गुटनिरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन

गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के शिखर सम्मेलन प्रत्येक 3 वर्ष बार्द किये जार्ते है इसकी लोकप्रियतार् को बढ़ार्नार् इसक प्रमुख उद्देश्य है। इन सम्मेलनों में रार्ष्ट्रों के रार्ष्ट्रार्ध्यक्ष तथार् शार्सनार्ध्यक्ष भार्ग लेते है। इसक निर्णय सर्वसम्मति से लियार् जार्तार् हैं इसमें चार्र प्रकार के सदस्य शार्मिल होते है, पूर्ण सदस्य, पर्यवेक्षक सदस्य, पर्यवेक्षक गैर-रार्ज्य सदस्य और अतिथि इन सम्मेलनों से प्रमुख लार्भ है – गुटनिरपेक्षतार् की लोकप्रियतार् में वृद्धि होती है। अन्र्तरार्ष्ट्रीय मार्मलों पर गुटनिरपेक्ष देशों की प्रतिक्रियार् स्पष्ट रूप से अभिव्यत हो जार्ती है। गुटनिरपेक्ष देशों में आपस में रार्जनीतिक, आर्थिक तथार् सार्ंस्कृतिक सहयोग की भार्वनार् क विकास होतार् है। अन्र्तरार्ष्ट्रीय मंच पर गुटनिरपेक्ष देशों की एक आवार्ज को बल मिलतार् है। अन्र्तरार्ष्ट्रीय समस्यार्ओं पर गंभीर रूप से विचार्र विमर्श करने हेतु तथार् उनके समार्धार्न के लिए महत्वपूर्ण सुझार्व गुटनिरपेक्ष रार्ष्ट्रों द्वार्रार् विभिन्न शिखर सम्मेलनों में दिये गए जिसमें इन सुझार्वों क अन्र्तरार्ष्ट्रीय रार्जनीति पर गहरार् प्रभार्व पड़ार् । सम्मेलनों क प्रार्रंभ बेलग्रेड सम्मेलन 1961 ई. से हुआ।

प्रथम शिखर सम्मेलन (1961 ई.)

1961 ई. में चेकोस्लार्वियार् की रार्जधार्नी वेलग्रेड में प्रथम शिखर सम्मेलन रार्ष्ट्रपति माशल टीटो के सुझार्वों से आमंत्रित कियार् गयार्। इस सम्मेलन में किन देशों को आमंत्रित कियार् जार्ए तथार् किन देशों को नहीं यह एक बड़ी विडम्बनार् थी। देशों को आमंत्रित करने के लिए पार्ंच सूत्रीय शर्ते थी – (i) जो देश शार्ंतिपूर्ण-सह अस्तित्व के आधार्र पर स्वतंत्र विदेश नीति क अनुसरण करतार् हो। (ii) स्वतंत्रतार् प्रार्प्ति के लिए चल रहे आन्दोलनों क सर्मथन करने वार्ले देश (iii) ऐसे देश जो सैनिक गुटों के सदस्य न हो (iv) ऐसे देश जिन्होंने किसी महार्शक्ति के सार्थ संधि न की हो (v) ऐसे देश जिनकी भूमि पर सैनिक अड्डे न हो।

इस आधार्र पर बेलग्रेड सम्मेलन में 28 देशों को आमंत्रित कियार् गयार् जिनमें से 3 देशों ने अपने पर्यवेक्षक तथार् 25 देशों ने अपने प्रतिनिधि भेजकर सम्मेलन में भार्ग लियार्। 3 पर्यवेक्षक भेजने वार्ले देशों में इक्वेडोर, बोलीवियार् तथार् ब्रार्जील थे। जिन देशों को बेलग्रेड सम्मेलन के लिए आमंत्रित कियार् गयार् थार् वे इस पार्ंच सूत्रीय फामूले पर खरे उतरे थे। यह सम्मेलन 1 से 6 सितम्बर तक चलार्। सम्मेलन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित विषयों पर विचार्र कियार् गयार् :-

