कर्मचार्री भविष्य-निधि एवं प्रकीर्ण प्रार्वधार्न अधिनियम, 1952

अधिनियम क नार्म, विस्तार्र, उद्देश्य तथार् लार्गू होनार् 

औद्योगिक विकास के सार्थ ही कुछ नियोजकों ने अपने कर्मकारों के कल्यार्ण के लिए भविष्य निधि स्कीम लार्गू किये। लेकिन ऐसी योजनार्एं शुद्ध रूप से प्रार्इवेट और ऐच्छिक थीं। छोटे उद्योगों में कार्यरत मजदूर इस लार्भ से वंचित थे। इससे असन्तोष और र्इश्र्यार् होनार् स्वार्भार्विक थार्। ऐसी योजनार् के सम्पार्दन की खोजबीन करने के लिए ‘‘लेबर इन्वेस्टीगेशन कमिटी’’ गठित की गर्इ। 11 फरवरी, 1948 में एक प्रार्इवेट बिल संविधार्न सभार् में पेश की गर्इ तार्कि नियोजक प्रतिष्ठार्नों के कुछ वर्गो को नियोजक भविष्य निधि प्रदार्न करें। केन्द्रीय श्रम मंत्री के आश्वार्सन पर कि सरकार महसूस करती है कि ऐसार् विधेयक लार्यार् जार्ए जिससे औद्योगिक प्रतिष्ठार्नों समेत वार्णिज्यिक अन्डरटेकिंग के कर्मकार ऐसी योजनार् क लार्भ पार् सके। इसके लिए व्यार्पक विधेयक लार्यार् जार्एगार्। इस पर प्रार्इवेट विधेयक वार्पस ले लियार् गयार्। 5 नवम्बर, 1951 को भार्रत सरकार ने ‘इम्प्लार्इज प्रार्विडेन्ट फन्ड्स आर्डीनेन्स’ जार्री कियार् जिस पर स्टैन्डिग लेवर कमिटी ने विचार्र-विमर्ष कर लियार् थार्। इसक स्थार्न लोक सभार् में पेश बिल ने लियार्। संसद के दोनों सदनों से पार्रित होने के बार्द 4 माच, 1952 को रार्ष्ट्रपति की मन्जूरी मिलने पर इसने अधिनियम क रूप ग्रहण कर लियार्।

समुचित सरकार – 

‘समुचित सरकार’ से अभिप्रार्य है (1) केन्द्रीय सरकार के नियन्त्रण में यार् उससे सम्पृक्त प्रतिष्ठार्न यार् महार्पतन खार्न यार् तेल क्षेत्र यार् नियन्त्रित उद्योग (यार् एक से अधिक रार्ज्यों में विभार्ग यार् शार्खार्यें रखने वार्ले उद्योग) यार् संस्थार्न के निमित 186 केन्द्रीय सरकार, और (2) दूसरे स्थार्पनों के निमित रार्ज्य सरकार ही समुचित सरकार मार्नी जार्एगी।

प्रार्धिकृत अधिकारी –

प्रार्धिकृत अधिकारी से तार्त्पर्य केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त, अतिरिक्त केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त, उपभविष्य निधि आयुक्त, क्षेत्रीय आयुक्त अथवार् केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् शार्स्कीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् अधिकृत किए जार्ने वार्ले अधिकारी से है।

मूल मजदूरी – 

ये अभिप्रार्य सभी उपलब्धियार्ं से है, जिसे कि कर्मकार ने अवकाश यार् कार्यवार्ही में नियोजन के अनुबन्ध की सभी शर्तो के अनुसार्र अर्जित कियार् है। मेसर्स ब्रिज एण्ड रूपस क0 बनार्म ऑफ इण्डियार् के मार्मले में निर्धार्रित कियार् गयार् कि इसमें प्रोडक्शन बोनस सम्मिलित करने क केन्द्रीय सरकार क निर्णय सही नहीं थार्। पक्षकारों के बीच हुए करार्र के फलस्वरूप देय विशेष भत्तार् मजदूरी नहीं ह। स्पेशल् एलार्उन्स मूल मजदूरी क भार्ग है। लेकिन इसमें सम्मिलित नही है। –

  1. किसी खार्द्यार्न्न रियार्यत क उचित मूल्य 
  2. नियोजक द्वार्रार् की गर्इ भेंटे यार् उपहार्र 
  3. कोर्इ मंहगाइ भत्तार् (अर्थार्त् ऐसे समस्त भुगतार्न चार्हे उनको कोर्इ भी नार्म दियार् जार्य, जो किसी कर्मकार को निर्वार्ह व्यय में वृद्धि के कारण देय हो) मकान-भार्ड़ार् भत्तार्, अधिक समय भत्तार्, अधिक समय भत्तार्, बोनस कमीशन यार् ऐसार् ही कोर्इ अन्य भत्तार् जो कर्मचार्री को उसके नियोजक की बार्वत देय हो, यार् ऐसे नियोजन में किए गए काम के सम्बन्ध में देय हो। 

अंशदार्न से अभिप्रार्य ऐसे अंशदार्न से है जो किसी परियोजनार् के अन्तर्गत किसी सदस्य की बार्वत देय है यार् किसी ऐसे कर्मचार्री के बार्रे में देय है जिस पर जीवन बीमार् योजनार् लार्गू होती है।

नियन्त्रित उद्योग से मतलब उस उद्योग से है जिसक संघ सरकार द्वार्रार् नियन्त्रण केन्द्रीय अधिनियम द्वार्रार् लोक हित में अभीश्ट होनार् घोषित कियार् जार् चुक है।

नियोजक से तार्त्पर्य – 

  1. किसी प्रतिष्ठार्न के निमित जो एक कारखार्नार् है, इसक स्वार्मी यार् अधिभोगी (दखलकार) से है और इसमें ऐसे स्वार्मी यार् दखलकार क अभिकर्तार् मृत स्वार्मी यार् मृत अधिभोगी क विधिक प्रतिनिधि भी शार्मिल है और जहार्ँ कोर्इ व्यक्ति कारखार्नार् अधिनियम, 1948 की उपधार्रार् (7) (1) क्रियार्-कलार्प के अधीन कारखार्ने के प्रबन्धक के रूप में नार्मित कियार् गयार् है वहार्ं ऐसार् नार्मित व्यक्ति आतार् है, तथार् 
  2. किसी अन्य स्थार्पन के सम्बन्ध में वह व्यक्ति यार् वह प्रार्धिकारी जिसक स्थार्पन के क्रियार्-कलार्प पर अन्तिम नियन्त्रण है और जहार्ं कथित क्रियार्-कलार्प किसी प्रबन्धक, प्रबन्ध निदेशक यार् प्रबन्ध-अभिकर्तार् को सौपे गये है; वहार्ं ऐसार् प्रबन्धक, प्रबन्ध-संचार्लक यार् प्रबन्ध अभिकर्तार्/सिविल प्रोसीजर कोड के आर्डर 40 के प्रार्वधार्नों के अन्तर्गत किसी आस्थार्न के लिए नियुक्त रिसीवर नियोजक मार्नार् जार्येगार्, यदि उसक प्रतिष्ठार्न तथार् उसके विद्यमार्न कर्मचार्री-वृन्द पर नियन्त्रण रहतार् है क्योंकि उसकी चल और अचल सम्पत्ति पर उसक कब्जार् होतार् है। पी0एफ0 के अंशदार्न की मार्ंग उससे की जार् सकती है। 

कर्मकार –

कर्मकार से तार्त्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जो शार्रीरिक यार् अन्य काम करने के लिये किसी भी स्थार्पन में मजदूरी पर नियोजित है और जो प्रत्यक्षत: यार् परोक्ष रूप से नियोजक से अपनी मजदूरी पार्तार् है और इसमें वह व्यक्ति भी शार्मिल समझार् जार्येगार्; जो उस स्थार्पन के काम में यार् काम के सम्बन्ध में किसी ठेकेदार्र द्वार्रार् यार् उसके मार्ध्यम से नियोजित हो।

छूट प्रार्प्त कर्मचार्री से ऐसार् कर्मचार्री अभिप्रेत है जिस पर कोर्इ योजनार् यार् बीमार् योजनार् लार्गू होती है, यदि धार्रार् 11 के अन्तर्गत प्रार्प्त छूट न मिली होती। छूट प्रार्प्त अधिश्ठार्न से तार्त्पर्य है कोर्इ अभिश्ठार्न जिसके निमित धार्रार् 17 के अन्तर्गत किसी परियोजनार् के समस्त यार् किन्हीं उपबन्धों के लार्गू होने से छूट प्रदार्न की गर्इ है, चार्हे ऐसी छूट स्थार्पन को यार् उसमें कार्यरत व्यक्तियों के वर्ग को दी गर्इ है।

कारखार्नार् से अभिप्रार्य अपनी परिसीमार्ओं सहित किसी ऐसे परिसर से है, किसी भी उद्योगार्लय से हे, जिसमें उसके निकटतम भार्ग की सम्मिलित है जिसके किसी भार्ग में चार्हे विद्युत-शक्ति की सहार्यतार् से यार् बिनार् उसके अभिनिर्मार्ण प्रक्रियार् की जार् रही है यार् सार्मार्न्यतयार् इस तरह की जार्ती है। कारखार्ने में यहार्ँ बीड़ी बनार्ने वार्लों क निवार्स स्थार्न भी सम्मिलित समझार् जार्येगार्, क्योंकि उनक बीड़ी बनार्ने क काम फैक्टरी में इसी प्रकार काम किए जार्ने क एक अभिन्न अंग है और वे बनी बीड़ियार्ं बीड़ी निर्मार्तार् फैक्टरी में लार्ते है, जहार्ँ उन्हें दिये जार्ने वार्ले कच्चे मार्ल क रजिस्टर होतार् है, प्रबन्धकीय प्रशार्सनिक स्टार्फ रहतार् है। उनमें भी ‘मार्स्टर और सर्वेन्ट’ क सम्बन्ध होतार् है।

