क्षेत्र पंचार्यत क गठन, चुनार्व प्रणार्ली, अधिकार एवं शक्तियार्ं

तिहत्तरवें संविधार्न संषोधन के अन्र्तगत नर्इ पंचार्यत रार्ज व्यवस्थार् में पंचार्यतें तीन स्तरों पर गठित की गर्इ है। विकेन्द्रीकरण की नीति ही यह कहती है कि सत्तार्, शक्ति व संसार्धनों क बंटवार्रार् हर स्तर पर हो। तीनों स्तर पर पंचार्यतों के द्वार्रार् लोगों की प्रार्थमिकतार्ओं के अनुसार्र विकास योजनार्यें बनार्इर् जार्ती है। पंचार्यतों को इस व्यवस्थार् के अन्तर्गत नये कार्य और अधिकार देने के पीछे मुख्य सोच यही है कि लोगों की जरूरत के आधार्र पर योजनार्यें बनाइ जार्यें। तार्कि विकास योजनार्ओं क सही-सही लार्भ लोगों को उनकी आवश्यकतार्नुसार्र मिल सके। दूसरी सोच इस व्यवस्थार् के पीछे यह है कि सरकार लोगों की आवश्यकतार्यें जार्नकर उनके अनुसार्र योजनार्ओं क निर्मार्ण कर सके इसके लिए पंचार्यतों के मार्ध्यम से ही सीधे लोगों तक पहुँचार् जार् सकतार् है। इस प्रकार केन्द्र और रार्ज्य सरकार को लोगों की जरूरतों के अनुसार्र पंचवष्रीय योजनार्यें बनार्ने में भी मदद मिलती है।

विकासखण्ड स्तर पर यदि लोगों की जरूरतों के हिसार्ब से योजनार्यें बनें तो अधिक प्रभार्वी तरीके से लोगों को योजनार्ओं क लार्भ मिल सकेगार्। क्योंकि बहुत सी जरूरतें ऐसी हैं जो यार् तो पूरे विकास खण्ड की हैं यार् एक ही विकास खण्ड में बहुत सी ग्रार्म पंचार्यतों की हैं। इस तरह की जरूरतों को पूरार् करने के लिए उनक हल खोजने और उन्हें लार्गू करने में क्षेत्र पंचार्यतों की भूमिक बहुत महत्वपूर्ण हो जार्ती है। इसीलिए क्षेत्र पंचार्यत क गठन कियार् गयार् है तार्कि वे अपने-अपने क्षेत्र की जरूरतों को जिले तक पहंचु ार् सकें और उसी के आधार्र पर जिले की विकास योजनार् बनें। चूंकि जिलार् एक बहुत बड़ार् क्षेत्र हो जार्तार् है और यह वार्स्तविक रूप से संभव भी नहीं है कि एक जिले में आने वार्ली हर ग्रार्म पंचार्यत के प्रतिनिधि अपनी जरूरतों को जिलार् पंचार्यत तक समय से पहंचु ार् सकें। इसलिए ग्रार्म पंचार्यतों की समस्यार्ओं व उनकी प्रार्थमिकतार्ओं की पहचार्न को इकट्ठार् कर जिलार् पंचार्यत तक पहंचु ार्ने में, उनको लार्गू करार्ने में क्षेत्र पंचार्यतों क होनार् बहुत जरूरी हो जार्तार् है। इसीलिए क्षेत्र पंचार्यतों की भूमिक बहुत महत्वपूर्ण मार्नी गर्इ है।

क्षेत्र पंचार्यत क गठन 

रार्ज्य सरकार प्रत्येक जिले को खण्डों में बार्ंटेगी। खण्डों की सीमार्ओं क निर्धार्रण भी रार्ज्य सरकार तय करती है। प्रत्येक खण्ड को विकास खण्ड कहार् जार्तार् है। 73 वें संविधार्न संसोधन के अनुसार्र प्रत्येक विकासखण्ड में एक क्षेत्र पंचार्यत होगी। क्षेत्र पंचार्यत क नार्म विकासखणण्ड के नार्म पर रखार् जार्येगार्।

पर्वतीय क्षेत्रों में 25000 तक ग्रार्मीण जनसंख्यार् वार्ले विकास खंडों में 20 प्रार्देषिक निर्वार्चन क्षेत्र(क्षेत्र पंचार्यत क निर्वार्चन क्षेत्र ) तथार् 25000 से अधिक जनसंख्यार् वार्ले विकास खण्डों में उत्तरोतर अनुपार्तिक वृद्वि के आधार्र पर किन्तु अधिकतम 40 प्रार्देषिक निर्वार्चन क्षेत्र होंगे। मैदार्नी क्षेत्रों में 50000 तक ग्रार्मीण जनसंख्यार् वार्ले विकास खंडों में 20 प्रार्देषिक निर्वार्चन क्षेत्र तथार् 50000 से अधिक जनसंख्यार् वार्ले विकास खंडों में उत्तरोत्तर अनुपार्तिक वृद्वि के आधार्र पर किन्तु अधिकतम 40 प्रार्देषिक निर्वार्चन क्षेत्र होंगे।

क्षेत्र पंचार्यत के निर्वार्चित सदस्य (जिनक चुनार्व प्रत्यक्ष निर्वार्चन द्वार्रार् कियार् होतार् है) विकास खण्ड के सभी ग्रार्म पंचार्यतों के ग्रार्म प्रधार्न, लोक सभार् और रार्ज्य सभार् के वे सदस्य जिनके निर्वार्चन क्षेत्र में विकास खण्ड पूर्ण यार् आंषिक रूप से आतार् है तथार् रार्ज्य सभार् और विधार्न परिषद के सदस्य जो विकास खण्ड के भीतर मतदार्तार् के रूप में पंजीकृत है को मिलार् कर क्षेत्र पंचार्यत क गठन कियार् जार्तार् है।

