ग्रार्म पंचार्यत क गठन, चुनार्व प्रणार्ली, कार्य, एवं शक्तियार्ं

संविधार्न के 73वें संशोधन अधिनियम द्वार्रार् पंचार्यती रार्ज संस्थार्ओं को मजबूती प्रदार्न की गर्इ है। इस अधिनियम के द्वार्रार् स्थार्नीय स्वशार्सन व विकास की इकार्इयों को एक पहचार्न मिली है। त्रिस्तरीय पंचार्यत व्यवस्थार् में ग्रार्म पंचार्यत ग्रार्म विकास की पहली इकार्इ मार्नी गर्इ है। गार्ंव के लोगों के सबसे नजदीक होने के कारण इसक अत्यधिक महत्व है। ग्रार्म प्रधार्न, उपप्रधार्न व सदस्यों से मिलकर ग्रार्म पंचार्यत बनती है। ग्रार्म पंचार्यत के प्रतिनिधियों क चयन ग्रार्म सभार् के सदस्य चुनार्व के द्वार्रार् करते है। अत: ग्रार्म सभार् के सदस्यों से इसक सीधार् नार्तार् होतार् है। ग्रार्म पंचार्यत ग्रार्म सभार् के निर्देषन में ग्रार्म सभार् के सदस्यों की समस्यार्ओं के समार्धार्न हेतु कार्य करती है। गार्ंव के विकास व सार्मार्जिक न्यार्य की योजनार् बनार्नार् इनक प्रमुख काम है। कर्इ लोगों क मार्ननार् है कि पंचार्यत लोगों की आवार्ज व आवश्यकतार्ओं को केन्द्र तक पहँुचार्ने क एक कारगर मंच हो सकतार् है। अत: पंचार्यत सही मार्यने में लोगों की आवार्ज बने इसके लिये जरूरी है कि ग्रार्म पंचार्यत की बैठकें बरार्बर होती रहें और इसमें सभी सदस्यों की उचित भार्गीदार्री हो। एक ग्रार्म पंचार्यत तभी सशक्त हो सकती है जब हर सदस्य अपने विचार्रों को पंचार्यत की बैठक में बिनार् किसी संकोच के रख सके, गार्ंव की समस्यार्ओं तथार् अन्य मुद्दों पर चर्चार् करे और उनके निदार्न के लिये प्रयत्न करे।

ग्रार्म पंचार्यत क गठन (धार्रार्- 12-1) 

सर्व प्रथम यह जार्ननार् जरूरी है कि ग्रार्म पंचार्यत क गठन कैसे होतार् है। त्रिस्तरीय पंचार्यत व्यवस्थार् की पहली इकार्इ ग्रार्म पंचार्यत में एक प्रधार्न व कुछ सदस्य होते हैं। ग्रार्म पंचार्यत के सदस्यों की संख्यार् पंचार्यत क्षेत्र की आबार्दी के अनुसार्र निम्न प्रकार से होगी –

  1. 500 तक की जनसंख्यार् पर –      05 सदस्य 
  2. 501 से 1000 तक की जनसंख्यार् पर –     07 सदस्य 
  3. 1001 से 2000 तक की जनसंख्यार् पर –     09 सदस्य 
  4. 2001 से 3000 तक की जनसंख्यार् पर –     11 सदस्य 
  5. 3001 से 5000 तक की जनसंख्यार् पर –     13 सदस्य 
  6. 5000 से अधिक की जनसंख्यार् पर –     15 सदस्य

प्रधार्न तथार् 2 तिहाइ सदस्यों के चुनार्व होने पर ही पंचार्यत क गठन घोषित कियार् जार्येगार्।

ग्रार्म पंचार्यत प्रतिनिधियों के चुनार्व 

1. प्रधार्न क चुनार्व (धार्रार्- 11- ख – 1) 

ग्रार्म सभार् सदस्यों द्वार्रार् प्रत्यक्ष निर्वार्चन प्रणार्ली द्वार्रार् प्रधार्न क चुनार्व कियार् जार्येगार्। यदि पंचार्यत के सार्मार्न्य चुनार्व में प्रधार्न क चुनार्व नहीं हो पार्तार् है तथार् पंचार्यत के लिए दो तिहाइ से कम सदस्य ही चनु े जार्ते है उस दशार् में सरकार एक प्रशार्सनिक समिति बनार्येगी। जिसकी सदस्य संख्यार् सरकार तय करेगी। सरकार एक प्रशार्सक भी नियुक्त कर सकती है। प्रशार्सनिक समिति व प्रशार्सक क कार्यकाल 6 मार्ह से अधिक नहीं होगार्। इस अवधि में ग्रार्म पंचार्यत, उसकी समितियों तथार् प्रधार्न के सभी अधिकार इसमें निहित होंगे। इन छ: मार्ह में नियत प्रक्रियार् द्वार्रार् पंचार्यत क गठन कियार् जार्येगार्।

2. उपप्रधार्न क चुनार्व (धार्रार्- 11 – ग – 1) 

उप प्रधार्न क चुनार्व ग्रार्म पंचार्यत के सदस्यों के द्वार्रार् अपने में से ही कियार् जार्ऐगार्। यदि उप प्रधार्न क चुनार्व न हो पार्ये तो नियत अधिकारी किसी सदस्य को उप प्रधार्न मनोनीत कर सकतार् है।

पंचार्यतों क कार्यकाल 

ग्रार्म पंचार्यत की पहली बैठक के दिन से 5 सार्ल तक ग्रार्म पंचार्यत क कार्यकाल होतार् है। यदि पंचार्यत को उसके कार्यकाल पूर्ण होने के 6 मार्ह पूर्व भंग कियार् जार्तार् है तो ग्रार्म पंचार्यत में पुन: चुनार्व करवार्कर पंचार्यत क गठन कियार् जार्तार् है। इस नवनिर्वार्चित पंचार्यत क कार्यकाल 5 वर्ष के बचे हुए समय के लिए होगार् अर्थार्त बचे हुए छ: मार्ह के लिए ही होगार्।