  1. निधि फण्ड – निधि से अभिप्रार्य किसी योजनार् के अन्तर्गत स्थार्पित निधि से है। सन् 1976 Deposit Linked Insurance Fund में इसमें जोड़ दियार् गयार्।
  2. परिवार्र पेंशन योजनार् – से तार्त्पर्य धार्रार् 6क के अधीन इम्प्लार्इज फैमिली पेंशन स्कीम से है।
  3. परिवार्र पेंशन निधि – परिवार्र पेंशन योजनार् के अन्तर्गत स्थार्पित परिवार्र पेंशन फण्ड से है।
  4. बीमार् विधि – से अभिप्रार्य डिपार्जिट लिंक्ड इन्श्योरेन्स फण्ड से है जिसकी स्थार्पनार् धार्रार् 6 (ग) की उपधार्रार् (2) में की गर्इ है।
  5. बीमार् योजनार् – ये तार्त्पर्य धार्रार् 6 (ग) की उपधार्रार् (1) के अन्तर्गत निर्मित इम्प्लार्इज डिपोजिट लिंक्ड इन्श्योरेंस स्कीम से है।
  6. उद्योग – उद्योग से अभिप्रार्य प्रथम अधिसूची में निदिष्ट किसी उद्योग से है और उसमें धार्रार् 4 के अधीन अधिसूचनार् द्वार्रार् अनुसूची में जोड़ार् गयार् संलग्न कार्इ अन्य उद्योग भी सम्मिलित है।
  7. अभिनिर्मार्ण यार् अभिनिर्मार्ण प्रक्रम से तार्त्पर्य किसी वस्तु यार् पदाथ क प्रयोग, बिक्री, परिदार्न यार् व्ययन की दृष्टि से उसक निर्मार्ण, परिवर्तन, अलंकरण, निहन, धुलाइ, उन्मूलन, विघटन यार् अन्यथार् अभिक्रियार्न्वयन यार् अनुकूलन करने के लिए किसी प्रक्रियार् से है। मरम्मत करने, आभूशित करने, फिनिशिंग, फैकिंग, आइलिंग, धोने, सफाइ करने, तोड़ने, विनश्ट करने आदि में बरतने के लिये कोर्इ प्रक्रम।
  8. सदस्य – सदस्य से अभिप्रार्य फण्ड के सदस्य से है।
  9. कारखार्ने के अधिभोगी (कब्जेदार्र) से तार्त्पर्य उस व्यक्ति से है जिसक कारखार्ने पर अन्तिम नियन्त्रण होतार् है और जहार्ं कथित मार्मले किसी प्रबन्ध-अभिकर्तार् को सौंप दिये गए हैं, वहार्ं ऐसार् प्रबन्ध-अभिकर्तार् उस कारखार्ने क अधिभोगी समझार् जार्येगार्।
  10. प्रतिष्ठार्न – जहार्ं किसी प्रतिष्ठार्न के विभिन्न विचार्र है यार् उसकी शार्खार्एं हैं, चार्हे उसी स्थार्न पर स्थित है यार् भिन्न-भिन्न स्थार्न पर ऐसी सभी शार्खार्एं यार् विभार्ग उसी प्रतिष्ठार्न के अंग मार्ने जार्एंगें।

नियोजक क दार्यित्व, शार्सितयार्ँ एवं प्रक्रियार् 

ऐसे व्यार्पक एवं प्रभार्वशार्ली प्रार्वधार्न बनार्ये गए हैं, जिनसे नियोजक नियमोल्लंघन यार् अधिनियम के सिद्धार्न्त के विपरीत कोर्इ अपरार्ध करके शार्स्त्रियों से मुक्त न रह सके। निम्न ढंग से नियोजक दार्यित्वार्धीन होगार् –

  1. जब वह समयार्नुसार्र भविष्य अंशनिधि को विहित ढंग से जमार् नहीं करतार् है तो इसके लिए 1 वर्ष तक क कारार्वार्स तार्िार् 10000 रुपये से कम क जुर्मार्नार् नहीं होगार्। 
  2. जब नियोजक चार्लू महीने बीतने के बार्द फण्ड जमार् करने में जार्न-बूझकर अधिक विलम्ब करतार् है। फण्ड की रकम नकद, चेक यार् ड्रार्फ्ट में भी जमार् की जार् सकती है। यदि उद्योग किये जार्ने वार्ले स्थार्न पर रिजर्व बैंक यार् स्टेट बंकै यार् उनकी शार्खार् नहीं, तो अन्य बैंक में फण्ड सम्बन्धी रार्शि नहीं जमार् होगी। उसे उक्त बैंक में से किसी एक में ही कियार् जार्नार् अनिवाय होगार्। बैंकों के रार्ष्ट्रीयकरण के प्रकाश में क्यार् अब उक्त बैंक में से किसी एक में ही कियार् जार्नार् अनिवाय होगार्। बैंकों के रार्ष्ट्रीयकरण के प्रकाश में क्यार् अब अन्य बैंकों में भी यह रार्शि जमार् की जार् सकेगी, इसके विषय में अभी कोर्इ स्पष्टीकरण नहीं प्रार्प्त हुआ है। 
  3. जब नियोजक किसी रकम को अदत्त रखतार् है, जो विधिक रूप में देय हो यार् की गर्इ हो। शोध्य रार्शि क निर्णय सेन्ट्रल प्रार्विडेन्ट फण्ड कमिश्नर यार् डिप्टी कमिश्नर फण्ड यार् कोर्इ रीजनल प्रार्विडेन्ट फण्ड कमिश्नर करने की क्षमतार् रखतार् है। नियोजक से शोध्य रकम सरकार द्वार्रार् वैसे ही वसूल की जार्येगी, जैसे भू-रार्जस्व। देय रार्शि को अदत्त रखने पर नियोजक जिम्मेदार्र होगार्। 
  4. नियोजक के धार्रार् 11 के उपबन्धों के प्रतिकूल कार्य करने पर उसे दण्ड क भार्गी बनार्यार् जार्येगार्। सभी ऋणों के भुगतार्न क प्रश्न उठने पर फण्ड के लिए योगदार्न को प्रार्थमिकतार् दी जार्येगी। यदि नियोजक कर्मकारी के और अपने योगदार्न को जमार् न करके अन्य ऋणों क भुगतार्न करतार् है, तो क्यार् उसे दण्ड क भार्गी बनार्यार् जार्नार् न्यार्योचित न होगार् ? 
  5. कोर्इ भी नियोजक, जब फण्ड के लिए योगदार्न की रार्शि को कर्मकारों की मजदूरी से कटौती करेगार्, वह उत्तरदार्यी होगार्। प्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार नियोजक अपने आर्थिक भार्र को नियोजिती वर्ग पर नहीं लार्द सकतार्, उसे अपने कर्त्तव्य क निर्वार्ह तो करनार् ही पड़ेगार्। अपने हिस्से के किये जार्ने वार्ले योगदार्न को वह कर्मचार्रियों को मजदूरी से नहीं काट सकतार्। कटौती करने पर उसे दोषसिद्ध कियार् जार्येगार्। 
  6. निरीक्षकों के आदेश क पार्लन न करने पर नियोजक दण्डित कियार् जार्यगार्। जब उससे रजिस्टर, अभिलेख-रिकार्ड यार् अन्य आवश्यक कागजार्त निरीक्षण के लिए मार्ंगे जार्ते हैं, जब उससे आदेशार्नुसार्र कार्य करने की अपेक्षार् की जार्ती है। चूंकि, निरीक्षक लोकसेवक मार्ने जार्ते है।, इसलिये उनकी अवमार्ननार् यार् अवैधार्निक ढंग से उनके कार्य में व्यवधार्न डार्लनार् दण्डनीय होगार्। 
  7. जब नियोजक अपने यहार्ं नियोजित कर्मकार के स्थार्पन में काम छोड़कर अन्यत्र चले जार्ने पर उसके फण्ड को हस्तार्न्तरित नहीं करतार्। जैसार् कि नियमत: उसे धार्रार् 17 (अ) अनुसार्र कर देनार् चार्हिये। 

भविष्य निधि पर ब्यार्ज भी देय होतार् है – समय-समय पर ब्यार्ज की दरों में परिवर्तन होतार् रहतार् है। पहले यह दर 12): थी लेकिन कोर्इ नतीजार् न निकल सका। वार्म दल भी 10 प्रतिशत से कम पर रार्जी नहीं रहे। अन्ततोगत्वार् सरकार ने कर्मचार्री भविष्य निधि के केन्द्रीय बोर्ड की सिफार्रिश पर 4 करोड़ से अधिक ग्रार्हकों को 2006-07 के दौरार्न उनकी जमार्रार्शि पर 8.5 प्रतिशत ब्यार्ज देने की अधिसूचनार् 20 अक्टूबर, 2007 को केन्द्र सरकार ने जार्री कर दी। सभी क्षेत्रीय निधि आयुक्तों को इस फैसले पर अमल सुनिश्चित और सम्बन्धित वर्ष क वाषिक लेखार् बयार्न भी तैयार्र करने और बतार्ने क निर्देश दे दियार् गयार् है।

अंश जमार् न करनार् आर्थिक अपरार्ध और गैर जमार्नती अपरार्ध होगार् शार्सितयों और प्रक्रियार्ओं क उल्लेख धार्रार् 14 (अ), 14 (ब) तथार् धार्रार् 8 में कियार् गयार् है। उनके उपबन्धों के आधार्र पर हम यह कह सकते हैं कि दण्ड विधार्न –

  1. नियोजकों के लिए तथार् 
  2. निगमित निकायों यार् विधिक व्यक्तियों जैसे कम्पनी, मिल्स और कारखार्ने के लिए लार्गू होगार्। 

धार्रार् 14 में उपबन्धित है कि समुचित रूप से कर्त्तव्यों के निर्वार्ह न करने पर किस प्रकार से शार्सित क प्रयोग कियार् जार्येगार्। उसके अनुसार्र जो कोर्इ भी अपने द्वार्रार् अदार्यगी किये जार्ने की बार्त को टार्लने के प्रयोजन से यार् इस अधिनियम यार् स्कीम के अधीन किसी अन्य व्यक्ति को भुगतार्न न करने के योग्य बनार्तार् है, यार् जार्न बूझकर कोर्इ मिथ्यार्-विवरण यार् अभ्यार्वेदन प्रस्तुत करतार् है, यार् ऐसार् करार्ने क यार् किये जार्ने क कारण बनतार् है, तो उसे एक वर्ष तक क कारार्वार्स यार् 5000 रुपये तक क जुर्मार्नार् यार् दोनों प्रकार क दण्ड दियार् जार् सकतार् है।