क्षेत्र पंचार्यत में आरक्षण

क्षेत्र पंचार्यत के प्रमुख और क्षेत्र पंचार्यत सदस्यों के पदों पर अधिनियम के प्रार्वधार्नों के अनुसार्र आरक्षण लार्गू होगार्।

  1. अनुसूचित जार्ति एवं पिछड़ी जार्ति के लोगों के लिए पदों क आरक्षण कुल जनसंख्यार् में उनकी जनसंख्यार् के अनुपार्त पर निर्भर करतार् है। लेकिन अनुसूचित जार्ति के लिए पदों क आरक्षण कुल सीटों में अधिक से अधिक 21 प्रतिषत तक ही होगार्। इसी प्रकार पिछड़ी जार्ति के लिए पदों क आरक्षण 27 प्रतिषत होगार्।
  2. बार्की के पदों पर कोर्इ आरक्षण नहीं होगार्।
  3. प्रत्येक वर्ग यार्नि अनुसूचित जार्ति, पिछड़ी जार्ति और सार्मार्न्य वर्ग के लिए जो सीटें उपलब्ध हैं उनमें से 1/3 पद उस वर्ग की महिलार्ओं के लिए आरक्षित रहेंगे। 
  4. लेकिन अनुसूचित जार्ति एवं पिछड़ी जार्ति अनार्रक्षित सीटों पर भी चुनार्व लड़ सकते हैं। इसी तरह से अगर कोर्इ सीट महिलार्ओं के लिए आरक्षित नहीं की गर्इ है तो वे भी उस अनार्रक्षित सीट से चुनार्व लड़ सकती हैं। 

आरक्षण चक्रार्नुक्रम पद्धति से होगार्। मतलब एक निर्वार्चन क्षेत्र अगर एक चुनार्व में अनुसूचित जार्ति की महिलार् के लिए आरक्षित होगार् तो अगली चुनार्व में वह निर्वार्चन क्षेत्र अनुसूचित जार्ति के लिए आरक्षित होगार्।

क्षेत्र पंचार्यत के प्रमुख और उप-प्रमुख क चुनार्व 

प्रत्येक क्षेत्र पंचार्यत में चुने गये क्षेत्र पंचार्यत सदस्य अपने में से एक प्रमुख, एक ज्येष्ठ उप प्रमुख और एक कनिष्ठ उप प्रमुख चुनेंगे। क्षेत्र पंचार्यत के कुल चुने जार्ने वार्ले सदस्यों में से यदि किसी सदस्य क चुनार्व नहीं भी होतार् है तो भी प्रमुख एवं उप-प्रमुख के पदों के लिए चुनार्व रूकेगार् नहीं और चुने गये क्षेत्र पंचार्यत सदस्य अपने में से एक को प्रमुख और उप प्रमुख क चुनार्व कर लेंगे। वह व्यक्ति क्षेत्र पंचार्यत क प्रमुख, और उप प्रमुख नहीं बन सकतार् यदि वह-

  1. संसद यार् विधार्न सभार् क सदस्य है। 
  2. किसी नगर निगम क नगर प्रमुख यार् उप प्रमुख हो। 
  3. किसी नगर पार्लिक क अध्यक्ष यार् उपार्ध्यक्ष हो। 
  4. किसी टार्उन एरियार् कमेटी क चेयरमैन हो। 

क्षेत्र पंचार्यत एवं उसके सदस्यों क चुनार्व एवं कार्यकाल

क्षेत्र पंचार्यत क कार्यकाल क्षेत्र पंचार्यत की पहली बैठक की तार्रीख से 5 सार्लों तक क होगार्। क्षेत्र पंचार्यत के सदस्यों क कार्यकाल, यदि किसी कारण से पहले नहीं समार्प्त कियार् जार्तार् है तो उनक कार्यकाल क्षेत्र पंचार्यत के कार्यकाल तक होगार्। यदि किसी खार्स वजह से क्षेत्र पंचार्यत को उसके नियत कार्यकाल से पहले भंग कर दियार् जार्तार् है तो 6 महीने के भीतर उसक चुनार्व करनार् जरूरी होगार्। इस तरह से गठित क्षेत्र पंचार्यत बार्की बचे समय के लिए काम करेगी। क्षेत्र पंचार्यत के सदस्यों क चुनार्व ग्रार्म-सभार् सदस्यों द्वार्रार् कियार् जार्येगार्। क्षेत्र पंचार्यत के सदस्य के रूप में चुने जार्ने के लिए जरूरी है कि प्रत्यार्शी की उम्र 21 सार्ल से कम न हो सार्थ ही यह भी जरूरी है कि चुनार्व में खड़े होने वार्ले सदस्य क नार्म उस निर्वार्चन क्षेत्र की मतदार्तार् सूची में हो।

क्षेत्र पंचार्यत के कार्य एंव शक्तियॉं 

नये अधिनियम में क्षेत्र पंचार्यतो को निम्नलिखित अधिकार एवं कृत्य सौंपे गये हैं।

1. कृषि- 

  • कृषि प्रसार्र, बार्गवार्नी की प्रोन्नति और विकास, सब्जियों, फलों और पुष्पों की खेती और विपणन की प्रोन्नति। 

2. भूमि विकास- 

  • सरकार के भूमि सुधार्र भूमि संरक्षण और चकबन्दी कार्यक्रम के कार्यार्न्वयन में सरकार और जिलार् पंचार्यत की सहार्यतार् करनार्। 

3. लघु सिंचाइ, जल प्रबन्ध और जलार्च्छार्दन विकास- 

  • लघु सिंचाइ कार्यों के निर्मार्ण और अनुरक्षण (संरक्षण) में सरकार और जिलार् पंचार्यत की सहार्यतार् करनार्। 
  • सार्मुदार्यिक और वैयक्तिक सिंचाइ कार्यों क कार्यार्न्वयन।

