कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् अधिनियम, 1948 क्यार् है ?

कुछ महत्त्वपूर्ण परिभार्षार्एँ 

1. समुचित सरकार- 

केन्द्रीय सरकार यार् रेलवे-प्रशार्सन के नियंत्रण में प्रतिष्ठार्नों, महार्पत्तनों, खार्नों यार् तेलक्षेत्रों के संबंध में समुचित सरकार केन्द्रीय सरकार तथार् सभी प्रतिष्ठार्नों के संबंध में समुचित सरकार रार्ज्य सरकार है।

2. कर्मचार्री- 

‘कर्मचार्री’ क अभिप्रार्य ऐसे व्यक्ति से है, जो अधिनियम के अधीन आने वार्ले किसी कारखार्नार् यार् स्थार्पन में यार् उससे संबंद्ध कार्य के लिए मजदूरी पर नियोजित है। ‘कर्मचार्री’ की परिभार्षार् में ऐसे व्यक्ति सम्मिलित होते हैं –

  1. जो कारखार्ने यार् प्रतिष्ठार्न के किसी काम पर यार् उससे आनुशंगिक, प्रार्रंभिक यार् संबद्ध किसी काम पर प्रधार्न नियोजक द्वार्रार् प्रत्यक्ष रूप से नियोजित है, चार्हे वह काम कारखार्ने यार् स्थार्पन में यार् अत्यन्त कियार् जार्तार् हो, यार् 
  2. जो किसी असन्न नियोजक के द्वार्रार् यार् उसके मार्ध्यम से किसी कारखार्ने यार् स्थार्पन में प्रधार्न नियोजक यार् उसके अभिकर्तार् के पर्यवेक्षण में ऐसे काम पर नियोजित है, जो सार्मार्न्यत: उस कारखार्ने यार् स्थार्पन क एक भार्ग है यार् उसमें चलार्ए जार्ने वार्ले काम के लिए प्रार्रंभिक यार् आनुशंगिक है, यार् 
  3. जिनकी सेवार्एं प्रधार्न नियोजक को संविदार् करने वार्ले किसी अन्य नियोजक द्वार्रार् भार्ड़े पर यार् अन्य प्रकार से दी गर्इ। 

‘कर्मचार्री’ की परिभार्षार् में ऐसे व्यक्ति भी शार्मिल है, जो कारखार्ने यार् स्थार्पन यार् उसके किसी भार्ग, विभार्ग यार् शार्खार् के प्रशार्सन, कच्चे मार्ल के क्रय, उत्पार्दित वस्तुओं के वितरण यार् विकास से संबद्ध किसी कार्य पर मजदूरी के लिए नियोजित हो यार् जो शिक्षु अधिनियम, 1961 यार् स्थार्पन के स्थार्यी आदेशों के अधीन रखे गए शिक्षु को छोड़कर अन्य प्रकार से शिक्षु के रूप में रखे गए हो। ‘कर्मचार्री’ की परिभार्षार् के अंतर्गत निम्नलिखित शार्मिल नहीं होते –

  1. भार्रतीय जलसेनार्, स्थलसेनार् यार् वार्युसेनार् के सदस्य; 
  2. इस तरह नियोजित कोर्इ भी व्यक्ति जिसकी मार्सिक मजदूरी (अतिकाल के लिए मजदूरी को छोड़कर) केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् विहित मजदूरी से अधिक हो। पहले यह विहित मजदूरी 1600 रुपये और बार्द में 3000 रुपये प्रतिमार्ह थी, लेकिन जनवरी, 1997 में इसे बढ़ार्कर 6500 रुपये प्रतिमार्ह कर दियार् गयार्। 6500 रु0 की मार्सिक मजदूरी सीमार् आज भी लार्गू है। लेकिन, अगर कर्मचार्री की मार्सिक मजदूरी केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् विहित मजदूरी से किसी अंशदार्न-अवधि के प्रार्रंभ होने के बार्द किसी भी समय बढ़ जार्ती हो, तो वह उस अवधि की समार्प्ति तक अधिनियम के अधीन कर्मचार्री समझार् जार्एगार्; 
  3. ऐसे नियोजित व्यक्ति, जिनकी कुल मजदूरी (अतिकाल के लिए पार्रिश्रमिक को छोड़कर) केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् निर्धार्रित मजदूरी से अधिक हो। 

3. मजदूरी – 

‘मजदूरी’ क अभिप्रार्य ऐसे पार्रिश्रमिक से है, जो नियोजन की सेवार् की अभिव्यक्त यार् विवक्षित शर्तो को पूरार् किए जार्ने पर कर्मचार्री को नकद दियार् गयार् हो, यार् देय हो। मजदूरी के अंतर्गत अधिकृत छुट्टी की अवधि, तार्लार्बंदी, वैध हड़तार्ल यार् कामबंदी यार् जबरी छुट्टी से संबंद्ध कर्मचार्री को ऐसार् संदार्य यार् अन्य अतिरिक्त पार्रिश्रमिक जिसक भुगतार्न अधिकतम दो महीनों के अंतरार्लों पर कियार् जार्तार् है, सम्मिलित होतार् है, लेकिन निम्नलिखित शार्मिल नही होते –

  1. इस अधिनियम के अंतर्गत नियोजक द्वार्रार् किसी पेंषन-निधि यार् भविष्य-निधि में दियार् गयार् अंशदार्न; 
  2. यार्त्रार्-भत्तार् यार् यार्त्रार्-रियार्यत क मूल्य; 
  3. नियोजित व्यक्ति को उसके नियोजन की प्रकृति के कारण उसपर पड़े विशेष व्यय को चुकाने के लिए दी गर्इ धनरार्शि; यार् 
  4. सेवोन्मुक्ति पर देय उपार्दार्न। 

4. कारखार्नार् – 

कारखार्नार् अपनी प्रसीमार्ओं सहित ऐसार् परिसर है, जिसमें (1) दस यार् अधिक व्यक्ति काम कर रहे है यार् पिछले बार्रह महीने के किसी दिन काम कर रहे थे और जिसके किसी भी भार्ग में विनिर्मार्ण प्रक्रियार् शक्ति की सहार्यतार् से चलाइ जार् रही हो यार् आम तौर पर चलाइ जार्ती हो यार् (2) जिसमें बीस यार् अधिक व्यक्ति काम कर रहे है यार् पिछले बार्रह महीने के किसी दिन काम कर रहे थे, और जिसके किसी भार्ग में विनिर्मार्ण-प्रक्रियार् शक्ति की सहार्यतार् के बिनार् चलाइ जार् रही हो यार् आम तौर से ऐसे चलाइ जार्ती हो, लेकिन इसके अंतर्गत खार्न अधिनियम, 1952 के दार्यरे में आने वार्ले खार्न यार् रेलवे रनिंग शेड सम्मिलित नहीं होतार्।

5. आसन्न यार् निकटतम नियोजक – 

आसन्न यार् निकटतम नियोजक क अभिप्रार्य ऐसे व्यक्ति से है, जिसने अधिनियम के दार्यरे में आने वार्ले किसी कारखार्ने यार् स्थार्पन के परिसर पर यार् प्रधार्न नियोजक यार् उसके अभिकर्तार् के पर्यवेक्षण में किसी ऐसे कार्य को पूर्णत: यार् अंशत: करने क दार्यित्व अपने ऊपर ले लियार् हो जो प्रधार्न नियोजक के कारखार्ने यार् स्थार्पन क सार्मार्न्यत: एक भार्ग है यार् जो उस कारखार्ने यार् स्थार्पन में किए जार्ने वार्ले कार्य के प्रयोजन के लिए प्रार्रंभिक यार् आनुशंगिक है। आसन्न नियोजक के अंतर्गत ऐसार् व्यक्ति भी शार्मिल है जिसने अपने द्वार्रार् नियुक्त व्यक्ति की सेवार्ओं को संविदार् के अधीन अस्थार्यी रूप से प्रधार्न नियोजक को उधार्र यार् भार्ड़े पर दे दियार् हो।