  1. इस सम्मेलन में दुनियार् क ध्यार्न ऐसी समस्यार्ओं की ओर खींचार् गयार् जिनसे विश्वयुद्ध संभव थार् वे जिनमें बर्लिन की समस्यार्, संयुक्त रार्ष्ट्र में सार्म्यवार्दी चीन की सदस्यतार् क प्रश्न तथार् कांगों की समस्यार्। 
  2. प्रत्येक देश को अपनी इच्छार्नुसार्र शार्सन क स्वरूप निर्धार्रण करने और संचार्र करने की स्वतंत्रतार् हो।
  3. विश्व शार्न्ति स्थार्पित करने के लिए सार्म्रार्ज्यवार्द को हार्निकारक सिद्ध कियार् जार्ए। 
  4. बिनार् किसी भेदभार्व के किसी भी देश की प्रभुसत्तार् क सम्मार्न कियार् जार्नार् चार्हिए सार्थ ही किसी भी देश के आंतरिक मार्मलों के संबंध में हस्तक्षेप की नीति क समर्थन करनार् चार्हिए। 
  5. सम्मेलन में यह भी कहार् गयार् कि शार्न्ति व्यवस्थार् बनार्ए रखने के लिए विकासशील देश आर्थिक, सार्मार्जिक और रार्जनैतिक पिछड़ेपन से मुक्ति दिलार्कर उनकी सार्मार्जिक व्यवस्थार् को उन्नत बनार्यार् जार्नार् चार्हिए। 
  6. इस सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीक की रंगभेद नीति की आलोचनार् की गई। 
  7. शार्न्तिपूर्ण सह अस्तित्व के सिद्धार्न्त में आस्थार् व्यक्त की गई। इस सम्मेलन से शीत-युद्ध को कम कियार् जार् सक और अन्र्तरार्ष्ट्रीय रार्जनीति पर इसक बड़ार् ही हितकारी प्रभार्व पड़ार्। इसके कारण 1963 में अणु परीक्षण निषेध संधि सफलतार् पूर्वक की गई।

द्वितीय शिखर सम्मेलन (1964 ई.)

द्वितीय शिखर सम्मेलन 5 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक 1964 ई. में काहिरार् में कियार् गयार्। जिसमें 48 देशों के प्रतिनिधि शार्मिल थे तथार् 11 पर्यवेक्षक देश थे। इस सम्मेलन क उद्देश्य गुटनिरपेक्षतार् के क्षेत्र को विस्तृत करनार् थार्। तथार् उसके मार्ध्यम से तनार्व को कम करनार् थार्। काहिरार् सम्मेलन में प्रतिनिधि रार्ष्ट्रों के बीच मतभेद की स्थिति उत्पन्न हो गई और ऐसार् लगने लगार् कि सम्मेलन विफल हो जार्येगार्। इस सम्मेलन में आर्थिक सहयोग की बार्त कही गई। इस सम्मेलन में निम्नलिखित बिन्दुओं पर चर्चार् की गई।

  1. शार्ंतिपूर्ण वातार् के मार्ध्यम से अन्र्तरार्ष्ट्रीय विवार्दों क निपटार्रार् कियार् जार्ए। 
  2. परमार्णु परीक्षण पर रोक लगार्ई जार्ए सार्थ ही नि:शस्त्रीकरण की नीति अपनार्ई जार्ए। 
  3. दक्षिण रोडेशियार् की अल्पमत गोरी सरकार को मार्न्यतार् नही दी जार्नी चार्हिए। 
  4. उपनिवेशवार्द क अंत कियार् जार्य। कम्बोडियार् तथार् वियतनार्म में विदेशी हस्तक्षेप क अंत हो 
  5. चीन को संयुक्त रार्ष्ट्र संघ क सदस्य बनार्यार् जार्ए।
  6. सभी रार्ष्ट्रों से आºवार्न कियार् गयार् कि दक्षिण अफ्रीक से कूटनीतिक सम्बन्ध विच्छेद कर ले। सार्थ ही दक्षिण अफ्रीक की रंग भेद की नीति की कड़ी आलोचनार् की गई। काहिरार् सम्मेलन को शार्न्तिपूर्ण वातार् द्वार्रार् विवार्दों क निपटार्रार्, उपनिवेशवार्द क अंत, रंगभेद की नीति के विरोध आदि के लिए महत्वूपर्ण है।

तृतीय शिखर सम्मेलन, (1970 ई.)