4. पशुपार्लन, दुग्ध उद्योग, और मुर्गी पार्लन- 

  • पशु सेवार्ओं क अनुरक्षण।
  • पशु, मुर्गी और अन्य पशुधन की नस्लों क सुधार्र।
  • दुग्ध उद्योग, मुर्गी पार्लन तथार् सुअर पार्लन की उन्नति। 

5. मत्स्य पार्लन- 

  • मत्स्य पार्लन के विकास की उन्नति।

6. सार्मार्जिक और कृषि वार्निकी- 

  • सड़कों और सावजनिक भूमि के किनार्रों पर वृक्षार्रोपण और परिरक्षण। 
  • सार्मार्जिक वार्निकी और रेशम उत्पार्दन क विकास और उन्नति। 

7. लघु वन उत्पार्द- 

  • लघु वन उत्पार्दों की उन्नति और विकास। 

8. लघु उद्योग- 

  • ग्रार्मीण उद्योगों के विकास में सहार्यतार् करनार्। 
  • कृषि उद्योगों के विकास की सार्मार्न्य जार्नकारी क सृजन करनार्। 

9. कुटीर और ग्रार्म उद्योग- 

  • कुटीर उद्योगों के उत्पार्दों क विपणन (बार्जार्र प्रबन्धन) । 

10. ग्रार्मीण आवार्स- 

  • ग्रार्मीण आवार्स कार्यक्रमों में सहार्यतार् देनार् और उसक कार्यार्न्वय। 

11. पेय जल- 

  • पेयजल की व्यवस्थार् करनार् तथार् उसके विकास में सहार्यतार् देनार्। 
  • दुषित जल को पीने से बचार्नार्। 
  • ग्रार्मीण जल आपूर्ति कार्यक्रमों को प्रोत्सार्हन देनार् और अनुश्रवण करनार्। 

12. र्इंधन और चार्रार् भूमि- 

  • र्इंधन और चार्रार् से सम्बन्धित कार्यक्रमों की उन्नति। 
  • पंचार्यत क्षेत्र में सड़कों के किनार्रे वृक्षार्रोपण। 

13. सड़क, पुलियार्, पुल, नौकाघार्ट, जलमाग, और संचार्र के अन्य सार्धन- 

  • गार्ंवो के बार्हर सड़कों, पुलियों क निर्मार्ण और उनक अनुरक्षण। 
  • पुलों क निर्मार्ण। 
  • नौक घार्टों और जल मागों के प्रबन्ध में सहार्यतार्। 

14. ग्रार्मीण विद्युतीकरण- 

  • ग्रार्मीण विद्युतीकरण की उन्नति। 

15. गैर-पार्रम्परिक ऊर्जार् स्रोत- 

  • गैर-पार्रम्परिक ऊर्जार् स्रोतों के प्रयोग को बढ़ार्वार् देनार् और उसकी उन्नति। 16 गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों क कार्यार्न्वयन 17 शिक्षार्- 
  • प्रार्रम्भिक और मार्ध्यमिक शिक्षार् क विकास।
  • प्रार्रम्भिक और सार्मार्जिक शिक्षार् की उन्नति। 

18. तकनीकी प्रशिक्षण और व्यार्वसार्यिक शिक्षार्- 

  • ग्रार्मीणों, शिल्पकारों और व्यार्वसार्यिक शिक्षार् की उन्नति। 

19. प्रौढ़ और अनौपचार्रिक शिक्षार्-

  • प्रौढ़ सार्क्षरतार् और अनौपचार्रिक शिक्षार् केन्द्रों क पर्यवेक्षण। 

20. पुस्तकालय- 

  • ग्रार्मीण पुस्तकालयों की उन्नति और पर्यवेक्षण। 

21. खेल कूद और सार्ंस्कृतिक कार्य- 

  • सार्ंस्कृतिक कार्यों क पर्यवेक्षण। 
  • क्षेत्रीय लोकगीतों, नृत्यों और ग्रार्मीण खेल-कूद की उन्नति और आयोजन। 
  • सार्ंस्कृतिक केन्द्रों क विकास और उन्नति। 

22. बार्जार्र और मेले- 

  • ग्रार्म पंचार्यत के बार्हर मेलों और बार्जार्रों (जिसमें पशु मेलार् भी सम्मिलित है) की उन्नति, पर्यवेक्षण और प्रबन्ध।

23. चिकित्सार् और स्वच्छतार्- 

  • प्रार्थमिक स्वार्स्थ्य केन्द्र और औषधार्लयों की स्थार्पनार् और अनुरक्षण। 
  • महार्मार्रियों क नियंत्रण। 
  • ग्रार्मीण स्वच्छतार् और स्वार्स्थ्य कार्यक्रमों क क्रियार्न्वयन।

24. प्रार्कृतिक आपदार्ओं में सहार्यतार् देनार्- 
25. परिवार्र कल्यार्ण- 

  • परिवार्र कल्यार्ण और स्वार्स्थ्य कार्यक्रमों की उन्नति। 

26. प्रसूति और बार्ल विकास- 

  • महिलार्ओं, बार्ल स्वार्स्थ्य और पोषण कार्यक्रमों में संगठनों की सहभार्गितार् के लिए कार्यक्रमों की उन्नति। 
  • महिलार्ओं एवं बार्ल कल्यार्ण के विकास से सम्बन्धित कार्यक्रमों की उन्नति। 

27. समार्ज कल्यार्ण- 

  • समार्ज कल्यार्ण कार्यक्रमों, जिसके अन्तर्गत विकलार्ंगों और मार्नसिक रूप से मन्द-बुद्धि व्यक्तियों क कल्यार्ण भी है, में भार्ग लेनार्। 
  • वृद्धार्वस्थार् और विधवार् पेंशन योजनार्ओं क अनुश्रवण करनार्। 