6. प्रधार्न नियोजक- 

प्रधार्न नियोजक क अभिप्रार्य है –

  1. किसी कारखार्ने के संबंध में कारखार्ने क स्वार्मी यार् अधिश्ठार्तार्, तथार् इसमें ऐसे स्वार्मी यार् अधिश्ठार्तार् क प्रंबध अभिकर्तार्, मृत स्वार्मी यार् अधिश्ठार्तार् क विधिक प्रतिनिधि तथार् कारखार्नार् अधिनियम, 1948 के अंतर्गत नार्मित प्रबंधक भी शार्मिल है; 
  2. भार्रत सरकार के किसी विभार्ग के नियंत्रण के अधीन किसी स्थार्पन के संबंध में, वह प्रार्धिकारी जिसे ऐसी सरकार ने नियुक्त कियार् है, तथार् जहार्ँ इस तरह क प्रार्धिकारी नियुक्त नहीं है, वहार्ँ विभार्गार्ध्यक्ष, तथार् 
  3.  किसी अन्य स्थार्पन के संबंध में स्थार्पन के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए दार्यी व्यक्ति। 

7. अन्य परिभार्षार्एं- 

अधिनियम के अधीन ‘आश्रित’, ‘आंशिक अशक्ततार्’ तथार् ‘पूर्ण अशक्ततार्’ की परिभार्षार्एँ उसी तरह है, जिस तरह कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम के अधीन दी गर्इ है।

अंशदार्न 

  1. सभी कर्मचार्रियों क बीमित होनार्- अधिनियम के उपबंधों के दार्यरे में आने वार्ले कारखार्नों यार् स्थार्पनों के सभी कर्मचार्रियों के लिए विहित ढंग से बीमित होनार् आवश्यक है। 
  2. अंशदार्न की दरें उनक भुगतार्न- बीमार्कृत कर्मचार्रियों के संबंध में बीमार्कृत कर्मचार्रियों तथार् उनके नियोजक दोनों को कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम को अंशदार्न देनार् आवश्यक है। कर्मचार्रियों के अंशदार्न के भुगतार्न के लिए भी नियोजक दार्यी होतार् है। 1989 के पहले, कर्मचार्री तथार् उसके नियोजक द्वार्रार् दिए जार्ने वार्ले अंशदार्न की दरें अधिनियम में ही निर्दिष्ट की गर्इ थीं। लेकिन, 1989 में किए गए संशोधन के अनुसार्र अंशदार्न केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् विहित दरों से देय होगार्। केन्द्रीय सरकार ने समय-समय इन दरों को नियत कियार्। जनवरी, 1997 में नियोजकों के अंशदार्न की दर कर्मचार्रियों को प्रत्येक मजदूरी-अवधि में देय मजदूरी क 4.75 प्रतिशत तथार् कर्मचार्रियों के लिए 174 प्रत्येक मजदूरी-अवधि में मजदूरी क 1.75 प्रतिशत नियत की गर्इ, जो आज भी लार्गू है। 50 रुपये यार् इससे कम दैनिक मजदूरी प्रार्प्त करने वार्ले कर्मचार्रियों को कोर्इ अंशदार्न नही देनार् पड़तार्। दिसम्बर 2006 में निगम द्वार्रार् इस सीमार् को बढ़ार्कर 70 रू0 दैनिक करने क निर्णय कियार् गयार् है। अधिनियम के अंतर्गत सभी अंशदार्नों के लिए संबंधित कर्मचार्री की मजदूरी-अवधि को इकार्इ मार्नार् जार्एगार्। सार्मार्न्यत: प्रत्येक मजदूरी-अवधि के संबंध में दिए जार्ने वार्ले अंशदार्न उस मजदूरी अवधि के अंतिम दिन देय होगें। अगर कोर्इ कर्मचार्री, किसी मजदूरी-अवधि के एक भार्ग के लिए ही नियोजित है यार् जो एक ही मजदूरी-अवधि में दो यार् अधिक नियोजकों के अधीन नियोजित रहार् है, तो उसके अंशदार्न विनियम में निर्दिष्ट दिनों के लिए देय होंगे। जब प्रधार्न नियोजक अधिनियम के अंतर्गत कोर्इ भी अंशदार्न उस दिन नही देतार् जिस दिन वह देय होतार् है, तो उसे वार्स्तविक भुगतार्न की तिथि तक के लिए 12 प्रतिशत यार् विनिमय द्वार्रार् निर्दिष्ट उच्चतर दर से सार्धार्रण ब्यार्ज देनार् होगार्, लेकिन यह उच्चतर दर अनुसूचित बैंकों की उधार्र की ब्यार्ज-दर से अधिक नही होगी। इस ब्यार्ज को भू-रार्जस्व के रूप में वसूल कियार् जार् सकतार् है। 
  3. प्रथमत: अंशदार्न क प्रधार्न नियोजक द्वार्रार् दियार् जार्नार् – प्रधार्न नियोजक के लिए प्रत्येक कर्मचार्री के संबंध में, चार्हे वह उसके द्वार्रार् प्रत्यक्ष रूप से यार् आसन्न नियोजक द्वार्रार् नियोजित हो, नियोजक तथार् कर्मचार्री दोनों के अंशदार्नों क देनार् जरूरी है। वह अपने द्वार्रार् प्रत्यक्ष रूप से नियोजित कर्मचार्री के अंशदार्न को केवल उसकी मजदूरी से काटकर वसूल कर सकतार् है। कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम को अंशदार्न भेजने क खर्च प्रधार्न नियोजक ही वहन करेगार्। 
  4. आसन्न नियोजक से अंशदार्न की वसूली – प्रधार्न नियोजक को आसन्न नियोजक से नियोजक तथार् कर्मचार्री दोनों के अंशदार्न को वसूल करने क अधिकार है। यह वसूली आसन्न नियोजक द्वार्रार् किसी संविदार् के अधीन देय किसी रार्शि से काटकर यार् उसके लिए देय ऋण के रूप में वसूल कियार् जार् सकतार् है। आसन्न नियोजक के लिए अपने सभी कर्मचार्रियों क रजिस्टर रखनार् तथार् लेखार् के निपटार्रे के पहले प्रधार्न नियोजक को भेजनार् आवश्यक है। आसन्न नियोजक अपने कर्मचार्रियों के अंशदार्न को उनकी मजदूरी से काटकर वसूल कर सकतार् है। 
  5. अंशदार्न के भुगतार्न से संबद्ध सार्मार्न्य उपबंध – ऐसे कर्मचार्री द्वार्रार् अंशदार्न देय नही होतार् है, जिसकी किसी मजदूरी-अवधि में औसत दैनिक मजदूरी केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् विहित मजदूरी से कम है। प्रधार्न नियोजक, नियोजक तथार् कर्मचार्री के अंशदार्न क भुगतार्न प्रत्येक मजदूरी-अवधि के लिए करेगार् जिसके संबंध में कर्मचार्री को पूर्ण यार् आंशिक रूप से मजदूरी देय होती है। 
  6. अंशदार्न के भुगतार्न क तरीका- अंशदार्नों के भुगतार्न के तरीके तथार् उनके संग्रहण से संबंधित यार् आनुशंगिक विषयों के संबंध में विनियम बनार्ने की शक्ति कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम को प्रार्प्त है। 
  7. नियोजकों द्वार्रार् विवरणी क भेजार् जार्नार् तथार् रजिस्टर क रखार् जार्नार्- प्रत्येक प्रधार्न तथार् आसन्न नियोजक के लिए निगम यार् उसके द्वार्रार् निदेशित अधिकारी के पार्स विहित रूप में विवरणी भेजनार् आवश्यक है, जिसमें संबंधित कारखार्ने यार् स्थार्पन में नियोजित व्यक्तियों के बार्रे में विनियम द्वार्रार् निर्दिष्ट ब्योरे होंगे। सार्थ ही, प्रत्येक प्रधार्न और आसन्न नियोजक के लिए अपने कारखार्ने यार् स्थार्पन के संबंध में विहित रजिस्टर यार् रिकॉर्ड रखनार् भी आवश्यक है। कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम द्वार्रार् निरीक्षकों और निगम द्वार्रार् अधिकृत अन्य अधिकारियों को नियोजक द्वार्रार् भेजी गर्इ विवरणी यार् रजिस्टर यार् रिकॉर्ड में सम्मिलित ब्योरे की तथ्यतार् की जार्ँच करने से संबद्ध महत्त्वपूर्ण शक्तियार्ँ दी गर्इ है। 
  8. कुछ मार्मलों में अंशदार्न क निर्धार्रण- अगर किसी कारखार्ने यार् स्थार्पन के संबंध में कोर्इ प्रणार्ली विवरणी, विषिश्टियार्ँ, रजिस्टर यार् रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए गए हों यार् अगर निरीक्षक यार् अन्य अधिकृत अधिकारी को प्रधार्न यार् आसन्न नियोजक यार् अन्य प्रभार्री व्यक्ति द्वार्रार् अपने कर्तव्यों के पार्लन के सिलसिलें में किसी भी तरह रोक गयार् हो, तो निगम आदेश द्वार्रार् उस कारखार्ने यार् स्थार्पन के कर्मचार्रियों के संबंध में देय अंशदार्न की रार्शि निर्धार्रित कर सकतार् है। लेकिन, ऐसार् आदेश निर्गत करने के पहले निगम कारखार्ने यार् स्थार्पन के प्रधार्न यार् आसन्न नियोजक यार् अन्य प्रभार्री व्यक्ति को सुनवाइ के लिए युक्तियुक्त अवसर देगार्।  
  9. अंशदार्नों की वसूली- अधिनियम के अंतर्गत देय किसी भी अंशदार्न को भू-रार्जस्व के बकाए की तरह वसूल कियार् जार् सकतार् है। 
  10. अन्य उपबंध- अधिनियम में अंशदार्नों की वसूली, रिकॉवरी अधिकारी के पार्स प्रमार्णपत्र के निर्गत किए जार्ने, प्रमार्णपत्र की वैधतार्, कार्यवार्ही के संशोधन यार् उसकी वार्पसी, वसूली के अन्य तरीकों आदि से संबद्ध उपबंध विस्तार्र से दिए गए है। 
  11. अंशदार्न-अवधि तथार् हितलार्भ अवधि- अप्रैल से 30 सितंबर की ‘अंशदार्न-अवधि’ के लिए संगत ‘हितलार्भ-अवधि’ अगले वर्ष 1 जनवरी से 30 जून, तथार् 1 अक्टूबर से अगले वर्ष 31 माच की ‘अंशदार्न-अवधि’ के लिए संगत ‘हितलार्भ-अवधि’ 1 जुलाइ से 31 दिसम्बर होगी। 