धार्रार् 14 क ख स्पष्ट करती है कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, 1973, में अन्तर्निहित किसी बार्त के होते हुए भी नियोजक द्वार्रार् अंशदार्न की भुगतार्न में त्रुटि से सम्बन्धित अपरार्ध, जो इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय है, संज्ञेय होगार्।

कम्पनियों द्वार्रार् अपरार्ध- 

नियोजकों को दण्डित करने के विधार्न के सार्थ ही कम्पनी-जैसे निगमित निकायों को भी दोषभार्गी बनार्ने तथार् दण्ड देने की व्यवस्थार् धार्रार् 14 (क) में की गर्इ है। यदि इस अधिनियम यार् स्कीम यार् बीमार् स्कीम के अधीन अपरार्ध करने वार्लार् व्यक्ति कम्पनी हो तो प्रत्येक जो उस उल्लंघन के समय उस कम्पनी के कारबार्र के संचार्लन के लिए उस कम्पनी क भार्रसार्धक और उसके प्रति उत्तरदार्यी थार् और सार्थ ही वह 190 कम्पनी भी ऐसे अपरार्ध के दोषी समझे जार्एंगे तथार् तदनुसार्र अपने विरुद्ध कार्यवार्ही किए जार्ने और दण्डित होने के भार्गी होंगे।

अधिनियम के अन्तर्गत प्रार्धिकारीगण- 

अधिनियम के अन्तर्गत मुख्य रूप से सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज, स्टेट बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज, कमिश्नर्स और निरीक्षक-जैसे प्रार्धिकारियों क उल्लेख तथार् निरीक्षकों के सम्बन्ध में अध्यार्य 7 में विस्तार्र में उनकी नियुक्ति, अधिकार एवं कर्त्तव्य पर विचार्र कियार् गयार् है। सबसे उच्च अधिकार वार्लार् सेन्ट्रल बोर्ड ही होतार् है। स्टेट बोर्ड क नम्बर दूसरार् है।

सेन्ट्रल बोर्ड की स्थार्पनार्, सदस्य-संख्यार् और कार्य [धार्रार् 5(क)] 

इसमें व्यक्ति सदस्य होंगे –

  1. केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् नियुक्त एक अध्यक्ष एवं एक उपार्ध्यक्ष। अध्यक्ष बोर्ड क सर्वोच्च अधिकारी होगार् और उसकी अध्यक्षतार् और सर्वेक्षण में सार्रे कार्य-कलार्प सम्पन्न होंगे। उसकी संख्यार् सदैव एक रहेगी। वह पूर्ण रूप से स्वतन्त्र व्यक्ति होगार्।
  2. पार्ंच से अनधिक ऐसे व्यक्ति होंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् अपने अधिकारियों में से नियुक्त किए जार्एंगे।
  3. केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त पदेन।
  4. 15 से अनधिक ऐसे व्यक्ति, जिनकी नियुक्ति केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् की जार्येगी और वे ऐसे रार्ज्यों क प्रतिनिधित्व करेंगे जैसार् कि सरकार विनिर्दिष्ट करें।
  5. ऐसे स्थार्पनों के नियोजकों के प्रतिनिधित्व करने वार्ले दस व्यक्ति, जहार्ं कि यह परियोजनार् लार्गू है, जिनकी नियुक्ति केन्द्रीय सरकार नियोजकों के ऐसे संगठनों के परार्मर्श से करेगी जैसार् केन्द्रीय सरकार इस प्रयोजन से मार्न्यतार् प्रदार्न करे।

केन्द्रीय बोर्ड को निर्देश देने की शक्ति – 

धार्रार् 20 के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार समय-समय पर केन्द्रीय बोर्ड को ऐसार् निर्देश दे सकती है जो वह इस अधिनियम के उचित प्रबन्ध के लिए आवश्यक समझे। ऐसे निर्देश दिये जार्ने पर केन्द्रीय बोर्ड ऐसे निर्देशों के अनुसार्र कार्य करेगार्। केन्द्रीय बोर्ड अपने आय और व्यय के हिसार्ब को उचित एवं निर्धार्रित तरीके एवं प्रयोग में रखेगार् जो भार्रत के नियन्त्रक एवं महार्लेखार्परीक्षक द्वार्रार् अंकेक्षित किये जार्एंगे। वे आय-व्यय सम्बन्धी पुस्तकें, विलों, दस्तार्वेजों, कागजार्तों को मार्ंगने एवं प्रस्तुत करवार्ने और केन्द्रीय बोर्ड के कार्यार्लय क निरीक्षण भी कर सकेंगे। केन्द्रीय बोर्ड क कर्त्तव्य होगार् कि वह अपने कार्य-कलार्पों की वाषिक रिपोर्ट, प्रतिवेदन केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करे और सरकार उसकी एक प्रति अंकेक्षित खार्ते, और उसके सार्थ ही महार्लेखार् परीक्षक एवं नियन्त्रक की रिपोर्ट केन्द्रीय बोर्ड की टिप्पणी के सार्थ संसद के प्रत्येक सदन में प्रस्तुत करेगी।

स्टेट बोर्ड 

  1. केन्द्रीय परिषद के समार्न ही केन्द्रीय सरकार को सदस्यों की नियुक्ति एवं स्टेट बोर्ड क गठन निर्दिष्ट करने की शक्ति प्रदार्न की गर्इ है। धार्रार् 5 (ख) के अनुसार्र केन्द्रीय सरकार किसी भी रार्ज-सरकार से परार्मर्श लेने के पश्चार्त् शार्स्कीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् उस रार्ज्य के लिए स्टेट बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज क गठन ऐसे ढंग से कर सकती है जैसार् कि स्कीम में उपबन्धन कियार् जार्ये। 
  2. कोर्इ भी स्टेट-बोर्ड ऐसे अधिकारों क प्रयोग करेगार् और ऐसे कर्त्तव्यों की अनुपार्लनार् करेगार् जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार उसे सुपुर्द करे। 
  3. वे शर्ते और दशार्एं जिनके अधीन स्टेट-बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति होगी और उसकी मीटिंग क स्थार्न, समय और प्रक्रियार् वह होगी जो योजनार् में उपबन्धित की जार्ये। अन्य बार्त के विषय में भी स्कीम में प्रार्वधार्न बनार्यार् जार् सकतार् है। 

न्यार्सी बोर्ड क निगमित निकाय होनार् – 

धार्रार् 5(ग) में इस बार्त क स्पष्ट उल्लेख है कि धार्रार् 5(क) और 5(ख) के अन्तर्गत गठित बोर्ड, इसे गठित करने वार्ली अधिसूचनार् में निर्दिष्ट नार्म से एक निगमित निकास होगार्, जिसक शार्श्वत उत्तरार्धिकार और एक कामन सील होगी। उक्त नार्म से वह वार्द प्रस्तुत कर सकेगार् और उसके विरुद्ध वार्द संस्थित कियार् जार् सकेगार्। सेन्ट्रल बोर्ड तथार् स्टेट-बोर्ड की देख-रेख में निधि क प्रशार्सन होगार्। उसमें सहार्यतार् प्रदार्न करने के प्रयोजन से भिन्न-भिन्न अधिकारियों की नियुक्ति की जार्येगी, जिसक उल्लेख यहार्ं पर कर देनार् समीचीन होगार्।

कार्यकारिणी समिति – 

धार्रार् 5(क) क के अन्तर्गत कार्यकारिणी समिति के गठन सम्बन्धी उपबन्ध प्रस्तुत किए गए है : जो निम्न प्रकार से है –

केन्द्रीय सरकार शार्स्कीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् जार्री कर कार्यकारी समिति के गठन व उसके कार्य प्रार्रम्भ करने की तिथि क प्रकाशन करेगी। इसक गठन निम्न प्रकार से होगार् –

  1. एक अध्यक्ष जो केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् केन्द्रीय बोर्ड के सदस्यों में से नियुक्त कियार् जार्एगार्, 
  2. दो व्यक्ति जो केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् धार्रार् 5(1) के अधीन नियुक्त किये जार्एंगे, 
  3. नियोजकों क प्रतिनिधित्व करने वार्ले तीन व्यक्ति, 
  4. कर्मचार्रियों क प्रतिनिधित्व करने वार्ले तीन व्यक्ति, 
  5. भविष्य निधि आयुक्त पदेन। 

अधिकारियों की नियुक्ति – 

(1) अधिनियम की धार्रार् 5 (ख) में केन्द्रीय सरकार को कतिपय अधिकारियों की नियुक्ति सम्बन्धी शक्तियार्ं प्रदार्न की गर्इ है जो निम्नवत हैं- केन्द्रीय सरकार धार्रार् 5 (द) के अनुसार्र एक सेन्ट्रल-प्रार्विडेन्ट फण्ड कमिश्नर की नियुक्ति करेगी, जो केन्द्रीय बोर्ड क मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगार्। लेकिन आयुक्त उस बोर्ड के सार्मार्न्य नियन्त्रण और अधीक्षण के अधीन ही अपनार् कार्य करेगार्। स्मरणीय है कि बोर्ड क सर्वोच्च प्रशार्स्कीय-अधिकारी उसक अध्यक्ष होगार् और अध्यक्ष तथार् आयुक्त दोनों एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। पहले क मुख्य कार्य कार्यपार्लिकीय होतार् है, जब कि दूसरे क प्रशार्सनिक।

