” को पहचार्ननार् होगार्। यदि आधार्र ही मजबूत न होगार् तो एक मजबूत इमार्रत की कल्पनार् ही व्यर्थ है। पंचार्यत रूपी इमार्रत क आधार्र सिर्फ ग्रार्मीण समार्ज के कुछ एक प्रभार्वशार्ली अथवार् तार्कतवर लोग ही नहीं हैं, अपितु वहार्ं रह रहे विभिन्न वर्गों के वे सभी लोग हैं जिन्हें मत देंने क अधिकार है। ग्रार्मसभार् तभी सशक्त होगी जब सभी समार्न रूप से विकास की मुख्य धार्रार् से जुड़ेंगे। विभिन्न विकास कार्यों की योजनार् निर्मार्ण तथार् कार्यार्न्वयन में अपनी भूमिक के महत्व को समझेंगे। ग्रार्मसभार् की बैठक में अपनी उपस्थिति की अनिवायतार् के प्रति भी संवेदनशील हों। यदि देखार् जार्ये तो ग्रार्मसभार् एक ऐसी आधार्रभूत इकार्इ है जिसमें उस ग्रार्मसभार् के सभी सदस्य नि:संकोच आकर गार्ंव से जुड़ी विभिन्न समस्यार्ओं तथार् मुद्दों पर विचार्र विमर्श कर सकते हैं। ग्रार्म सभार् के सभी लोग सहभार्गितार् से गार्ंव के विकास के लिये योजनार् बनार् सकते हैं। पंचार्यत में चार्हे कार्यक्रम क नियोजन हो यार् क्रियार्न्वयन यार् पूर्ण हुये कार्यों क मूल्यार्ंकन एवं निगरार्नी, कोर्इ भी कार्य लोगों की सहभार्गितार् के बिनार् पूर्ण नहीं हो सकतार्। अत: पंचार्यत को सफल बनार्ने के लिये सभी कार्यों व निर्णय स्तर पर सबकी भार्गेदार्री व सहयोग को “ार्ार्मिल करनार् अति आवश्यक है। सभी की सहभार्गितार् से जहार्ं एक ओर पंचार्यत संगठित व मजबूत होगी वहीं दूसरी ओर पंचार्यत पर आम लोगों क विश्वार्स भी बढ़ेगार्। ग्रार्म विकास कर प्रक्रियार् में ग्रार्म समुदार्य की सक्रिय सहभार्गितार् के बिनार् ग्रार्म स्वरार्ज क सपनार् अधूरार् ही रहेगार्। अत: ग्रार्म समुदार्य को ग्रार्म के विकास व स्वयं उसकी सशक्ततार् के प्रति जार्गरूक करनार् होगार् तभी एक सशक्त ग्रार्मसभार् क निर्मार्ण होगार् और गार्ंव विकास की ओर बढ़ सकेगार्।

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