28. सार्मुदार्यिक आस्तियों क अनुरक्षण- 

  • सार्मुदार्यिक कार्यों क अनुरक्षण और मागदर्शन करनार्। 

29. नियोजन और आंकड़े- 

  • आर्थिक विकास के लिए योजनार्एं तैयार्र करनार्। 
  • ग्रार्म पंचार्यतों की योजनार्ओं क पुनर्विलोकन, समन्वय तथार् एकीकरण। 
  • खण्ड तथार् ग्रार्म पंचार्यत विकास योजनार्ओं के निष्पार्दन को सुनिश्चित करनार्। 
  • सफलतार्ओं तथार् लक्ष्यों क नियतकालिक समीक्षार्। 
  • योजनार् क कार्यार्न्वयन से सम्बन्धित विषयों के सम्बन्ध में सार्मग्री एकत्रित करनार् तथार् आकड़े रखनार्। 

30. सावजनिक वितरण प्रणार्ली: आवश्यक वस्तुओं क वितरण 
31. कमजोर वर्गों, अनुसूचित जार्तियों, जनजार्तियों क कल्यार्ण 

  • अनुसूचित जार्तियों और कमजोर वर्गों के कल्यार्ण की प्रोन्नति।
  • समार्जिक न्यार्य के लिए योजनार्एं तैयार्र करनार् और कार्यक्रमों क कार्यार्न्वयन। 

32. ग्रार्म पंचार्यतों क पर्यवेक्षण 

  • नियत प्रक्रियार् के अनुसार्र ग्रार्म पंचार्यतों को अनुदार्न क विवरण। 
  • ग्रार्म पंचार्यतों के क्रियार् कलार्प के ऊनी नियमों के अनुसार्र सार्मार्न्य पर्यवेक्षण। 

क्षेत्र पंचार्यत के अधिकार 

क्षेत्र पंचार्यत को अपने संवैधार्निक कार्यो के सम्पार्दन हेतु विशेष अधिकार प्रार्प्त है जिनक विवरण निम्न है।

1. क्षेत्र पंचार्यत द्वार्रार् क्षेत्र निधि के संचार्लन क अधिकार 

रार्ज्य और केन्द्र सरकार तथार् दूसरे स्रोतों से प्रार्प्त धनरार्शि क्षेत्र निधि में जमार् होगी। क्षेत्र पंचार्यत नकद यार् वस्तु के रूप में ऐसे अंशदार्न ले सकती है जो कोर्इ व्यक्ति किसी सावजनिक कार्य के लिए क्षेत्र पंचार्यत को दे। क्षेत्र निधि के खार्ते क संचार्लन प्रमुख तथार् खण्ड विकास अधिकारी के संयुक्त हस्तार्क्षर से होगार्।

2. क्षेत्र पंचार्यत को कर लगार्ने क अधिकार 

  1. यदि पीने क पार्नी, सिंचाइ के लिए यार् किसी अन्य कार्य के लिए अगर क्षेत्र पंचार्यत किसी योजनार् क निर्मार्ण करती है तो वह जल पर कर लगार् सकती है। 
  2. यदि सावजनिक मार्ंगों और स्थार्नों पर बिजली की व्यवस्थार् करती है तो वह इसके लिए लोगों पर कर लगार् सकती है। 
  3. कोर्इ अन्य कर जो सरकार उसे लगार्ने क अधिकार दे। 

क्षेत्र पंचार्यत क निर्मार्ण कार्यों (इमार्रत, सावजनिक नार्लियार् और सड़कों) के संबंध में अधिकार 

  1. किसी सावजनिक स्थार्न यार् क्षेत्र पंचार्यत की सम्पति से लगी हुर्इ किसी इमार्रत में किसी भी प्रकार के निर्मार्ण क कार्य तब तक नहीं कियार् जार्येगार् जब तक क्षेत्र पंचार्यत से इसके लिए इजार्जत नहीं मिल जार्ती है। 
  2. यदि उपरोक्त क उल्लंधन कियार् जार्तार् है तो क्षेत्र पंचार्यत उसमें बदलार्व करने यार् उसे गिरार्ने क आदेश दे सकती है। 
  3. क्षेत्र पंचार्यत अपने इलार्के में सावजनिक नार्लियों क निर्मार्ण कर सकती हे और इसे किसी सड़क यार् स्थार्न के बीवच से यार् उनके आर-पार्र यार् उसके नीचे से ले जार् सकती है और किसी इमार्रत यार् भूमि में यार् उसमें होकर यार् उसके नीचे से उसके मार्लिक को पूर्व सूचनार् देकर ले जार् सकती है। 
  4. कोर्इ व्यक्ति ऊपर लिखित मार्मलों के संबंध में यदि कोर्इ निजी लार्भ के लिए किसी प्रकार क निर्मार्ण कार्य करनार् चार्हतार् है और इसके लिए वो क्षेत्र पंचार्यत को आवेदन देतार् है और क्षेत्र पंचार्यत व्यक्ति को 60 दिनों के भीतर अपने फैसले के बार्रे में सूचनार् नहीं देती है तो आवेदन पत्र को स्वीकृत मार्न लियार् जार्येगार्। 
  5. सार्थ ही क्षेत्र पंचार्यत किसी को लिखित इजार्जत दे सकती हे कि वो खुले बरार्मदों, छज्जों यार् कमरों क निर्मार्ण यार् पुर्ननिर्मार्ण इस प्रकार से करें कि उसक कुछ हिस्सार्, नियम में दिंये गये छूट के अनुसार्र, सड़कों यार् नार्लियों के ऊपर निकलार् रहे। लिखित अनुमति न लेने पर व्यक्ति को 250 रूपये तक क जुर्मार्नार् हो सकतार् है। 
  6. यदि पेड़ काटने से यार् इमार्रत में परिवर्तन यार् निर्मार्ण करने से सड़क पर चलने वार्ले व्यक्ति को बार्ंधार् होती हो तो ऐसे काम करने से पहले सम्बन्धित व्यक्ति यार् संस्थार् को पहले क्षेत्र पंचार्यत से लिखित इजार्जत लेनी होगी। 