  1. केन्द्रीय सरकार भविष्य निधि आयुक्त को उसके कर्त्तव्यों के निर्वहन में सहार्यतार् देने के लिए एक वित्तीय सलार्हकार एवं मुख्य लेखार्धिकारी नियुक्त कर सकेगी। 
  2. केन्द्रीय सरकार उतने अतिरिक्त, आयुक्त, उपार्युक्त, निदेशक, रीजनल प्रार्विडेन्ट फण्ड कमिष्नर्स और ऐसे अन्य अधिकारियों जिन्हें वह योजनार् में निर्दिष्ट किए 192 अनुसार्र कुछ परिवार्र पेंशन योजनार् और बीमार् योजनार् के कुशल प्रशार्सन के लिए आवश्यक समझे, नियुक्त कर सकेगार्।
  3. कार्य क आबंटन कार्य-पद्धति को सरल बनार् देतार् है और कार्य आसार्नी से सम्पन्न कियार् जार् सकतार् है। इसी बार्त को ध्यार्न में रखकर सेन्ट्रल प्रार्विडेण्ट फण्ड कमिश्नर के सहार्यताथ अन्य सहार्यक अधिकारियों की नियुक्ति केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् की जार्ती है जो सेन्ट्रल प्रार्विडेन्ट फण्ड कमिश्नर के अधीन और अधीक्षण में कार्य करेंगे। 
  4. केन्द्रीय सरकार उक्त अधिकारियों की नियुक्ति करते समय केन्द्रीय लोक सेवार् आयोग से परार्मर्श लेकर ही कोर्इ घोषणार् करेगी। परन्तु निम्न नियुक्तियों के लिए ऐसार् परार्मर्श लेनार् आवश्यक नहीं होगार् – (अ) एक वर्ष से अनधिक कार्यवार्ही के लिए, यार् (ब) यदि नियुक्ति किये जार्ने के समय वह व्यक्ति – 
    1. इण्डियन ऐडमिनिस्टे्रटिव सर्विस क सदस्य है; यार् 
    2. केन्द्रीय सरकार की सेवार् में है, यार् रार्ज्य-सरकार के अधीन सेवार्रत है यार् सेन्ट्रल बोर्ड प्रथम यार् द्वितीय वर्ग क है। 
  5. सम्बन्धित रार्ज्य सरकार क अनुमोदन लेकर स्टेट-बोर्ड ऐसे स्टार्फ की नियुक्ति कर सकतार् है, जिन्हें वह आवश्यक समझे। 
  6. सेन्ट्रल प्रार्विडेन्ट फण्ड कमिश्नर, अतिरिक्त डिप्टी फण्ड कमिश्नर और रीजनल प्रार्विडेन्ट फण्ड कमिश्नर की नियुक्ति करने क ढंग, वेतन एवं भत्ते, अनुशार्सन तथार् अन्य सेवार् की शर्ते ऐसी होंगी, जैसार्कि केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे और इस प्रकार क वेतन भत्तार् फण्ड से प्रदेय होगार्। 
  7. केन्द्रीय बोर्ड के अन्य प्रार्धिकारियों एवं कर्मचार्रियों की नियुक्ति की पद्धति, वेतन तथार् भत्ते, अनुशार्सन तथार् सेवार् की अन्य शर्ते वैसी ही होगी, जैसार् कि सेन्ट्रल बोर्ड केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से निर्दिष्ट करें। 
  8. अतिरिक्त केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त, उपार्युक्त, प्रार्देशिक सहार्यक आयुक्त केन्द्रीय बोर्ड के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचार्रियों की भर्ती की पद्धति, उनके वेतन और भत्ते, अनुशार्सन तथार् सेवार् की अन्य शर्ते वे होगी जो केन्द्रीय बोर्ड द्वार्रार् उन नियमों और आदेशों को ध्यार्न में रखते हुए जो केन्द्रीय सरकार के अधिकारियों एवं कर्मचार्रियों के आधार्रित वेतनमार्न के लिए उपयोग में लिए जार्ते रहे हों। 
  9. रार्ज्य बोर्ड के अधिकारियों एवं कर्मचार्रियों की भर्ती की पद्धति, वेतन और भत्ते अनुशार्सन और सेवार् की अन्य शर्ते वे होंगी जो सम्बद्ध रार्ज्य सरकार के अनुमोदन में वह बोर्ड निर्दिष्ट करे।

केन्द्रीय बोर्ड यार् उसकी कार्यकारिणी समिति रार्ज्य बोर्ड की कार्यवार्ही कुछ आधार्रों पर अवैध नहीं मार्नी जार्एगी – केन्द्रीय बोर्ड यार् कार्यकारिणी समिति यार् रार्ज्य बोर्ड द्वार्रार् की गर्इ यार् कियार् गयार् कोर्इ कार्य यार् कार्यवार्ही रिक्ततार् की स्थिति के आधार्र पर एकमार्त्र आधार्र प्रश्नगत होतार् है यार् केन्द्रीय बोर्ड यार् कार्यकारिणी समिति यार् रार्ज्य बोर्ड के गठन में किसी त्रुटि के आधार्र पर प्रश्नार्स्पद नहीं बनार्यार् जार् सकतार्।

प्रत्यार्योजन – धार्रार् 5(ड.) में सेन्ट्रल बोर्ड, केन्द्रीय सरकार तथार् स्टेट बोर्ड सम्बन्धित रार्ज्य सरकार से पूर्वार्नुमोदन लेकर अपने अध्यक्ष को यार् किसी भी अधिकारी की ऐसी शर्तो और परिसीमार्ओं के अधीन, यदि कोर्इ हो, जैसार् कि वह यह निर्दिष्ट करे, अपने ऐसे अधिकारों यार् कर्त्तव्यों क प्रत्यार्योजन कर सकेगार्, जैसार् कि वह योजनार् के कुशल प्रशार्सन के लिए आवश्यक समझे।

कर्मचार्री भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण – 

ऐसे ट्रिब्यूनल की अधिकारितार् कार्य आदि के लिए जोड़ी गर्इ नर्इ धार्रार्एं 7 डी0 से 7 क्यू0 तक में प्रार्वधार्न कियार् गयार् है।

  1. केन्द्रीय सरकार आफीशियल गजट में विज्ञप्ति द्वार्रार् ऐसे एक यार् अनेक अधिकरण क गठन कर सकेगी जो इस अधिनियम द्वार्रार् अधिकरण को प्रदत्त अधिकारों क प्रयोग करेंगे तथार् कर्त्तव्यों क निर्वहन करेंगे। ऐसे अधिकरण की अधिकारितार् क्षेत्र, तथार् उसमें आने वार्ले प्रतिष्ठार्नों क उल्लेख नोटीफिकेशन में कियार् जार्एगार्। 
  2. अधिकरण में केन्द्र सरकार द्वार्रार् केवल एक व्यक्ति ही नियुक्त कियार् जार्यगार्। 
  3. कोर्इ भी व्यक्ति अधिकरण के पीठार्सीन अधिकारी पद के लिए अर्ह नहीं होगार्। अ) जब तक वह हाइकोर्ट क जज नहीं रह चुक है, यार् है यार् नियुक्ति के लिए अर्ह है। ब) यार् डिस्ट्रिक्ट जज नहीं रहार् है, यार् है यार् नियुक्ति के लिए अर्ह है। 

कार्यकाल – 

पद धार्रण की तिथि से 5 वर्ष यार् 62 वर्ष आयु जो भी पहले हो।

पद-त्यार्ग (7एफ0) – 

अधिकरण क पीठार्सीन अधिकारी लिखित हस्तार्क्षरित नोटिस केन्द्र सरकार को सम्बोधित करके पद-त्यार्ग कर सकतार् है। केन्द्र सरकार द्वार्रार् मुक्त न होने तक वह काम करतार् रहेगार्, कम से कम नोटिस प्रार्प्ति के तीन महीने तक यार् जब तक सम्यक रूप से नियुक्त उसक उत्तरार्धिकारी नहीं आ जार्तार् यार् उसक कार्यकाल समार्प्त नहीं हो जार्तार् जो भी पहले हो।

अधिकांश क स्टार्फ ;(7H) – 

केन्द्र सरकार अधिकरण को उसके काम में सहार्यतार् के लिए इतनी संख्यार् में अधिकारी और कर्मचार्री नियुक्त करेगी जैसार् वह उचित समझे। जो पीठार्सीन अधिकारी के सार्मार्न्य अधीक्षण में अपनार् कार्य सम्पन्न करेगें। उनकी सेवार् शर्ते, वेतन, भत्ते आदि वही होंगे जो निर्धार्रित हों। िट्व्यूनल में अपील (71) कोर्इ भी उपस्थित व्यक्ति निम्न आदेश यार् नोटीफिकेशन के विरुद्ध अपील कर सकतार् है –

  1. किसी प्रतिष्ठार्न में अधिनियम लार्गू करने की रार्जपत्र में जार्री अधिसूचनार्, 
  2. प्रथम अनुसूची में समार्विष्ट करने वार्ले मदों की अधिसूचनार्, 
  3. नियोजक से शोध्य रार्शि के निर्धार्रण क आदेश, 
  4. रिब्यू के लिए आदेश, इस्केप्ड एमार्उन्ट यार् निर्धार्रण सम्बन्धी आदेश, नियोजक से क्षतिपूर्ति वसूलने सम्बन्धित आदेश – अपील विहित शुल्क प्रार्रूप और समय के अनुरूप की जार्एगी। 

अधिकरण की प्रक्रियार्- 

अपने बैठने के स्थार्न, अपनी शक्तियों के प्रयोग और कर्त्तव्यों के निर्वार्ह से उद्भूत सभी मार्मलों को विनियमित करने क उसे अधिक होगार्।

विधि व्यवसार्यी की सहार्यतार् – 

अपीलकर्तार् अधिकरण के समक्ष स्वत: यार् अपने अधिवक्तार् के मार्ध्यम से उपसंजार्त हो सकतार् है, जो उसके च्वार्यस क होगार्। केन्द्र यार् 194 रार्ज्य सरकार अधिकरण के समक्ष सरकार की ओर से पैरवी करने के लिए अधिवक्तार् नियुक्त कर सकेगी।

अधिकरण क आदेश –

पक्षकारों को सुनवाइ क अवसर प्रदार्न करने के बार्द अधिकरण ऐसार् आदेश पार्रित कर सकेगार् जैसार् वह उचित समझे। वह उस आदेश को जिसके विरुद्ध अपील की गर्इ है, अनुमोदित, संशोधित यार् निरस्त कर सकतार् है यार् उचित निर्देश देकर पुन: विचार्रण के लिए वार्पस भेज सकतार् है और नये सार्क्ष्य लेने को कह सकतार् है। अपने द्वार्रार् पार्रित आदेश को अधिकरण पार्ंच वर्ष के भीतर रिकार्ड पर दृष्य गलती को सुधार्र यार् अपील के पक्षकार द्वार्रार् ध्यार्न आकृष्ट किये जार्ने पर संशोधन कर सकतार् है। यदि संशोधन नियोजक के दार्यित्व को यार् शोध्य रार्शि को बढ़ार्ने वार्लार् है तो नियोजक को सुनवाइ क अवसर अवश्य दियार् जार्एगार्। अधिकरण अपने आदेश की सत्य प्रतिलिपि अपील के पक्षकारों को भेजेगार्। अधिकरण द्वार्रार् अन्तिम रूप से निस्तार्रित आदेश को किसी न्यार्यार्लय में प्रश्नार्स्पद नहीं बनार्यार् जार् सकेगार्।