पंचार्यतों की बैठक 

पंचार्यतीरार्ज को स्थार्नीय स्वशार्सन की इकार्इ के रूप में स्थार्पित करने की दिशार् में पंचार्यतों में ग्रार्म सभार् व ग्रार्म पंचार्यतों की बैठकों क आयोजन विशेष महत्व रखतार् है। 73वें संविधार्न संशोधन के द्वार्रार् जो नर्इ पंचार्यत व्यवस्थार् लार्गू हुर्इ ह,ै उसमें ग्रार्म पंचार्यतों व ग्रार्म सभार् की बैठकों क आयोजन वैधार्निक रूप से आवश्यक मार्नार् गयार् है। यही नहीं इन बैठकों में प्रधार्न व उप-प्रधार्न सहित अन्य पंचार्यत सदस्यों की भार्गेदार्री अत्यन्त आवश्यक है। इसके सार्थ ही ग्रार्मीण विकास से जुड़े विभिन्न रेखीय विभार्ग के प्रतिनिधियों द्वार्रार् भी बैठक में भार्गीदार्री की जार्येगी। महिलार्, दलित व पिछड़े वर्ग के लोगों की भार्गीदार्री के बिनार् बैठकों क कोर्इ महत्व नहीं है। अत: पंचार्यतों की बैठकों क नियमित समय पर आयोजन व उन बैठकों में समस्त प्रतिनिधियों की भार्गीदार्री विकेन्द्रीकरण की दिशार् में किये गये प्रयार्सों को सार्कार करने क एक महत्वपूर्ण मार्ध्यम है। अक्सर यह देखार् गयार् है कि ग्रार्म सभार् यार् ग्रार्म पंचार्यतों की बैठकों में प्रतिनिधियों व ग्रार्म सभार् सदस्यों की समुचित भार्गीदार्री न होने से बैठकों में दो-चार्र प्रभार्वशार्ली लोगों द्वार्रार् ही निर्णय लेकर ग्रार्म विकास के कार्य किये जार्ते हैं। अत: अगर ग्रार्मस्वरार्ज यार् स्थार्नीय स्वशार्सन को मजबूत बनार्नार् है तो पंचार्यत प्रतिनिधियों व ग्रार्म सभार् के सदस्यों को अपनी जिम्मेदार्री क अहसार्स होनार् जरूरी है। सार्थ ही इन बैठकों को पूरी तैयार्री के सार्थ आयोजित कियार् जार्नार् चार्हिए।

1. ग्रार्म पंचार्यत की बैठक के आयोजन से संबंधित कार्यवार्ही 

ग्रार्म पंचार्यत की बैठक प्रत्येक मार्ह में एक बार्र जरूर होनी चार्हिये। जिस गार्ंव में पंचार्यत घर होगार् वहीं बैठक होगी। दो लगार्तार्र बैठकों के बीच दो मार्ह से अधिक क अन्तर नहीं होनार् चार्हिये।

  1. पंचार्यत की बैठक की सूचनार् निश्चित तार्रीख के कम से कम पार्ंच दिन पहले लिखित नोटिस से सदस्यों को दी जार्येगी। सूचनार् को ग्रार्म के प्रमुख स्थार्नों पर चिपकानार् होगार्। 
  2. प्रधार्न पंचार्यत की बैठक की अध्यक्षतार् करेगार्/करेगी तथार् समय, स्थार्न व तार्रीख तय करेगार्/करेगी। उसके गैर हार्जिरी में उपप्रधार्न द्वार्रार् बैठक की अध्यक्षतार् की जार्येगी।प्रधार्न, उपप्रधार्न दोनों की गैर हार्जिरी में प्रधार्न बैठक में अध्यक्षतार् के लिए किसी सदस्य क नार्म पहले दे सकतार्/सकती है यार् उसके द्वार्रार् चुनार् अधिकारी किसी सदस्य क नार्म अध्यक्षतार् के लिये दे सकतार्/सकती है। इन सब की नार्मौजूदगी में ग्रार्म पंचार्यत किसी सदस्य को बैठक की अध्यक्षतार् करने के लिये चुन सकती है।
  3. पंचार्यतेार्ं की बैठकों में सदस्यों की एक तिहाइ संख्यार् क होनार् जरूरी है इसे कोरम कहते है। जिसके बिनार् बैठक नहीं हो सकती। सरल शब्दों में पंचार्यत सदस्य, प्रधार्न ओर उपप्रधार्न को मिलार् कर पूरे सदस्यों की संख्यार् यदि 18 है तो 6 के होने पर बैठक हो सकेगी। कोरम के न होने से यदि बैठक नहीं हो सके तो सदस्यों को दुबार्रार् नोटिस देनार् होगार्। इस बैठक में कोरम की जरूरत नहीं होगी।
  4. पंचार्यत के एक तिहाइ सदस्य यदि लिख कर बैठक बुलार्ने की मार्ंग करें तो 15 दिन के अन्दर प्रधार्न को बैठक बुलार्नी होगी। अगर किसी कारण वश प्रधार्न बैठक नहीं बुलार्तार् है तो ए. डी. ओ. पंचार्यत द्वार्रार् बैठक बुलाइ जार्येगी। 
  5. बैठक की कार्यवार्ही को एक रजिस्टर में लिखार् जार्येगार् जिसे “एजेन्डार् रजिस्टर” कहते हैं। 

2. बैठक से पहले 

  1. ग्रार्म पंचार्यतों की हर मार्ह होने वार्ली बैठक में प्रतिनिधि, वाड की समस्यार्ओं पर चर्चार्, विभिन्न योजनार्ओं के अन्तर्गत हुए आय-व्यय क ब्यौरार्, जिलार् यार् ब्लार्क से मिली सूचनार् क आदार्न-प्रदार्न करते हैं।
  2. इस बैठक में पंचार्यत रार्ज अधिकारी भी भार्गीदार्री करते हैं। अत: प्रधार्न को बैठक में उपस्थित होने वार्ले लोगों की सूची, किन विषयों पर चर्चार् होगी उसक एजेण्डार् यार् कार्य सूची तैयार्र कर लेनी चार्हिए। 
  3. बैठक क स्थार्न सभी की सुविधार् व महिलार्ओं की पहुँच को ध्यार्न में रखकर तय करनार् चार्हिए।
  4. जिस विषय पर बैठक हो रही है उससे सम्बन्धित जार्नकार लोगों को भी बैठक में बुलार्नार् चार्हिए तार्कि उनके सुझार्वों क लार्भ लियार् जार् सके। अगर कार्यक्रम नियोजन को लेकर बैठक है तो नियोजन से सम्बन्धित विभार्गीय विशेषज्ञ को बैठक में बुलार्नार् चार्हिए। यदि वित्त प्रबन्धन से सम्बन्धित बैठक है तो वित्त से सम्बन्धित विशेषज्ञ को बैठक में बुलार्नार् चार्हिए। 
  5. बैठक क एजेण्डार् बनार्ते समय सरल व स्पष्ट शब्दों क प्रयोग करें व विषयों को क्रमार्नुसार्र रखें। सार्थ ही बैठक प्रार्रम्भ होने व समार्प्त होने क समय अवश्य लिखार् होनार् चार्हिए।
  6. बैठक क समय ऐसार् हो जिसमें अधिक से अधिक प्रतिनिधियों की भार्गीदार्री हो, महिलार्ओं पर अत्यधिक कार्यबोझ होने से उनकी बैठक में अनुपस्थिति अधिक रहती है। अत: प्रधार्न को महिलार्ओं की समस्यार् के प्रति संवेदनशील रहते हुए बैठक क समय ऐसार् रखनार् चार्हिए तार्कि महिलार् प्रतिनिधि सक्रिय रूप से भार्गीदार्री कर सकें।
  7. महिलार् सदस्यों की भार्गेदार्री सुनिश्चित करने के लिए बैठक से पूर्व ही उनको बैठक में आने के लिए प्रेरित करनार् चार्हिए। यह एक योग्य व सक्रिय प्रधार्न क कर्तव्य भी है। 
  8. बैठक के आयोजन से पूर्व प्रधार्न को गार्ंव के सभी सदस्यों व गार्ंव के लोगों क बैठक के बार्रे में बतार्नार् चार्हिए। व प्रत्येक सदस्य के घर एजेण्डार् भेजकर सदस्यों द्वार्रार् उठार्ये जार्ने वार्ले मुद्दों की सूचनार् भी एकत्र करनी चार्हिए।