सिम्बर 1970 में जार्म्बियार् की रार्जधार्नी लुसार्क में तृतीय सम्मेलन क आयोजन कियार् गयार्। इस सम्मेलन में 65 रार्ज्यों ने भार्ग लियार् जिनमें 53 पूर्ण सदस्य तथार् 12 प्रेक्षक देश थे। इस सम्मेलन में पश्चिमी एशियार् के बार्रे में एक निश्चित मत प्रकट कियार् गयार्। पश्चिमी एशियार् के बार्रे में रखे गये प्रस्तार्व में केवल अरबों के पक्ष क सर्मथन ही नही अपितु हमलार्वर इजरार्इल की आवश्यकतार् पड़ने पर बार्यकाट करने तथार् नार्केबंदी तक करने की बार्त कही गर्इं अमरीकी फौजों तथार् अन्य फौजों को वियतनार्म से हटार्ने की सिफार्रिस की गई। दक्षिण अफ्रीक से उपनिवेश के सन्दर्भ में बार्त की गई और दक्षिण अफ्रीक से अनुरोध कियार् गयार् कि वह अपने ऊपर से हवार्ई जहार्ज जार्ने दे। सन् 1970 के दशक के लिए गुटनिरपेक्ष रार्ष्ट्रों के बीच एक योजनार् स्वीकार की गई इस सम्मेलन में यह सुझार्व आयार् थार् कि गुटनिरपेक्ष देशों क एक स्थार्यी संगठन बनार्यार् जार्ए जिसक एक सचिवार्लय भी हो। इस सुझार्व को नार्मंजूर कर दियार् गयार्। क्योंकि गुट निरपेक्ष देश गुटबंदी के खिलार्फ थे और इस प्रकार संगठित होने क अर्थ होतार् है – तृतीय विश्व गुट क गठन।

चतुर्थ शिखर सम्मेलन (1973 ई.)

गुटनिरपेक्ष देशों क चतुर्थ सम्मेलन 1973 में अल्जीरियार् की रार्जधार्नी अल्जीयर्स में 9-10 सितम्बर में हुआ इस सम्मेलन में 75 देशों के पूर्ण सदस्य और 9 देशों ने पर्यवेक्षक के रूप में भार्ग लियार्। निर्गुट देशों में व्यार्प्त मत भेदों क खुलार् प्रदर्शन हुआ सार्थ ही अभूतपूर्व आत्मविश्वार्स और एकतार् क दर्शन भी हुआ। इस सम्मेलन में निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार्र कियार् गयार्।

  1. महार्शक्तियेार्ं के बीच तनार्व-शैथिल्य क स्वार्गत कियार् गयार्। 
  2. गुटनिरपेक्ष रार्ष्ट्रों को अपनी असंलग्नतार् की परिभार्षार् बदल कर अन्र्तरार्ष्ट्रीय स्थिति के संदर्भ में करने पर जोर दियार् गयार्। 
  3. निर्गुट देशों के बीच आर्थिक, व्यार्पार्रिक और तकनीकी तार्लमेल होनार् चार्हिए। 
  4. जार्तीय विद्वेश, उपनिवेशवार्द, सार्म्रार्ज्यवार्द के उन्मूलन पर जोर दियार् जार्ए। 
  5. आर्थिक दृष्टि से यह निश्चित कियार् गयार् कि गुटनिरपेक्ष देशों को अपने आर्थिक सार्धनों क पूर्ण उपयोग करने क अधिकार है। 
  6. इस सम्मेलन के अपने घोषणार् पत्र में यह कहार् गयार् कि रार्जनीतिक और आर्थिक नीतियों के गठन में विकासशील देशों की आवार्ज सुनी जार्ए तथार् निर्गुट रार्ष्ट्र सम्मलित रूप से विकसित देशों पर दबार्व डार्लें।

पंचम शिखर सम्मेलन (1976 ई.)