रिक्त स्थार्नों की पूर्ति- 

यदि किसी कारण से पीठार्सीन अधिकारी क स्थार्न रिक्त होतार् है तो उसे भरने के लिए सरकार अधिनियम के प्रार्वधार्न के अनुसार्र नियुक्ति करेगी और प्रक्रियार् वहार्ं से प्रार्रम्भ होगी जब स्थार्न भरार् गयार्। आदेश की अन्तिमतार्- पीठार्सीन अधिकारी की नियुक्ति तथार् अधिकरण क कोर्इ कार्य यार् प्रक्रियार् को उसके गठन में किसी दोष के आधार्र पर प्रश्नार्स्पद नही कियार् जार् सकेगार्। अपील करने पर शोध रार्शि क जमार् करनार्- अधिकरण अपील तभी ग्रहण करेगार् जब धार्रार् 7 क में निर्धार्रित शोध्य रार्शि क 75 प्रतिशत जमार् कर दियार् गयार् है। कारण बतार्ते हुए अभिकरण जमार् की जार्ने वार्ली को कम यार् मुक्त कर सकतार् है।

  1. कुछ आवेदनों क अधिकरण को सौंपार् जार्नार्- धार्रार् 19 क में केन्द्र सरकार के समक्ष लम्बित आवेदन अधिकरण के पार्स अन्तरित कर दिए जार्एगें मार्नो वे अपीलें हों।
  2. नियोजक द्वार्रार् देय ब्यार्ज – नियोजक धनरार्शि के शोध्य हो जार्ने तथार् वार्स्तविक भुगतार्न के बीच की अवधि के लिए 12 प्रतिशत यार् अधिक ब्यार्ज देगार्।
  3. अधिनियम के अन्तर्गत सरकार के अधिकार- धार्रार् 21 केन्द्रीय सरकार को नियम बनार्ने की शक्ति प्रदार्न करती है।

    1. सरकार क प्रथम अधिकार किसी भी स्थार्पन में अधिनियम को लार्गू करने की रार्जपत्र में अधिसूचनार् जार्री करके घोषित करनार् है। लेकिन उससे प्रभार्वित होने वार्ले नियोजकों यार् प्रतिष्ठार्नों को कम से कम दो मार्स पूर्व-सूचनार् देनार् आवश्यक है। 
    2. सरकार अधिनियम को वहार्ँ भी लार्गू करने क अधिकार रखती है जहार्ँ नियोजक और उसके अधीन बहुसंख्यक कर्मकार एक समझौतार् करके इसके लार्गू करने के लिए सरकार के पार्स आवेदन प्रस्तुत करते है, चार्हे भले भी वहार्ँ काम करने वार्लों की संख्यार् 20 से कम ही हो।
    3. सरकार को सार्मार्न्य प्रार्विडेण्ट फण्ड रखने वार्ले प्रतिष्ठार्नों में यह अधिनियम लार्गू करने क अधिकार है, जिसक प्रयोग वह शार्स्कीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् कर सकतार् है, जैसार् कि धार्रार् 3 में उपबन्धित है। 
    4. उपर्युक्त रीति से केन्द्रीय सरकार प्रथम अनुसूची में अन्य मार्मलों को समार्विश्ट करने क निर्देश दे सकती है, जिसकी बार्वत प्रार्विडेण्ट फण्ड स्कीम लार्गू की जार् सकेगी। अनुसूची में अन्य उद्योगों को इस अधिनियम की परिधि में लार्ने क एकमार्त्र अधिकार केन्द्रीय सरकार को ही प्रार्प्त है। 
    5. धार्रार् 5 के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार को कर्मकार भविष्य-अंशनिधि योजनार् विनिर्मित करने क अधिकार है। योजनार् की योजनार् उसी के आदेश और निर्देश के अनुसार्र ही कार्यार्न्वित की जार्येगी। 
    6. सेन्ट्रल बोर्ड एवं स्टेट बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के गठन क अधिकार भी केन्द्रीय सरकार को प्रार्प्त है। इतनार् ही नहीं, जितने भी आवश्यक संख्यार् में सदस्य होगें, उन सभी की नियुक्ति केन्द्रीय सरकार ही करेगी। उसके उच्च कार्यपार्लकीय अधिकारियेार्ं की नियुक्ति केन्द्रीय लोक सेवार् आयोग के परार्मर्श से की जार्येगी। रार्ज्य सरकार से मन्त्रणार् लेकर केन्द्रीय सरकार उस रार्ज्य के लिए स्टेट ऑफ ट्रस्टीज की स्थार्पनार् कर सकती है। 
    7. फण्ड के कार्य सफल संचार्लन के उद्देश्य से केन्द्रीय सरकार सेन्ट्रल फण्ड कमिश्नर, डिप्टी प्रार्विडेण्ट फण्ड कमिश्नर तथार् रीजनल प्रार्विडेण्ट फण्ड कमिश्नर की नियुक्ति तथार् उनके वेतन, मंहगाइ-भत्ते, सेवार्-दशार्ओं के सम्बन्ध में नियम बनार् सकती है। 
    8. केन्द्रीय सरकार कर्मकारों द्वार्रार् फण्ड में योगदार्न की दर में वृद्धि करने क अधिकार रखती है। 
    9. शार्स्कीय पर अधिसूचनार् द्वार्रार् केन्द्रीय सरकार योजनार् को रूपभेदित करने के अधिकार क प्रयोग कर सकती है। 
    10. नियोजक से शोध्य रकम को सरकार (केन्द्र यार् रार्ज्य) भू-रार्जस्व की भार्ंति वसूल कर सकती है। 
    11. निरीक्षकों की नियुक्ति करने क अधिकार समुचित सरकार को प्रार्प्त है। धार्रार् 13 में यह बार्त स्पष्ट है कि समुचित सरकार ऐसी संख्यार् में निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकती है, जैसार् कि वह उचित और आवश्यक समझे। 
    12. धार्रार् 14 (ब) में समुचित सरकार को जिससे दोनों, केन्द्रीय तथार् रार्ज्य सरकारें अभित्रेत है, नियोजक से क्षतिपूर्ति वसूल करने क अधिकार प्रार्प्त है। यह क्षतिपूर्ति बकायार् रकम की 25 प्रतिशत के बरार्बर हो सकती है। 
    13. अधिनियम के सभी यार् कुछ प्रार्वधार्नों से किसी उद्योग यार् प्रतिष्ठार्न वर्ग को धार्रार् 16(2) के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार ही छूट दे सकती है। 
    14. शक्ति के प्रत्यार्योजन क अधिकार- समुचित सरकार यह निर्देश दे सकती है कि अधिनियम यार् अन्य किसी स्कीम के अन्तर्गत जिस क्षेत्रार्धिकार यार् शक्ति क प्रयोग कियार् जार् सकतार् है वह ऐसे मार्मलों के विषय में और ऐसी दशार्ओं के अधीन, यदि कोर्इ हो जैसार् कि निर्देश में निर्दिष्ट कियार् जार्य, अन्य प्रार्धिकारियों द्वार्रार् भी प्रयुक्त की जार् सकती है। लेकिन इस विषय में दोनों सरकारों के प्रत्यार्योजन की शक्ति अपने-अपने क्षेत्रार्धिकार तक ही सीमित है, अर्थार्त् – यदि समुचित सरकार केन्द्रीय सरकार है, तो उस शक्ति के प्रयोग क अधिकार ऐसे अधिकारी यार् ऑफीसर को प्रदार्न कियार् जार्येगार्, जो उसके अधीन हो। 196 रार्ज्य-सरकारें भी अपने अधीन प्रार्धिकारियों को शक्ति क प्रत्यार्योजन करने में सर्वथार् सक्षम है। 
    15. कठिनार्इयार्ँ दूर करने की शक्ति (धार्रार् 22)- यदि इस अधिनियम के उपबन्धों के समुचित ढंग से संचार्लन करने में कोर्इ कठिनाइ विशेष रूप से जब कोर्इ शंक निम्नलिखित के बार्रे में उत्पन्न होती है कि- 
      1. क्यार् कोर्इ प्रतिष्ठार्न, जो कारखार्नार् है, प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट उद्योग में कार्यरत है, यार् 
      2. क्यार् कोर्इ प्रतिष्ठार्न-विशेष ऐसे प्रतिष्ठार्न-वर्ग के अन्तर्गत आतार् है, जहार्ँ कि अधिनियम की धार्रार् 1 की उपधार्रार् (3) के खण्ड (ब) के अनुसार्र अधिसूचनार् लार्गू होती है; यार् 
      3. किसी प्रतिष्ठार्न में नियोजित व्यक्ति की संख्यार्; यार् 
      4. किसी प्रतिष्ठार्न के स्थार्पित होने पर कितने सार्ल व्यतीत हो गये हैं; यार् 
      5. क्यार् नियोजक द्वार्रार् प्रार्प्त लार्भ की कुछ मार्त्रार् कम कर दी गर्इ है, जिस पार्ने क अधिकार थार्। 
    16. भविष्य-निधि एकाउण्ट मेन्टेन करने के लिए कुछ नियोजकों को अधिकृत करनार् (धार्रार् 19)- नर्इ धार्रार् 16 (भविष्य-निधि एकाउन्ट मेन्टेन करने के लिए कुछ नियोजकों को अधिकृत करनार्) सरकार को अधिकार प्रदार्न करती है कि यदि ऐसे प्रतिष्ठार्न के जिसमें एक सौ यार् अधिक कर्मकार नियोजित है नियोजक और बहुसंख्यक कर्मकार आवेदनपत्र देते हैं तो सरकार लिखित आदेश द्वार्रार् प्रतिष्ठार्न से सम्बन्धित भविष्य निधि एकाउन्ट मेन्टेन करने के लिए अधिकृत कर सकती है। उन शर्तो तथार् निबन्धनों के अधीन जो स्कीम में स्पेसीफार्इड हो। 
    17. भविष्य निधि के अधिक लार्भ अर्जित करने क सरकार क अधिकार है – कोष में से कुछ रार्शि को अन्य क्षेत्रों में लगार्कर कोष की वृद्धि करनार् सरकार के अधीन है। वर्तमार्न कोष की 80 हजार्र करोड़ रुपये के 15 प्रतिशत रार्शि को शेयर बार्जार्र और म्युचुअल फंडों में निवेश की अनुमति सरकार ने दे दी है। लेकिन इ0 पी0 एफ0 ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य इस पर एकमत नहीं है। 