ग्रार्म पंचार्यतों की कार्यवार्ही 

गार्म पंचार्यत की कार्यवार्ही के कुछ कायदे हैं जिनक ध्यार्न हर ग्रार्म प्रधार्न को रखनार् चार्हिय। बैठक में सर्वप्रथम पिछली बैठक की कार्यवार्ही पढ़कर सुनाइ जार्येगी तथार् सदस्यों द्वार्रार् सर्व सम्मति से पार्रित होने पर प्रधार्न उस पर अपने हस्तार्क्षर करेगी/करेगार्। इसके पष्चार्त पिछले मार्ह में किये गये विकास कार्यों को सबके सार्मने बैठक में रखार् जार्येगार् व उससे सम्बन्धित हिसार्ब-कितार्ब व व्यय को ग्रार्म पंचार्यत के सार्मने रखकर उस पर विचार्र कियार् जार्येगार्। अगर रार्ज्य, जिलार् व ब्लार्क स्तर से पंचार्यत को कोर्इ महत्वपूर्ण सूचनार् मिली है तो उसको पंचार्यत की बैठक में पढ़कर सुनार्यार् जार्येगार्। ग्रार्म पंचार्यत की बैठक में ग्रार्म पंचार्यत की समितियों की कार्यवार्ही पर भी विचार्र होगार्। इन कार्यों के पष्चार्त मतदार्तार् सूची, परिवार्र रजिस्टर, जन्म मृत्यु रजिस्टर में किये गये व किये जार्ने वार्ले नार्मार्ंकन यार् बदलार्व पर चर्चार् की जार्येगी।यदि कोर्इ पंचार्यत सदस्य प्रशार्सन यार् कृत्यों से सम्बन्धित किसी विषय पर प्रस्तार्व लार्नार् चार्हे यार् प्रश्न उठार्नार् चार्हे तो उसकी एक लिखित सूचनार् बैठक से 11 दिन पहले प्रधार्न यार् उपप्रधार्न को देनी होगी। प्रधार्न किसी भी प्रस्तार्व को स्वीकार करने के सम्बन्ध में निर्णय लेगार्/लेगी। प्रस्तार्व यार् प्रश्न नियम के अनुसार्र होने चार्हिये व विवार्द बढ़ार्ने वार्ले मनगढ़ंत यार् किसी जार्ति/ व्यक्ति के लिये अपमार्नजनक नहीं होने चार्हिये। यदि कोर्इ भी प्रस्तार्व यार् प्रश्न संविधार्न के नियमों के अनुरूप नहीं है तो प्रधार्न उन्हें पूछने के लिये मनार् कर सकती/सकतार् है।

1. बैठक के दौरार्न ध्यार्न देने वार्ली बार्तें 

प्रधार्न ग्रार्म पंचार्यत क मुखियार् होने के नार्ते बैठक क आयोजन करती/करतार् है। बैठक के दौरार्न अपने विचार्रों को ठीक प्रकार से रखनार्, चर्चार् क सही रूप से संचार्लन करनार्, बैठक में उठार्ये मुद्दों पर सदस्यों को सन्तुष्ट करनार् जैसे अनेक बार्तें हैं जिन्हें प्रधार्न को बैठक के दौरार्न ध्यार्न में रखनी है।

  1. बैठक के प्रार्रम्भ में प्रधार्न सभी सदस्यों क स्वार्गत करनार् चार्हिए तथार् बैठक के एजेण्डार् को सभी सदस्यों के सम्मुख रखनार् चार्हिए। प्रधार्न को यह ध्यार्न रखनार् है कि अपनी बार्त रखते समय वह सभी उपस्थित लोगों की तरफ देख कर अपनी बार्त को कहे। केवल एक ही व्यक्ति की तरफ देखते हुए अपनी बार्त नहीं कहनी चार्हिए। चर्चार् के दौरार्न यदि कोर्इ दूसरार् बोल रहार् हो तो उसे बीच में नही टोकनार् चार्हिए अपितु बोलने वार्ले को अपनी बार्त समार्प्त करने क मौक देनार् चार्हिए।
  2. बैठक में यदि कोर्इ सदस्य अपनी बार्त रख रहे हों तो अपनी बार्त शुरू करने से पहले ‘मार्ननीय’ प्रधार्न जी यार् अध्यक्ष जी कह कर सम्बोधन करनार् चार्हिए। 
  3. यदि बैठक में कोर्इ प्रश्न पूछनार् है यार् कोर्इ सूचनार् देनी है तो प्रधार्न की अनुमति लेकर अपनी बार्त रखी जार् सकती है। और यदि कोर्इ बार्त आपकी समझ में न आयी हो तो वह भी प्रधार्न की अनुमति मार्ंगकर स्पष्ट की जार् सकती है।
  4. अगर किसी मुद्दे पर चर्चार् विषय से हट गर्इ हो तो ऐसी स्थिति में हस्तक्षेप द्वार्रार् चर्चार् को पुन: मुद्दे पर लार्नार् चार्हिए व चर्चार् को संतुलित बनार्ये रखनार् चार्हिए।
  5. कुछ सदस्य खार्सकर महिलार्एं, दलित व पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधि अपनी बार्त नहीं रखते व बैठक में चुप्पी सार्धे रहते हैं। अत: प्रधार्न व सक्रिय सदस्यों को चार्हिए कि वे उन लोगों को विशेष रूप से प्रेरित करें, उन्हेंं अपनी बार्त रखने के लिए उचित वार्तार्वरण प्रदार्न करें तार्कि महिलार्एं बिनार् झिझक, संकोच व डर के अपनी बार्त को बैठक में रख सकें। 