गुटनिरपेक्ष देशों क पार्ंचवार् शिखर सम्मेलन 16 से 20 अगस्त 1976 ई. में कोलम्बों में हुआ। इस सम्मेलन में कुल 116 देशों ने भार्ग लियार् जिनमें 86 देश पूर्ण सदस्य, 13 पर्यवेक्षक गैर-रार्ज्य तथार् 7 ने अतिथि सदस्य के रूप में भार्ग लियार्। पुर्तगार्ल, रूमार्नियार्, पार्किस्तार्न, टर्की और ईरार्न, फिलिपीन्स आदि प्रमुख थे जो सदस्यतार् ग्रहण करने के इच्छुक थे। इस सम्मेलन में नयी अन्र्तरार्ष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्थार् विकसित करने क आग्रह कियार् गयार्, तथार् एक आर्थिक घोषणार्-पत्र प्रस्तुत कियार् गयार् जिसमें निम्नलिखित बार्तों पर चर्चार् की गई।

(अ) अन्र्तरार्ष्ट्रीय व्यार्पार्र को इस तरह पुर्नगठित कियार् जार्ए कि विकासशील देशों को बेहतर शर्तो पर व्यार्पार्र क मौक मिले और उनको अपने निर्यार्त क उचित मूल्य प्रार्प्त हो।

  1. अन्र्तरार्ष्ट्रीय विभार्जन के आधार्र पर उत्पार्दन को नये सिरे से पुर्नगठित कियार् जार्ए। 
  2. मुद्रार् संबंधी सुधार्रों में विकासशील देशों की रार्य को वही आदर मिलनार् चार्हिए जो विकसित रार्ष्ट्रों को मिलतार् है सार्थ ही मुद्रार् प्रणार्ली में आमूल-चूल परिवर्तन होनार् चार्हिए। 
  3. अनार्ज उत्पार्दन बढ़ार्ने हेतु प्रबल सार्धन तथार् तकनीकी क प्रयोग कियार् जार्ए। 
  4. विकासशील देशों को यथेष्ट मार्त्रार् में नियमित रूप से आर्थिक सार्धन हस्तार्न्तरित किये जार्ए और उनकी स्वार्धीनतार् क सम्मार्न कियार् जार्ए।

इस सम्मेलन की रार्जनीतिक घोषणार् में निम्न लिखित बार्तें कही गयी थी :-

  1. समतार् के आधार्र पर नयी रार्जनीतिक व्यवस्थार् बनार्यी जार्ए और ‘प्रभार्व क्षेत्र‘ जैसे सिद्धार्न्तों को शार्ंति विरोधी बतार्यार् गयार्। 
  2. सम्मेलन में मुक्त आन्दोलनों क समर्थन कियार् गयार् सार्थ ही पश्चिमी एशियार्, सार्इप्रस, फिलीस्तीन समस्यार्, दोनों कोरियार्ओं (उत्तरी कोरियार्, दक्षिणी कोरियार्) क एकीकरण आदि की समस्यार्ओं पर विचार्र कियार् गयार्। 
  3. सम्मेलन में हिन्द महार्सार्गर में विदेशी अड्डों के प्रश्न को भी उठार्यार् गयार् और इसे तनार्व मुक्त क्षेत्र बनार्ने की आवश्यकतार् पर बल दियार् गयार्।

षष्टम् शिखर सम्मेलन (1979 ई.)