अधिनियम के अन्तर्गत कर्मकारों को प्रार्प्त अधिकार एवं लार्भ- प्रार्विडेन्ट फण्ड ऐक्ट जो प्रार्रम्भ में केवल छ: उद्योगों सीमेन्ट, सिगरेट, विद्युत यार्न्त्रिक, सार्मार्न्य इन्जीनियरिंग के उत्पार्द, लोहे-इस्पार्त, कागज तथार् वस्त्र उद्योग में लार्गू होने क उद्देश्य ही कर्मकारों को निधि-सम्बन्धी लार्भ पहुंचार्नार् है। अब इसक व्यार्पक विस्तार्र हो गयार् है। इसके अतिरिक्त उसमें उल्लिखित अन्य लार्भों क भी उपभोग नियोजित कर सकतार् है –

  1. प्रार्विडेन्ट फन्ड से दोहरार् लार्भ – कर्मकार अपने अंशदार्न की जितनी रार्शि कटवार्तार् है, उतनी ही रार्शि उसके नार्म वार्ले फण्ड के खार्ते में नियोजक भी जमार् करेगार्। अत: उसक ठीक दोगुनार् उसे भविष्य में प्रार्प्त होगार्। इस प्रकार अधिनियम के अन्तर्गत कर्मकार को दोहरार् लार्भ प्रार्प्त है। 
  2. फण्ड सदैव सभी प्रकार की विधिक कार्यवार्हियों से अग्रप्रभार्वित रहेगार्- धार्रार् 10 में यह स्पष्ट कर दियार् गयार् है कि न्यार्यार्लय के आदेश के तहत कोर्इ धनरार्शि निम्न भार्ंति कुर्क नहीं की जार् सकती है- किसी सदस्य के नार्म भविष्य निधि में यार् किसी छूट-प्रार्प्त कर्मकार के नार्म भविष्य निधि में वह रार्शि जो जमार् है किसी प्रकार से समनुदिश्ट की जमार् रकम किसी प्रकार अन्तरित यार् भार्रित किये जार्ने के योग्य न होगी और उस सदस्य यार् छूट-प्रार्प्त कर्मकार द्वार्रार् उपगत ऋण यार् दार्यित्व के सम्बन्ध में किसी न्यार्यार्लय की डिग्री यार् आदेश के अधीन कुर्की के लिए बार्ध्य नहीं की जार् सकेगी। 
  3. अंशदार्न के भुगतार्न को अन्य ऋणों पर प्रार्थमिकतार्- धार्रार् 11 अंशदार्न के भुगतार्न को प्रार्थमिकतार् प्रदार्न करती है। उसके अनुसार्र जहार्ँ कोर्इ नियोजक दिवार्लियार् हो गयार् है यार् यदि कम्पनी है और उसके समार्पन क आदेश दियार् जार् चुक है, तो देय रकम जो – 
    1. किसी स्थार्पन के सम्बन्ध में, जिसमें योजनार् लार्गू होती है, किसी योगदार्न की बार्बत जो कि निधि में देय है, हर्जार्ने के निमित जिसक धार्रार् 15 (2) के अन्तर्गत जमार् रार्शि क हस्तार्न्तरण अपेक्षित है यार् ऐसे आभार्रों के सम्बन्ध में जो इस अधिनियम के किसी दूसरे उपबन्ध के अधीन उस नियोजक के द्वार्रार् देय है, नियोजक से प्रार्प्त है, यार् 
    2. छूट प्रार्प्त प्रतिष्ठार्न की बार्बत किसी भविष्य अंश-निधि के योगदार्न के निमित नियोजक के प्रार्विडेन्ट फण्ड के नियमों के अधीन धार्रार् 14 (ब) के अन्तर्गत निर्दिष्ट किसी शर्त के अधीन समुचित सरकार को प्रभार्र के रूप में नियोजक द्वार्रार् देय हो; ऐसी रकमें अन्य ऋणों की अपेक्षार् भुगतार्न में प्रार्थमिकतार् रखेंगी, जहार्ँ तक दिवार्लियार् के सार्मार्नों के वितरण यार् कम्पनी के समार्पन के समय उसकी आस्तियार्ँ, जैसार् भी हो, के वितरण क सम्बन्ध होतार् है। 
  4. नियोजक द्वार्रार् वेतन की कटौती न किये जार्ने क लार्भ – धार्रार् 12 के अनुसार्र किसी भी स्थार्पन यार् उद्योग क कोर्इ भी नियोजक, जहार्ँ कि योजनार् लार्गू होती है, केवल फण्ड में अंशदार्न देने यार् इस अधिनियम यार् स्कीम के अन्तर्गत किसी प्रभार्र संदार्य करने के अपने दार्यित्व के कारण ही योजनार् में अपने हिस्से के दिये जार्ने वार्ले अंशदार्न की रार्शि प्रत्यक्षत: यार् परोक्षत: नही काटेगार्। 
  5. नियोजक द्वार्रार् की गर्इ त्रुटियों के विरुद्ध लार्भ – नियोजक की त्रुटियों और अपरार्धों की ओर कर्मकार सम्बन्धित निरीक्षक क ध्यार्न आकृष्ट कर सकते हैं और तब वह उचित कार्यवार्ही करेगार्। 
  6. अपने एकाउन्ट के हस्तार्न्तरण क भी कर्मकारों को लार्भ – धार्रार् 17 (अ) के अनुसार्र नियोजक क यह परम कर्तव्य होतार् है कि वह उस कर्मकार के अर्जित फण्ड की रार्शि को वहार्ं हस्तार्न्तरित कर दें, जहार्ँ वह पूर्व नियोजक को छोड़कर दूसरे स्थार्न पर नियोजन पार् गयार् है। कर्मकार इस अधिनियम के लार्भ से केवल स्थार्न यार् उद्योग यार् स्थार्पन-परिवर्तन के आधार्र पर वंचित नहीं कियार् जार् सकतार्। फण्ड क ट्रार्न्सफर केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् निर्दिष्ट अवधि में ही कर दियार् जार्येगार्। निम्न शर्तो क होनार् आवश्यक है कि – 
    1. कर्मकार एक नियोजन क परित्यार्ग करतार् है। 
    2. एक नियोजन को छोड़कर दूसरे स्थार्न पर काम पार् गयार् है।
    3. परिव्यक्त नियोजन और पुनपर््रार्प्त नियोजन दोनों स्थार्नों पर फण्ड-स्कीम लार्गू है। 
    4. कर्मकार क संचित दण्ड पूर्व नियोजक के पार्स रह गयार् है और भुगतार्न नहीं हुआ है। 
    5. कर्मकार अपने फण्ड के अन्तरण की इच्छार् प्रकट करतार् है। 
    6. दूसरे नियोजन क भविष्य अंश निधि सम्बन्धी नियम ट्रार्न्सफर की अनुज्ञार् देते हों। 
    7. दूसरे नये नियोजक के स्थार्न पर भी उनके नार्म में फण्ड क खार्तार् है। 
    8. ट्रार्न्सफर केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् निर्दिष्ट समय में ही कियार् जार्तार् है। 
  7. फेमिली-पेन्षन स्कीम क लार्भ – इसके अतिरिक्त सन् 1971 से फेमिली के पेन्षन फण्ड क लार्भ भी प्रत्येक कर्मकार को देने की योजनार् बनार्यी गयी है, जो 1 माच, 1971 से लार्गू हुर्इ। 
  8. डिपार्जिट लिंक्ड इन्शोरेन्स स्कीम क लार्भ- 1 अगस्त, 1976 से लार्गू इस योजनार् का, जिसमें कुल 22 पैरार् हैं, भी कर्मकार लार्भ उठार् सकते हैं, जिसे बनार्ने क अधिकार केन्द्रीय सरकार को लेवर प्रार्विडेन्ट फण्ड लार्ज (अमेण्डमेन्ट) ऐक्ट, 1976 के तहत प्रार्प्त हुआ। इसी क लार्भ उठार्कर सरकार ने इस योजनार् को धार्रार् 6 (ग) जोड़कर क्रियार्न्वित कियार् और यह योजनार् वहार्ँ लार्गू की गर्इ, जिन प्रतिष्ठार्नों में मुख्य अधिनियम लार्गू होतार् है। इसके लिए एक डिपार्जिट लिंक्ड इन्ष्योरेन्स फण्ड की स्थार्पनार् की गर्इ। उसमें नियोजिती की ओर से नियोजक को अंशदार्न करनार् होगार् और सरकार नियोजक द्वार्रार् देय अंशदार्न की रार्शि स्वयं जमार् करेगी। 
  9. भविष्य अंश-निधि से कर्मकार ऋण ले सकतार् है और आसार्न किस्तों में उसको भुगतार्न करतार् रहेगार्। इस निधि के खार्ते से धन निकालने की प्रणार्ली के उदार्रीकरण क प्रस्तार्व विचार्रार्धीन है।
  10. भविष्य निधि को आयकर के प्रयोजन हेतु मार्न्यतार् – अधिनियम की धार्रार् 9 के अनुसार्र भार्रतीय आयकर अधिनियम, 1922 के प्रयोजनों के लिए यह समझार् जार्येगार् कि निधि उस अधिनियम के अध्यार्य 9-क के प्रयोजन हेतु मार्न्यतार् प्रार्प्त भविष्य निधि है किन्तु उक्त अध्यार्य की कोर्इ भी बार्त इस प्रकार प्रभार्वशील नहीं होगी कि वह उस योजनार् के जिसके अधीन विधि स्थार्पित की गर्इ है किसी ऐसे उपबन्ध को जो इस अध्यार्य के यार् उसके अधीन बनार्ए गए नियमों के उपबन्धों में से किसी के विरुद्ध हो, प्रभार्वहीन बनार् दे। 

