गौरवपूर्ण क्रार्ंति 1688 के कारण, घटनार् और परिणार्म

गौरवपूर्ण क्रार्ंति के उदार्र विचार्रों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी और फ्रार्ंसीसी क्रार्ंति को प्रभार्वित कियार् और आगे चल कर समस्त विश्व में लोकतार्न्त्रिक व्यवस्थार् की स्थार्पनार् हेतु आन्दोलनों की पृष्ठभूमि तैयार्र की।

गौरवपूर्ण क्रार्ंति के कारण

  1. 1685 में चार्ल्र्स द्वितीय की मृत्यु के उपरार्न्त उसक भार्ई जेम्स द्वितीय सिंहार्सनार्रूढ़ हुआ। जेम्स द्वितीय कैथोलिक थार् और वह वह अपने मत के प्रचार्र-प्रसार्र हेतु कटिबद्ध थार्। उसक रार्जत्व के दैविक सिद्धार्न्त में अटूट विश्वार्स थार्। यह बार्तें पालियार्मेन्ट को स्वीकार्य नहीं थीं। इंग्लैण्ड में उभरतार् हुआ और समार्ज में एक सीमार् तक अपनार् प्रभार्व स्थार्पित कर चुक शिक्षित मध्यम वर्ग शार्सक की निरंकुशतार् सहन करने को तैयार्र नहीं थार्।
  2. ‘व्हिग’ दल जेम्स द्वितीय क विरोधी थार्। इसी दल ने जेम्स द्वितीय के अवैध पुत्र मन्मथ को विद्रोह करने के लिए प्रेरित कियार्। मन्मथ ने विद्रोह करके स्वयं को इंग्लैण्ड के सिंहार्सन क उत्तरार्धिकारी घोषित कर दियार्। जेम्स द्वितीय ने मन्मथ के विद्रोह को कुचल दियार् और न्यार्यार्लय ने उसे प्रार्णदण्ड दियार्। जनतार् ने इस न्यार्यार्लय को ‘ब्लडी कोर्ट्स’ कहार्। इस प्रसंग के कारण जेम्स द्वितीय इंग्लैण्ड, स्कॉटलैण्ड व आयरलैण्ड की जनतार् और पालियार्मेन्ट की घृणार् क पार्त्र बन गयार्।
  3. चार्ल्र्स द्वितीय के काल में पार्रित ‘टेस्ट अधिनियम’ के अन्तर्गत केवल एंग्लिकन चर्च के अनुयार्यी ही सरकारी पदों पर नियुक्त किए जार् सकते थे किन्तु जेम्स द्वितीय ने इस अधिनियम को स्थगित कर मन्त्रिमण्डल, न्यार्यार्लय, नगर निगम और सेनार् के अनेक उच्च पदों पर कैथोलिकों की नियुक्ति कर दी। पालियार्मेन्ट ने इस कृत्य को संविधार्न क अपमार्न बतार्यार् किन्तु जेम्स द्वितीय ने इस आलोचनार् की कोई परवार्ह नहीं की।
  4. जेम्स द्वितीय शिक्षार् के क्षेत्र में भी कैथोलिक आधिपत्य स्थार्पित करनार् चार्हतार् थार् और इसीलिए उसने अपनी नीतियों के विरोधी कैम्ब्रिज विश्वविद्यार्लय के कुलपति को अपदस्थ कर दियार् और परिणार्मत: जनतार् में उसके प्रति आक्रोश में और वृद्धि हुई।
  5. जेम्स द्वितीय की विदेश नीति, विशेषकर उसक फ्ऱार्ंस के शार्सक लुई चौदहवें
  6. जेम्स द्वितीय की एंग्लिकन चर्च के विरुद्ध नीतियों क कैण्टरबरी के आर्कबिशप तथार् अन्य 6 पार्दरियों ने खुलकर विरोध कियार्। जेम्स ने उन सभी को रार्जद्रोह के आरोप में टॉवर ऑफ़ लन्दन में कैद कर लियार्। जनतार् के दबार्व में न्यार्यधीशों ने उन सभी को आरोप-मुक्त कर दियार्।
  7. जेम्स द्वितीय की पुत्री मैरी को, जिसक कि विवार्ह हार्लैण्ड के शार्सक प्रोटैस्टैन्ट मतार्वलम्बी विलियम से हुआ थार्, सभी लोग उसक उत्तरार्धिकारी मार्नते थे किन्तु 10 जून, 1688 को जेम्स द्वितीय को अपनी दूसरी रार्नी मैडोनार् से एक पुत्र हुआ और अब यह निश्चित हो गयार् कि उसक यह पुत्र ही उसक उत्तरार्धिकारी होगार् जिसक कि लार्लन-पार्लन एक कैथोलिक की भार्ंति होगार्। पालियार्मेन्ट को यह स्वीकार्य नहीं थार् कि भविष्य में भी इंग्लैण्ड क शार्सक कैथोलिक ही हो। इन परिस्थितियों में शार्सक और पालियार्मेन्ट के मध्य संघर्ष हुआ और यही गौरवपूर्ण क्रार्न्ति क तार्त्कालिक कारण बनार्।