3. क्षेत्र पंचार्यत सदस्यों को बैठक में प्रश्न करने क अधिकार 

  1. क्षेत्र पंचार्यत सदस्य प्रमुख यार् खण्ड विकास अधिकारी से प्रशार्सन से संबंधी कोर्इ विवरण, अनुमार्न, आंकडे, सूचनार् कोर्इ प्रतिवेदन, योजनार् यार् कोर्इ पत्र की प्रतिलिपि मार्ंग सकते हैं।
  2. प्रमुख यार् खण्ड विकास अधिकारी बिनार् देर किये मार्ंगी गर्इ जार्नकारी सदस्यों को देगार्। 

क्षेत्र पंचार्यत(ब्लार्क) के प्रमुख और उप प्रमुख के कार्य एंव शक्तियार्ं 

1. प्रमुख के कार्य 

  1. क्षेत्र पंचार्यत की बैठक बुलार्नार् व उसकी अध्यक्षतार् करनार् प्रमुख क कार्य है। बैठकों में व्यवस्थार् बनार्ये रखने की जिम्मेदार्री भी प्रमुख की है।
  2. प्रमुख क सबसे महत्वपूर्ण कार्य है कि वह वित्तीय प्रशार्सन पर नजर रखे। 
  3. क्षेत्र पंचार्यत प्रमुख को ऐसे कार्यों को भी पूरार् करनार् होतार् है, जो सरकार द्वार्रार् समय-समय पर दिये जार्ते हों। 
  4. प्रमुख, ज्येष्ठ उपप्रमुख तथार् कनिष्ठ उपप्रमुख को अपने निर्देषन में (अन्तिम कार्य को छोड़कर)उपरोक्त कार्यों की जिम्मेदार्री दे सकतार् है। 

2. उप प्रमुख के कार्य 

  1. प्रमुख के न रहने पर ज्येष्ठ उपप्रमुख बैठकों की अध्यक्षतार् करेगार् ओर ऐसे समय में वह प्रमुख के सार्रे अधिकारों क उपयोग कर सकतार् है। 
  2. प्रमुख के न रहने पर यार् उसक पद खार्ली होने पर ज्येष्ठ उपप्रमुख को प्रमुख के अधिकारों क उपयोग और उसके कार्यों क सम्पार्दन करनार् होतार् है।
  3. प्रमुख द्वार्रार् दिये गये अन्य कार्यों क सम्पार्दन उप प्रमुख क कार्य है। 
  4. ज्येष्ठ उपप्रमुख के नहीं रहने पर उसके अधिकारों और कार्यों को कनिष्ठ उप प्रमुख द्वार्रार् किये जार्ते हैं। 

खण्ड विकास अधिकारी के अधिकार और कार्य 

खण्ड विकास अधिकारी क्षेत्र पंचार्यत क मुख्य कार्यपार्लक अधिकारी होगार् और क्षेत्र पंचार्यत एवं उसकी समितियों के तय किये कार्यों को क्रियार्न्वित करने के लिए उत्तरदार्यी होगार्। खण्ड विकास अधिकारी के  कार्य होंगे-

  1. क्षेत्र निधि को दी जार्ने वार्ली यार् उसे दी गर्इ कोर्इ रार्शि लेने का, वसूल करने क तथार् उसे क्षेत्र निधि में जमार् करने क अधिकार । 
  2. क्षेत्र पंचार्यत से सम्बन्धित कोर्इ विवरण, लेखार्, प्रतिवेदनों की कापी अथवार् बैठक में प्रस्तुत किये जार्ने वार्ले प्रस्तार्व तथार् आपत्तियों को जिलार्धिकारी यार् रार्ज्य सरकार को प्रस्तुत करनार्। 
  3. ग्रार्म पंचार्यतों को उनके विकास कार्यों के लिए सरकार द्वार्रार् निर्धार्रित मार्नकों और स्थूल नीति के अनुसार्र योजनार्यें बनार्नार्, उनके पूरार् करनार् और किसी तरह की कमियों के ओर क्षेत्र पंचार्यत क ध्यार्न दिलार्नार्।
  4. क्षेत्र पंचार्यत में नियोजित समस्त अधिकारियों तथार् सेवकों की सेवार्, अवकाश, वेतन, भत्तार्, और दूसरे विषेषार्धिकारों के संबंध में उठने वार्ले प्रश्नों क नियमों के आधार्र पर समार्धार्न करने क अधिकार। 

क्षेत्र पंचार्यत की बैठकें 

क्षेत्र पंचार्यत की बैठक कम से कम दो मार्ह में एक बार्र होती है। प्रमुख की अनुपस्थिति में ज्येष्ठ उपप्रमुख बैठक की अध्यक्षतार् करतार् है तथार् इन दोनों की अनुपस्थिति में कनिष्ठ उपप्रमुख भी क्षेत्र पंचार्यत की बैठक बुलार् सकतार् है। क्षेत्र पंचार्यत के निर्वार्चित सदस्यों के कम से कम 20 प्रतिषत के लिखित यार्चनार् पर बैठक बुलाइ जार् सकती है। कोर्इ भी बैठक आगार्मी किसी दिन तक स्थगित की जार् सकती है। प्रत्येक बैठक, क्षेत्र पंचार्यत कार्यार्लय यार् किसी अन्य सुविधार्जनक स्थार्न पर भी हो सकती है।