स्थार्पन के अन्तरण की स्थिति में दार्यित्व – जहार्ँ स्थार्पन के सम्बन्ध में कोर्इ नियोजक विक्रय, दार्न यार् अनुज्ञार्पन द्वार्रार् यार् किसी भी अन्य रीति से उस स्थार्पन क पूर्णत: यार् अंशत: अन्तरण कर देतार् है, वहार्ँ नियोजक और वह व्यक्ति, जिसे इस प्रकार स्थार्पन अन्तरित कियार् गयार् है, ऐसे अन्तरण की तिथि तक नियोजक द्वार्रार् इस अधिनियम योजनार्, यार् परिवार्र पेंशन यार् बीमार् योजनार् के किसी उपबन्ध के अधीन देय अंशदार्न और अन्य रार्शियों क भुगतार्न करने के लिए सम्मिलित रूप से और पृथकत: उत्तरदार्यी होंगे परन्तु अन्तरिती क दार्यित्व उसके द्वार्रार् ऐसे अन्तरण से अभिप्रार्प्त प्रार्प्तियों के मूल्य तक ही सीमित होगी।

निरीक्षक 

निरीक्षकों की नियुक्ति – 

समुचित सरकार द्वार्रार् निरीक्षकों की नियुक्ति की घोषणार् शार्स्कीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् की जार्एगी। उनकी संख्यार् कितनी होगी, यह संरकार के विवेकाधीन है। ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें वह उचित समझती है, इस अधिनियम, योजनार् परिवार्र पेंशन यार् बीमार् योजनार् के प्रयोजन के लिए निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी और उनकी अधिकारितार् सुनिश्चित कर सकेगी। कार्य की अधिकतार् को देखते हुए सरकार आवश्यकतार्नुसार्र यथेष्ट संख्यार् में निरीक्षकों की नियुक्ति और उसके सार्थ ही उनके क्षेत्रार्धिकार को भी विनिर्दिष्ट करेगी, जिससे कि तद्विषयक कोर्इ पार्रस्परिक मतभेद न उत्पन्न हो और निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रार्धिकार से भली-भार्ंति परिचित रहें और अपनार् कार्य संभार्ल लें। संहितार् द्वार्रार् विहित विधि के अनुसार्र कुछ औपचार्रिकतार्ओं को निरीक्षक पूरार् करेगार् जैसे –

  1. परिसर में जार्ने के पहले अधिकारियों तथार् तलार्शी के सार्क्षियों की तलार्शी। यह एक परम्परार् है तार्कि यह सन्देह न रहे कि तलार्शी लेने वार्लार् दल ऐसी कोर्इ चीज सार्ल ले जार्कर चुपके से निकाल कर दिखार् सके कि यह चीज परिसर में प्रार्प्त हुर्इ है। 
  2. तलार्शी किये जार्ने वार्ले परिसर में स्थार्नीय न्यूनतम दो संप्रार्न्त व्यक्तियों को बुलार्नार् और उन्हें तलार्शी क सार्थी बनार्नार्। 
  3. तैयार्र की जार्ने वार्ली सूची पर उनक हस्तार्क्षर करनार्। 
  4. तलार्शी लिए जार्ने वार्ले स्थार्न के स्वार्मी यार् उसके द्वार्रार् अधिकृत व्यक्ति को तलार्शी के समय सार्थ में रहने देनार्। 
  5. तैयार्र की गर्इ सूची की हस्तार्क्षरित प्रतिलिपि परिसर-स्वार्मी को देनार्। यदि तलार्शी ली जार्ने वार्ली महिलार् है, तो उसकी तलार्शी दण्ड प्रक्रियार् संहितार् की धार्रार् 12 के अनुसार्र की जार्नी चार्हिये। 

यदि कोर्इ व्यक्ति इस अधिनियम योजनार् के अधीन नियुक्त किए गए किसी निरीक्षक को, उसके कर्त्तव्यों के निर्वहन में बार्धार् पहुंचार्तार् है, यार् निरीक्षक द्वार्रार् निरीक्षण के लिए कोर्इ अभिलेख प्रस्तुत करने में असफल रहतार् है तो उसे 6 मार्स तक क कारार्वार्स यार् 1000 रुपये तक क जुर्मार्नार् यार् दोनों से दण्डित कियार् जार् सकेगार्।

निरीक्षक : लोक-सेवक – 

धार्रार् 13 (3) से यह स्पष्ट है कि प्रत्येक निरीक्षक भार्रतीय दण्ड संहितार् की धार्रार् 21 के अर्थ में लोक-सेवक समझार् जार्यगार्। अनार्वश्यक ढंग से उसकी कार्यवार्ही में व्यवधार्न डार्लने वार्लार् व्यक्ति दण्ड क भार्गी होगार्। इसके अतिरिक्त धार्रार् 18 में उन्हें कुछ अन्य प्रकार क भी विशेषार्धिकार प्रार्प्त है। उससे अधिनियम यार् परियोजनार् के अन्तर्गत निरीक्षक यार् अन्य व्यक्ति द्वार्रार् सद्भार्व में किये गये किसी भी कार्य के लिए कोर्इ कार्यवार्ही नही की जार्येगी। अपनी पदीय प्रार्स्थिति में किये गये कार्यो के लिए निरीक्षक दार्यित्वार्धीन नहीं होगार्।

ठेक श्रम विनियमन अधिनियम 1970 

ठेकाश्रम के विनियमन हेतु ठेकाश्रम विनियमन और उत्सार्दन अधिनियम, 1970 में पार्रित कियार् गयार् जो 10 फरवरी, 1970 से प्रभार्वी हुआ। इसक उद्देश्य ठेके पर काम करने वार्ले श्रमिकों को शोषण से बचार्नार् है। श्रमिकों के स्वार्स्थ्य और कल्यार्ण हेतु 200 समुचित व्यवस्थार् सुनिश्चित करार्नार् अधिनियम क उद्देश्य है। बीस यार् बीस से अधिक कर्मकार जिस प्रतिष्ठार्न में कार्यरत है। यार् थे उन पर यह अधिनियम लार्गू होगार्। लेकिन समुचित सरकार चार्हे तो इसे कम कार्यरत कर्मकारों वार्ले प्रतिष्ठार्न में भी शार्स्कीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् लार्गू कर सकती है। आन्तरार्यिक यार् आकस्मिक प्रकृति के स्थार्पनों पर यह लार्गू नहीं होगार्। इस सम्बन्ध में सरकार क निश्चय अन्तिम होगार्। यह अधिनियम सावजनिक निजी नियोजकों तथार् सरकार पर लार्गू होतार् है। इसे असंवैधार्निक नहीं मार्नार् गयार् यद्यपि कि यह ठेकेदार्रों पर कतिपय निर्बन्धन और दार्यित्व अधिरोपित करतार् है। स्थार्पन में कार्य/परिणार्म सम्पन्न करार्ने के लिए श्रमिकों को उपलब्ध करार्ने वार्लार् ठेकेदार्र (उपठेकेदार्र समेत) तथार् उनके मार्ध्यम से काम करने के लिए उपलब्ध व्यक्ति ठेक श्रमिक कहलार्तार् है उसे भार्ड़े पर रखार् जार्तार् है। स्थार्पन क यहार्ँ व्यार्पक अर्थ है जहार्ँ अभिनिर्मार्ण प्रक्रियार् सम्पन्न की जार्ती है। प्रधार्न नियोजक धार्रार् 1 उपधार्रार् (छ) में परिभार्षित है, नार्म निर्दिष्ट इससे अभिप्रेत है। केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय सलार्हकार बोर्ड (ठेकाश्रम) गठित करती है। इसमें एक अध्यक्ष, मुख्य श्रम आयुक्त, केन्द्रीय सरकार, रेल खार्न आदि के कम से कम 11 यार् अधिकतम 17 प्रतिनिधि होंगे। कर्मकारों के हितों क प्रतिनिधित्व करने वार्ले सदस्यों की संख्यार् प्रधार्न नियोजकों के प्रतिनिधियों से कम नहीं होगी। इसकी सलार्ह मार्नने के लिए सरकार बार्ध्य नहीं होगी।

ओंकार प्रसार्द वर्मार् बनार्म मध्य प्रदेश रार्ज्य के निर्णय मं उच्चतम न्यार्यार्लय ने स्पष्ट कियार् है कि इस प्रश्न पर विचार्र करने क कि संविदार् श्रम उत्सार्दित कर दियार् अथवार् नहीं एकान्तिक अधिकार समुचित रार्ज्य सरकार के क्षेत्र में आतार् है, वह धार्रार् 10 में उल्लिखित प्रक्रियार् इसके लिए अपनार् सकेगी। ऐसे प्रश्न क निर्धार्रण न तो श्रम न्यार्यार्लय, न ही रिट कोर्ट ही कर सकेगी। लेकिन जहार्ँ यह बार्त उठाइ गर्इ है कि ठेकेदार्र और प्रबन्ध के द्वार्रार् (बीच) की गर्इ संविदार् दिखार्वटी है तो स्टील एथार्रिटी ऑफ इण्डियार् लि0, के आलोके में औद्योगिक एडजुडीकेटर कथित विवार्द को निर्धार्रित करने क हकदार्र होगार्। ठेकाश्रम समार्प्त करने क सरकार क प्रशार्सनिक अधिकार है। लेकिन उत्सार्दन हेतु खूब सोच-समझकर नोटीफिकेषन जार्री करनार् चार्हिए। उल्लेखनीय है कि इस अधिनियम से सम्बन्धित किसी मार्मले पर एकान्तिक क्षमार्धिकारितार् समुचित सरकार की होती है। न तो श्रम न्यार्यार्लय ने ही रिट कोर्ट कथित उत्सार्दन के प्रश्न को निर्धार्रित/निण्र्ार्ीत कर सकती है।