हितलार्भ 

अधिनियम के अंतर्गत  हितलार्भ उपलब्ध हैं –

  1. बीमार्री-हितलार्भ
  2. प्रसूति-हितलार्भ
  3. अंशक्ततार्-हितलार्भ
  4. आश्रित-हितलार्भ
  5. चिकित्सार्-हितलार्भ
  6. अंत्येश्टि व्यय
  7. बेरोजगार्री भत्तार्

उपर्युक्त हितलार्भों में चिकित्सार्-हितलार्भ को छोड़कर अन्य सभी हितलार्भ नकद दिए जार्ते हैं। बीमार्री-हितलार्भ, प्रसूति-हितलार्भ और चिकित्सार्-हितलार्भ के लिए निर्धार्रित अवधि तक अंशदार्न दे चुकने की शर्त पूरी करनार् आवश्यक है, लेकिन अंशक्ततार्-हितलार्भ, आश्रित-हितलार्भ तथार् अंत्येश्टि खर्च के लिए अंशदार्न दे चुकनार् जरूरी नहीं है। तार्लिक कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् अधिनियम, 1948 के अधीन विभिन्न मजदूरी-समूहों के लिए दैनिक मार्नक हितलार्भ-दर

क्र.संख्यार् औसत दैनिक मजदूरी तत्संबंधी दैनिक हितलार्भ दर
1   28 रु0 से कम 14 रु0
2 28 रु0 एवं अधिक परन्तु 32 रु0 से कम 16 रु0
3 32 रु0 एवं अधिक परन्तु 36 रु0 से कम 18 रु0
4 36 रु0 एवं अधिक परन्तु 40 रु0 से कम 20 रु0
5 40 रु0 एवं अधिक परन्तु 48 रु0 से कम 24 रु0
6 48 रु0 एवं अधिक परन्तु 56 रु0 से कम 28 रु0
7 56 रु0 एवं अधिक परन्तु 60 रु0 से कम 30 रु0
8 60 रु0 एवं अधिक परन्तु 64 रु0 से कम 32 रु0
9 64 रु0 एवं अधिक परन्तु 72 रु0 से कम 36 रु0
10 72 रु0 एवं अधिक परन्तु 76 रु0 से कम 38 रु0
11 76 रु0 एवं अधिक परन्तु 80 रु0 से कम 40 रु0
12 80 रु0 एवं अधिक परन्तु 88 रु0 से कम 44 रु0
13 88 रु0 एवं अधिक परन्तु 96 रु0 से कम 48 रु0
14 96 रु0 एवं अधिक परन्तु 106 रु0 से कम 53 रु0
15 106 रु0 एवं अधिक परन्तु 116 रु0 से कम 58 रु0
16 116 रु0 एवं अधिक परन्तु 126 रु0 से कम 63 रु0
17 126 रु0 एवं अधिक परन्तु 136 रु0 से कम 68 रु0
18 136 रु0 एवं अधिक परन्तु 146 रु0 से कम 73 रु0
19 146 रु0 एवं अधिक परन्तु 156 रु0 से कम 78 रु0
20 156 रु0 एवं अधिक परन्तु 166 रु0 से कम 83 रु0
21 166 रु0 एवं अधिक परन्तु 176 रु0 से कम 88 रु0
22 176 रु0 एवं अधिक परन्तु 186 रु0 से कम 93 रु0
23 186 रु0 एवं अधिक परन्तु 196 रु0 से कम 98 रु0
24 196 रु0 एवं अधिक परन्तु 206 रु0 से कम 103 रु0
25 206 रु0 एवं अधिक परन्तु 216 रु0 से कम 108 रु0
26 216 रु0 एवं अधिक परन्तु 226 रु0 से कम 113 रु0
27 226 रु0 एवं अधिक परन्तु 236 रु0 से कम 118 रु0
28 236 रु0 एवं अधिक परन्तु 250 रु0 से कम 125 रु0
29 250 रु0 एवं अधिक परन्तु 260 रु0 से कम 130 रु0
30 260 रु0 एवं अधिक परन्तु 270 रु0 से कम 135 रु0
31 270 रु0 एवं अधिक परन्तु 280 रु0 से कम 140 रु0
32 280 रु0 एवं अधिक परन्तु 290 रु0 से कम 145 रु0
33 290 रु0 एवं अधिक परन्तु 300 रु0 से कम 150 रु0
34 300 रु0 एवं अधिक परन्तु 310 रु0 से कम 155 रु0
35 310 रु0 एवं अधिक परन्तु 320 रु0 से कम 160 रु0
36 320 रु0 एवं अधिक परन्तु 330 रु0 से कम 165 रु0
37 330 रु0 एवं अधिक परन्तु 340 रु0 से कम 170 रु0
38 340 रु0 एवं अधिक परन्तु 350 रु0 से कम 175 रु0
39 350 रु0 एवं अधिक परन्तु 360 रु0 से कम 180 रु0
40 360 रु0 एवं अधिक परन्तु 370 रु0 से कम 185 रु0
41 370 रु0 एवं अधिक परन्तु 380 रु0 से कम 190 रु0
42 380 रु0 एवं अधिक 195 रु0