3. बैठक क समार्पन 

बैठक के समार्पन से पहले बैठक में लिये गये निर्णयों को एक बार्र सभी को पढकर सुनार्नार् चार्हिए व उसके क्रियार्न्वयन से सम्बन्धित जिम्मेदार्री भी तय हो जार्नी चार्हिए। जिम्मेदार्री सुनिश्चित करते समय यह भी तय कर लेनार् चार्हिए कि अमुक कार्य कब पूरार् होगार्। बैठक की कार्यवार्ही सुनार्ने के पश्चार्त उस पर प्रधार्न ग्रार्म पंचार्यत तथार् ग्रार्म पंचार्यत विकास अधिकारी (पंचार्यत सचिव) के हस्तार्क्षर करवार्ने चार्हिए। बैठक समार्पन करते समय प्रधार्न/अध्यक्ष को बैठक में उपस्थित सभी प्रतिभार्गियों क धन्यवार्द करनार् चार्हिए। बैठक की कार्यवार्ही की एक प्रति सहार्यक विकास अधिकारी (पंचार्यत) /खण्ड विकास अधिकारी को भेजनी चार्हिए।

4. ग्रार्म प्रधार्न के कार्य एंव अधिकार

  1. ग्रार्मसभार् की एवं ग्रार्म पंचार्यत की बैठक बुलार्नार् व बैठक की कार्यवार्ही पर नियन्त्रण करनार्। 
  2. ग्रार्म पंचार्यतों में चल रही विकास योजनार्ओं,निर्मार्ण कार्य व अन्य कार्यक्रमों की जार्नकारी रखनार्। 
  3. पंचार्यत की आर्थिक व्यवस्थार् और प्रशार्सन की देखभार्ल करनार् तथार् इसकी सूचनार् गार्ंव वार्लों को देनार्।
  4. पंचार्यती रार्ज संम्बन्धी विभिन्न रजिस्टरों क रखरखार्व करनार् व ग्रार्म पंचार्यत द्वार्रार् रखे गये कर्मचार्रियों की देखभार्ल करनार्।
  5. ग्रार्म पंचार्यत के कार्यों को क्रियार्न्वित करनार् व सरकारी कर्मचार्रियों से आवश्यक सहयोग लेनार् व सहयोग देनार्।
  6. ग्रार्मपंचार्यत संम्बन्धी संम्पत्तियों की सुरक्षार् व्यवस्थार् करनार् तथार् ग्रार्म पंचार्यत द्वार्रार् निर्धार्रित विभिन्न शुल्कों की वसूली भी सुनिश्चित करनार्। 

ग्रार्म पंचार्यत सचिव के कार्य एवं अधिकार 

पंचार्यत सचिव क प्रथम कार्य पंचार्यत अधिनियम व उसके अन्र्तगत बने नियमों , विभार्गीय आदेशों क सार्वधार्नी से अघ्ययन करनार् व उनक पार्लन सुनिश्चित करवार्नार् है।

  1. ग्रार्म पंचार्यत कार्यार्लय को व्यवस्थित करनार् तथार् पंचार्यत के समस्त अभिलेखों क विषयवार्र रख-रखार्व करनार् सचिव क कर्तव्य है। इसके सार्थ ही पंचार्यत के पुरार्ने अभिलेखों को पंजीबद्ध करके सुरक्षित रखनार् होतार् है।
  2. विभिन्न योजनार्ओं हेतु पार्त्र लार्भाथियों क सर्वेक्षण करनार्। 
  3. प्रधार्न की सहमति से ग्रार्म पंचार्यत की बैठक बुलार्ने की कार्यवार्ही करनी होती है सार्थ ही बैठक क एजेण्डार् भी तैयार्र करनार् होतार् है। सचिव को पंचार्यतों की बैठकों की समय पर सभी सदस्यों को सूचनार् देनी होती है। बैठक में जो सदस्य उपस्थित नहीं हैं, उनकी सूचनार् प्रधार्न केार् देनी होती है। सचिव ही ग्रार्म पंचार्यत की बैठकों की कार्यवार्ही क लेखन करतार् है। 
  4. विकास खण्ड द्वार्रार् मार्ंगी गर्इ सूचनार्ओं को ग्रार्म पंचार्यत द्वार्रार् समय से प्रेषित करनार् होतार् है। 
  5. सचिव द्वार्रार् ग्रार्म पंचार्यत में विकास कार्यों के सम्पार्दन में ग्रार्म पंचार्यत व पंचार्यत समितियों को सहयोग दियार् जार्तार् है। ग्रार्म पंचार्यत की समितियों की बैठकों की कार्यवार्ही क विवरण रखनार् व उसे पंचार्यत की बैठक में प्रस्तुत करनार् सचिव क ही कार्य है। सार्थ ही ग्रार्मपंचार्यत क वाषिक प्रतिवेदन हर सार्ल निश्चित तिथि तक तैयार्र कर उसे पंचार्यत की बैठक में रखनार् व उनपर कार्यवार्ही सुनिश्चित करवार्नार् सचिव क कार्य है। 
  6. सचिव द्वार्रार् पंचार्यत में विभिन्न स्रोतों से प्रार्प्त रार्षि को पंचार्यत कोष में जमार् करवार्यार् जार्तार् है , उसक हिसार्ब-कितार्ब रखार् जार्तार् है तथार् उनके व्यय हेतु आवश्यक कार्यवार्ही की जार्ती है। 

प्रधार्न, उप-प्रधार्न पर आन्तरिक नियन्त्रण(अविश्वार्स प्रस्तार्व) 

पंचार्यत रार्ज अधिनियम की धार्रार्- 14 व सहपठित नियम -33 ख के अन्तर्गत ग्रार्म पंचार्यत के प्रधार्न व उप-प्रधार्न को हटार्ये जार्ने की व्यवस्थार् की गयी है। अविश्वार्स प्रस्तार्व से सम्बन्धित मुख्य बिन्दु हैं-