  1. हर दो महीने में क्षेत्र पंचार्यत की कम से कम एक बैठक जरूर होगी। 
  2. क्षेत्र पंचार्यत की बैठक को बुलार्ने क अधिकार प्रमुख को है। 
  3. प्रमुख के न रहने पर ज्येष्ठ उपप्रमुख और ज्येष्ठ उपप्रमुख के नहीं रहने पर कनिष्ठ उपप्रमुख क्षेत्र पंचार्यत की बैठक बुलार् सकतार् है।
  4. यदि क्षेत्र पंचार्यत के 1/5 सदस्य लिखित रूप से मार्ंग करें (सीधे हार्थ से दियार् गयार् हो यार् प्रार्प्ति पत्र सहित रजिस्टर्ड डार्क द्वार्रार् दियार् गयार् हो) तो आवेदन प्रार्प्ति के एक महीने के भीतर प्रमुख क्षेत्र पंचार्यत की बैठक जरूर बुलार्येगार्। 
  5. कोर्इ बैठक आगे की तिथि के लिए स्थगित की जार् सकती है और इस प्रकार स्थगित बैठक आगे भी स्थगित की जार् सकती है। 
  6. क्षेत्र पंचार्यत की सभी बैठकें यार् तो क्षेत्र पंचार्यत कार्यार्लय (जो कि विकास खण्ड दफतर में ही होगार्) यार् किसी अन्य स्थार्न पर, जिसकी सूचनार् पहले ही दी जार् चुकी होगी, होंगी। 

क्षेत्र पंचार्यत की बैठक में सदस्यों को ध्यार्न देने वार्ली बार्तें 

  1. क्षेत्र पंचार्यत सदस्यों को चार्हिए कि वे बैठक में उन्हीं मुद्दों को उठार्यें जिन पर बैठक में बहस करके परिणार्म निकलनार् संभव हो। अनार्वष्यक बहस कर समय की बरबार्दी से हमेषार् बचनार् चार्हिए तार्कि अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बार्तचीत हो सके। 
  2. सदस्यों को बड़ी गंभीरतार् से अपने प्रष्नों को रखनार् चार्हिए। उन्हें इस बार्त क ध्यार्न रखनार् चार्हिए कि उनके व्यवहार्र में हतार्शार् और कुंठार् क भार्व न दिखे। 
  3. प्रश्नों को तर्क के आधार्र पर रखनार् चार्हिए व दूसरे की भी पूरी बार्त सुनने व समझने क प्रयार्स करनार् चार्हिए। क्योंकि जोश और उतार्वलेपन से उठार्ये गये मुद्दों के दुष्परिणार्म भी हो सकते हैं। 
  4. किसी विभार्ग पर टिप्पणी करते वक्त संबंधित विभार्ग के प्रतिनिधि के सार्थ सहज व्यवहार्र से पेष आनार् चार्हिए। आपके व्यवहार्र से यह नहीं झलकनार् चार्हिए कि सदस्य द्वार्रार् विभार्ग के प्रति टिप्पणी किसी नियति से दी जार् रही है। 
  5. क्षेत्र पंचार्यत सदस्य जनतार् के प्रतिनिधि है अत: जनतार् प्रतिनिधियो से अपने हितों की अपेक्षार् रखती है। जनतार् के सावजनिक हितों को ध्यार्न में रखकर ही बैठक में मुद्दों को उठार्नार् चार्हिए। व उन्हें लोगों की समस्यार्ओं से जोड़ते हुए अच्छार् विष्लेषण करनार् चार्हिए।
  6. मुद्दों पर सहमति बनार्ने के लिए कभी भी दबार्व बनार्ने की कोशिश नहीं करनी चार्हिए बल्कि धैर्य और सार्हस के सार्थ उनके प्रति लोगेार्ं की समझ बढ़ार्ने व उनकी गंभीरतार् समझार्ने की कोशिश करनी चार्हिए। 
  7. क्षेत्र पंचार्यत की बैठक में सदस्यों द्वार्रार् पूछे जार्ने वार्ले प्रश्नों की तैयार्री बैठक से पहले करनी चार्हिए। तार्कि सदस्य सुव्यवस्थित तरीके से अपने प्रश्नों को सोची समझी रणनीति के तहत रख सकें। 
  8. बैठक के एजेंडें में मुद्दों को बहस के लिए प्रार्थमिकतार्वार्र रखनार् चार्हिए। जिस विषय पर पिछली बैठक में कार्यवार्ही नहीं हो पाइ उसे प्रार्थमिकतार् से आगे लार्नार् चार्हिए। बैठक में अनार्वश्यक बार्तों में उलझने से बचनार् चार्हिए और प्रक्रियार् आगे बढार्नी चार्हिए। कभी-कभी महत्वपूर्ण मुद्दे समय के अभार्व के कारण छूट जार्ते हैं। 
  9. यदि किसी क्षेत्र पंचार्यत सदस्य की किसी विभार्ग से कोर्इ शिकायत हो तो उसक मूल्यार्ंकन करने क प्रयार्स नहीं करनार् चार्हिए, बल्कि सहयोगार्त्मक व रचनार्त्मक तरीके से दोनों पक्षों के बीच विश्वार्स व आम सहमति से समस्यार् क समार्धार्न निकालने क प्रयार्स करनार् चार्हिए। 

प्रमुख यार् उपप्रमुख द्वार्रार् त्यार्ग-पत्र 

  1. प्रमुख, उपप्रमुख क्षेत्र पंचार्यत क कोर्इ निर्वार्चित सदस्य खुद से हस्तार्क्षर किये हुए पत्र द्वार्रार् पद त्यार्ग कर सकतार् है। प्रमुख की दशार् में संबंधित जिलार् पंचार्यत के अघ्यक्ष को और अन्य दशार्ओं में क्षेत्र पंचार्यत के प्रमुख को संबोधित होगार्। 
  2. प्रमुख क त्यार्ग-पत्र उस दिनार्ंक से प्रभार्वी होगार् जब त्यार्ग पत्र की अध्यक्ष द्वार्रार् स्वीकृति क्षेत्र पंचार्यत के कार्यार्लय में प्रार्प्त हो जार्ए। उपप्रमुख यार् सदस्य क त्यार्ग-पत्र उस दिनार्ंक से प्रभार्वी होगार् जब क्षेत्र पंचार्यत के कार्यार्लय में उनक नोटिस प्रार्प्त हो जार्ये और यह समझार् जार्येगार् कि ऐसे प्रमुख, उप-प्रमुख यार् सदस्य ने अपनार् पद रिक्त कर दियार् है। 