‘अथवार् पूर्ण औसत मजदूरी, जो भी कम हो। 1989 के पहले विभिन्न हितलार्भों के लिए योग्यतार् की शर्ते, उनकी दरें, उनकी उपलभ्यतार् की अवधि आदि अधिनियम में ही निर्धार्रित थीं, लेकिन 1989 के संशोधन के अनुसार्र इन सभी के निर्धार्रण की शक्ति केन्द्रीय सरकार को दी गर्इ। केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् नियत की गर्इ विभिन्न मजदूरी-श्रेणियों के लिए वर्तमार्न दैनिक मार्नक हितलार्भ-दरें तार्लिक में उल्लिखित है। अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध विभिन्न हितलार्भों की प्रकृति, हितलार्भ की दरों और अवधियों तथार् उनके लिए योग्यतार् की शर्तो की विवेचनार् है।

1. बीमार्री-हितलार्भ – 

बीमार्री हितलार्भ बीमार्कृत कर्मचार्री को बीमार्री की अवस्थार् में आवधिक नकद भुगतार्न के रूप में सम्यक् रूप से नियुक्त यार् कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम द्वार्रार् निर्दिष्ट योग्यतार् और अनुभव वार्ले व्यक्ति द्वार्रार् प्रमार्णित किए जार्ने पर दियार् जार्तार् है। बीमार्री हितलार्भ के लिए पार्त्रतार् की शर्ते, उसकी दर तथार् अवधि केन्द्रीय नियमों में निर्दिष्ट की गर्इ है।

  1. अंशदार्यनी शर्ते- किसी हितलार्भ-अवधि में बीमार्री हितलार्भ की पार्त्रतार् के लिए बीमार्कृत कर्मचार्री द्वार्रार् तदनुरूपी अंशदार्न अवधि में न्यूनतम 78 दिनों के लिए अंशदार्न दे चुकनार् आवश्यक है। नए नियुक्त कर्मचार्री के लिए, जिसकी अंशदार्न अवधि 156 दिनों में कम है, बीमार्री-हितलार्भ की पार्त्रतार् के लिए ऐसी अंशदार्न-अवधि में न्यूनतम उपलब्ध काम के दिनों के आधे के लिए अंशदार्न दे चुकनार् जरूरी है। 
  2. बीमार्री-हितलार्भ की दर- बीमार्री हितलार्भ बीमार्कृत कर्मचार्री की मजदूरी से सुसंगत दैनिक मार्नक हितलार्भ दर से दियार् जार्तार् है। दिसम्बर 2006 में निगम द्वार्रार् इसे बढ़ार्कर मार्नक हितलार्भ दर से 20 प्रतिशत अधिक करने क निर्णय कियार् गयार् है। 
  3. बीमार्री-हितलार्भ की अवधि- बीमार्री हितलार्भ किन्हीं दो लगार्तार्र हितलार्भ-अवधियों, अर्थार्त एक वर्ष में अधिकतम 91 दिनों के लिए देय होतार् है। 
  4. बीमार्री-हितलार्भ प्रार्प्त करने वार्लों के लिए शर्तो क पार्लन- बीमार्री-हितलार्भ पार्ने वार्लों के लिए निम्नलिखित शर्तो क पार्लन करनार् आवश्यक है – 
    1. अधिनियम के अधीन स्थार्पित अस्पतार्ल, औशधार्लय, क्लिनिक यार् अन्य संस्थार् यार् चिकित्सकीय उपचार्र के लिए रहनार् तथार् चिकित्सार्-अधिकारी यार् चिकित्सार्-परिचार्रक द्वार्रार् दिए गए निर्देशों क पार्लन करनार्; 
    2. उपचार्र की अवधि में ऐसार् कोर्इ काम नहीं करनार्, जिससे स्वार्स्थ्य-लार्भ में बार्धार् पहुंचे; 
    3. चिकित्सार्-अधिकारी, चिकित्सार्-परिचार्रक यार् अन्य अधिकृत प्रार्धिकारी की अनुमति के बिनार् उस क्षेत्र को नहीं छोड़नार्, जहार्ँ उपचार्र चल रहार् हो; तथार् 
    4. कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम द्वार्रार् नियुक्त चिकित्सार्-अधिकारी यार् अन्य अधिकृत व्यक्ति द्वार्रार् परीक्षार् के लिए तैयार्र रहनार्। 
  5. बीमार्री-हितलार्भ देय नहीं होने की दशार्एं- निम्नलिखित दशार्ओं में बीमार्री-हितलार्भ देय नही होतार् – 
    1. हड़तार्ल पर हो, जिसके लिए उसे मजदूरी मिलती है। धार्रार् 63, लेकिन, हड़तार्ल के दिनों के लिए उसे बीमार्री-हितलार्भ मिल सकतार् है अगर 1. वह निगम के अस्पतार्ल यार् अन्य मार्न्यतार् प्रार्प्त किसी अस्पतार्ल मं उपचार्र के लिए भरती हो यार् अंतरंग रोगी के रूप में उपस्थित रहार् हो, यार् 2. वह किसी निर्दिष्ट बीमार्री के लिए विस्तार्रित बीमार्री हितलार्भ प्रार्प्त करने क अधिकारी हो, यार् 3. हड़तार्ल आरंभ होने के शीघ्र पहले बीमार्री-हितलार्भ प्रार्प्त कर रहार् हो। 
    2. बीमार्री-हितलार्भ आरंभिक 2 दिनों की प्रतीक्षार् अवधि के लिए भी सार्मार्न्यत: नहीं दियार् जार्तार्। लेकिन, अगर बीमार्कृत कर्मचार्री को पिछले बीमार्री दौर से 15 दिनों के अंदर पुन: बीमार्र प्रमार्णित कियार् जार्तार् है जिसके लिए बीमार्री-हितलार्भ क भुगतार्न कियार् गयार् थार्, तो वह 2 दिनों की प्रतीक्षार् अवधि के लिए भी भुगतार्न क अधिकारी हो जार्तार् है। 

1. वर्धित बीमार्री-हितलार्भ- 

वर्धित बीमार्री-हितलार्भ परिवार्र कल्यार्ण के लिए नसबंदी यार् नलबंदी ऑपरेशन करार्ने के लिए दियार् जार्तार् है। इस हितलार्भ के लिए भी अंशदार्यनी शर्ते वे ही है जो बीमार्री हितलार्भ के लिए है। वर्धित बीमार्री-हितलार्भ की दैनिक दर मार्नक हितलार्भ दर की दुगुनी है। नसबंदी के लिए वर्धित हितलार्भ 7 दिनों के लिए तथार् नलबंदी के लिए 14 दिनों के लिए देय होतार् है। ऑपरेशन के बार्द जटिलतार्एं होने यार् बीमार्र पड़ जार्ने की स्थिति में उपर्युक्त अवधियार्ँ बढ़ाइ जार् सकती है।

2. वर्धित बीमार्री-हितलार्भ अनुज्ञेय बीमार्री-हितलार्भ –

अर्थार्त 91 दिनों के अतिरिक्त होतार् है। विस्तार्रित बीमार्री-हितलार्भ- विस्तार्रित बीमार्री-हितलार्भ कुछ निर्दिष्ट बीमार्रियों से पीड़ित बीमार्कृत कर्मचार्रियों को देय होतार् है। इस हितलार्भ के हकदार्र होने के लिए बीमार्कृत व्यक्ति क 2 वर्षो तक लगार्तार्र बीमार्योग्य रोजगार्र में रह चुकनार् तथार् उसके द्वार्रार् पिछले 4 अंशदार्न-अवधियों में कम-से-कम 156 दिनों के लिए अंशदार्न क भुगतार्न कर चुकनार् आवश्यक है। विस्तार्रित बीमार्री-हितलार्भ पहले चरण में सार्मार्न्य बीमार्री-हितलार्भ की 91 दिनों की समार्प्ति के बार्द 124 के 309 दिनों के लिए देय होतार् है, लेकिन दीर्घकालिक मार्मलों में सक्षम प्रार्धिकारी की सिफार्रिश पर इसे 2 वर्षो तक बढ़ार्यार् जार् सकतार् है। 