  1. ग्रार्म पंचार्यत प्रधार्न के प्रति अविश्वार्स प्रस्तार्व लार्ने हेतु ग्रार्म सभार् के कम से कम आधे सदस्यों द्वार्रार् हस्तार्क्षरित नोटिस को कम से कम 3 सदस्य स्वयं जिलार् पंचार्यत रार्ज अधिकारी को देंगे। 
  2. जिलार् पंचार्यत रार्ज अधिकारी नोटिस प्रार्प्ति के 30 दिन के अन्तर्गत ग्रार्म सभार् की बैठक बुलार्येगें। उक्त बैठक की अध्यक्षतार् जिलार् पंचार्यत रार्ज अधिकारी स्वयं करते है यार् इस हेतु प्रधिकृत व्यक्ति द्वार्रार् की जार्ती है। 
  3. इस बैठक हेतु कोरम कुल ग्रार्म सभार् सदस्यों क 1/5 निर्धार्रित है। बैठक में अविश्वार्स प्रस्तार्व पर बहस की जार्ती है। तदुपरार्न्त गुप्त मतदार्न सम्पन्न करवार्यार् जार्तार् है। 
  4. अविश्वार्स प्रस्तार्व के पक्ष में उपस्थित व मतदार्न करने वार्ले ग्रार्म सभार् सदस्यों के दो तिहाइ मत पड़ने की दशार् में प्रस्तार्व पार्रित समझार् जार्तार् है तथार् प्रधार्न अपने पद से हट जार्तार् है।
  5. प्रधार्न के निर्वार्चन के उपरार्न्त एक वर्ष तक अविश्वार्स प्रस्तार्व नहीं लार्यार् जार् सकतार्। अविश्वार्स प्रस्तार्व पार्रित न होने यार् बैठक में गणपूर्ति के अभार्व की दशार् में प्रधार्न के प्रति आगार्मी दो वर्षों तक अविश्वार्स प्रस्तार्व नहीं लार्यार् जार् सकतार् है।
  6. उप प्रधार्न को हटार्ने हेतु उसके प्रति अविश्वार्स प्रस्तार्व पंचार्यत सदस्य लार्ते है, बार्की नियम वही लार्गू होंगे जो प्रधार्न को पद से हटार्ये जार्ने के लिए है।

1. बार्ह्य नियंत्रण 

रार्ज्य सरकार ग्रार्म पंचार्यत के प्रधार्न, उप प्रधार्न यार् ग्रार्म पंचार्यत सदस्यों को हटार् सकती है । यदि प्रधार्न, वित्तीय अनियमिततार्, पद क दुरूपयोग आदि कदार्चार्र क दोषी पार्यार् जार्तार् है तो उसे सरकार पदच्युत कर सकती है। जार्ंच के दौरार्न जिलार् मजिस्ट्रेट के द्वार्रार् तीन सदस्यों की समिति गठित की जार्ती है तथार् प्रधार्न के दार्यित्वों क निर्वहन इसी समिति के सदस्यों द्वार्रार् कियार् जार्तार् है। यदि ग्रार्म पंचार्यत सदस्य बिनार् कारण बतार्ये लगार्तार्र तीन बैठकों से अनुपस्थित रहतार्/ रहती है, यार् उसके द्वार्रार् कार्य करने से इन्कार कियार् जार्तार् है अथवार् पद क दुरूपयोग कियार् जार्तार् है तो उसे भी रार्ज्य सरकार पदच्युत कर सकती है।

2. पद रिक्त होने पर चुनार्व 

पंचार्यत भंग होने यार् किसी पद के रिक्त होने के छ: मार्ह के अन्तर्गत ही पुन: चुनार्व करार्ये जार्ऐंगे। किसी भी परिस्थिति में छ: मार्ह से अधिक समय तक पंचार्यतें भंग नहीं रह सकती व पंचार्यत क कोर्इ पद रिक्त नहीं रह सकतार् है।

ग्रार्म पंचार्यत के कार्य, एवं शक्तियॉं 

प्रत्येक स्तर पर पंचार्यतों के कार्यकलार्प एवं दार्यित्वों की सूची तैयार्र की गर्इ है। इस सूची के अन्तर्गत पंचार्यतों की 29 जिम्मेदार्रियार्ं सुनिश्चित की गर्इ हैं। संविधार्न के 73 संशोधन द्वार्रार् 29 विषय पंचार्यतों के अधीन किये गये हैं, जिसके लिये पृथक से 73वें संविधार्न संशोधन में 243 जी 11वीं अनुसूची जोड़ी गर्इ है। इस सूची में शार्मिल विषयों के अन्तर्गत आर्थिक विकास, सार्मार्जिक न्यार्य और विकास योजनार्ओं को अमल में लार्ने क दार्यित्व पंचार्यतों क होगार्। संविधार्न की ग्यार्रहवीं अनुसूचि के अन्तर्गत ग्रार्म पंचार्यतों की कुछ जिम्मेदार्रियार्ं सुनिश्चित की गर्इ है। प्रत्येक ग्रार्म पंचार्यत निम्नार्ंकित कृत्यों क संपार्दन निष्ठार्पूर्वक करेगी। प्रत्येक स्तर पर पंचार्यतों के कार्यकलार्प एवं दार्यित्वों की सूची तैयार्र की गर्इ है इस सूची के अन्तर्गत पंचार्यतों की 29 जिम्मेदार्रियार्ं सुनिश्चित की गर्इ हैं। जिसके द्वार्रार् पंचार्यती रार्ज संस्थार्ओं को विभार्गों एवं विषयों के दार्यित्व सार्ंपै े गये हैं।