छठार् शिखर सम्मेलन हवार्नार् (क्यूवार्) में 3 सितम्बर 1979 में क्यूबार् के रार्ष्ट्रपति डॉ. फिदेल कास्त्रों ने अमरीकी विरोधी भार्षण के सार्थ प्रार्रंभ कियार्। लगभग इसमें 95 देशों ने भार्ग लियार्। यह प्रथम सम्मेलन थार् जिसमें भार्रतीय प्रधार्नमंत्री क स्थार्न रिक्त रहार्।

इस सम्मेलन में विचित्र भार्षण डॉ फिदेल द्वार्रार् दियार् गयार् जो अन्र्तविरोधी से भरार् हुआ थार्। उन्होंने कहार् हमार्रार् देश माक्सवार्दी सिद्धार्न्तों में विश्वार्स करतार् है पर कभी भी अपने विचार्र और नीतियार्ं गुटनिरपेक्ष देशों पर थोपने क प्रयत्न नही करेगार्। उन्होंने फूट डार्लने और शार्सन करने वार्ली नीतियों से दूर रहने की सलार्ह दी। उन्होंने इस बार्त पर प्रसन्तार् व्यक्त की कि पार्किस्तार्न भी गुटनिरपेक्ष देशों की लार्इन में आ गयार्। हवार्नार् सम्मेलन के घोषणार्-पत्र में निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार्र कियार् गयार्। ‘ निर्गुट रार्ष्ट्रों से अपनी स्वतन्त्र विदेश नीति एवं एकतार् के लिए एकजुट रहने को कहार्। ‘ तेल निर्यार्तक देशों से अपील की गई की वे दक्षिण अफ्रीक को तेल निर्यार्त न करें। ‘ सभी गुटनिरपेक्ष देशों से अपील की गई की वे दक्षिण अफ्रीक के अश्वेत छार्पार्मार्र युद्ध क समर्थन करें ‘ मिश्र को निलंबित करने के लिए कई घंटो बहस चली सार्थ ही मिश्र और इजरार्इल के बीच हुए कैम्प डेविड समझौते की निंदार् की गई। ‘ नस्लवार्द, उपनिवेशवार्द, सार्म्रार्ज्यवार्द, विदेशी प्रभुत्व, विदेशी कब्जे और हस्तक्षेप एवं चौधरार्हट के विरूद्ध संघर्ष से स्वार्भार्विक सम्बन्ध है। इस सम्मेलन में विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थार् को लेकर भी विचार्र विमर्श हुआ। विशेषकर तेल निर्यार्त करने वार्ले विकासशील देशों की ऊर्जार् सम्बन्धी समस्यार्ओं पर बहुत गंम्भीरतार् पूर्वक विचार्र हुआ।

सार्तवार्ं शिखर सम्मेलन (1983 ई.)

क्यूवार् के रार्ष्ट्रपति डॉ. फिदेल कास्त्रों द्वार्रार् 31 अगस्त 1982 को सार्तवें शिखर सम्मेलन की अनुमति प्रार्प्त हो गयी । रार्ष्टार्ध्यक्षों को सूचित कियार् गयार् कि ईरार्न तथार् ईरार्क युद्ध के कारण ईरार्क में सम्मेलन स्थिगित करनार् पड़ार्। गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलनों क सार्तवार्ं शिखर सम्मेलन भार्रत की रार्जधार्नी नई दिल्ली में 6 से 12 माच 1983 में कियार् गयार्। इस सम्मेलन ने अन्य छ: सम्मेलनों से अलग अपने नये कीर्तिमार्न स्थार्पित किये। इस समय विश्व रार्जनीति क जो मार्हौल बनार् हुआ थार् वह 1959-60 के मार्हौल से कम खतरनार्क नहीं थार्। गम्भीर चुनौतियार्ँ, तनार्व, अविश्वार्स, और संघर्ष क जहर घोलने वार्ली इन सभी समस्यार्ओं क सूत्रपार्त हवार्नार्, अल्जीयर्म कोलम्बो, आदि सम्मेलन के समय से दिखनार् प्रार्रंभ हो गयार् थार्।