रार्ज्य सरकार रार्ज्य स्तर पर सलार्ह देने के लिए रार्ज्य सलार्हकार (ठेकाश्रम) बोर्ड गठित करेगी इन दोनों के सदस्यों की पदार्वधि, सेवार् की अन्य शर्ते, अपनाइ जार्ने वार्ली प्रक्रियार् तथार् रिक्त स्थार्नों के भरने की रीति ऐसी होगी जो निर्धार्रित की जार्ये। वे बोर्ड समितियार्ं गठित करने की शक्ति रखते हैं। धार्रार् 6 के अनुसार्र सरकार अपने रार्जपत्रित अधिकारों को ठेकाश्रम पर नियोजित करने वार्ले स्थार्पनों के पूंजीकरण करने के लिए नियुक्त करेगी और उनके क्षेत्रार्धिकार की सीमार् भी निश्चित कर देगी। निर्धार्रित अवधि में आवेदन देने पर तथार् सार्री शर्तो के पूरार् रहने पर पंजीकरणकर्तार् पंजीकरण करके प्रमार्णपत्र जार्री करेगार् जो लार्इसेन्सिंग क काम करेगार्। पर्यार्प्त कारणों से सन्तुष्ट होने पर विलम्ब से प्रस्तुत किये गये आवेदन पर अधिकारी विचार्र कर सकेगार्। अनुचित ढंग से प्रार्प्त किये गये पंजीकरण क प्रधार्न नियोजक सुनवाइ क अवसर प्रदार्न करके तथार् सरकार के पूर्व अनुमोदन से प्रतिसंहरण भी कियार् जार् सकेगार्। धार्रार् 9 के अनुसार्र पंजीकरण रह होने पर ठेक श्रमिकों को नियोजित नहीं कियार् जार्येगार्। धार्रार् 10 के अन्तर्गत समुचित सरकार ठेक श्रमिकों के नियोजन पर प्रतिशेध लगार् सकेगी।

समुचित सरकार धार्रार् 11 के अन्तर्गत अनुज्ञार्पन अधिकारियों की यथेष्ठ संख्यार् में उनकी सीमार्ओं को निर्धार्रित करते हुए नियुक्ति करेगी। बिनार् लार्इसेन्स लिए ठेकाश्रम के मार्ध्यम से कार्य नहीं करार्यार् जार्येगार्। सेवार् शर्तो जेसे काम के घण्टों आदि, तथार् निर्धार्रित सिक्योरिटी रार्शि जमार् करने के बार्रे में सरकार नियम बनार्येगी। उसक प्रधार्न नियोजक को अनुपार्लन करनार् होगार्। अनुज्ञार्पन अधिकारी समय पर अनुज्ञार्पन् की धार्रार् 13 के अधीन निर्धार्रित फीस देने पर नवीनीकरण कर सकेगार्। अनुज्ञप्ति के दुव्र्यपदेशन, महत्वपूर्ण तथ्यों के गोपन, नियमोल्लंघन से प्रार्प्त किये जार्ने की दशार् में उसक प्रतिसंहरण, निलम्बन तथार् संशोधन भी कियार् जार् सकेगार्। धार्रार् 15 के अधीन किसी आदेश से व्यथित हुआ व्यक्ति 30 दिन के भीतर सरकार द्वार्रार् नार्म निर्देशित व्यक्ति अपील अधिकारी के यहार्ं अपील कर सकेगार्।

धार्रार् 16 में सरकार ठेक श्रमिकों के कल्यार्ण तथार् स्वार्स्थ्य के लिए जलपार्न गृहों की व्यार्ख्यार् के लिए नियोजकों को आदेश देगी। खार्द्य पदाथो क विवरण तथार् मूल्य आदि के बार्रे में दिशार् निर्देश देगी। धार्रार् 18 के अन्तर्गत विश्रार्म कक्षों तथार् रार्त में रुकने के लिए स्वच्छ आरार्मदेह प्रकाशयुक्त आनुकल्पिक आवार्सों की व्यवस्थार् करने क नियोजक क दार्यित्व होगार्। इसके अलार्वार् स्वार्स्थ्यप्रद पेय जल की आपूर्ति, पर्यार्प्त संख्यार् में शौचार्लय, मूत्रार्लय, धुलाइ की सुविधार्एं उपलब्ध करार्नार् होगार्। इसके अलार्वार् स्वार्स्थ्यप्रद पेय जल की आपूर्ति, पर्यार्प्त संख्यार् में शौचार्लय, मूत्रार्लय, धुलाइ की सुविधार्एं उपलब्ध करार्नार् होगार्। धार्रार् 20 के अनुसार्र फस्र्ट एड फैसिलिटीज की व्यवस्थार् होगी। इन सुविधार्ओं के लिए प्रधार्न नियोजक उपगत व्ययों क प्रधार्न नियोजक ठेकेदार्र से वसूल कर सकतार् है। धार्रार् 21 के अनुसार्र मजदूरी क भुगतार्न ठेकेदार्रों पर होतार्। इसमें ओवर टार्इम वेज भी सम्मिलित होगी। कम भुगतार्न करने पर प्रधार्न नियोजक शेष रार्शि क भुगतार्न करके ठेकेदार्र से वसूल करने क हकदार्र होगार्। इण्डियन एयर लार्इन्स बनार्म केन्द्रीय सरकार श्रम न्यार्यार्लय, के निर्णयार्नुसार्र ठेक श्रमिक मजदूरी न पार्ने की दशार् में मुख्य नियोजक से मजदूरी मार्ंग सकते हैं।

धार्रार् 22 में दण्ड की व्यवस्थार् की गर्इ है। जो कोर्इ निरीक्षक के कार्य में बार्धार् पहुंचार्येगार् यार् निरीक्षण हेतु रजिस्टर देने से इन्कार करेगार् वह तीन मार्ह के कारार्वार्स यार् पार्ंच सौ रुपये जुर्मार्नार् यार् दोनों से दण्डित कियार् जार् सकेगार्। निर्बन्धनों, अनुज्ञप्ति की शर्तो क उल्लंघन करने वार्लार् नियोजक तीन मार्ह के कारार्वार्स तथार् एक हजार्र रुपये जुर्मार्नार् यार् दोनों से दण्डित होगार्। प्रथम उल्लंघन के दोषसिद्ध होने पर उसके जार्री रहने पर एक सौ रुपये प्रतिदिन के लिए धार्रार् 23 के अन्तर्गत दण्ड दियार् जार् सकेगार्। उल्लंघन सिद्ध करने क भार्र शिकायतकर्तार् पर होगार्। कम्पनी के मार्मले में धार्रार् 25 के अन्तर्गत कम्पनी क भार्रसार्धक तथार् उसके प्रति उत्तरदार्यी व्यक्ति दण्डित कियार् जार् सकेगार्। इसमें निदेशक, प्रबन्धक, प्रबन्ध अभिकर्तार्, आदि आते हैं। प्रेसीडेन्सी मजिस्टे्रट यार् फस्र्ट क्लार्स मजिस्टे्रट से अवर कोर्इ भी न्यार्यार्लय दण्डनीय अपरार्धों क संज्ञार्न यार् विचार्रण नहीं करेगार्। अपरार्ध किये जार्ने की तिथि से निरीक्षक द्वार्रार् यार् उसकी लिखित पूर्व स्वीकृति प्रार्प्त करने वार्ले व्यक्ति द्वार्रार् परिवार्द 90 दिन के भीतर दार्खिल किये जार्ने पर विचार्रण कियार् जार्येगार् अन्यथार् नहीं। निरीक्षकों की जार्ंच आदि करने, लोक 202 अधिकारी की सहार्यतार् लेने, किसी व्यक्ति से परीक्षार् करने, कार्य बार्ंटने वार्ले क नार्म, पतार् जार्नने रजिस्टर आदि को जब्त करने यार् उनकी प्रतिलिपियार्ं लेने क अधिकार होगार्।

रजिस्टरों यार् अन्य अभिलेखों को बनार्ये रखने क दार्यित्व धार्रार् 29 के अन्तर्गत प्रधार्न नियोजक क होगार् जिनमें मजदूरी भुगतार्न आदि की प्रविष्टियार्ं और अन्य वार्ंछित जार्नकारियार्ं आदि दी गर्इ होती है। धार्रार् 30 अधिनियम से असंगत विधियों और करार्रों के प्रभार्व पर प्रकाश डार्लती है। अन्य विधियों में प्रदार्न की गर्इ सुविधार्ओं से इस अधिनियम के अन्तर्गत दी जार्ने वार्ली सुविधार्एं किसी भी दशार् में कम नहीं होंगी। धार्रार् 31 समुचित सरकार को अधिनियम के कुछ निर्बन्धनों से कुछ समय किसी स्थार्पनों यार् ठेकेदार्रों को छूट देने की शक्ति प्रदार्न करती है। धार्रार् 32 पंजीकरणकर्तार् अधिकारी, अनुज्ञार्पन अधिकारी यार् केन्द्रीय यार् रार्ज्य बोर्ड के सदस्य यार् सेवक द्वार्रार् अधिनियम के नियम के अनुसरण में सद्भार्वपूर्वक किये गये कार्य के लिए अभियोजन यार् विधिक कार्यवार्ही नहीं हो जार्येगी। यह धार्रार् उन्हें संरक्षण प्रदार्न करती है। धार्रार् 33 केन्द्र सरकार को रार्ज्य सरकार को निर्देश देने की तथार् धार्रार् 34 अधिनियम के उपबन्धों को प्रभार्वी बनार्ने में आने वार्ली कठिनाइयों को दूर करने की तथार् धार्रार् 34 नियम बनार्ने की शक्ति प्रदार्न करती है।

दैनिक मजदूरी पर काम करने वार्ले- ‘समार्न कार्य के लिए समार्न वेतन क सिद्धार्न्त’ दैनिक मजदूरी पर काम करने वार्ले श्रमिकों पर भी लार्गू होतार् है चार्हे उनकी नियुक्ति स्थार्यी स्कीम में हो यार् अस्थार्यी स्कीम में, मजदूरी भुगतार्न में अन्तर अनुच्छेद 14 के अन्तर्गत विभेदकारी मार्नार् जार्येगार्। एक लम्बी अवधि के बार्द ऐसे श्रमिकों को स्थार्यी मार्नार् जार्नार् चार्हिए।

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