ग्रार्म पंचार्यत के कार्य, एवं शक्तियॉं 

क्र.सं. जिम्मेदार्री मुख्य कार्य 
     कृषि एवं कृषि विस्तार्र • कृषि एवं बार्गवार्नी क विकास और प्रोन्नति।
• बंजर भूमि और चार्रार्गार्ह भूमि क विकास और उसके अनार्धिकृत अतिक्रमण एवं प्रयोग की रोकथार्म करनार्।
2 भूमि विकास, सुधार्र क कार्यार्न्वयन और चकबन्दी • भूमि विकास, भूमि सुधार्र, चकबन्दी और भूमि संरक्षण में सरकार तथार् अन्य एजेन्सियों की सहार्यतार् करनार्।
3 लघु सिंचाइ, जल
अनुरक्षण, व्यवस्थार्,
जल आच्छार्दन विकास
• लघु सिंचाइ योजनार्ओं क लिर्मार्ण, मरम्मत और  सिंचाइ के उद्देश्य से जल पूर्ति क विनिमय।
4 पशुपार्लन, दुग्ध उद्योग
तथार् कुक्कुट पार्लन
• पार्लतु जार्नवरों कुक्कुटों और अन्य पशुओं की नस्लों में सुधार्र करनार्।
• दुग्ध उद्योग, कुक्कुट पार्लन तथार् सुअर पार्लन की प्रोन्नति।
• गार्ंव में मत्स्य पार्लन विकास
5 सार्मार्जिक और
कृषि वार्निकी 
• सड़कों और सावजनिक भूमि के किनार्रों पर वृक्षार्रोपण और परिरक्षण।
• सार्मार्जिक, वार्निकी, कृषि वार्लिकी एवं रेशम उत्पार्दन क विकास करनार्।
6 लघु वन उत्पार्द  • लघु वन उत्पार्दों की प्रोन्नति एवं विकास करनार्।
7 लघु उद्योग • लघु उद्योगों के विकास में सहार्यतार् करनार्।
• कुटीर उद्योगों की प्रोन्नति।
8 लघु वन उद्योग • लघु वन उत्पार्दन के कार्यक्रम की प्रोन्नतिऔर उसक क्रियार्न्वयन 
9 कुटीर और ग्रार्म उद्योग • कृषि एवं वार्णिज्यिक उद्योगों के विकास में सहार्यतार् करनार्।
• कुटीर उद्योगों को प्रोत्सार्हित करनार्।
10 ग्रार्मीण आवार्स • ग््रार्मीण आवार्स कार्यक्रमों को क्रियार्न्वयन।
• आवार्स स्थलों क वितरण और उनसे सम्बन्धित सभी प्रकार के अभिलेखों क रख-रक्षार्व तथार् अनुरक्षण।
11 पेयजल  • पीने, कपड़ार् धोने, स्नार्न करने के प्रयोजनों के लिए सावजनिक कुओं, तार्लार्बों, पोखरों क निर्मार्ण
• अनुरक्षण तथार् पेयजल के लिए जल सम्ीार्ार्रण के स्रोतों क विनिमय।
12 र्इंधन व चार्रार् भूमि • र्इंधन व चार्रार् भूमि से सम्बन्धित घार्स और पौधों क विकास।
• चार्रार् भूमि के अनियमित चार्रार् पर नियंत्रण।
13 पुलियार्, नौकाघार्ट
तथार् संचार्र के अन्य सार्धन
• गार्ंव की सड़कों, पुलियों, पुलों और नौकाघार्टों क निर्मार्ण तथार् अनुरक्षण।
• जल मागों क अनुरक्षण। सावजनिक स्थार्नों से अतिक्रमण को हटार्नार्।
14 ग्रार्मीण विद्युतीकरण  • सावजनिक मागों तथार् अन्य स्थार्नों पर प्रकाश उपलब्ध करार्नार् तथार् अनुरक्षण करनार्।
15 गैर पार्रम्परिक ऊर्जार् स्रोत • गैर पार्रम्परिक ऊर्जार् के कार्यक्रमों को बढ़ार्वार् देनार्, प्रोन्नत्ति तथार् उनक अनुरक्षण 
16 गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम  • गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को बढ़ार्वार् देनार्, पार््रन्नत्ति एवं कार्यार्न्वयन।
17 शिक्षार् के बार्रे में
सावजनिक चेतनार्
• त्कनीकी प्रशिक्षण एवं व्यवसार्यिक शिक्षार्
• ग्रार्मीण कलार् और शिल्पकारों की प्रोन्नति।
18 प्रौढ़, अनौपचार्करक शिक्षार् • प्रौढ़, अनौपचार्करिक शिक्षार् क प्रसार्र।
19 पुस्तकालय • पुस्तकालयों की स्ार्िार्पनार् एवं अनुरक्षण।
20 खेलकूद एवं सार्ंस्कृतिक कार्य • समार्जिक एवं सार्ंस्कृतिक क्रियार्कलार्पों को बढ़ार्वार् देनार्।
• विभिन्न त्यौहार्रों पर सार्ंस्कृतिक संगोष्ठियों क आयोजन करनार्।
• खेलकूद के लिए ग्रार्मीण कलबों की स्थार्पनार् एवं अनुरक्षण।
21 बजार्र एवं मेले • पंचार्यत क्षेत्रों के मेलों, बार्जार्रों व हार्टों को प्रोत्सार्हित करनार्।
22  चिकित्सार् एवं स्वच्छतार् • ग््रार्मीण स्वच्छतार् को प्रोत्सार्हित करनार्।
• महार्मार्रियों के विरूद्ध रोकथार्म।
• मनुष्य, पशु टीकाकरण के कार्यक्रम।
• खुले पशु और पशुधन की चिकित्सार् तथार् उनके विरूद्ध निवार्रण कार्यवार्ही।
• जन्म-मृत्यु एवं विवार्ह क पंजीकरण।
23 परिवार्र कल्यार्ण • परिवार्र कल्यार्ण कार्यक्रमों को प्रोत्सार्हित कर क्रियार्न्वित करनार्। 
24 आर्थिक विकास के लिए
योजनार् 
• ग्रार्म पंचार्यत क्षेत्र के आर्थिक विकास हेतु योजनार् तैयार्र करनार्।
25 प्रसूति एवं बार्ल विकास  • ग्रार्म पंचार्यत स्तर पर महिलार् एवं बार्ल विकास कार्यक्रमों के क्रियार्न्वयन में भार्ग लेनार्।
• बार्ल स्वार्स्थ्स एवं बार्ल विकास के पोषण कार्यक्रमों की प्रोन्नत्ति करनार्।
26 समार्ज कल्यार्ण  • समार्ज कल्यार्ण के तहत मार्नसिक रूप से विकलार्ंग एवं मंद बुद्धि के बच्चों, व्यक्तियों, पुरुषों तथार् महिलार्ओं की सहार्यतार् करनार्।
• वृद्धार्वस्थार् और विधवार् पेन्शन योजनार्ओं में सहार्यतार् करनार्।
27 अनुसूचित जार्तियों एवं
जनजार्तियों क कल्यार्ण 
• अनुसूचित जार्तियों एवं जनजार्तियों तथार् समार्ज के अन्य कमजोर वगार्ंर् े के लिए विशिष्ट कार्यक्रमों के क्रियार्न्वयन में सहयोग करनार्।
• सार्मार्जिक न्यार्य के लिए योजनार्ओं की तैयार्री करनार् तथार् क्रियार्न्वयन करनार्ं 
28 सावजनिक वितरण प्रणार्ली  • सावजनिक वितरण प्रणार्ली, आवश्यक वस्तुओं के वितरण के सम्बन्ध में सावजलिक चेतनार् की प्रोन्नति करनार्।
सावजनिक वितरण प्रणार्ली क अनुश्रवण एवं मूल्यार्ंकन करनार्। 
29 समुदार्यिक अस्तियों क अनुरक्षण • समुदार्यिक अस्तियों क परिरक्षण और अनुरक्षण