हवार्नार् सम्मेलन 1979 में सम्पन्न हुआ तीन मार्ह बार्द सोवियत फौजें अफगार्निस्तार्न में घुस आई इससे पार्किस्तार्न, ईरार्न, अफगार्निस्तार्न आदि के सम्बन्ध बिगड़ गए और विश्व रार्जनीति में फिर एक बार्र विश्वयुद्ध जैसी स्थिति बन गई। दोनों महार्शक्तियों के बीच चल रही शस्त्रार्अस्त्र परीसीमन की वातार् असफल हो गई, पश्चिमी रार्ष्ट्रों ने सोवियत संघ पर अनेक आर्थिक और रार्जनैतिक प्रतिबंध लगार्ने की कोशिश की और खार्ड़ी देशों, हिन्दमहार्सार्गर तथार् पार्किस्तार्न आदि में अपनी सैनिक उपस्थिति बढ़ार्नार् शुरू कर दियार्।

गुटनिरपेक्ष आन्दोलन में फूट क प्रमुख कारण थार् अफगार्निस्तार्न क मार्मलार्, जहार्ँ एक ओर वियतनार्म, सीरियार्, यमन, इथोपियार् आदि देशों ने रूसी कार्यवार्ही क दमन कियार् वहीं दूसरी ओर सिंगार्पुर, जार्यरे, मोरक्को, पार्क आदि देशों ने इसक विरोध कियार्। तथार् भार्रत जैसे रार्ष्ट्र ने सोवियत संघ की भत्र्सनार् करने के वजार्य यह मार्नार् कि अफगार्निस्तार्न से सोवियत सेनार् की वार्पसी तथार् बार्हरी हस्तक्षेप की समार्प्ति एक सार्थ होनी चार्हिए। इस प्रकार सप्तम सम्मेलन बहुत ही नार्जुक परिस्थितियों में हुआ थार्।

सम्मेलन क प्रार्रभिक स्वरूप

गुटनिरपेक्ष देशों क यह सार्तवार्ं शिखर सम्मेलन रार्ष्ट्रार्ध्यक्षों तथार् शार्सनार्ध्यक्षों की उपस्थ्ति में श्रीमती इन्दिरार्गार्ंधी की अपील के सार्थ प्रार्रंभ हुआ। श्रीमती इन्दिरार् गार्ंधी ने कहार् कि विश्व की महार्शक्तियार्ं आणविक हथियार्रों के इस्तेमार्ल की धमकी न दे वे अपने स्वाथ की चिंतार् छोड़कर मार्नवतार् की भलार्ई के कार्य करें। सम्मेलन में 101 सदस्य देशों में से 93 देशों ने इसमें भार्ग लियार् जिनमें 68 रार्ष्ट्रार्ध्यक्ष 26 प्रधार्नमंत्री तथार् उपरार्ष्ट्रपति शार्मिल थे। डॉ फिदेल कास्त्रो ने श्रीमती इन्दिरार् गार्ंधी के हार्थों में अध्यक्ष पद की कमार्न सौपी, तथार् महार्सचिव नटवरसिंह को चुनार् गयार्। यह सम्मेलन पार्ंच दिन तक चलनार् थार् परन्तु ईरार्न-ईरार्क युद्ध के कारण यह दो दिन तक चलार्। रार्ष्ट्रार्ध्यक्षों ने अपने-अपने भार्षण दिये परन्तु पार्क रार्ष्ट्रपति क भार्षण उल्लेखनीय रहार् उसमें श्रीमती इन्दिरार् गार्ंधी को मुबार्रकबार्द दी गई और पार्ंच सूत्रीय कार्यक्रम भी पेश कियार्। सार्तवें शिखर सम्मेलन के प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चार् की गई –