2. प्रसूति-हितलार्भ- 

प्रसूति-हितलार्भ बीमार्कृत स्त्री-श्रमिक को प्रसवार्वस्थार्, गर्भपार्त तथार् गर्भार्वस्थार् यार् प्रसवार्वस्थार्, बच्चे के अकाल-जन्म, यार् गर्भपार्त के कारण होने वार्ली बीमार्री के लिए विहित प्रार्धिकारों के प्रमार्णन पर आवधिक भुगतार्न के रूप में दियार् जार्तार् है। किसी हितलार्भ-अवधि में कोर्इ बीमार्कृत स्त्री-श्रमिक प्रसूति-हितलार्भ की अधिकारिणी तभी होती है, जब उसने पूर्ववर्ती दो अंशदार्न-अवधियों में कम-से-कम 70 दिनों के लिए अंशदार्न दे दियार् हो। 

3. अशक्ततार्-हितलार्भ- 

अशक्ततार्-हितलार्भ बीमार्कृत कर्मचार्री को नियोजन के दौरार्न तथार् नियोजन से उत्पन्न दुर्घटनार् से होने वार्ली अशक्ततार् के लिए आवधिक भुगतार्न के रूप में दियार् जार्तार् है। अशक्ततार्-हितलार्भ के दार्वेदार्र को विनियमों के अधीन निर्दिष्ट प्रार्धिकारी द्वार्रार् दियार् गयार् अशक्ततार् क प्रमार्ण प्रस्तुत करनार् आवश्यक है। विभिन्न प्रकार की अशक्ततार्ओं के लिए अशक्ततार्-हितलार्भ प्रकार से दियार् जार्तार् है- 

  1. अस्थार्यी अशक्ततार् के लिए हितलार्भ पूर्ण दर से 3 दिनार्ं के प्रतीक्षार् काल के बार्द अशक्ततार् की अवधि तक दियार् जार्तार् है। 
  2. स्थार्यी आंशिक अशक्ततार् के लिए हितलार्भ पूर्ण दर कावह प्रतिशत होतार् है, जिस प्रतिशत से दुर्घटनार् के फलस्वरूप कर्मचार्री की अर्जन-शक्ति की हार्नि हुर्इ हो। विभिन्न प्रकार की स्थार्यी आंशिक अशक्ततार्ओं की सूची अधिनियम की दूसरी अनुसूची में दी गर्इ है। जहार्ँ एक ही दुर्घटनार् के कारण कर्इ प्रकार की स्थार्यी आंशिक अशक्ततार्एं एक सार्थ होती है, तो उन्हें जोड़ दियार् जार्तार् है, लेकिन किसी भी स्थिति में स्थार्यी आंशिक अशक्ततार् के लिए हितलार्भ पूर्ण दर से अधिक नहीं हो सकतार्। स्थार्यी आंशिक अशक्ततार् के लिए हितलार्भ जीवन भर मिलतार् है।
  3. स्थार्यी पूर्ण अशक्ततार् के लिए हितलार्भ पूर्ण दर से जीवन पर्वत मिलतार् है। विभिन्न प्रकार की अस्थार्यी तथार् स्थार्यी अशक्ततार्ओं के लिए हितलार्भों की दरें, उनकी अवधि तथार् उनको देने के लिए शर्ते निर्धार्रित करने की शक्ति केन्द्र सरकार को प्रार्प्त है। अशक्ततार् हितलार्भ पार्ने वार्लों के लिए भी उन्हीं शर्तो क पार्लन करनार् आवश्यक है, जो बीमार्री-हितलार्भ पार्ने वार्लों के सार्थ लार्गू है। 
    1. अशक्ततार्-हितलार्भ के संबद्ध कुछ अन्य उपबंध 1. इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए नियोजन के दौरार्न होने वार्ली दुर्घटनार् को सार्धार्रणत: नियोजन से उत्पन्न भी समझार् जार्तार् है। 2. अगर कोर्इ दुर्घटनार् किसी कानून के उपबंधों यार् नियोजक द्वार्रार् दिए गए निर्देशों के उल्लंघन यार् उसके अपने मन से काम करने के कारण हुर्इ हो, तो उसे भी नियोजन के दौरार्न और नियोजन से उत्पन्न समझार् जार्एगार्, बशर्ते कि वह दुर्घटनार् अन्यथार् नियोजन के दौरार्न और उससे उत्पन्न हो तथार् कर्मकार नियोजक के व्यार्पार्र यार् व्यवसार्य के लिए काम कर रहार् हो। 3. अगर बीमार्कृत कर्मकार नियोजक के अभिव्यक्त यार् विवक्षित आदेश के अनुसार्र अपने काम पर आने तथार् वहार्ं से जार्ने के लिए किसी वार्हन के प्रयोग करते समय दुर्घटनार्ग्रस्त हो जार्तार् है, तो उसे भी नियोजन के दौरार्न और नियोजन से 180 उत्पन्न समझार् जार्एगार्, यदि (क) दुर्घटनार् अन्यथार् नियोजन के दौरार्न और उससे उत्पन्न हो तथार् (ख) दुर्घटनार् के समय वार्हन नियोजक यार् उसके द्वार्रार् अधिकृत किसी व्यक्ति द्वार्रार् यार् उसके बदले में चलार्यार् जार् रहार् हो और (ग) वह सार्मार्न्य सावजनिक यार्तार्यार्त के रूप में नहीं चलार्यार् जार् रहार् हो। 4. अगर दुर्घटनार् नियोजक के परिसर में यार् उसके समीप आपार्तकालीन स्थिति में किसी व्यक्ति यार् संपत्ति की रक्षार् करने के सिलसिले में होती है, तो उसे भी नियोजन के दौरार्न और नियोजन से उत्पन्न समझार् जार्एगार्। 
    2. अशक्ततार् से संबद्ध प्रश्नों क निर्धार्रण- किसी दुर्घटनार् के फलस्वरूप स्थार्यी अशक्ततार् के होने यार् नहीं होने, अर्जन-क्षमतार् की क्षति की मार्त्रार् आदि क निर्धार्रण विनियमों के अधीन नियुक्त चिकित्सार्-बोर्ड द्वार्रार् कियार् जार्एगार्। अगर कोर्इ बीमार्कृत व्यक्ति चिकित्सार्-बोर्ड के निर्णय से संतुश्ठ नहीं है, तो वह चिकित्सार्-अपील-अधिकरण यार् सीधे कर्मचार्री, बीमार् न्यार्यार्लय के पार्स अपील कर सकतार् है, लेकिन अगर बीमार्कृत व्यक्ति ने चिकित्सार् बोर्ड के निर्णय के आधार्र पर अशक्ततार् हितलार्भ के रूपार्न्तरण के लिए आवेदन दियार् हो तथार् ऐसे हितलार्भ क रूपार्न्तरित मूल्य प्रार्प्त कर लियार् हो, तो चिकित्सार् अपील अधिकरण यार् कर्मचार्री-बीमार्-न्यार्यार्लय के पार्स अपील नहीं की जार् सकती। अशक्ततार्-हितलार्भ से संबद्ध निर्णयों को समय-समय पुनर्विलोकित कियार् जार् सकतार् है।