गौरवपूर्ण क्रार्ंति की घटनार्

इंग्लैण्ड के सिंहार्सन पर फिर से कैथोलिक शार्सक के आरूझ़ होने की सम्भार्वनार् समार्प्त करने के उद्देश्य से पार्दरी वर्ग, टोरी तथार् व्हिग दल ने जेम्स द्वितीय को अपदस्थ कर उसके स्थार्न पर उसकी बड़ी बेटी मैरी के पति, प्रोटैस्टैन्ट मतार्वलम्बी विलियम ऑफ़ ऑरेन्ज (हॉलैण्ड क शार्सक) को इंग्लैण्ड के सिंहार्सन पर अपनार् अधिकार करने के लिए आमन्त्रित कियार्। विलियम ऑफ़ औरेन्ज ने इस निमन्त्रण स्वीकार करते हुए इंग्लैण्ड की ओर कूच कियार्। जेम्स द्वितीय के सैन्य अधिकारी व उसकी अपनी छोटी पुत्री एन भी विद्रोहियों के सार्थ हो गए। युद्ध से पूर्व ही अपनी सैनिक असमर्थतार् देखकर जेम्स द्वितीय 23 दिसम्बर, 1688 को इंग्लैण्ड छोड़कर फ्ऱार्ंस भार्ग गयार् और बिनार् रक्त की एक बूंद बहे इंग्लैण्ड में सत्तार् परिवर्तन (मैरी तथार् विलियम ऑफ़ ऑरेन्ज के संयुक्त रूप से सिंहार्सनार्रूढ़ होने से) हो गयार् जिसको हम गौरवपूर्ण क्रार्न्ति के नार्म से जार्नते हैं।

‘बिल ऑफ़ रार्इट्स अथवार् डिक्लेरेशन ऑफ़ रार्इट्स (दिसम्बर, 1689)

मैरी तथार् विलियम ऑफ़ ऑरेन्ज द्वार्रार् संयुक्त रूप से इंग्लैण्ड की सत्तार् सम्भार्ले जार्ने से यह स्पष्ट हो गयार् कि पालियार्मेन्ट के निर्णयों की अवज्ञार् करके कोई भी शार्सक अपने पद पर बनार् नहीं रह सकतार् है। इसके सार्थ ही रार्जत्व के दैविक सिद्ध़ार्न्त की अवधार्रणार्, इंग्लैण्ड के सन्दर्भ में अर्थहीन हो गई। दिसम्बर, 1689 में पालियार्मेन्ट ने ‘बिल ऑफ़ रार्इट्स’ पार्रित कियार् जिसके अनुसार्र भूतकालीन ‘डिक्लेरेशन ऑफ़ रार्इट्स’ के प्रार्वधार्नों की पुन: पुष्टि की गई। इसमें शार्सक के विशेषार्धिकारों पर प्रतिबन्ध लगार्यार् गयार्। इसने यह व्यवस्थार् की कि शार्सक –

  1. न तो पालियार्मेन्ट द्वार्रार् पार्रित कानूनों को स्थगित कर सकतार् है,
  2. न ही पालियार्मेन्ट के अनुमोदन के बिनार् नए कर लगार् सकतार् है,
  3. न ही यार्चिक प्रस्तुत करने के अधिकार क उल्लंघन कर सकतार् है,
  4. न ही शार्न्तिपूर्ण काल के दौरार्न पालियार्मेन्ट की सहमति के बिनार् स्थार्यी सेनार् खड़ी कर सकतार् है,
  5. न ही प्रोटैस्टैन्ट प्रजार्-जनों क हथियार्र रखने क अधिकार छीन सकतार् है,
  6. न ही संसदीय चुनार्वों में अनार्वश्यक हस्तक्षेप कर सकतार् है,
  7. न ही पालियार्मेन्ट में बहस के दौरार्न दोनों सदनों में से किसी के भी सदस्य की कही हुई किसी भी बार्त के आधार्र पर उससे ज़मार्नत के रूप में एक बड़ी रकम की मार्ंग कर सकतार् है और न उसे कठोर दण्ड दे सकतार् है।

गौरवपूर्ण क्रार्ंति के परिणार्म

अब इंग्लैण्ड में संवैधार्निक रार्जतन्त्र की स्थार्पनार् हो गई। इंग्लैण्ड क शार्सक अब केवल प्रोटैस्टैन्ट ही हो सकतार् थार्। शार्सक की शक्तियों पर, रार्ज्य के खर्च पर और शार्सक के निजी खर्च पर पालियार्मेन्ट क नियन्त्रण स्थार्पित हो गयार्। प्रति वर्ष पालियार्मेन्ट क अधिवेशन होनार् अनिवाय हो गयार्। अब शार्सन में शार्सक के स्थार्न पर पालियार्मेन्ट की सर्वार्च्चतार् स्थार्पित हो गई। अब रार्ज-परिवार्र में होने वार्ले विवार्हों के लिए भी पालियार्मेन्ट क अनुमोदन आवश्यक हो गयार्। अब इंग्लैण्ड उदार्र एवं संवैधार्निक रार्जतन्त्र क मुख्य केन्द्र बन गयार्।

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