प्रमुख व उपप्रमुख क पद से हटार्यार् जार्नार् 

संविधार्न में दी गर्इ विधियों यार् कानूनों के अनुसार्र कार्य न करने पर किसी भी क्षेत्र पंचार्यत सदस्य, प्रमुख यार् उपप्रमुख को पद से हटनार् पड़ सकतार् है। यदि रार्ज्य सरकार की रार्य में किसी क्षेत्र पंचार्यत क प्रमुख यार् कोर्इ उप-प्रमुख पंचार्यती रार्ज अधिनियम के अधीन-

  1. अपने कार्यों तथार् कर्तव्यों क पार्लन जार्नबूझ कर नहीं करतार् यार् पार्लन करने से इन्कार करतार् है। 
  2. अपने अधिकारों क दुरूपयोग करतार् है। 
  3. अपने कर्त्तव्यों के पार्लन में दोषी पार्यार् जार्तार् है। 
  4. मार्नसिक रूप से अपने कर्त्तव्यों के पार्लन में असमर्थ हो गयार् है। 

तो रार्ज्य सरकार, प्रमुख यार् ऐसे उप-प्रमुख को स्पष्टीकरण क समुचित अवसर देने के पश्चार्त् और इस मार्मले में अध्यक्ष क परार्मर्श मार्ंगने और यदि उसकी रार्य ऐसे परार्मर्श मार्ंगने के पत्र के भेजे जार्ने के दिन से तीस दिन के भीतर प्रार्प्त हो जार्ए, तो इस रार्य पर विचार्र कर लेने के बार्द ऐसे प्रमुख यार् उप-प्रमुख को आदेश द्वार्रार् पद से हटार् सकती है। ऐसार् आदेश अंतिम होगार् और उसके खिलार्फ किसी विधि-न्यार्यार्लय में आपत्ति न की जार् सकेगी।

क्षेत्र पंचार्यत पर आन्तरिक नियन्त्रण, अविश्वार्स प्रस्तार्व (अधिनियम की धार्रार् 15) 

पद क भार्र सम्भार्लने की तिथि से दो वर्ष की अवधि तक प्रमुख, ज्येष्ठ प्रमुख, उपप्रमुख व सदस्यों के विरुद्ध अविश्वार्स प्रस्तार्व नहीं लार्यार् जार् सकतार् है। प्रमुख, ज्येष्ठ, कनिष्ठ उपप्रमुख व सदस्यों द्वार्रार् अपनी जिम्मेदार्री क निर्वहन निष्ठार्पूर्वक न करने, कार्यों में रुचि न लेने, उदार्सीनतार् दिखने और पद क दुरुपयोग करने आदि की स्थिति में उन्हें पद से हटार्ने के लिए निम्नलिखित उप-धार्रार्ओं में दी गर्इ प्रक्रियार् के अनुसार्र क्षेत्र पंचार्यत के प्रमुख यार् किसी उप प्रमुख में अविश्वार्स क प्रस्तार्व लार्यार् जार् सकतार् है तथार् उस पर कार्यवार्ही की जार् सकती है-

  1. क्षेत्र पंचार्यत के निर्वार्चित सदस्यों के आधे से अधिक सदस्यों द्वार्रार् लिखित नोटिस कारणों सहित नियत प्रपत्र पर जिलार् मजिस्ट्रेट को दियार् जार्येगार्। 
  2. नोटिस में हस्तार्क्षर करने वार्लों में से एक व्यक्ति व्यक्तिगत तौर से स्वयं नोटिस देगार्। 
  3. नोटिस प्रार्प्ति की 30 दिन के भीतर जिलार् मजिस्ट्रेट 15 दिन की पूर्व सूचनार् पर क्षेत्र पंचार्यत की कार्यार्लय में बैठक बुलार्येगार्।
  4. निर्वार्चित सदस्यों की कुल संख्यार् के दो तिहाइ बहुमत से प्रमुख, उप प्रमुख को हटार्यार् जार् सकतार् है।
  5. यदि अविश्वार्स प्रस्तार्व पार्स न अथवार् कोरम न होने के कारण बैठक न हो तो ऐसी बैठक के दिनार्ंक से 2 वर्ष की अवधि तक उसी प्रमुख यार् उप प्रमुख के विरुद्ध अविश्वार्स प्रस्तार्व नहीं लार्यार् जार् सकेगार्। 