1. ग्रार्म पंचार्यत के अन्य कार्य 

  1. ग्रार्म पंचार्यत व ग्रार्म सभार् की बैठकों की तिथि, कार्यसूचि निश्चित करनार् तथार् बैठकों की कार्यवार्ही अंकित करनार्। सार्थ ही ग्रार्म पंचार्यत की विभिन्न समितियों की बैठक करनार्। 
  2. किये जार्ने वार्ले कार्यों की प्रार्थमिकतार् तय करनार् व कार्यों की निगरार्नी व प्रगति की देख-रेख। 
  3. ग्रार्म विकास के लिए योजनार्यें बनार्नार् व सरकार द्वार्रार् तय तरीके के अनुसार्र निर्धार्रित समय में उन्हें क्षेत्र पंचार्यत को भेजनार्। 
  4. पंचार्यत द्वार्रार् लगार्ये जार्ने वार्ले करों, पथ करों, शुल्क, फीस की रार्शि, भुगतार्न विधि, जमार् करने की तिथि निर्धार्रित करनार्। प्रार्प्त होने वार्ली धनरार्शियों क लेखार्-जोखार् रखनार्। 
  5. ग्रार्म सभार् की बैठकों की कार्यवार्ही चलार्नार् व अंकित करनार्। ग्रार्म सभार् द्वार्रार् दी जार्ने वार्ली सिफार्रिशों पर विचार्र करके निर्णय लेनार्। 
  6. ग्रार्म सभार् की देख-रेख में चलने वार्ली सरकारी योजनार्ओं क नियमों के अनुसार्र संचार्लन व निगरार्नी करनार्। 

2. रार्ज्य सरकार द्वार्रार् समनुदेशित कार्य 

  1. पंचार्यत क्षेत्र में स्थित किसी वन की व्यवस्थार् व अनुरक्षण।
  2. पंचार्यत क्षेत्र के भीतर स्थित सरकार की बंजर भूमि, चार्रार्गार्ह भूमि, खार्ली पड़ी भूमि की व्यवस्थार्। 
  3. किसी कर यार् भूरार्जस्व क संग्रह और संविधार्न आदि लेखों क रखरखार्व। 
  4. सावजनिक सड़कों, जलमागों तथार् अन्य विषयों के सम्बन्ध में ग्रार्म पंचार्यतों की शक्ति। 
  5. नये पुल अथवार् पुलियार् क निर्मार्ण। 
  6. जल मार्गोर्ं को पार्स पड़ोस के खेतों को न्यूनतम क्षति पहुंचार् कर सावजनिक सड़क, पुल, पुलियार् को चौड़ार् करनार्, विस्तार्र करनार्।
  7. सावजनिक सड़क पर निकली किसी वृक्ष यार् झार्ड़ी की शार्खार् को काट सकती है। 
  8. सावजनिक जलमाग, पीने व भोजन बनार्ने के लिये उपयोग होने वार्लार् जल यदि स्नार्न करने, कपड़े धोने, पशु नहलार्ने यार् अन्य कारणों से गन्दार् हो रहार् है तो उसक प्रतिषेद्य कर सकती है। 
  9. सफाइ सुधार्र के लिये ग्रार्म पंचार्यत नोटिस द्वार्रार् किसी भूमि अथवार् भवन के स्वार्मी को उसकी वित्तीय स्थिति क सुधार्र करते हुये नोटिस दे कर तथार् उसके पार्लन क यथोचित समय देकर निर्देश दे सकती है। 
  10. शौचार्लय, मूत्रार्लय, नार्ली, मल, कूप मलवार्, कूड़ार् को हटार्ने सफाइ करने, मरम्मत करने कीटार्णु रहित करने, अच्छी हार्लत में रखने को कार्य।
  11. हौज, कुन्ड, तार्लार्ब, नौले जलार्शय, खदार्न को जो पार्स पड़ोस के व्यक्तियों के स्वार्स्थ्य के लिये हार्निकारक है दुर्गन्ध युक्त पदाथ – जैसे गोबर, मल, खार्द, आदि को हटार्ने व पार्टने के आदेश दे सकती है। 
  12. जिस व्यक्ति को सफाइ क नोटिस पंचार्यत देती है वह 30 दिन के भीतर जिलार् स्वार्स्थ्य अधिकारी को उक्त नोटिस के विरूद्ध अपील कर सकतार् है। जो उसे बदल सकतार् है, रद्द कर सकतार् है, पुष्टि कर सकतार् है। 
  13. अगर दो यार् तीन पार्स पार्स की पंचार्यतों में स्कूल, चिकित्सार्लय, औषधार्लय नहीं है यार् अपने सार्मार्न्य लार्भ के लिये किसी पुल यार् सड़क की आवश्यकतार् है तो वे पंचार्यतें नियत अधिकारी के निर्देश द्वार्रार् इन सुविधार्ओं के निर्मार्ण यार् अनुरक्षित करने में सम्मिलित हो जार्येगी। रार्ज्य सरकार व जिलार् पंचार्यतों द्वार्रार् अनुदार्न दिये जार्येगें, जो नियत हो।

पंचार्यतों द्वार्रार् अभ्यार्वेदन एवं सिफार्रिश 

  1. ग्रार्म पंचार्यत अपने क्षेत्र में कार्यरत्त सींचपार्ल, पतरोल, लेखपार्ल, पटवार्री, ग्रार्म पंचार्यत विकास अधिकारी व ग्रार्म स्तरीय कार्यकर्त्तार्/कर्मचार्री के स्थार्नार्न्तरण, पदच्युत के सम्बन्ध में सिफार्रिश कर सकती है। 
  2. अपने अधिकारिक क्षेत्र के अन्तर्गत कार्य करने वार्ले कर्मचार्रियों के आचार्र की जार्ंच व रिपोर्ट ए.डी.ओ. पंचार्यत/सक्षम अधिकारी को भेज सकती है।
  3. पंचार्यत मंत्री के अतिरिक्त ऐसे कर्मचार्री वर्ग की नियुक्ति कर सकती है जिसकी समय-समय पर आवश्यकतार् पड़ती है। ऐसार् नियत प्रार्धिकारी के अनुमोदन से ही कर सकती है। आपार्त स्थिति में प्रार्धिकारी के अनुमोदन के बिनार् भी कर्मचार्री की नियुक्ति कर सकती है। लेकिन इसकी सूचनार् तत्काल देनी होती है। उन कर्मचार्रियों के वेतन की व्यवस्थार् पंचार्यत को अपने खर्चे से करनी होती है।
  4. ग्रार्म पंचार्यत क सदस्य किसी बैठक में कोर्इ संकल्प/प्रस्तार्व प्रस्तुत कर सकतार् है और प्रधार्न यार् उपप्रधार्न से ग्रार्म पंचार्यतों के प्रशार्सन से सम्बन्धित विषयों के सम्बन्ध में प्रश्न नियत रीति से पूछ सकतार् है।
  5. अगर ग्रार्म पंचार्यत यार् ग्रार्म पंचार्यतें किसी जमीन को पंचार्यती एक्ट में निहित किसी कार्य के उपयोग के लिए प्रार्प्त करनार् चार्हती है तो वे पहले तो आपसी समझौते से इसे लेंगी अगर दोनो पाटी किसी एग्रीमेन्ट पर नहीं पहँुचतीं है तो जिलार्धिकारी को एक प्राथनार् पत्र भेज सकती है। (नियत प्रपत्र में जिलार्धिकारी ग्रार्म पंचार्यतों को भूमि अर्जित कर सकती है।) 