4. आश्रित-हितलार्भ- 

आश्रित-हितलार्भ नियोजन के दौरार्न और उससे उत्पन्न दुर्घटनार् के फलस्वरूप बीमार्कृत कर्मचार्री की मृत्यु की स्थिति में उसके आश्रितों को दियार् जार्तार् है। आश्रित-हितलार्भ भी आवधिक भुगतार्न के रूप में दियार् जार्तार् है। आश्रित-हितलार्भ की पूर्ण दर तार्लिक में उल्लिखित मार्नक हितलार्भ दर से 40 प्रतिशत अधिक होती है। आश्रित-हितलार्भ मृत कर्मकार के आश्रितों को दियार् जार्तार् है – 

  1. मृत कर्मकार की विधवार् को आश्रित-हितलार्भ जीवनभर यार् उसके फिर से विवार्हित होने तक पूर्ण दर के 3/5 भार्ग की दर से दियार् जार्तार् है। मृत कर्मकार की दो यार् अधिक विधवार्एं होने पर हितलार्भ उनके बीच बरार्बर-बरार्बर बार्ंट दियार् जार्एगार्। 
  2. मृत कर्मकार के प्रत्येक धर्मज यार् दत्तक पुत्र को आश्रित-हितलार्भ उसके 18 वर्ष के होने तक पूर्ण दर के 2/3 भार्ग की दर से दियार् जार्तार् है। धर्मज पुत्र के अपंग होने की स्थिति में आश्रित-हितलार्भ उसकी अपंगतार् तक देय होतार् है। 
  3. मृत कर्मकार की धर्मजार् यार् दत्तक पुत्री को आश्रित-हितलार्भ उसके 18 वर्ष के होने यार् विवार्ह होने तक, जो भी पहले हो, पूर्ण दर के 2/5 भार्ग की दर से दियार् जार्तार् है। अपंग पुत्री को आश्रित-हितलार्भ उसकी अपंगतार् की अवधि तक देय होतार् है। 

अगर विभिन्न आश्रितों को देय आश्रित-हितलार्भ पूर्ण दर से अधिक हो जार्तार् है, तो उन्हें देय हितलार्भ को इस तरह बार्ंट दियार् जार्एगार् कि आश्रित हितलार्भ कुल मिलार्कर पूर्ण दर से अधिक नही हो। अगर मृत कर्मकार को कोर्इ विधवार् पत्नी यार् धर्मज यार् दत्तक संतार्न नही है, तो आश्रित-हितलार्भ को आश्रितों के बीच बार्ंट दियार् जार्एगार् – 1. मार्तार्-पितार् यार् पितार्मह-पितार्मही को आश्रित-हितलार्भ पूर्ण दर के 3/10 भार्ग की दर से उसके जीवन भर दियार् जार्एगार्। उनकी संख्यार् एक से अधिक होने पर हितलार्भ को उनके बीच बरार्बर-बरार्बर बार्ंट दियार् जार्एगार्। 2. अन्य पुरुष आश्रित को आश्रित-हितलार्भ पूर्ण दर 2/10 भार्ग की दर से उसके 18 वर्ष होने तक दियार् जार्एगार्। 3. अन्य स्त्री आश्रितार् को आश्रित-हितलार्भ पूर्ण दर क 2/10 भार्ग की दर से उसके 18 वर्ष के होने यार् उसके विवार्हित हो जार्ने तक, जो भी पहले ही दियार् जार्एगार्। 

5. चिकित्सार्-हितलार्भ – 

चिकित्सार्-हितलार्भ बीमित कर्मचार्री यार् उसके परिवार्र के सदस्य को (अब इसे उसके परिवार्र को भी उपलब्ध करार्यार् गयार् है) उस दशार् में देय होतार् है जब उसे चिकित्सकीय उपचार्र तथार् परिचर्यार् की आवश्यकतार् हो। चिकित्सार्-हितलार्भ किसी अस्पतार्ल, औशधार्लय, क्लिनिक यार् अन्य संस्थार् में बार्ह्म रोगी उपचार्र यार् बीमार्कृत कर्मचार्री के घर जार्कर देखने यार् किसी अस्पतार्ल यार् अन्य संस्थार् में अंत:रोगी उपचार्र के रूप में दियार् जार् सकतार् है। 

अगर कोर्इ कर्मचार्री स्थार्यी अशक्ततार् के फलस्वरूप बीमार्-योग्य नहीं रह गयार् हो, तो भी उसे अंशदार्न के भुगतार्न तथार् केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् विहित अन्य शर्तो को पूरी करने पर चिकित्सार्-हितलार्भ उस समय तक दियार् जार् सकतार् है, जब तक वह अशक्ततार् के नहीं रहने पर सेवार्निवृति की आयु प्रार्प्त नहीं कर लेतार्। सेवार्निवृति की आयु प्रार्प्त कर लेने पर भी बीमार्कृत कर्मचार्री तथार् पति-पत्नी को अंशदार्न के भुगतार्न और केंद्रीय सरकार द्वार्रार् विहित शर्ते पूरी करने पर चिकित्सार्-हितलार्भ उपलब्ध हो सकतार् है। 

  1. चिकित्सार्-हितलार्भ क पैमार्नार्- बीमार्कृत कर्मचार्रियों तथार् उनके परिवार्र के सदस्यों को चिकित्सार्-हितलार्भ रार्ज्य सरकार यार् कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम द्वार्रार् निर्धार्रित प्रकार यार् पैमार्ने के अनुसार्र उपलब्ध होगार्। बीमार्कृत कर्मचार्री यार् उनके परिवार्र के सदस्य विनियमों के अधीन व्यवस्थित अस्पतार्लों, औशधार्लयों, क्लिनिकों यार् अन्य संस्थार्ओं में उपलब्ध चिकित्सकीय उपचार्र को छोड़कर अन्य प्रकार की सुविधार् के हकदार्र नहीं होते। विनियमों के प्रार्वधार्नों को छोड़कर अन्य प्रकार से कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम के पार्स चिकित्सार् पर होने वार्ले खर्च की प्रतिपूर्ति क दार्वार् नहीं कियार् जार् सकतार्। 
  2. रार्ज्य सरकार द्वार्रार् चिकित्सकीय उपचार्र की व्यवस्थार्- अधिनियम के अंतर्गत चिकित्सकीय सेवार्ओं की व्यवस्थार् करनार् रार्ज्य सरकार क दार्यित्व है। रार्ज्य सरकार निगम की स्वीकृति से निजी चिकित्सकीय व्यवसार्यियों के क्लिनिक में भी कर्मचार्रियों के चिकित्सकीय उपचार्र की व्यवस्थार् कर सकती है। ज्हार्ँ चिकित्सार्-हितलार्भ पर होने वार्लार् व्यय अखिल भार्रतीय औसत से अधिक है, तो व्यय की अतिरिक्त रार्शि क भार्र निगम तथार् रार्ज्य सरकार के बीच समझौते द्वार्रार् नियत किए गए अनुपार्त में रार्ज्य सरकार को वहन करनार् पड़तार् है। निगम रार्ज्य सरकार पर पड़े भार्र को छोड़ भी सकतार् है। कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम रार्ज्य सरकार के सार्थ चिकित्सकीय उपचार्र की प्रकृति और मार्त्रार् के बार्रे में भी समझौतार् कर सकतार् है। अगर इस संबंध में दोनों के बीच कोर्इ समझौतार् नहीं हुआ हो, तो उसके दार्यित्वों क निर्धार्रण विवार्चक द्वार्रार् होगार्। विवार्चक के लिए उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीश रह चुकने यार् रहने की योग्यतार् रखनार् आवश्यक है। विवार्चक की नियुक्ति उच्चतम न्यार्यार्लय के मुख्य न्यार्यार्धीश द्वार्रार् होती है।
  3. कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम द्वार्रार् अस्पतार्ल आदि की स्थार्पनार्- निगम स्वयं भी चिकित्सकीय हितलार्भ क दार्यित्व ले सकतार् है और व्यय के भार्र को वहन करने के संबंध में रार्ज्य सरकार से समझौतार् कर सकतार् है। 