  1. विश्वशक्तियों से परमार्णु हथियार्र प्रयोग न करने की अपील की गई। 
  2. अन्र्तरार्ष्ट्रीय मुद्रार् एवं वित्तीय प्रणार्ली के व्यार्पक पुनर्गठन की आवश्यकतार् पर भी बल दियार् गयार्। 
  3. दक्षिण अफ्रीक के अश्वेत लोगों के शोषण उनके प्रति असमार्नतार् के व्यवहार्र व उनके अधिकारों के हनन की भत्र्सनार् करते हुए उनके संघर्ष में गुटनिरपेक्ष आन्दोलन द्वार्रार् पूरार् सहयोग दिये जार्ने की बार्त कही गई।
  4. यूरोप में बढ़ती हथियार्रों की होड तनार्व व विभिन्न गुटों के बीच टकरार्व की नीति पर चिंतार् व्यक्त की गई।
  5. आर्थिक घोषणार्-पत्र में विकसित रार्ष्ट्रों द्वार्रार् विकासशील रार्ष्ट्रों पर लगार्ये गये व्यार्पार्रिक प्रतिबंध को समार्प्त करने के लिए तथार् संरक्षणार्वार्दी रवैयार् अपनार्ने को कहार् गयार्। 
  6. सम्मेलन में खार्द्य, ऊर्जार् एवं परमार्णु शक्ति के बार्रे में भी विचार्र कियार् गयार् और इनक हल ढ़ूढ़नार् नितार्ंत आवश्यक थार्। 

अन्य विवार्दस्पद मुद्द्दे 

  1. सम्मेलन में कम्पूचियार् के भार्ग न लेने क विवार्द प्रमुख थार् इस प्रश्न पर सदस्य देश एकमत नहीं है। कुछ देश रार्जकुमार्र सिंहनुक को आमंत्रित करने के पक्ष में थे तो कुछ हेंग सैमरिन की सरकार को आमंत्रित करने के, तो कुछ उसक स्थार्न खार्ली छोड़ने के पछ में थे। हवार्नार् सम्मेलन की तरह भार्रत जैसी स्थिति बनी हुई थी अतत: उसक स्थार्न खार्ली छोड़ दियार् गयार्।
  2. ईरार्न-ईरार्क के युद्ध के बार्रे में सम्मेलन की अवधि बढ़ार्ये जार्ने क कोई ठोस हल नहीं निकालार् जार् सका। 
  3. आठवें शिखर सम्मेलन कहार्ं बुलार्यार् जार्ए ईरार्क चार्हतार् थार् कि बगदार्द में बुलार्यार् जार्ए ईरार्न, चार्हतार् थार् कि, लीबियार् में यह सम्मेलन बुलार्यार् जार्ए इस आदि विरोध के कारण इसक कोई हल नहीं निकालार् जार् सका।

सार्तवे शिखर सम्मेलन की समीक्षार्

सही मार्यनों में देखार् जार्ए तो यह गुटनिरपेक्ष आन्दोलन केवल एक मंच हैं और उसके होने वार्ले सम्मेलन एक क्लब की तरह है। इसके द्वार्रार् निकाले गये ज्यार्दार्तर घोषण पत्र बिल्कुल अर्थहीन है। ‘‘यहार्ं जैसार् चार्हे वैसार् व्यवहार्र करों ‘‘ की कहार्वत सिद्ध हो जार्ती है। सार्तवे गुटनिरपेक्ष सम्मेलन की आर्थिक घोषणार् में गरीब देशों की खार्द्ध की कमी को दूर करने पर बल दियार् गयार्, कृषि में सहार्यतार् आदि की बार्त कही गयी, पर सवार्ल इस बार्त क है कि क्यार् मार्त्र घोषणार् करने यार् विकसित रार्ष्ट्रों से अपील करने से ये समस्यार्यें हल हो जार्ती है विकसित रार्ष्ट्र तो अपने स्वाथ के लिए विकासशील देशों क इस्तेमार्ल करते आए है और करते रहेगें।

सार्थ ही इस सम्मेलन में कई सवार्लों पर चर्चार् की गई, जैसे हैंग सैमरिन सरकार को प्रजार्तार्ंत्रिक रूप से परिवर्तित करनार्, दक्षिण अफ्रीक द्वार्रार् नार्मीवियार् क शोषण कम करने आदि महत्वपूर्ण, सवार्लों पर सम्मेलन में जो कुछ भी हुआ वह नयार् नहीं थार्। ऐसे मुद्दों पर बहस आदि के सिवार्य कुछ भी नहीं कियार् जार् सकतार्।