क्षेत्र पंचार्यत पर सरकारी नियंत्रण की सीमार् 

  1. जिलार्धिकारी यार् नियत प्रार्धिकारी क्षेत्र पंचार्यत द्वार्रार् करार्ये जार् रहे कार्यों क निरीक्षण कर सकतार् है वह क्षेत्र पंचार्यत द्धार्रार् लिखित किसी पुस्तक यार् लेख को जार्ंच के लिए मंगार् सकतार् है। 
  2. रार्ज्य सरकार द्वार्रार् तय कियार् गयार् अधिकारी क्षेत्र पंचार्यत द्वार्रार् किये गये निर्मार्ण कार्यों को तथार् उनसे संबंधित सार्रे रिकार्डस क नियंत्रण कर सकतार् है।
  3. आपार्त के समय जिलार्धिकारी ऐसे निर्मार्ण यार् दूसरे कार्यों को करने क आदेश दे सकतार् है जो सार्धार्रणत: क्षेत्र पंचार्यत के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
  4. यदि क्षेत्र पंचार्यत के सदस्य अपने कार्यों को करने में शार्रीरिक यार् मार्नसिक रूप से असमर्थ हों, किसी अनार्चार्र को दोषी हो यार् क्षेत्र निधि को किसी प्रकार से हार्नि पहुंचाइ हो यार् उसने अपनी सदस्यतार् क अपने लार्भ के लिए उपयोग कियार् हो तो रार्ज्य सरकार उसकी सदस्यतार् समार्प्त कर सकती है। 
  5. यदि किसी भी समय रार्ज्य सरकार पार्ती है कि क्षेत्र पंचार्यत अपने कार्यों में चूक करती है तो जार्ंच के बार्द दोश सार्बित होने पर वह क्षेत्र पंचार्यत क विघटन कर सकती है। 
  6. विघटन के बार्द 6 महीने के भीतर क्षेत्र पंचार्यत के गइन के लिए फिर से चुनार्व करार्ये जार्येंगे। तब तक के लिए सरकार, क्षेत्र पंचार्यत के स्थार्न पर प्रषार्सनिक समिति गठित कर सकती है। 

क्षेत्र पंचार्यत क बजट 

क्षेत्र पंचार्यत क बजट प्रस्तार्व उसकी समितियों द्वार्रार् आपस में विचार्र विमर्ष करके तैयार्र कियार् जार्येगार्। इस बजट को क्षेत्र पंचार्यत प्रमुख द्वार्रार् पार्ंच दिनों के अंदर जिलार् पंचार्यत को भेजार् जार्येगार्। यह बजट जिलार् पंचार्यत, नियोजन समिति के समक्ष समीक्षार् हेतु रखेगी। नियोजन समिति अपने निर्णय व सिफार्रिशों सहित निश्चित तिथि से पूर्व ही क्षेत्र पंचार्यत को वार्पिस कर देगी। अंत में क्षेत्र पंचार्यत प्रार्प्त बजट प्रस्तार्व पर विचार्र विमर्ष कर पार्रित करेगी।

क्षेत्र पंचार्यत की आय के स्रोत 

क्षेत्र पंचार्यत की आय के स्रोत शार्सन द्वार्रार् प्रार्प्त हार्ने वार्ली अनुदार्न एवं ऋण के रूप में प्रार्प्त होने वार्ली धनरार्शियार्ं हैं। क्षेत्र पंचार्यत अपने निजि संसार्धनों से भी आय अर्जित कर सकती है। जिसमें विभिन्न प्रकार के कर जैसे-इमार्रतों से आय, बार्जार्र एवं मेलों क आयोजन, प्रदर्शनियार्ं, बार्ग-बगीचे, शौचार्लय एवं अन्य सुविधार्यें आती हैं। अगर किसी अलार्भकर भूमि को क्षेत्र पंचार्यत ने लार्भकर बनार्यार् है तो उस पर कर लगार् कर उससे आय अर्जित कर सकती है।क्षेत्र पंचार्यत अपने निजि प्रयार्सों से लार्भकारी योजनार्यें बनार्कर जनहित में उन्हें लार्गू करके भी लार्भ कमार् सकती है।

क्षेत्र पंचार्यत द्वार्रार् क्षेत्र की विकास योजनार् 

बनार्नार् क्षेत्र पंचार्यत, विकास खण्ड की सभी ग्रार्म पंचार्यतों की विकास योजनओं को मिलार्कर विकास खण्ड के लिए प्रत्येक सार्ल एक विकास योजनार् तैयार्र करती है। क्षेत्र पंचार्यत की नियोजन एवं विकास समिति खण्ड विकास अधिकारी तथार् दूसरी समितियों की मदद से यह योजनार् तैयार्र करती है और उसे क्षेत्र पंचार्यत को प्रस्तुत करती है। क्षेत्र पंचार्यत इस योजनार् पर विचार्र करती है ओर उसमें बदलार्व यार् बिनार् बदलार्व के पार्स भी कर सकती है। खण्ड विकास अधिकारी क्षेत्र पंचार्यत द्वार्रार् पार्स की गर्इ योजनार् को जिलार् पंचार्यत को नियत तार्रीख से पहले प्रस्तुत करतार् है।

क्षेत्र पंचार्यत क ग्रार्म पंचार्यत व जिलार् पंचार्यत के सार्थ संबंध 

  1. ग्रार्म पंचार्यतों के द्वार्रार् किये गये विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट क्षेत्र पंचार्यत को सौंपी जार्येगी।
  2. एक से अधिक ग्रार्म पंचार्यतों में यदि कोर्इ कार्य होनार् है तो वह क्षेत्र पंचार्यत के मार्ध्यम से कियार् जार्येगार्।
  3. ग्रार्म पंचार्यतें अपने क्षेत्र के लिए जो विकास योजनार्यें बनार्येंगी उसे सबंधित क्षेत्र पंचार्यत सदस्य के पार्स भेजेंगी। 
  4. क्षेत्र पंचार्यत सभी ग्रार्म पंचार्यत की वाषिक योजनार्ओं के आधार्र पर एक योजनार् बनार्कर जिलार् पंचार्यत को भेजेगी।
  5. क्षेत्र पंचार्यत सदस्य, ग्रार्म पंचार्यत की मार्सिक बैठकों में हिस्सार् नहीं ले सकते। किन्तु खार्स मौकों पर ग्रार्म पंचार्यत की समितियों की बैठकों में विशेष रूप से आमंत्रित किये जार् सकतार् है। लेकिन उन्हें मत देने क अधिकार नहीं है। 
  6. जिले के अन्तर्गत सभी क्षेत्र पंचार्यतों के प्रमुख जिलार् पंचार्यत में नार्मित सदस्य के रूप में होते हैं।

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