5. अंत्येश्टि खर्च – 

अंत्येश्टि खर्च बीमार्कृत व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति में उसके दार्ह-संस्कार के लिए दी जार्ती है। अंत्येश्टि खर्च मृत कर्मचार्री के परिवार्र के सबसे बड़े जीवित सदस्य यार् वार्स्तव में दार्ह-संस्कार करने वार्ले व्यक्ति को दियार् जार्तार् है। अगर मृत कर्मचार्री क कोर्इ परिवार्र नही है यार् अगर वह अपने परिवार्र के सार्थ नहीं रहतार् थार्, तो वह उस व्यक्ति को देय होतार् है, जिसने उसके दार्ह-संस्कार पर वार्स्तव में खर्च कियार् हे। अंत्येश्टि खर्च की अधिकतम रार्शि केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् विहित रार्शि होती है। वर्तमार्न समय में यह 2500 रुपये है। दिसम्बर 2006 में निगम द्वार्रार् इसे बढ़ार्कर 3000 रु0 करने क निर्णय कियार् गयार् है। अंत्येश्टि खर्च के लिए दार्वार् सार्धार्रणत: कर्मचार्री की मृत्यु के तीन महीने के अंदर करनार् आवश्यक है, लेकिन इस अवधि को निगम यार् उसके द्वार्रार् अधिकृत प्रार्धिकारी बढ़ार् सकतार् है। 

6. बेरोजगार्री भत्तार्- 

अधिनियम के अधीन विहित स्थितियों में बेरोजगार्री भत्तार् देने की योजनार् रार्जीव गार्ँधी श्रमिक कल्यार्ण योजनार् के नार्म से 1 अप्रैल, 2005 को शुरू की गर्इ। योजनार् के अधीन अधिनियम के दार्यरे में आने वार्ले कारखार्नों यार् स्थार्पनों की बंदी, कर्मचार्री की छंटनी यार् गैर-रोजगार्र चोट से उत्पन्न स्थार्यी अशक्ततार् के कारण बीमित कर्मचार्री के अनैच्छिक रूप से बीमार्-योग्य नियोजन से बार्हर हो जार्ने पर, उसे निर्धार्रित अवधि के लिए बेरोजगार्री-भत्तार् देने की अवस्थार् है। योजनार् की मुख्य विशेषतार्एं है – 

(1) पार्त्रतार् की शर्ते- 

‘रार्जीव गार्ँधी श्रमिक कल्यार्ण योजनार्’ के अंतर्गत बेरोजगार्री-भत्तार् के लिए पार्त्रतार् की शर्ते निम्नलिखित है- 

  1. कारखार्नार्/स्थार्पन की बंदी, छँटनी यार् गैर-रोजगार्र चोट से उत्पन्न अशक्ततार् की तिथि को कर्मचार्री क अधिनियम के अधीन बीमार्कृत रह चुकनार् आवश्यक है। 
  2. रोजगार्र की हार्नि के पूर्ववर्ती 5 वर्षो की अवधि के लिए उसके द्वार्रार् अधिनियम के अधीन अंशदार्न दे चुक गयार् हो। 
  3. बीमार्कृत व्यक्ति बेरोजगार्री की तिथि से शीघ्र पहले की चार्र अंशदार्न-अवधियों की तदनुरूपी हितलार्भ-अवधियों में बीमार्री-हितलार्भ क हकदार्र रह चुक हो।
  4. बेरोजगार्री भत्तार् उस दिन देय नहीं होगार् जिस दिन उसे अन्यत्र रोजगार्र मिल जार्तार् है। 5. 1 अप्रैल, 2005 को अथवार् उसके बार्द बेरोजगार्र बीमार्कृत व्यक्ति ही बेरोजगार्री भत्तार् क हकदार्र हो सकतार् है। 

(2) बेरोजगार्री-भत्तार् की दर, अवधि और भुगतार्न- 

  1. बेरोजगार्री भत्तार् की दैनिक दर बेरोजगार्री की तिथि से पूर्ववर्ती पिछली चार्र अंशदार्न-अवधियों के दौरार्न बीमार्कृत व्यक्ति की औसत दैनिक मजदूरी के तदनुरूपी ‘मार्नक हितलार्भ दर’ है। 
  2. बेरोजगार्री-भत्तार् कर्मचार्री के संपूर्ण बीमार्-योग्य नियोजन के दौरार्न अधिकतम 6 महीने के लिए देय होतार् है।
  3. बेरोजगार्री-भत्तार् क भुगतार्न एक दौर से यार् विभिन्न दौरों में कियार् जार् सकतार् है, बशर्ते की ऐसार् प्रत्येक दौर एक महीने से कम नही हो। 
  4. बेरोजगार्री-भत्ते को उसी अवधि के लिए बीमार्री-हितलार्भ, प्रसूति-हितलार्भ यार् अस्थार्यी अशक्ततार् के लिए अशक्ततार्-हितलार्भ के सार्थ सम्मुचय नहीं कियार् जार् सकतार्। लेकिन, अगर बीमार्कृत व्यक्ति उसी अवधि के दौरार्न इनमें से कोर्इ हितलार्भ प्रार्प्त कर रहार् हो, तो वह अपनी इच्छार्नुसार्र उस हितलार्भ को चुनने के लिए स्वतंत्र होगार् जिसे वह प्रार्प्त करनार् चार्हतार् है। 

(3) चिकित्सकीय देखरेख- 

बेरोजगार्री भत्तार् क हकदार्र व्यक्ति कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् अस्पतार्ल, औशधार्लय यार् क्लीनिक में चिकित्सकीय देखरेख क भी हकदार्र होतार् है। 