सार्तवे शिखर सम्मेलन की उपलब्धियार्ं

यह बार्त तो मार्ननार् ही पड़ेगी कि इस शिखर सम्मेलन ने गुटनिरपेक्ष आन्दोलन को एक नई शक्ति और दिशार् दी है। कुछ लोगों क मार्ननार् है कि यह सम्मेलन एक तरह के शिविर के रूप में सार्मने आयार्। जो एक तरह से नये सघर्ष की शुरूआत क माग दिखार्तार् है। इस सम्मेलन में नये शिरे से सदस्य रार्ष्ट्रों की एकतार् क बोध करार्यार् गयार्। सशस्त्र संघर्ष की निरर्थकतार् क अहसार्स और मतभेदों को शार्न्तिपूर्ण तरीके से हल करने की उपयुक्ततार् अधिक अर्थपूर्ण लगी। अन्र्तरार्ष्ट्रीय व्यवस्थार् पर औद्योगिक देशों से बार्तचीत चलार्ने के प्रस्तार्व क एक परिणार्म यह हुआ कि सदस्य देशों ने विकास कार्यक्रमों में सहयोग की आवश्यकतार् क महत्व समझार्। उन्हें यह भी लगार् कि वे अपने संसार्धनों और क्षमतार्ओं क विकास कार्यक्रमों में उपयोग अपने प्रयत्न से कर सकते है। इस सम्मेलन क दृष्टिकोण ज्यार्दार्तर समस्यार्ओं को हल न करके उन्हें टार्ल देने क थार्।

आठवार्ं गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन (1986 ई.)

1 से 7 सितम्बर 1986 ई. में जिम्बार्ब्वे की रार्जधार्नी हरार्रे में आठवार्ं शिखर सम्मेलन सम्पन्न हुआ। जिम्बार्ब्बे के प्रधार्नमंत्री राबट मुगार्वे को अध्यक्ष चुनार् गयार्। इस सम्मेलन में 101 देशों ने भार्ग लियार्। यूनार्न, आस्ट्रेलियार्, मंगोलियार् आदि देशों को पर्यवेक्षक क विशेष दर्जार् दियार् गयार्। हरार्रे सम्मेलन में निम्नलिखित बिन्दुओं पर चर्चार् की गई –

  1. दक्षिण अफ्रीक की रंग भेद की नीति के विरूद्ध कुछ उपार्य अपनार्ये जार्ए जिससे वह यह नीति समार्प्त करने के लिए बार्ध्य हो। जिनमें अफ्रीक को प्रोद्योगिकी के हस्तार्ंतरण पर प्रतिबंध, निर्यार्त की समार्प्ति, तेल की बिक्री पर रोक, तथार् हवार्ई संपर्क आदि भी शार्मिल हो। 
  2. सम्मेलन में तय कियार् गयार् कि एक कोष स्थार्पित कियार् जार्ए। 
  3. इस कोष से दक्षिण अफ्रीक पर आर्थिक निर्भरतार् को कम करने के लिए सहार्यतार् की जार्ए। 
  4. इस सम्मेलन में नार्मीबियार् की आजार्दी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त रार्ष्ट्र महार्सभार् क एक विशेष अधिवेशन बुलार्ये जार्ने की मार्ंग की । 
  5. सार्म्रार्ज्यवार्द, उपनिवेशवार्द की कड़ी आलोचनार् की गई। निर्गुट रार्ष्ट्र तथार् विकासशील देश एक दूसरे क आर्थिक सहयोग बढ़ार्ने के लिए तत्पर हो गये यह इस सम्मेलन की एक महार्न उपलब्धि थी। सार्थ ही एक आयोग गठित करने क निर्णय लियार् गयार्, यह आयोग दोनों गुटनिरपेक्ष तथार् विकासशील देशों में ही सहयोग बढ़ार्ने क कार्य करेगार्, सार्थ ही निरक्षरतार् क उन्मूलन, निर्धनतार्, भुखमरी तथार् अन्य आर्थिक समस्यार्ओं के निरार्करण के उपार्य तथार् सुझार्व देगार्।

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