पंचार्यत सदस्यों की अन्य जिम्मेदार्रियार्ं 

पंचार्यत में चुनकर आये प्रतिनिधियों की सबसे पहली जिम्मेदार्री है कि गार्ँव में चुनार्व के दौरार्न हुए आपसी मतभेद को भुलार्कर सौहाद क वार्तार्वरण बनार्नार्।

  1. पंचार्यत की नियमित बैठकें आयोजित करवार्नार् व उन बैठकों में अपनी सक्रिय भार्गीदार्री देनार्।
  2.  ग्रार्म सभार् की बैठक नियमित समय पर करवार्नार् व उसमें महिलार्-पुरूषों की भार्गीदार्री सुनिश्चित करनार्। 
  3. गार्ंव की महिलार्ओं, पिछड़े व दलित वर्ग के लोगों को विशेष रूप से हर कार्य, निर्णय व योजनार्ओं के निमाण में शार्मिल करनार्।
  4. पंचार्यत के लिये संसार्धन जुटार्नार् जैंसे-मार्नव श्रम की उपलब्धतार्, धन की व्यवस्थार् करनार्, कर लगार्नार् व वसूल करनार् व इससे पंचार्यत की आमदनी बढ़ार्नार्। 
  5. पंचार्यत में आये धन क सदुपयोग करनार् व उसक लेखार्-जोखार् पंचार्यत भवन के बार्हर लिखनार्। 
  6. ग्रार्म पंचार्यत के अन्र्तगत क्षेत्र में आने वार्ले कर्मचार्रियों के कार्यो की देख-रेख करनार्। 
  7. जन्म मृत्यु क पंजीकरण करनार्। अगर पंचार्ार्यत अपने स्तर पर विवार्ह पंजीकरण भी करें तो यह एक अच्छी पहल होगी। 
  8. पंचार्यत की समितियों क गठन कर उसके सदस्य के रूप में अपने कार्यो व भूमिक क निर्वहन करनार्। 
  9. पंचार्यत के प्रतिनिधि गार्ँव व क्षे़त्र में व्यार्प्त सार्मार्जिक बुराइयों जैसे- दहेज, बार्लविवार्ह, शरार्ब आदि पर प्रतिबन्ध भी लगार् सकती है। समार्ज सुधार्र की दिशार् में यह महत्वपूर्ण कार्य होगार्।
  10. अपने क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्धन के लिये योजनार् बनार्नार् व ग्रार्म वार्सियों के सार्थ मिलकर इन प्रार्कृतिक संसार्धनों की रक्षार् व प्रबन्धन करनार्। 
  11. गार्ँव में बने अन्य सार्मुदार्यिक संगठनों जैसे महिलार् मंगल दल, स्वयं सहार्यतार् समूह यार् वन सुरक्षार् समिति आदि के सार्थ मिलकर कार्य करनार् व उनके सार्थ तार्लमेल बनार्नार्।
  12. महिलार् सदस्य गार्ंव में देखें कि गार्ंव की गर्भवती महिलार्ओं क आंगन बार्ड़ी रजिस्टर में पंजीकरण व देखभार्ल की उचित व्यवस्थार् है यार् नहीं। आंगनबार्ड़ी केन्द्र में ए.एन.एमसमय- समय पर आ रही है यार् नहीं। गर्भवती महिलार्यें आयरन व फॉलिक एसिड की गोलियार्ं खार् रही हैं यार् नहीं। उनहे नियमित खून की जार्ंच करार्ने तथार् संतुलित आहार्र लेने के लिए प्रेरित करें।
  13. आंगनबार्ड़ी केन्द्र क वार्तार्वरण स्वच्छ है यार् नहीं, बच्चों के लिए आवश्यक सार्मग्री उपलब्ध हो इसक भी ध्यार्न दें। ए.एन.एम. बच्चों व गर्भवती महिलार् को आवश्यक टीके दे रही हैं यार् नहीं। 
  14. ग्रार्म पंचार्यत में महिलार् समूहों की विशेष बैठक करनी चार्हिये जिसमें महिलार्ओं के अधिकारों व सार्मार्जिक बिन्दुओं पर चर्चार् करें। 
  15. पंचार्यतों को देखनार् होगार् कि कोर्इ बार्ल श्रमिक तो कार्य नहीं कर रहार्। बार्ल श्रमिक को स्वीकारने क मतलब उसे उसकी शिक्षार् व खेलने के अधिकार से वंचित रखनार्। दलित व पिछड़े वर्ग के लोगों खार्सकर महिलार्ओं की भार्गीदार्री विकास कार्यक्रमों में सुनिश्चित करें। 
  16. पंचार्यत की बैठक में गार्ंव के बच्चों के शार्रीरिक व मार्नसिक विकास के उपार्यों पर चर्चार् करें व ग्रार्म सभार् के लोगों को उससे सम्बन्धित जार्नकारियार्ं दें। विकलार्ंग बच्चों को विकास सम्बन्धित योजनार्ओं को भी प्रार्थमिकतार् दें। 
  17. गार्ंव के विद्यार्लय में शिक्षक प्रतिदिन उपस्थित हो रहे हैं यार् नहीं व बच्चों को पढ़ार्ते हैं यार् नहीं इस बार्त को भी ध्यार्न रखें। निरक्षर महिलार्ओं को सार्क्षर बनार्ने की जिम्मेदार्री पंचार्यत के पढ़े-लिखे सदस्यों को लेनी होगी। उन्हें पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करें। 
  18. गार्ंव में चल रही योजनार्ओं की निगरार्नी करने की जिम्मेदार्री भी पंचार्यत सदस्यों को निभार्नी है। तार्कि योजनार् सही ढंग से पूरी हो और उसमें किसी प्रकार की धार्ंधलेबार्जी न हो। 
  19. गार्ंव में महिलार् मंगल दल व युवक मंगल दल को मजबूत व सक्रिय बनार्नार्। उनकी आवश्यकतार्ओं क पंचार्यत द्वार्रार् ध्यार्न में रखार् जार्नार् चार्हिए। 

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