हितलार्भों से संबद्ध सार्मार्न्य उपबंध 

  1. हितलार्भों क सम्मुचय नहीं कियार् जार्नार्- कोर्इ भी बीमार्कृत व्यक्ति एक ही अवधि में निम्नलिखित हितलार्भ सार्थ-सार्थ नहीं प्रार्प्त कर सकतार्- 
    1. बीमार्री-हितलार्भ और प्रसूति-हितलार्भ, यार् 
    2. बीमार्री-हितलार्भ और अस्थार्यी अशक्ततार् के लिए अशक्ततार्-हितलार्भ, यार् 
    3. प्रसूति-हितलार्भ और अस्थार्यी अशक्ततार् के लिए अशक्ततार्-हितलार्भ। अगर कोर्इ व्यक्ति उपर्युक्त हितलार्भों में एक से अधिक हितलार्भों क अधिकारी है, तो वह उनमें से केवल एक ही हितलार्भ चुन सकतार् है। 
  2. हितलार्भों क समार्नुदेशन तथार् कुर्की से मुक्त होनार्- अधिनियम के अधीन उपलब्ध होने वार्ले किसी भी भुगतार्न के अधिकार को हस्तार्ंतरित यार् समार्नुदेशित नहीं कियार् जार् सकतार्। अधिनियम के अंतर्गत देय किसी भी नकद हितलार्भ की किसी भी न्यार्यार्लय की डिक्री यार् आदेश के निष्पार्दन में कुर्की यार् बिक्री नहीं की जार् सकती।  
  3. अन्य अधिनियमों के अधीन हितलार्भ प्रार्प्त करने क वर्जन- अगर कोर्इ व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन उपलब्ध हितलार्भों क अधिकारी है, तो वह अन्य अधिनियमों के अंतर्गत उन प्रकार के हितलार्भों क अधिकारी नहीं हो सकतार्। 
  4. अशक्ततार्-हितलार्भ क रूपार्न्तरण नहीं होनार्- किसी भी व्यक्ति को विनियमों के अंतर्गत निर्दिष्ट तरीकों को छोड़कर अन्य प्रकार से अशक्ततार्-हितलार्भ को एकमुश्त रार्शि में रूपार्ंतरित करने क अधिकार प्रार्प्त नही है। 
  5. कुछ मार्मलों में व्यक्तियों क हितलार्भ पार्ने क अधिकार नहीं होनार् – विनियमों के प्रार्वधार्नों में निर्दिष्ट तरीकों को छोड़कर कोर्इ भी व्यक्ति अन्य प्रकार से बीमार्री-हितलार्भ यार् अशक्ततार्-हितलार्भ उस दिन प्रार्प्त करने क अधिकारी नहीं होतार् जिस दिन उसने मजदूरी पर काम कियार् हो यार् छुट्टी यार् अवकाश पर रहने पर भी उसे मजदूरी मिली हो यार् वह उस दिन हड़तार्ल पर हो। 
  6. अनुचित रूप से प्रार्प्त हितलार्भ क प्रतिसंदार्व- अगर किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम के अंतर्गत कोर्इ भी हितलार्भ यार् भुगतार्न प्रार्प्त कर लियार् हो जिसक वह विधिक रूप से अधिकारी नहीं है, तो उसे निगम को हितलार्भ के मूल्य यार् उसकी रार्शि क प्रतिसंदार्य करनार् आवश्यक है। मृत्यु की स्थिति में इसे मृत व्यक्ति की आस्तियों से उसके प्रतिनिधि से वसूल कियार् जार् सकतार् है। नकद भुगतार्नों को छोड़कर अन्य हितलार्भों के मूल्य क निर्धार्रण विनियमों द्वार्रार् निर्दिष्ट प्रार्धिकारी करेगार्। हितलार्भ के प्रतिसंदार्य की रार्शि को भू-रार्जस्व के बकाए की तरह वसूल कियार् जार् सकतार् है। 
  7. हितलार्भ मृत्यु के दिन तक देय – अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु किसी ऐसी अवधि में हो जार्ती है जिसके लिए अधिनियम के अंतर्गत कोर्इ नकद हितलार्भ देय है, तो उस हितलार्भ की रार्शि को (जो मृत्यु के दिन तक देय होती है) मृत व्यक्ति द्वार्रार् लिखित रूप से नार्म-निर्देशित व्यक्ति को दियार् जार्एगार्। जहार्ँ हितलार्भ क भुगतार्न मृत व्यक्ति के वार्रिस यार् विधिक प्रतिनिधि को कियार् जार्एगार्। 
  8. नियोजक द्वार्रार् मजदूरी आदि क क्रम नहीं कियार् जार्नार्- इस अधिनियम के अंतर्गत अंशदार्न देने के दार्यित्व ही के कारण कोर्इ भी नियोजक प्रत्यक्ष यार् अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी कर्मचार्री की मजदूरी कम नहीं कर सकतार्। वह विनियमों द्वार्रार् निर्दिष्ट तरीके को छोड़कर अन्य प्रकार से किसी कर्मचार्री की सेवार् की शर्तो के अंतर्गत उपलब्ध ऐसे हितलार्भों के भुगतार्न को न तो बंद और न ही कम कर सकतार् है, जो इस अधिनियम के अधीन उपलब्ध हितलार्भों के समार्न हो। 
  9. नियोजक द्वार्रार् बीमार्री आदि की अवधि में कर्मचार्री को पदच्युल यार् दंडित नहीं कियार् जार्नार् – कोर्इ भी नियोजक उस अवधि में किसी कर्मचार्री को पदच्युत, सेवोन्मुक्त यार् अन्य प्रकार से दंडित नहीं कर सकतार्, जिस अवधि में उसे बीमार्री-हितलार्भ यार् प्रसूति-हितलार्भ प्रार्प्त हो रहार् हो। इसी तरह, कोर्इ भी नियोजक, विनियमों द्वार्रार् निर्दिष्ट तरीकों को छोड़कर अन्य किसी प्रकार, किसी कर्मचार्री को उस अवधि में पदच्युत, सेवोन्मुक्त, अवनत यार् अन्य प्रकार से दंडित नहीं कर सकतार्, जिस अवधि में उसे अस्थार्यी अशक्ततार् के लिए अशक्ततार्-हितलार्भ मिल रहार् हो यार् जिसमें वह चिकित्सकीय उपचार्र में हो यार् जिस अवधि में वह गर्भार्वस्थार् यार् प्रसवार्वस्थार् के चलते होने वार्ली बीमार्री के कारण कार्य से अनुपस्थित हो। इस तरह की पदच्युति, सेवोन्मुक्ति यार् अवनति से संबद्ध कर्मचार्री को दी जार्ने वार्ली कोर्इ भी नोटिस अवैध और प्रभार्वहीन होगी। 

कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निधि 

अधिनियम के अंतर्गत भुगतार्न किए गए सभी अंशदार्नों तथार् निगम द्वार्रार् प्रार्प्त की जार्ने वार्ली सभी रार्शियों को कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निधि में जमार् करनार् आवश्यक है। निधि क प्रशार्सन कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् निगम द्वार्रार् होतार् है। निगम को केन्द्र एवं रार्ज्य सरकारों, स्थार्नीय प्रार्धिकारों, व्यक्तियों तथार् अन्य निकायों से अनुदार्न तथार् दार्न लेने क अधिकार है। निधि के लेखार् क संचार्लन निगम की स्वीकृति से स्थार्यी समिति द्वार्रार् अधिकृत अधिकारियों द्वार्रार् होतार् है। निधि से व्यय की जार्ने वार्ली मदों में सम्मिलित है- 

  1. हितलार्भों क भुगतार्न तथार् बीमार्कृत व्यक्तियों के लिए चिकित्सकीय उपचार्र तथार् देखभार्ल की व्यवस्थार्; 
  2. निगम, स्थार्यी समिति, चिकित्सार्-हितलार्भ परिसद, क्षेत्रीय बोर्डो, स्थार्नीय समितियों तथार् क्षेत्रीय एवं स्थार्नीय चिकित्सार्-हितलार्भ परिषदों के सदस्यों को फीस और भत्तों क भुगतार्न; 
  3. निगम के अधिकारियों तथार् कार्मिकों को वेतन, छुट्टी और कार्यग्रहण के लिए भत्तों, यार्त्रार्-भत्तों, उपार्दार्नों, पेंशन, भविष्य-निधि तथार् अन्य हितलार्भ-निधियों के लिए अंशदार्नों आदि क भुगतार्न; 
  4. अस्पतार्लों, दवार्खार्नों तथार् अन्य संस्थार्ओं की स्थार्पनार् तथार् चिकित्सकीय एवं अन्य सहार्यक सेवार्ओं की व्यवस्थार्; 
  5. बीमार्कृत कर्मचार्रियों और उनके परिवार्र के सदस्यों को उपलब्ध करार्ए गए चिकित्सकीय उपचार्र तथार् देखभार्ल पर किए गए खर्च के लिए रार्ज्य सरकारी, स्थार्नीय प्रार्धिकारियों, निजी निकायों यार् व्यक्तियों को भुगतार्न; 
  6. निगम के लेखार् की जार्ंच तथार् उनकी आस्तियों एवं दार्यित्वों के मूल्यार्ंकन पर होने वार्ले खर्च क भुगतार्न; 
  7. कर्मचार्री रार्ज्य बीमार् न्यार्यार्लयों पर होने वार्ले व्यय क वहन; 
  8. नियम के विरूद्ध न्यार्यार्लय यार् अधिकरण द्वार्रार् किए गए आदेश यार् अधिनियम के अधीन रकमों क भुगतार्न;
  9. अधिनियम के अधीन दीवार्नों यार् फौजदार्री कार्यवार्हियों पर होने वार्ले व्यय क वहन; 
  10. बीमार्कृत व्यक्तियों के स्वार्स्थ्य एवं कल्यार्ण, अशक्त एवं दुर्घटनार्ग्रस्त कर्मचार्रियों के पुनर्वार्सन तथार् पुनर्नियोजन पर होने वार्ले व्यय क वहन; तथार्
  11. केन्द्रीय सरकार की पूर्वस्वीकृति से निगम द्वार्रार् अधिकृत अन्य प्रयोजन। (धार्रार् 26-28)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *