एनजीओ (NGO) के सहार्यताथ कार्यक्रम

इस में हम आपको उन कानूनों के विषय में बतार्येगें जिनक की मुख्य रूप से संस्थार् वार्ले ज्ञार्न रखते है एवं जिनके मार्ध्यम से वे जनहित सुनिश्चित करते है। यहॉ विभिन्न प्रकार के अधिकारों , कानूनों एवं अधिनियमों की विस्तृत चर्चार् की गयी है जिसके अध्ययन के पश्चार्त आप यह जार्न सकेगें कि गैर सरकारी संगठन किस प्रकार से कार्य कर इन कानूनों क सहार्रार् लेकर जनहित की रक्षार् करते है तथार् वे कौन से ऐसे कानून है जो मुख्य रूप से जनहित सुनिश्चित करने में सहार्यतार् प्रदार्न करते हैं। 1

बार्ल कल्यार्ण 

भार्रत के संविधार्न में बार्ल कल्यार्ण से सम्बंधित विभिन्न संवैधार्निक प्रार्वधार्न इस प्रकार है:-

  1. अनुच्छेद 24 : चौदह वर्ष से कम आयु क कोर्इ भी बार्लक किसी फैक्टरी यार् खार्न यार् खतरनार्क रोजगार्र में काम करने के लिए नियुक्त नहीं कियार् जार्एगार्।
  2. अनुच्छेद 39 (e): कर्मचार्रियों, पुरूर्षो और महिलार्ओं, के स्वार्स्थय और शक्ति, और बच्चों की नार्जुक उम्र क दुरूपयोग नहीं कियार् जार्एगार् और नार्गरिकों क उनकी आर्थिक मजबूरी के कारण अनुचित लार्भ उठार्कर, उनकी आयु और शक्ति के लिए उनुपयुक्त उप-व्यवसार्यों में लगार्ने में जबरदस्ती नहीं की जार्एगी।
  3. अनुच्छेद39 (f): बच्चों को स्वस्थ ढंग से, और स्वतंत्रतार् और सम्मार्न के वार्तार्वरण में विकास करने के अवसर और सुविधार्एं दी जार्एंगी, और सुविधार्एं दी जार्एंगी, और उनके बचपन और युवार्वस्थार् को शोषण से तथार् नैतिक और भौतिक उपेक्षार् से बचार्यार् जार्एगार्।
  4. अनुच्छेद 41: शार्सन अपनी आर्थिक सार्मथ्र्य और विकास की सीमार्ओं के अन्तर्गत, काम करने के अधिकार, शिक्षार् पार्ने के अधिकार, और बेरोजगार्री, वृद्धार्वस्थार्, बीमार्री और अपंगतार् और जरूरतमंदों की आवश्यकतार्ओं के अन्य मार्मलो में सावजनिक सहार्यतार् उपलब्ध करार्ने के प्रभार्वकारी इंतजार्म करेगार्। 
  5. अनुच्छेद 45: शार्सन संविधार्न के लार्गू होने से दस वर्ष की अवधि के भीतर सभी बच्चों को उनके चौदह वर्ष की आयु पूर्ण होने तक, नि:शुल्क और अनिवाय शिक्षार् प्रदार्न करने क प्रयत्न करेगार्।
  6. अनुच्छेद 47: शार्सन अपने लोगों के पोशण के स्तर को बढ़ार्ने और जीवन स्तर को ऊँचार् उठार्ने और जनतार् के स्वार्स्थ्य में सुधार्र लार्ने को उसके प्रार्थमिक कत्र्तव्य समझेगार् और विशेष रूपसे शार्सन मदिरार्पार्न और नशीली दवाइयों के प्रयोग, सिवार्ये औशधी के रूप में निषेध की पूरी कोशिश करेगार्। शार्सन की यह जिम्मेदार्री है कि वह यह सुनिश्चित करें कि बच्चों क दुरूपयोग न कियार् जार्ए और नार्गरिकों काम करने के लिए मजबूर न कियार् जार्ए। 

बार्ल मजदूरी (निषेध और विनियम) अधिनियम, 1986 

यह अधिनियम बार्ल मजदूरी पर रोक लगार्ने के लिए लार्गू कियार् गयार् थार्। यह कानून यह प्रार्वधार्न करतार् है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को फैक्टरियों में खतनार्क काम करने से दूर रखार् जार्ए। इसमें 18 उद्योगों की एक सूची तैयार्र की गर्इ हे जो खतरनार्क है। क्योंकि वे स्पष्ट रूप् से बच्चों के लिए हार्निकारक है। इनमें बीड़ी बनार्नार्, कालीन बुननार्, सीमेंट उत्पार्दन, मार्चिस, विस्फोटक पदाथ और पटार्खे आदि शार्मिल हैं। इस अधिनियम के अनुसार्र अन्य स्थार्पनार्ओं में काम करने वार्ले बच्चों के लिए काम क समय (घंटे), काम की अवधि सार्प्तार्हिक छुट्टियों आदि को भी नियंत्रित कियार् गयार् है। एन0 जी0 ओ0 के कार्यकर्तार्ओं को अवश्य ही सरकारी कर्मचार्रियों के सार्थ सहयोग करनार् चार्हिए, और बच्चों कोखतरनार्क काम की परिस्थितियों से हटार्ने के लिए सृजनार्त्मक तरीके ढ़ूँढने चार्हिए। ग्रार्स रूट स्तर पर लोगों को बार्ल मजदूरी को समार्प्त करने और बार्ल मजदूरों के पुनर्वार्स के लिए स्वयं काम करने के लिए प्रोत्सार्हित करनार् चार्हिए।

हिन्दू दत्तक और संरक्षण अधिनियम, 1956 

इस अधिनियम के प्रार्वधार्नों (धार्रार् 20) के तहत, एक हिन्दू व्यक्ति (पुरूष/स्त्री) अपने जीवन काल में अपने वैध/अवैध बच्चों के भरण-पोशण के प्रति बार्ध्य है। एक वैध/अवैधय बच्चार् जब तक नार्बार्लिग (18 वर्ष से कम आयु का) होतार् है तब तक अपने पितार् यार् मार्तार् से भरण-पोशण (संरक्षण) की मार्ंग कर सकतार् है। ‘भरण-पोशण’ (संरक्षण) की परिभार्षार् में खार्द्य सार्मग्री, वस्त्र रिहार्यष, शिक्षार् और चिकित्सार् देखभार्ल और उपचार्र शार्मिल है। अविवार्हित पुत्री के मार्मले में, उसके विवार्ह पर होने वार्लार् उपयुक्त खर्च भी इसमें शार्मिल है।

भार्रतीय वयस्कतार् अधिनियम, 1875 

इस अधिनियम में यह व्यवस्थार् दी गर्इ है कि भार्रत क प्रत्येक निवार्सी, निम्नलिखित मार्मलें को छोड़कर, 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेने पर वयस्क (बार्लिग) हो जार्तार् है:

  1. वे व्यक्ति जिनके बार्रे में यार् जिनकी सम्पत्ति यार् दोनों के बार्रे में अभिभार्वक नियुक्त कियार् गयार् हो, 
  2. वे व्यक्ति जिनकी सम्पत्ति के बार्रे में देख-रेख की जिम्मेदार्री किसी अभिभार्वकों के न्यार्यार्लय ने ली हो, इन मार्मलों में 21 वर्ष पूरे होने पर ही व्यक्ति बार्लिग मार्नार् जार्एगार्। 

किशोरों के लिए न्यार्य (बच्चों की देखभार्ल और सुरक्षार्) अधिनियम, 2000 

इस अधिनियम में किशोरों के विकास की जरूरतों को पूरार् कर उन्हें समुचित देखभार्ल, सुरक्षार् और सद्वयवहार्र प्रदार्न करने, बच्चों के सर्वोत्तम हित में मुद्दों पर विचार्र और निर्णय करते समय बार्ल-मित्रवत-रार्स्तार् अपनार्ने और विभिन्न संस्थार्नों के जरिये उनके पुनर्वार्स क प्रार्वधार्न है। अधिनियम एक किशोर यार् बच्चे, जिसने 18 वर्ष पूरे न किये हों, की देखभार्ल और सुरक्षार् के लिये है। कानून से संघर्श में एक किशोर वह होतार् हैं जिस पर कोर्इ अपरार्ध करने क आरोप हो। इस अधिनियम में एन0 जी0 ओ0 की भूमिक इस प्रकार है:-

  1. कानून से संघर्श कर रहे अल्प वयसकों के अस्थार्यी आवार्स के लिए निरीक्षण गृह स्थार्पित करनार् जिनमें उन्हें उनके विरूद्ध चल रही जार्ँच के दौरार्न रखार् जार्ए, 
  2. कानून के संघर्श कर रहे अल्प वयस्कों के आवार्स और पुनर्वार्स के लिए विशेष गृह स्थार्पित करनार्, 
  3. अल्प वयस्क न्यार्य बोर्ड के समक्ष वयस्क पर एक सार्मार्जिक जार्ँच रिपोर्ट पेश करनार् तार्कि बोर्ड उस पर यथोचित आदेश पार्रित करे, 
  4. बार्ल कल्यार्ण समिति के समक्ष किसी बच्चें को पेश करनार् जिसे देखभार्ल और सुरक्षार् की जरूरत हो, 
  5. किसी जार्ँच के चलते जिन बच्चों को देखभार्ल और सुरक्षार् की जरूरत है, और बार्द में उनकी देखभार्ल उपचार्र, शिक्षार्, प्रशिक्षण विकास और पुनर्वार्स के लिए बार्ल गृह स्थार्पित करनार्, 
  6. जिन बच्चों को तुरन्त सहार्यतार् की आवश्यकतार् है उनके लिए आश्रय गृह स्थार्पित करनार् जो उनके लिए ड्रार्प-इन सेंटर क काम करेंगे, 
  7. गोद लेने, पार्लन पोशण देखभार्ल, प्रार्योजन और बच्चे को किसी परिचर्यार् संगठन में भेजकर, बार्ल गृह यार् विशेष गृह में रह रहे बच्चों के पुनर्वार्स और सार्मार्जिक जुड़ार्व की व्यवस्थार् करनार्, 8. बच्चों यार् अल्प वयस्कों के बार्ल गृह यार् विशेष गृह छोड़ने के बार्द उनकी देखभार्ल के उद्देश्य से परिचर्यार् संगठन स्थार्पित करनार् तार्कि वे र्इमार्नदार्र, मेहनतकश और उपयोगी जीवन बितार् सकें। 

इस अधिनियम में नीचे बताइ स्थितियों में दण्ड की व्यवस्थार् है: 

  1. किसी अल्प वयस्क यार् बच्चे पर प्रहार्र यार् नृशंसतार् क व्यवहार्र, 
  2. किसी बच्चे को काम पर रखनार् यार् उसक प्रयोग करनार् यार् उससे भीख मार्ंगने क काम करार्नार्, 
  3. किसी अल्प वयस्क यार् बच्चे को मार्दक शरार्ब यार् कोर्इ नार्रकोटिक ड्रग यार् सार्इकोट्रार्पिक वस्तु देनार् यार् देने के लिए मजबूर करनार्, 
  4. किसी खतनार्क नौकरी पर लगार्ने के लिए, किसी अल्प वयस्क यार् बच्चे क दुरूपयोग करनार्, उसे बंधक रखनार् और उसकी कमाइ रार्शि उसे न देनार् यार् उस रार्शि को अपने लिए प्रयोग में लार्नार्। 

बार्ल विवार्ह निरोध अधिनियम, 1929 

इस अधिनियम में बार्ल विवार्ह सम्पन्न करने क निरोध है। ‘बार्ल विवार्ह’ एक ऐसार् विवार्ह है जिसमें पुरूष ने 21 वर्ष की आयु पूरी न की हो और /यार् महिलार् ने 18 वर्ष की आयु पूरी न की हो । इस अधिनियम में निम्नलिखित के लिए दण्ड क प्रार्वधार्न है:

  1. पुरूष वयस्क जो बार्ल विवार्ह क सम्बंध बनार्तार् है,
  2. व्यक्ति जो बार्ल विवार्ह करवार्तार् है यार् उसक निर्देश देतार् है, और 
  3. नार्बार्लिग बच्चे के मार्त-पितार् यार् संरक्षक जो बार्ल विवार्ह करार्ते है। 

इसके अतिरिक्त, न्यार्यार्लय को यह जार्नकारी मिले यार् शिकायत प्रार्प्त हो कि बार्ल विवार्ह की व्यवस्थार् की जार् रही है यार् वह होने वार्लार् है, यार् वह होने वार्लार् है, तो न्यार्यार्लय उस विवार्ह पर रोक लगार् सकतार् है।

महिलार् कल्यार्ण 

प्रसूति लार्भ अधिनियम, 1961 : मैटर्निटी बैनिफिट एक्ट, 1961 क उद्देश्य शिशु जन्म के पूर्व तथार् जन्म के पश्चार्त् के कुछ समय-काल में महिलार् कर्मचार्रियों के रोजगार्र को नियंत्रित करनार् और मैटर्निटी और कुछ अन्य लार्भों की व्यवस्थार् करनार् हैं। यार् वह होने है। इस अधिनियम के दार्यरे में, सभी फैक्टरियार्ं, खार्ने, बार्गार्न, घुड़सवार्री कलार्बार्जी और अन्य कर्तब के प्रदर्शन में कार्यरत संस्थार्पनार्एं और दुकान और संस्थार्पनार्एँ आती हैं जहार्ं एक वर्ष के दौरार्न किसी एक समय पर 10 यार् इससे अधिक व्यक्ति काम पर रखे गए हों। (सिवार्य उन के जो ESI Act बज के दार्यरे में आते हैं)।

इस अधिनियम के तहत, प्रत्येक महिलार् कर्मचार्री जिसने अपने प्रत्यार्षित प्रसव से तुरंत पहले बार्रह महीनों के दौरार्न कम से कम 80 दिन काम कियार् हो वह निम्न मैटर्निटी बैनिफिट प्रार्प्त करने की अधिकारी है-(i) 12 सप्तार्ह की अवधि के लिए मैटर्निटी छुट्टी जो कि प्रसव से पहले यार् बार्द में ली जार् सकती है, और (ii) औसत दैनिक वेतन की दर पर, अपनी वार्स्तविक अनुपस्थिति की अवधि के लिए मैटर्निटी वैनिफिट। इसके अतिरिक्त, एक महिलार् कर्मचार्री, गर्भपार्त, चिकित्सकीय गर्भ समार्प्ति ट्यूबैक्टोमी आपरेषन, गर्भ धार्रण, डिलिवरी, बच्चे क समय-पूर्व जन्म, मिसकैरिज, चिकित्सकीय गर्भ समार्प्ति, यार् ट्यूबेक्टोमी आपरेषन से सम्बंधित रोकग के होने पर भी मैटर्निटी बैनिफिट प्रार्प्त करने क अधिकार रखती है। महिलार् कर्मचार्री, जो मैटर्निटी बैनिफिट की अधिकारी है, उसको 250 रूपये क मेडिकल बोनस भी दियार् जार्एगार्। इसके अतिरिक्त प्रत्येक महिलार् जब बच्चे के जन्म के बार्द डयूटी पर वार्पिस आती है, जो बच्चे के 15 महीने की आयु प्रार्प्त करने तक उसको 15 मिनट के दो नर्सिग बेक्र भी दिए जार्एंगें। अधिनियम के तहत नियोक्तार् को निम्नलिखित क करनार् जरूरी है:

  1. मैटर्निटी बैनिफिट और मेडिकल बोनस क भुगतार्न, 
  2. नर्सिग ब्रेक देनार्, 
  3. महिलार् कर्मचार्री को उसकी डिलिवरी, यार् मिसकैरिज यार् चिकित्सकीय गर्भ समार्प्ति की तार्रीख के तुरन्त बार्द 6 सप्तार्ह की अवधि तक काम पर नहीं रखनार्,
  4. किसी गर्भवती महिलार् कर्मचार्री से कोर्इ श्रम-सार्ध्य काम जिसमें लम्बे समय तक खड़ार् रहनार् पड़े यार् कोर्इ ऐसार् काम जो उसके गर्भार्वस्थार् पर विपरीत प्रभार्व डार्ले, यार् मिसकैरिज क कारण बने यार् उसकी सेहत पर बुरार् असर डोले, यार् मिसकैरिज क कारण बने यार् उसकी सेहत पर बुरार् असर डार्ले, संभार्वित डिलिवरी से पहले के छह हफ्ते से एक मार्स पूर्व और उक्त छह हफ्ते के दौरार्न नहीं करवार्नार्, 
  5. मैटर्निटी छटु ट् ी के दौरार्न उस गर्भवती महिलार् कर्मचार्री को नौकरी से नहीं निकालनार् यार् नौकरी से बर्खार्स्त नहीं करनार्। 

उपर्युक्त जिम्मेदार्रियों के उल्लंघन पर सजार् दी जार् सकती है। परन्तु, ठेकेदार्र यार् प्रार्इवेट नियोक्तार्ओं द्वार्रार् इन जिम्मेदार्रियों क पार्लन हो रहार् है, यह सुनिश्चित करने के लिए कोर्इ नियंत्रण नहीं है। कर्इ मार्मलों में, मैटर्निटी छुट्टी नहीं दी जार्ती और गर्भवती महिलार्ओं को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती है। इसके अतिरिक्त न तो क्रेच सुविधार्एं दी जार्ती है और न ही मार्तार्ओं को शिशुओं को स्तन पार्न करार्ने की इजार्जत दी जार्ती है।

समार्न पार्रिश्रमिक अधिनियम, 1976 

इस अधिनियम में पुरूषों और महिलार् कर्मचार्रियों को एक ही काम पर यार् समार्न प्रकार के काम पर रखने पर एक बरार्बर पार्रिश्रमिक देने की व्यवस्थार् है। और सार्थ ही रोजगार्र के मार्मले में लिंग के आधार्र पर महिलार्ओं के सार्थ भेदभार्व बरतने पर रोक है। यह अधिनियम लगभग सभी तरह की संस्थार्पनार्ओं पर लार्गू होतार् है।

दहेज निषेध अधिनियम, 1961 

इस अधिनियम में दहेज देने यार् लेने पर प्रतिबंध लगार्यार् गयार् है। दहेज क अर्थ है कोर्इ सम्पत्ति यार् मूल्यवार्न प्रतिभूति (security) जो विवार्ह से पूर्व यार् विवार्ह के पष्चार्त, सीधे यार् परोक्ष रूप में, “ार्ार्दी से सम्बंधित किसी एक पाटी (यार् वर/वधु मार्ँ-बार्प यार् किसी अन्य व्यक्ति) द्वार्रार् किसी दूसरी पाटी (यार् वर/वधु के मार्ँ-बार्प यार् किसी अन्य व्यक्ति) को दी गर्इ हो यार् देनार् स्वीकार कियार् गयार् हो। इस अधिनियम में निम्नलिखित के लिए दण्ड क प्रार्वधार्न है:-

  1. दहेज देनार् यार् लेनार् यार् दहेज देने यार् लेने के प्रेरित करन, 
  2. किसी दुल्हन यार् दुल्हे के मार्ँ-बार्प, रिश्तेदार्रों यार् संरक्षक से दहेज की मार्ंग करनार्, 
  3. पिंट्र मीडियार् में विज्ञार्पन के जरिये दहेज देने की पेशकश करनार्, 
  4. दहेज की पेशकश करने वार्ले किसी विज्ञार्पन को छार्पनार्, प्रकाशित करनार् यार् वितरित करनार्, 
  5. दुल्हन के अतिरिक्त किसी दूसरे व्यक्ति द्वार्रार् प्रार्प्त किए गए दहेज को दुल्हन को हस्तार्ंतरित न करनार्। दहेज देने और लेने सम्बंधित कोर्इ भी करार्र रद्द मार्नार् जार्येगार्। अधिनियम में यह भी व्यवस्थार् है कि दुल्हन के अतिरिक्त किसी दूसरे व्यक्ति द्वार्रार् प्रार्प्त दहेज की वस्तु अधिनियम के प्रार्वधार्नों के मुतार्बिक दुल्हन को हस्तार्ंतरित कर दी जार्एगी, और जब तक वह हस्तार्न्तरित नही की जार्ती, उसको दुल्हन के हित के लिए, धरोहर के रूप में रखार् जार्एगार्। 

इस अधिनियम के तहत अपरार्धों के मुकद में ऐसे न्यार्यार्लय में चलार्ए जार्एंगे, जो मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट यार् प्रथम श्रेणी के मजिस्टे्रट से कम के स्तर के न हों । न्यार्यार्लय किसी अपरार्ध क संज्ञार्न स्वयं, यार् पुलिस रिपोर्ट से यार् किसी पीड़ित व्यक्ति यार् उसके किसी रिश्तेदार्र यार् किसी स्वयंसेवी संगठन की शिकायत पर कर सकतार् है।

सती प्रथार् (निषेध) अधिनियम, 1987 

यह अधिनियम सती होने से रोकने और सती प्रथार् क गुणगार्न करने और उससे सम्बंधित मार्मलों के संबंध में बनार्यार् गयार् है। अधिनियम की धार्रार् 2(c) में ‘सती’ की परिभार्षार् में निम्नलिखित व्यक्ति को जिन्दार् अग्नि में जलार्नार् यार् जमीन में गार्ड़ दियार् जार्नार्, आतार् है-

  1. विधवार् को उसके मृतक पति, यार् उसके किसी रिश्तेदार्र, यार् उसके पति से यार् उस रिश्तेदार्र से जुड़ी किसी वस्तु, पदाथ यार् मद के सार्थ; यार् 
  2. किसी स्त्री को उसके किसी रिश्तेदार्र के शव के सार्थ,चार्हे यह जलनार् यार् जमीन में गार्ड़नार् उस विधवार् यार् उस स्त्री की अपनी मर्जी से कियार् जार् रहार् हो यार् अन्यथार् हो। 

इस अधिनियम मार्मलों में दण्ड की व्यवस्थार् है:- 

(a) कोर्इ व्यक्ति जो सती होने की कोशिश करतार् है के लिए प्रेरित करतार् है यार् निम्नलिखित कार्रवाइ के द्वार्रार् सती होने की कोशिश करतार् है यार् सती होने के लिए कोर्इ कार्रवाइ करतार् है 

(b) कोर्इ व्यक्ति, जो सती होने के लिए प्रेरित करतार् है यार् निम्नलिखित कार्रवाइ के द्वार्रार् सती होने के कोशिश के लिए उकसार्तार् है:- 

  1. किसी विधवार् यार् किसी स्त्री को उसके मृतक पति के शव यार् उसके किसी रिश्तेदार्र के शव के सार्थ आग में जलने यार् जिन्दार् जमीन में गार्ड़ने के लिए रार्जी करनार्
  2. किसी विधवार् यार् स्त्री को यह विश्वार्स दिलार्नार् कि सती होने क परिणार्म यह होगार् कि उसको, यार् उसके मृतक पति को, यार् रिश्तेदार्र को, आध्यार्त्मिक लार्भ पहुँचेगार्, यार् उसके परिवार्र क इससे कल्यार्ण होगार्, 
  3. किसी विधवार् यार् स्त्री को सती होने के फैसले पर अडिग यार् हठी रहने के लिए प्रोत्सार्हित करनार् और इस प्रकार उसको सती होने के लिए उकसार्नार्, 
  4. सती होने सम्बंधित किसी जुलूस में भार्ग लेनार् यार् किसी विधवार् यार् किसी स्त्री को सती होने के अपने निर्णय लेने में सहार्यतार् देते हुए उसे उसके मृतक पति यार् रिश्तेदार्र के शव के सार्थ शमशार्न भूमि यार् कब्रिस्तार्न में ले जार्नार्, 
  5. जिस स्थार्न पर सती कांड हो रहार् हो, वहार्ँ उस कार्यवाइ में सक्रिय भार्ग लेनार् यार् उससे सम्बंधित किसी संस्कार में भार्ग लेनार्,
  6. किसी विधवार् यार् स्त्री को उसके अग्नि में जलने यार् जिन्दार् जमीन मे गार्ड़ने से बचार्ने में बार्धार् डार्लनार् और रूकावट पैदार् करनार् 
  7. अगर सती होने के लिए किसी महिलार् को बचार्ने के लिए पुलिस अपनी ड्यूटी निभार्ते हुए कोर्इ कदम उठार्ती है तो उसमें बार्धार् डार्लनार् और दखल देनार्, 

(c) कोर्इ भी व्यक्ति अग सती होने की कार्रवाइ को बढ़ार्वार् देतार् है, उसमें सहयोग देतार् है, जैसे कि सती सम्बंधी किसी संस्कार में दर्षक बनतार् है, यार् सती के जुलूस में भार्ग लेतार् है, उसमें सहयोग देतार् है, सती प्रथार् को सही ठहरार्तार् है यार् उसक प्रचार्र करतार् है, यार् जो व्यक्ति सती हो चुक है, यार् जो व्यक्ति सती हो चुक है, उसकी प्रषंसार् के लिए समार्रोह आयोजित करतार् है। 

इस अधिनियम के तहत गठित विशेष अदार्लतें, घटनार् के तथ्यों की शिकायत प्रार्प्त होने यार् उन तथ्यों पर पुलिस की रिपोर्ट प्रार्प्त होने पर अपरार्ध क संज्ञार्न करेंगी। 

व्यभिचार्र (निषेध) अधिनियम, 1986

इस अधिनियम के अन्तर्गत यौन शोषण और महिलार्ओं और बच्चों क दुरूप्योग रोकने और देह-व्यार्पार्र के शिकार व्यक्तियों तथार् चार्रित्रिक खतरे में खतरे में पड़े व्यक्तियों को बचार्ने और उनके पुनर्वार्स के बार्रे में प्रार्वधार्न कियार् गयार् है। 

इस अधिनियम में ‘वेश्यार्वृत्ति’ की परिभार्षार् में, यौन शोषण यार् किन्हीं व्यक्तियों क व्यार्पार्रिक उद्देश्य के लिए दुरूपयोग करनार् बतार्यार् गयार् है। इस प्रकार वेश्यार्वृत्ति सिर्फ किसी महिलार् क अपनी देह किरार्ये पर देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि किसी पुरूष यार् बच्चो क यौन शोषण यार् व्यार्पार्रिक उद्देश्य के लिए दुरूपयोग भी इसमें शार्मिल है। 

इस अधिनियम में बच्चे की परिभार्षार् में वह व्यक्ति आतार् है जिसने 16 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। नार्बार्लिग वह व्यक्ति है जो सोलह (16) सार्ल क गयार् है लेकिन 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। नार्बार्लिग वह व्यक्ति है जिसने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है। यह आयु-भेद बड़ार् महत्वपूर्ण है क्योंकि नार्बार्लिग के सार्थ दुव्र्यवहार्र के मार्मले में दण्ड ज्यार्दार् सख्त है बनिस्पत बार्लिगों के मार्मले में। वेश्यार्वृत्ति पर कानूनन रोक नहीं है। यदि वेश्यार्18 वर्ष की आयु से ऊपर है, और वह “ार्ार्न्तिपूर्वक और स्वेच्छार् से किसी से यौन संबन्ध बनार्ती है, उसके कार्यकलार्प सावजनिक स्थार्नों और अधिसूचित इलार्कों के दार्यरे मे बार्हर है यह कानून के विरूद्ध नहीं है। तथार्पि, वेश्यार्वृत्ति निम्नलिखित मार्मलों में गैर-कानूनी है: जैसे कि (i) वेश्यार्वृत्ति चलार्नार्, (ii) वेश्यार्लय चलार्ने में किसी को किसी को उकसार्नार्, (iii) वेश्यार्वृत्ति की कमाइ पर जीनार्, (iv) वेश्यार्वृत्ति के लिए किसी व्यक्ति को लार्नार् और उसे उकसार्नार्, (v) जहार्ँ वेश्यार्वृत्ति क व्यार्पार्र चल रहार् है, उस स्थार्न पर किसी व्यक्ति को बन्धन रखनार्, (vi) सावजनिक स्थार्नों पर यार् उसके दार्यरे में वेश्यार्वृत्ति चलार्नार्, (vii) सावजनिक स्थार्नों पर वेश्यार्वृत्ति के लिए उकसार्नार्, (viii) वेश्यार्वृत्ति के उद्देश्य के लिए फुसलार्नार् और भड़कानार्, (ix) अपनी परिरक्षार् में आये हुए किसी व्यक्ति क शील भंग करनार्। 

इस अधिनियम के उद्देश्यों के लिए विशेष पुलिस, अवैध देह व्यार्पार्र पुलिस अधिकारियों और विशेष आदार्लतों की नियुक्ति की गर्इ है। इनके अतिरिक्त इस कानून में पार््र वधार्न है कि गैर-सरकारी सलार्हकार निकायों की सेवार्ओं क लार्भ उठार्यार् जार्ए जिसमें इलार्के के अधिक से अधिक पार्ँच समार्ज सेवक शार्मिल हों । ये समार्ज सेवक और सार्मार्जिक संगठन, विशेष पुलिस अधिकारियों को सलार्ह देंगे और मजिस्ट्रेटों को रक्षित पीड़ित व्यक्तियों की आयु, चरित्र और पूर्व वृत्तार्न्त जार्नने में सहार्यतार् करेंगे और उन लोगों के पुनर्वार्स और उन्हें सुरक्षित गृहों यार् सुधार्रक संस्थार्नों में रखने की व्यवस्थार् करेंगे। 

महिलार्ओं क अश्लील प्रदर्शन (निषेध) अधिनियम,1986 

इस अधिनियम के अन्तर्गत, विज्ञार्पनों यार् प्रकाशनों, लेखों, चित्रों यार् किसी अन्य तरीके से महिलार्ओं के अश्लील प्रदर्शन के निषेध और उनसे सम्बंधित मार्मलों के लिए प्रार्वधार्न है। अधिनियम की धार्रार् (ब) में ‘महिलार् के अश्लील प्रदर्शन’ की परिभार्षार् में किसी महिलार् के शरीर, उसकी फिगर, उसके जिस्म के किसी भी भार्ग को किसी ऐसे तरीके से पेश करनार् जो महिलार्ओं को अश्लील, यार् अपमार्नजनक यार् अवमार्नित करतार् है यार् जनतार् के चरित्र, यार् आचार्र को भ्रश्ट दूशित करतार् हो यार् क्षति पहुँचार्तार् हो, शार्मिल है। किसी भी उल्लंघन के लिए जुर्मार्नार् और कारार्वार्स हो सकतार् है

चिकित्सकीय गर्भ समार्पन अधिनियम, 1971 

इस अधिनियम में प्रत्यक्ष रूप से गर्भपार्त के सम्बंध में चयन के अधिकार क प्रार्वधार्न है। धार्रार् 4 के तहत, चिकित्सार् द्वार्रार् गर्भ गिरार्ने क कार्य सिर्फ उन परिस्थितियों में कियार् जार्तार् है जब मार्ँ के जीवन को बचार्नार् हो, यार् गर्भ धार्रण किसी बलार्त्कार के कारण हो, यार् भ्रूण असार्मार्न्य प्रतीत होतार् हो, यार् गर्भार्वस्थार् को जार्री रखनार् मार्नसिक तनार्व क कारण हो सकतार् है। इस अधिनियम के तहत गर्भपार्त सरकार द्वार्रार्। अनुमोदित स्थार्न यार् अस्पतार्ल में करार्यार् जार् सकतार् है, और वह भी किसी प्रार्शिक्षित मेडिकल प्रैक्टिषनर द्वार्रार्। यह सुविधार् पर्यार्प्त रूप में ग्रार्मीण यार् किसी दूरदरार्ज के इलार्कों में रहने वार्ली महिलार्ओं के लिए उपलब्ध नहीं है तथार् इस बार्रे में अक्सर सम्बंधित पुरूष ही चयन करतार् है कि गर्भ गिरार्यार् जार्ए यार् नहीं।

प्रसवपूर्ण जार्ँच तकनीक नियमन और रोकथार्म अधिनियम, 1994 : इस अधिनियम में प्रसव से पहले गर्भ में लिंग की जार्ँच और उसक निर्धार्रण करने के लिए प्रयोग में लाइ जार्ने वार्ली विभिन्न प्रकार की तकनीक, जिसमें अल्ट्रार्सार्उंड भी शार्मिल है, को नियमित करने के लिए प्रार्वधार्न है और सिर्फ लिंग के आधार्र पर लड़की पैदार् होने की संभार्वनार् पर गर्भ को गिरार्ने वार्ले डार्क्टरों के लिए दण्ड की व्यवस्थार् भी निर्धार्रित की गर्इ है। फिर भी, इस तरह के नियमों के कुख्यार्त उल्लंघन, अधिकांश मार्मलों में बिनार् दण्ड पार्ये ही रह जार्ते हैं। यह अधिनियम, लिंग क पहले चयन करने की धीरे-धीरे बढ़ती हुर्इ प्रवृत्ति को रोकने में असमर्थ सार्बित हुआ है।

वृद्ध लोग 

हिन्दू दत्तक ग्रहण और संरक्षण अधिनियम 1956 : इस अधिनियम की धार्रार् 20 के अनुसार्र प्रत्येक हिन्दू व्यक्ति क यह कर्त्त्ार्व्य है कि अपने बूढ़े यार् असहार्य मार्तार्-पितार् की देखभार्ल करे, ऐसी हार्लत में अवश्य हीख् जब वे अपनी आय यार् अपनी सम्पत्ति से अपनार् भरण-पोशण करने में असमर्थ हों। ‘मार्ँ-बार्प’ शब्द में वह सौतेली मार्ँ भी आती है जिसक कोर्इ अपनार् बच्चार् न हो। देखभार्ल में भोजन, कपउे, आवार्स, शिक्षार् और चिकित्सार् सहार्यतार् और उपचार्र आदि सभी शार्मिल हैं। पार्लन-पोशण करने के लिए रकम क निर्णय अदार्लत द्वार्रार् उनकी स्थिति एवं प्रतिश्ठार्, मार्तार्-पितार् की उपयुक्त आवश्यकतार्ओं, उनकी सम्पत्ति क मूल्य और उससे प्रार्प्त होने वार्ली आय आदि को ध्यार्न में रखकर कियार् जार्एगार्।

आपरार्धिक प्रक्रियार् संहितार्, 1973 

कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973 की धार्रार् 125 एक जुड़ीशियल मजिस्ट्रट को यह अधिकार प्रदार्न करती है कि वह पत्नी, बच्चों, यार् मार्ँ-बार् पके लिए, जो अपनार् भरण-पोशण करने में असमर्थ हों, के पार्लन-पोशण करने के निमित आदेश जार्री करे। इस प्रार्वधार्न के तहत, दी जार्ने वार्ली रार्हत दीवार्नी प्रकार की है तथार् आपरार्धिक प्रक्रियार् इसलिये अपनार्यी जार्ती है तार्कि बेसहार्रार् पत्नी और बच्चे यार् मार्ँ-बार्प को सड़क पर न डार्ल दियार् जार्ए। यह आदेश बेटों को दियार् जार् सकतार् है, बशर्ते उनके पार्र भरण-पोशण की रकम देने के लिए पर्यार्प्त सार्धन हो भरण-पोशण भत्ते के रूप में अधिक से अधिक 500 रूपये प्रति मार्ह की रकम क फैसलार् दियार् जार् सकतार् है।

मार्नसिक तौर पर रोगी व्यक्ति 

मार्नसिक स्वार्स्थ्य अधिनियम 1987 : इस अधिनियम में मार्नसिक तौर पर रोगी व्यक्तियों के इलार्ज और उनकी देखभार्ल की व्यवस्थार् करने, उनकी सम्पत्ति और मार्मलों तथार् इससे संबंधित मार्मलों के लिए प्रार्वधार्न है।इस अधिनियम के तहत, पुलिस चौकी क इंचाज प्रत्येक अधिकारी(थार्नेदार्र)निम्नलिखित को सुरक्षार् प्रदार्न करने के अधिकार रखतार् है:-

(a) कोर्इ व्यक्ति जो उसकी पुलिस चौकी के इलार्के की सीमार्ओं में घूमतार् फिरतार् हुआ नजर आये और जिसके बार्रे में उसे यह विश्वार्स करने के कारण हों, कि वह मार्नसिक तौर पर रोगी है और अपनी देखभार्ल स्वयं नहीं कर सकतार्; और

(b) कोर्इ व्यक्ति जो उसकी पुलिस चौकी की सीमार्ओं है जिसके बार्रे में उसे यह विश्वार्स करने के कारण हों िक वह मार्नसिक रोगी होने के करण खतरनार्क हो सकतार् है

इस प्रकार रोक के रखे गए व्यक्ति को 24 घंटों के भीतर मजिस्टेट्र के समक्ष पेश कियार् जार्एगार्। मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति की समझ बूझ की जार्ँच करेगार् और चिकित्सार् अधिकारी से उसकी जार्ँच करार्येगार् और आवश्यक पूछतार्छ करेगार्। मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को अन्तरंग रोगी के रूप में इलार्ज करार्ने के लिए किसी मार्नस रोग अस्पतार्ल यार् नर्सिग होग में दार्खिल करने क आदेश जार्री कर सकतार् है।

इसके अतिरिक्त अगर किसी व्यक्ति को किन्हीं कारणों से यह विश्वार्स हो जार्तार् है कि अमुक व्यक्ति मार्नसिक रोगी है, और वह उचित देखभार्ल और नियंत्रण में नहीं है, यार् उसके रिश्तेदार्र उसके सार्थ दुव्र्यवहार्र करते है यार् उस की परवार्ह नहीं करते, तो वह ऐसे व्यक्ति के बार्रे में अपने इलार्के के मजिस्ट्रेट को, जिसके अधिकार क्षेत्र में वह इलार्क आतार् है, इसकी रिपोर्ट कर सकतार् है।

उपभोक्तार् अधिकार 

उपभोक्तार् सुरक्षार् अधिनियम, 1986 क उद्देश्य है उपभोक्तार्ओं के हितों को बेहतर सुरक्षार् प्रदार्न करनार् और उपभोक्तार्ओं के विवार्दों और उनसे सम्बंधित मार्मलों क समार्धार्न करनार्। यह अधिनियम सभी वस्तुओं और सेवार्ओं पर लार्गू होतार् है, सिवार्य उनको छोड़कर जिनहें केन्द्रीय सरकार ने अधिसूचित कियार् हुआ है। इस अधिनियम के तहत दी गर्इ परिभार्षार् के अनुसार्र ‘उपभोक्तार्’ क अर्थ है:-
(a) कोर्इ भी व्यक्ति जो:

  1. कोर्इ वस्तुएं खरीदतार् है, यार् 
  2. कोर्इ सेवार् प्रार्पत करतार् है, यार् उसक उपयोग करतार् है, उसक पूर्ण भुगतार्न करके यार् किष्तों में यार् hire purchase आधार्र 

(b) कोर्इ व्यक्ति बिनार् किसी भुगतार्न करके यार् किश्तों के सार्मार्न क प्रयोग करतार् है यार् सेवार्ओं क लार्भ उठार्तार् है। इनके अतिरिक्त वे लोग जिन्हें हार्उसिंग एण्ड डिवेलपमेंट बोर्ड द्वार्रार् प्लार्ट अलार्ट किए गए हैं, सरकारी अस्पतार्लों/प्रार्ार्इवेट नर्सिग होम में इलार्ज करार्ने वार्ले रोगी, स्टार्क-ब्रोकर के जरिये शेयर खरीदने/बेचने वार्ले व्यक्ति, रेलवे यार्त्री आदि को भी उपभोक्तार् मार्नार् गयार् है।इस अधिनियम के अन्तर्गत उपभोक्तार्ओं के निम्नलिखित अधिकारों को प्रचार्रित करने और उनकी रक्षार् करेन के बार्रे में प्रार्वधार्न कियार् गयार् है:

  1. जो वस्तुएं यार् सेवार्एं जीवन यार् सम्पत्ति के लिए घार्तक हों, उनकी माकेटिंग के खिलार्फ उपभोक्तार् की सुरक्षार् क अधिकार; 
  2. वस्तुओं और सेवार्ओं की गुणवत्तार्, मार्त्रार्, शक्ति (potency) शुद्धतार्, मार्नक और मूल्य जैसी भी स्थिति हो, की जार्नकारी प्रार्प्त करने क अधिकार तार्कि अनुचित व्यार्पार्रिक प्रार्थार्ओं के विरूद्ध उसको बचार्यार् जार्ए और रक्षार् की जार्ए; 
  3. जहार्ँ भी संभव हो, वह विभिन्न प्रकार की वस्तुओं और सेवार्ओं को प्रतियोगी मूल्यों पर प्रार्प्त करें, इस आश्वार्सन क अधिकर: 
  4. यथोचित फोरम पर सुनवाइ और उपभोक्तार्ओं के हितों के प्रति उपयुक्त ध्यार्न दियार् जार्एगार्, इस आश्वार्सन क अधिकार ; 
  5. (a) अनुचित व्यार्पार्रिक पद्धतियों, यार् (b) प्रतिबंधी व्यार्पार्रिक पद्धतियों, यार् (c) धोखार्धड़ी द्वार्रार् शोषण, के खिलार्फ उसकी क्षतिपूर्ति की मार्ंग करने क अधिकार, और 
  6. उभोक्तार् को शिक्षित करने क अधिकार।

किसी वस्तु यार् सेवार् के संबंध में शिकायत निम्नलिखित द्वार्रार् की जार् सकती है:-

  1. उपभोक्तार् द्वार्रार् स्वयं; यार् 
  2. किसी मार्न्यतार् प्रार्प्त उपभोक्तार् संघ द्वार्रार्; यार् 
  3. केन्द्रीय यार् रार्ज्य सरकार द्वार्रार्; यार् 
  4. एक यार् एक से अधिक उपभोक्तार्ओं द्वार्रार्, अगर उनके समार्न हित हों, यार् 
  5. उपभोक्तार् की मृत्यु होने पर उसके उत्तरार्धिकारी यार् प्रतिनिधि द्वार्रार्। यह शिकायत, अगर मुआवजे की रकम की मार्ंग 20 लार्ख रूपये से अधिक न हो तो डिस्ट्रिक्ट फोरम के समक्ष (जिलार् स्तर स्थार्पित) यार् जब मुआवजे की रकम की मार्ंग 20 लार्ख रूपये से अधिक हो लेकिन 1 करोड़ रूपये से अधिक न हो, तो रार्ज्य आयोग (रार्ज्य स्तर पर स्थार्पित) के समक्ष और अन्य मार्मलो में रार्ष्ट्रीय आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जार् सकती है। उपर्युक्त प्रार्धिकारी अगर शिकायत के संबंध में संतुष्ट हों तो दूसरी पाटी को उपयुक्त आदेश दे सकते हैं जिसमें पीड़ित पाटी को मुआवजार् और खर्च देनार् शार्मिल होगार्।

खार्द्य अपमिश्रण रोकथार्म अधिनियम, 1954 

इस अधिनियम क उद्देश्य है खार्द्य सार्मग्री में मिलार्वट को रोकने के लिए प्रार्वधार्न बनार्नार्। खार्द्य सार्मग्री क अर्थ है कोर्इ वस्तु जो मार्नव के खार्ने यार् पीने के रूप में उपयोग में लाइ जार्ती है, सिवार्य दवार्इयों और पार्नी के और इसमें वह वस्तु भी शार्मिल है जो सार्मार्न्यत: मार्नव खार्द्य सार्मग्री बनार्ने और तैयार्र करने में प्रयोग में लाइ जार्ती है, जैसे कि सुगंध पैदार् करने वार्ले पदाथ, मसार्ले और केन्द्र सरकार द्वार्रार् घोशित अन्य चीजें। खार्द्य सार्मग्री की वस्तु को निम्नलिखित में मिलार्वट कियार् गयार् मार्नार् जार्एगार्:

  1. यदि विक्रेतार् द्वार्रार् बेची गर्इ वस्तु खरीदार्र की मार्ंग के मुतार्बिक यार् जैसार् उसे होनार् चार्हिए, उस प्रकृति, वस्तु तत्व यार् गुणवत्तार् की नहीं है; 
  2. यदि वस्तु में कोर्इ ऐसार् तत्व हो जो उसकी गुणवत्तार् पर विपरीत प्रभार्व डार्लतार् हो, यार् उसको तैयार्र करने क तरीक उसकी प्रकृति, वस्तु तत्व यार् गुणवत्तार् पर घार्तक प्रभार्व डार्लतार् हो; 
  3. यदि वस्तु को पूर्णतयार् यार् आंशिक रूप से किसी घटियार् यार् सस्ती चीज से बदल दियार् गयार् हो, यार् वस्तु के किसी के घटक तत्व को पूर्णतयार् यार् आंशिक रूप से निकाल लियार् गयार् हों, जिसके कारण उस वस्तु की प्रकृति, वस्तु तत्व यार् गुणवत्तार् पर घार्तक प्रभार्व पडतार् हो; 
  4. यदि वस्तु को अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार्र यार् पैक कियार् गयार् हो यार् रखार् गयार् हो जिससे वह दूशित यार् स्वार्स्थ्य के लिए हार्निकारक बन गर्इ हो; 
  5. यदि वस्तु पूर्ण यार् आंशिक रूप से किसी गंदे, सड़े हुए, घृणित, बदबूदार्र, गले हुए यार् रोगी पशु यार् सब्जी के तत्व से बनी हो यार् उस पर मच्छर भिनभिनार्ते हों यार् वह अन्यथार् मार्नव उपयोग के लिए अनुपयुक्त हो; 
  6. यदि वस्तु किसी रोगी पशु से प्रार्प्त की गर्इ हो; 
  7. यदि वस्तु में कोर्इ जहरीलार् यार् अन्य ऐसार् तत्व हो जो स्वार्स्थ्य के लिए घार्तक हो; यदि वस्तु क कन्टेनर किसी जहरीले यार् घार्तक विशैले तत्व से बनार् हो, जिससे उसमें रखी वस्तुएं स्वार्स्थ्य के लिए घार्तक हों; 
  1. यदि वस्तु में प्रतिबंधित रंग तत्व यार् परिरक्षण तत्व हो, यार् कोर्इ स्वीकृत रंग तत्व यार् परिरक्षण तत्व निर्धार्रित सीमार् से अधिक हो; 
  2. यदि वस्तु क गुणवत्तार् यार् शुद्धतार् निर्धार्रित मार्नक (स्टैंडर्ड) से नीचे के स्तर की हो, यार् उसके घटक निर्धार्रित औसत में न हों, भले ही उनक सेहत पर घार्तक प्रभार्व पड़े यार् न पड़े। 

विभिन्न खार्द्य पदाथो की गुणवत्तार् के मार्नक खार्द्य अपमिश्रण रोकथार्म नियम, 1955 के अपेंडिक्स B में विनिर्दिश्ट किये गए हैं। जो खार्द्य पदाथ इन मार्नकों पर पूरे नहीं उतरते, उन्हें मिलार्वटी कहार् जार्एगार्, भले ही उनमें मार्मूली व्यतिवम हो, क्योंकि उस पदाथ की गुणवत्तार् यार् शुद्धतार् निर्धार्रित मार्नक से गिर जार्ती है।

इस अधिनियम में निषेध है:-

(1) कोर्इ मिलार्वटी खार्द्य पदाथ, यार् कोर्इ गलत ब्रार्ंड क खार्द्य पदाथ आयार्त करनार् यार् आयार्त लार्इसेंस के तहत लार्इसेंस की शर्तो के अनुसार्र पूरी न उतरने वार्ली खार्द्य वस्तुओं क आयार्त करनार् यार् अधिनियम यार् उसके तहत बने नियमों के विरूद्ध कोर्इ खार्द्य तैयार्र करन, 

(2) निम्नलिखित क उत्पार्दन, भंडार्रण, बिक्री यार् वितरण-

  1. कोर्इ मिलार्वटी खार्द्य पदाथ, 
  2. कोर्इ गलत ब्रार्ंड (misbranded) क खार्द्य पदाथ,
  3. लार्इसेंस के तहत बेची जार्ने वार्ली खार्द्य सार्मग्री जो उस लार्इसेंस की शर्तो को पूरार् न करती हो, 
  4. कोर्इ ऐसार् खार्द्य पदाथ जो अधिनियम यार् उसके तहत बने नियमों की अवहेलनार् करतार् हो। 
  5. कोर्इ ऐसार् खार्द्य पदाथ जो अधिनियम यार् उसके तहत बने नियमों की अवहेलनार् करतार् हो। इनके अतिरिक्त, नियमों में कुछ ऐसे निषेध और प्रतिबन्ध भी हैं जिनक पार्लन कियार् जार्नार् जरूरी है। किसी खार्द्य पदाथ क खरीदार्र यार् एक मार्न्यतार् प्रार्प्त उपभोक्तार् संघ, किसी खार्द्य पदाथ क निर्धार्रित शुल्क क भुगतार्न करके पब्लिक अनेलिस्ट से उसक परीक्षण करार् सकतार् है, लेकिन खरीदते समय विक्रेतार् को इस कार्रवाइ के सम्बंध में सूचित कर देनार् होगार्। यदि खार्द्य वस्तु मिलार्वटी पाइ जार्ती है तो खरीदार्र यार् संघ द्वार्रार् भुगतार्न कियार् गयार् शुल्क वार्पस कर दियार् जार्एगार्। 

इस अधिनियम के प्रार्वधार्नों क उल्लंघन करने वार्ले को कारार्वार्स क दण्ड और जुर्मार्नार् लगार्यार् जार् सकतार् है इसके अतिरिक्त, जिस खार्द्य पदाथ के सम्बंध में नियमों क उल्लंघन हुआ है, सरकार उसको जब्त कर सकती है। 

औशध और जार्दुर्इ दवार्एं (आपत्तिजनक विज्ञार्पन) अधिनियम, 1954: इस अधिनियम क उद्देश्य है कुछ मार्मलों में औशधों के विज्ञार्पनों पर नियंत्रण रखनार्, और कुछ उद्देश्यों के लिए तथार्कथित जार्दुर्इ असर करने वार्ली दवार्इयों के विज्ञार्पनों क निषेध करनार्, और उनसे सम्बन्धित मार्मलों के लिए प्रार्वधार्न करनार्। अधिनियम में  विज्ञार्पन छार्पने यार् प्रकाशित करने पर रोक लगाइ गर्इ है:- 

  1. मिसकैरिज, गर्भ रोकने, योन शक्ति बढार्ने, मार्सिक धर्म की अनियमिततार् को ठीक करने, और विशिष्ट बीमार्रियों की पहचार्न, उपचार्र, शमन, इलार्ज यार् रोकथार्म करने के निमित किसी औरशध के प्रयोग के लिए परार्मर्श देने यार् फुसलार्ने वार्ले विज्ञार्पन; 
  2. किसी औशध के बार्रे में भ्रार्ंत धार्रण पेश करने यार् झूठे दार्वे करने यार् अन्यथार् मिथ्यार् कहने यार् गुमरार्ह करने वार्ले विज्ञार्पन 
  3. किसी जार्दुर्इ दवाइ जिसके बार्रे में दार्वार् कियार् जार्ए कि वह उपर्युक्त क्लार्ज (a)में विनिर्दिश्ट किसी उद्देश्य के लिए प्रभार्वकारी है को संदभिर्त करने वार्ले विज्ञार्पन। 

उपरोक्त प्रार्वधार्नों क उल्लंघन करने पर कारार्वार्स क दण्ड, जुर्मार्नार् यार् दोनों लगार्ए जार् सकते हैं।कालार्बार्जार्री रोकथार्म और अनिवाय वस्तुओं की आपूर्ति अनुरक्षण अधिनियम:इस अधिनियम में समुदार्य के लिए अनिवाय वस्तुओं अनिवाय वस्तुओं की आपूर्ति को बरकरार्र रखने और कालार्बार्जार्री रोकने के उद्देश्य से, विशिष्ट मार्मलों के कारार्वार्स और उनसे सम्बद्ध अन्य मार्मलों के लिए प्रार्वधार्न है।यह अधिनियम सरकार को यह अधिकार देतार् है िकवह अनिवाय वस्तुओं की आपूर्ति को बरकरार्र रखने से रोकने वार्ले व्यक्ति को हिरार्सत में ले सकती है। कोर्इ व्यक्ति अनिवाय वसतुओं की आपूर्ति को रोकने क काम करने वार्लार् तब कहार् जार्एगार्, जब लार्भ कमार्ने के उद्देश्य से लार्गू कियार् गयार् हो- 

  1. वह व्यक्ति स्वयं अनिवाय वसतुऐं अधिनियम, 1955 यार् इसी प्रकार के किसी अन्य कानून के तहत दण्डनीय अपरार्ध करतार् है, यार् अपरार्ध करने के लिए किसी व्यक्ति को भड़कातार् है; यार् 
  2. वह किसी अनिवाय वस्तु में व्यार्पार्र करतार् है; जो प्रत्यक्ष यार् परोक्ष रूप से उपरोक्त अधिनियम यार् कानून के प्रार्वधार्न को विफल करते हों। 

मार्नव अंग प्रत्यार्रोपण अधिनियम, 1994: यह कानुन चिकित्सीय उद्देश्य से मार्नव अंगों को शरीर से निकालने, स्टोरेज करने और उन्हें प्रतिरोपित करने की क्रियार् और उससे सम्बंधित मार्मलों को नियमित (regulate) करने के लिए बनार्यार् गयार् है। अधिनियम में दी गर्इ व्यवस्थार् के अतिरिक्त, कोर्इ भी मार्नव अंग डोनर के शरीर से उसकी मृत्यु के पहले निकालार् नहीं जार् सकतार् और प्रार्प्तकत्र्तार् के शरीर में प्रतिरोपित नहीं कियार् जार् सकतार्। जब कोर्इ डोनर अपनी मृत्यु के पश्चार्त् अपने शरीर के किसी मार्नव अंग को निकालने के लिए प्रार्धिकृत करतार् है यार् किसी मृतक के शरीर से मार्नव अंग को निकालने क अधिकार देने के लिए सक्षम यार् सशक्त व्यक्ति किसी अंग के निकालने के लिए अधिकार देतार् है, तो वह मार्नव अंग शरीर से निकाल कर दूसरे जरूरतमन्द प्रार्प्तकर्तार् के शरीर में प्रतिरोपित कियार् जार् सकतार् हैं।

 यह अधिनियम मार्नव अंगों के व्यार्पार्र क निषेध करतार् है, जैसे कि- 

  1.  किसी मार्नव अंग की सप्लाइ के लिए कोर्इ भुगतार्न करनार् यार् प्रार्प्त करनार्; 
  2. पैसों के लिए मार्नव अंग सप्लाइ करने के लिए रार्जी किसी व्यक्ति की तलार्श करनार्; 
  3. पैसों के लिए कोर्इ मार्नव अंग सप्लाइ करने की पेशकश करनार्; 
  4. मार्नव अंग की सप्लाइ करने के लिए रकम की अदार्यगी के प्रबंध के लिए पहल करनार् यार् बार्तचीत करनार्; 
  5. किसी ऐसे व्यक्तियों के समूह, भले ही वह कोर्इ सोसार्इटी, फर्म यार् कम्पनी हो, जिसकी गतिविधियार्ं में उपरोक्त क्लार्ज में बतार्ए गए प्रबंध के लिए पहल करनार् यार् बार्तचीत करनार् शार्मिल हों, के प्रबंधन यार् नियंत्रण में भार्ग लेनार् और (अप) ऐसे विज्ञार्पन क प्रकाशन यार् वितरण करनार् जो 
  1.  लोगों को पैसों के लिए मार्नव अंग सप्लाइ करने क आºवार्न करें, 
  2. पैसों के बदले मार्नव अंग सप्लाइ करने की पेशकश करें; 
  3.  यह संकेत दे कि विज्ञार्पनदार्तार्, उपरोक्त में बतार्ए गए प्रबंध के लिए पहल करने यार् बार्तचीत करने के लिए तैयार्र है। 

मार्नवार्धिकार मार्नव 

अधिकार सुरक्षार् अधिनियम, 1993 : मार्नवार्धिकार की परिभार्षार् धार्रार् 2 (क) के अन्तर्गत की गर्इ है। इसक अर्थ है कि किसी व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रतार्, समार्नतार् और प्रतिश्ठार् से सम्बंधित अधिकार जो संविधार्न द्वार्रार् गार्रंटी किये गए हैं यार् अन्तराश् टीय प्रतिज्ञार् पत्रों में धार्रित किए गए हैं और भार्रत की अदार्लतों द्वार्रार् लार्गू किए जार् सकते हैं। अधिनियम के तहत देश में मार्नव अधिकारों के लिए अदार्लतें स्थार्पित की गयी हैं। आयोग निम्नलिखित कार्य कार्य करेंगे:

(a) स्वत: यार् किसी पीड़ित व्यक्ति यार् उसकी तरफ से किसी अन्य व्यक्ति द्वार्रार् प्रस्तुत की गर्इ यार्चिक पर निम्न शिकायतों की जार्ँच करनार्- ;

  1. किसी सरकारी कर्मचार्री द्वार्रार् मार्नवार्धिकार क उल्लंघन करने यार् उल्लंघन करने के लिए उकसार्नार्; यार् 
  2. ऐसे उल्लंघन को रोकने में किसी सरकारी कर्मचार्री द्वार्रार् लार्परवार्ही बरतनार्; 

(b) मार्नवार्धिकार के हनन क आरोप वार्ले अदार्लत में चल रहे मार्मले में, अदार्लत की अनुमति लेकर उसकी कार्रवाइ में दखल देनार्;

(c) रार्ज्य सरकार के नियंत्रण में किसी जेल यार् अन्य संस्थार्न जहार्ं लोगों को उपचार्र, सुधार्र यार् सुरक्षार् के लिए रोक यार् बन्धक रखार् जार्तार् है, रार्ज्य सरकार को सूचित करके उनमें रखे गए व्यक्तियों के जीवन के हार्लार्त क अध्ययन करने के लिए उन स्ार्िार्नों पर जार्कर निरीक्षण करनार् और उन पर अपनी सिफार्रिशें देनार्;

(d) मार्नवार्धिकार की रक्षार् करने के निमित संविधार्न यार् यथार् समय लार्गू किसी कानून में किए गए सुरक्षार् उपार्यों पर पुनर्विचार्र करनार् और उनके प्रभार्वी कार्यार्न्वयन के उपार्य सुझार्नार्;

(e) मार्नवार्धिकारों के उपभोग में रोड़ार् अटकाने वार्ले कारणों, जिनमें आतंकवार्द की कार्रवाइ भी शार्मिल है, पर पुनर्विचार्र करनार् और उनके उपचार्र के लिए उपयुक्त उपार्यों की सिफार्रिशें करनार्;

(f) मार्नवार्धिकारों पर किए करार्रों और अन्य अन्तर्रार्श्ट्रीय दस्तार्वेजों क अध््रययन करनार् और उनके प्रभार्वकारी कार्यपार्लन के लिए सिफार्रिशें करनार्;

(g) मार्नवार्धिकार के क्षेत्र में अनुसंधार्न करनार् यार् उसे प्रचार्रित करनार्; ऋऋऋ प्रकाशनों, मीडियार्, सम्मेलनों और अन्य उपलब्ध सार्धनों के जरिये समार्ज के विभिन्न अंगों में मार्नवार्धिकार सम्बंधित जार्नकारी फेलार्नार् और मार्नवार्धिकार की रक्षार् के लिए जो सुरक्षार् प्रबंध उपलब्ध हैं, उनके प्रति जार्गरूकतार् प्रचार्रित करनार्;

(h) मार्नवार्धिकार के क्षेत्र में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों और संस्थार्नों के प्रयत्नों को प्रोत्सार्हित करनार्।

(i) और कोर्इ भी ऐसी कार्रवाइयार्ं करनार् जो मार्नवार्धिकारों को बढ़ार्ने के लिए वह आवश्यक समझे।

नशीले पदाथ और ड्रग्स 

नशीली दवार्एँ और सार्यकोट्रार्पिक तत्व अधिनियम, 1985 : यह अधिनियम किसी भी नशीली दवार् (स्वार्पक, निद्रार् लार्ने वार्ली औशधि) यार् सार्यकोट्रार्पिक तत्व (मनोविकृति पैदार् करने वार्लार् पदाथ) के उगार्ने, उत्पार्दन, पार्स रखने बेचने, खरीदने, परिवहन, भंडार्रण, इस्तेमार्ल, उपभोग, आयार्त, निर्यार्त यार् वार्हनार्न्तरण की कार्रवाइ क निषेध करतार् है, सिर्फ चिकित्सार् यार् विज्ञार्न के स्वीकृति उद्देश्यों को छोड़कर। ऊपर बताइ गर्इ कार्रवाइयों के अतिरिक्त नशीली दवार्ओं और सयार्कोट्रार्पिक तत्वों के अवैध व्यार्पार्र में निम्नलिखित शार्मिल हैं:

  1. नशीली दवार्ओं और सार्यकोट्रार्पिक पदाथो की गतिविधियों में भार्ग लेनार्; 
  2. उपर्युक्त किसी भी कार्रवाइ क प्रबंध यार् उसके लिए किसी स्थार्न को किरार्ये पर देनार्; 
  3. उपरोक्त किसी भी कार्रवाइ के लिए, सीधे यार् परोक्ष रूप से धन लगार्नार्; 
  4. उपरोक्त कार्रवाइयों को आगे और बढ़ार्ने यार् उनमें मदद करने के लिए उकसार्नार् यार् शड़यंत्र रचनार्; और 
  5. उपरोक्त कार्रवाइयों में संलग्न व्यक्तियों को आश्रय देनार्। यद्यपि इस अधिनियम के अन्तर्गत, अपरार्धियों के लिए कड़े दण्ड/सजार् निर्धार्रित की गर्इ हैं तो भी जो लोग इसके आदी (व्यसनी) हैं वे अगर स्वेच्छार्ने यार् से आदत छुड़ार्ने यार् व्यसन-मुक्त होने के लिए किसी अस्पतार्ल यार् स्वयंसेवी संगठन से इलार्ज करार्ने के लिए तैयार्र हों तो उन्हें दण्ड/सजार् से छूट दी जार् सकती है। 

नशीली दवार्एँ और सार्यकोट्रार्पिक पदाथो के अवैध व्यार्पार्र रोकथार्म अधिनियम, 1988 : नशीली दवार्ओं और सार्यकोट्रार्पिक पदाथो के अवेध व्यार्पार्र ने जनतार् के स्वार्स्थ और कल्यार्ण के समबंध में गंभीर खतरार् पैदार् कर दियार् है। अवैध व्यार्पार्र में भार्ग लेने वार्ले व्यक्तियों की गतिविधियार्ं रार्ष्ट्रीय अर्थव्यवस्थार् पर भी घार्तक प्रभार्व डार्लती हैं। इस तरह की गतिविधियों को प्रभार्वी ढ़ग से रोकने के लिए कुछ मार्मलों में व्यक्तियों को कारार्वार्स में रखने की भी व्यवस्थार् की गर्इ है।

पशुओं के सार्थ नृशंसतार् क व्यवहार्र 

पशुओं के सार्थ नृषंस व्यवहार्र रोकथार्म अधिनियम,1985:इस अधिनियम में पशुओं को अनार्वश्यक पीड़ार् देने और कष्ट देने को रोकने के लिए प्रार्वधार्न है। जिस व्यक्ति के पशुओं की देखभार्ल करने यार् नियंत्रण रखने की जिम्मेदार्री है, उसक कत्र्तव्य है कि वह उस पशु को ठीक ठार्क रखने और उसे किसी प्रकार के कष्ट यार् प्रहार्र से बचार्ने के लिए सभी उपयुक्त कदम उठार्ए।

अधिनियम में पशुओं के सार्थ नृशंसतार् क व्यवार्िर करने पर दण्ड की व्यवस्थार् है। अपने पशुओं को कोड़े लगार्नार्, ठोकर मार्रनार्, दौड़ार्-दौड़ार् कर थकानार्, अधिक भार्र लार्दनार्, घोर यंत्रणार् देनार्, पशु से ऐसी मेहनत क काम करार्नार् जिसके लिए वह योग्य न हो, पशु को घार्तक ओशधी यार् कोर्इ पदाथ खिलार्नार्, पशु को ऐसे ढ़ंग से भेजनार् यार् ले जार्नार् जिससे उसको अनार्वश्यक पीड़ार् हो, पशु को अनुपयुक्त आकार के पिंजरे में रखनार् यार् बन्द करनार्, पर्यार्प्त खार्नार् यार् पार्नी यार् रहने की जगह न देनार् आदि नृशंसतार् कहे जार्ते हैं।

वन्य जीवन और पर्यार्वरण 

वन्य जीवन (सुरक्षार्) अधिनियम,1972 : इस अधिनियम क उद्देश्य, जंगली जार्नवरों, पक्षियों और पौघों को सुरक्षार् प्रदार्न करनार् है। यह वन्य पशुओं यार् पशु-जन्य वस्तुओं, यार् विनिर्दिश्ट पौधों यार् उसके किसी भार्ग यार् उससे व्युत्पन्न चीजों के परिवहन पर प्रतिबन्ध लगार्तार् हैं। यह काम सिर्फ चीफ वार्इल्ड लार्इफ वाडन यार् अन्य प्रार्धिकृत अधिकारी की अनुमति लेकर ही कियार् जार् सकतार् है। यह अधिनियम निम्नलिखित को भी निषेध करतार् है:

  • किसी तरीके से व्यार्पार्र करनार्: 
  1.  अनुसूचित पशु से बनी वस्तुओं क निर्मार्तार् यार् व्यार्पार्री, यार् 
  2.  आयार्तित हार्थी दन्त यार् उससे बनी वस्तुओं क व्यार्पार्री यार् ऐसी वस्तुओं क नर्मार्तार् यार् 
  3. अनुसूचित पशुओं यार् ऐसे पशुओं के अंगों के संबंध में चर्म प्रसार्धक (चर्म में भूसार् भर कर जीव क रूप देने वार्लार्), यार् 
  4. अनुसूचित पशु से व्युत्पन्न  यार्  क व्यार्पार्री, यार्
  5.  बंधक पशुओं जो की अनुसूचित पशु हो, क व्यार्पार्री यार् 
  6.  किसी अनुसूचित पशु से व्यत्पन्न मार्ंस क व्यार्पार्री, यार् 

किसी अनुसूचित पशु से निकाले गए मार्ंस को किसी भोजनार्लय में पकानार् यार् उसको परोसनार्। पर्यार्वरण (संरक्षण) अधिनियम,1986:इस अधिनियम क विधार्न मार्नव सम्बंधी पर्यार्वरण के संरक्षण और उसमें सुधार्र लार्ने के लिए कियार् गयार् है। मार्नव सम्बंधी पर्यार्वरण में, पार्नी, हवार् और जमीन तथार् पार्नी, हवार् और जमीन और मार्नव जीवन अन्य जीव जन्तुओं, पौधों, सूक्ष्म जीवों और सम्पत्ति के बीच जो अन्तरंग सम्बन्ध है, वे सभी समार्विश्ट होते हैं। यह अधिनियम किसी भी व्यक्ति को निम्नलिखित काम करने से मनार् करतार् है:-

  1.  कोर्इ उद्योग संक्रियार् यार् प्रक्रियार् चलार्/कर रहे व्यक्ति द्वार्रार्, पर्यार्वरण को प्रदूशित करने वार्लार् तत्व छोड़नार् यार् निर्धार्रित मार्नक से अधिक मार्त्रार् में छोड़ने की अनुमति देनार्, 
  2.  किसी खतरनार्क तत्व को धार्रण करनार् यार् किसी से धार्रण करनार् यार् किसी से धार्रण करवार्नार्, सिवार्य उन परिस्थितियों को छोड़कर जब निर्धार्रित प्रक्रियार् अपनाइ गर्इ हो और निर्धार्रित सुरक्षार् के उपार्य अपनार्ए गए हों। 

इस अधिनियम के प्रार्वधार्नों क उल्लंघन करने पर दण्ड दियार् जार् सकतार् है। सरकार की ओर से यार् किसी व्यक्ति की ओर से की गर्इ शिकायत पर अदार्लत उस अपरार्ध पर विचार्र करेगी, अगर उस व्यक्ति ने तथार्कथित अपरार्ध के सम्बंध में कम से कम 60 दिन क नोटिस दियार् हो और शिकायत करने की अपनी मंशार् प्रकट की हो।

नार्गरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 के अनुच्छेद 17 द्वार्रार् छुआछुत को समार्प्त कर दियार् गयार् है और इसकी किसी भी रूप में अपनार्ने की मनार्ही है। इस सत्यनिश्ठ बचनबद्धतार् को लार्गू करने के लिए नार्गरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 बनार्यार् गयार् है।

‘छुआछूत’ की परिभार्षार् किसी भी कानून में नहीं की गर्इ है। इसमें कठोर भार्रतीय जार्ति प्रार्थार् के अन्तर्गत स्वीकृत रूढ़ि, रिवार्ज शार्मिल हैं, जिनके अनुसार्र अनुसूचित जार्ति के लोगों को हिन्दू मन्दिरों सावजनिक स्थार्नों, गलियों, सावनिक वार्हनों, भोजनार्लयों, शिक्षार् संस्थार्नों, आदि में प्रवेश से वंचित रखार् गयार् थार्।

यह अधिनियम ‘छुआछुत’ के आधार्र पर निम्न रिवार्जों पर रोक लगार्तार् है:- जैसे कि मन्दिर में प्रवेश और पूजार् अर्चनक करने, दुकानों और भोजनार्लयों में जार्ने, कोर्इ पेशे यार् व्यार्पार्र करने, पार्नी के स्रोतों, सावजनिक स्थलों और आवार्सीय स्थार्नों, सावजनिक परिवहन, अस्पतार्ल, शिक्षार् संस्थार्नों क प्रयोग करने, आवार्सीय स्थार्नों क निर्मार्ण और उनमें रहने, धामिक संस्कार करार्ने, आभूषणों और सुन्दर वस्तुओं को धार्रण करने आदि को रोकने में जोर जबरदस्ती करनार्।

इस प्रकार, छुआछुत के आधार्र पर किसी अनुसूचित जार्ति के व्यक्ति को कूड़ार् कर्कट उठार्ने, यार् सफाइ के लिए झार्डू लगार्ने, किसी शव को उठार्के ले जार्ने, किसी जार्नवर की खार्ल खीचने यार् इसी तरह क कोर्इ अन्य काम करने के लिए मजबूर करनार् इस अधिनियम के तहत निशिद्ध है और दण्डनीय है। इसक सार्थ ही, अगर कोर्इ व्यक्ति प्रत्यक्ष यार् परोक्ष रूप में किसी भी तरह छुआछुत यार् इसके किसी भी रूप में व्यवहार्र करने पर उपदेश देतार् है, यार् ऐतिहार्सिक, आध्यार्त्मिक यार् धामिक आधार्र पर, यार् जार्ति प्रथार् के आधार्र पर यार् किसी पर अन्य आधार्र यार् कारणों से छुआछुत के व्यवहार्र को सही ठहरार्तार् है तो वह दण्डनीय है।

अनुसूचित जार्ति और अनुसूचित जनजार्ति (नृशंसतार् निषेध) अधिनियम, 1989 : इस अधिनियम के अन्तर्गत अनुसूचित जार्ति और अनुसूचित जनजार्ति के सदस्यों पर नृशंसतार् क व्यवहार्र करने पर रोक लगार्ने, और इस प्रकार के अपरार्धों की सुनार्वाइ के लिए विशेष न्यार्यार्लय स्थार्पित करने और इस अपरार्धों से पीड़ित लोगों को रार्हत और पुनर्वार्स करने की व्यवस्थार् की गर्इ है। अधिनियम की धार्रार् 3 में किसी गैर SC|ST व्यक्ति द्वार्रार् किये जार्ने वार्ले नृशंसतार् के व्यवहार्र, जिसके लिये सजार् हो सकती है, की सूची में निम्लिखित शार्मिल हैं:-

  1. किसी अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य को खरार्ब यार् घृणित वस्तु खार्ने यार् पीने के लिए मजबूर करनार्; 
  2.  अनुसूचित जार्ति यार् किसी अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य को चोट पहुँचार्ने, अपमार्न करने यार् खिजार्ने, परेषार्न करने के लिए उसके परिसर यार् पड़ोस में मल मूत्र, कूड़ार् कर्कट, शव यार् किसी अन्य घृणित तत्व क ढ़ेर लगार्नार्; 
  3.  किसी अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जार्ति जनजार्ति के सदस्य के जबरदस्ती कपड़े उतार्रनार्, यार् उसको नग्न करके, यार् मुँह यार् जिस्म पर कालिख पोत कर, खुले आम परेड़ करार्नार् यार् मार्नव सम्मार्न को ठेस पहुँचो वार्लार् अन्य कोर्इ काम करनार्; 
  4.  किसी अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य की भूमि, यार् उसे अलार्ट की गर्इ यार् सक्षम प्रार्धिकारी द्वार्रार् अलार्ट किये जार्ने के लिए अधिसूचित भूमि को अवैध तरीके से कब्जार् करनार् यार् उस पर खेती करनार् यार् उसको अलार्ट की गर्इ जमीन को अपने नार्म हस्तार्न्तरित करार् लेनार्; 
  5.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य को उसकी जमीन यार् परिसर से अवैध तरीके से बेदखल करनार् यार् किसी भूमि, स्ार्िार्न यार् पार्नी क प्रयोग करने में बार्धार् डार्लनार्; 
  6.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य को बेगार्र करने यार् इसी तरह की कोर्इ लेबर यार् बंधुआ मजदूर क काम करने के लिए मजबूर करनार् यार् प्रलोभन देनार्, सिवार्य उन अनिवाय सेवार्ओं के जो सरकार द्वार्रार् समार्ज सेवार् के रूप में उसको सौंपी गर्इ हों: 
  7.  अनुसूचत जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य को जबरदस्ती यार् डरार् धमक कर वोट देने से रोकनार्, यार् किसी एक खार्स व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर करनार् यार् कानून के विरूद्ध किसी भी तरीके से वोट के लिए कहनार्; 
  8. अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य के खिलार्फ झूठार्, दुर्भार्वपूर्ण यार् कश्ठप्रद मुकदमार् यार् अपरार्धिक कानूनी कार्रवाइ करनार्; 
  9.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति सदस्य के सम्बंध मे झूठी यार् ओछी जार्नकारी किसी सरकारी कर्मचार्री को देनार् और उसके परिणार्मस्वरूप उस सरकारी कर्मचार्री द्वार्रार् उसऋष्रु+ष्ऋ व्यक्ति को चोट पहँुचार्ने यार् परेषार्न करने के कानून के तहत उसे मिली शक्ति क प्रयोग करवार्नार्; 
  10.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य को सावजनिक स्थार्न पर जार्नबूझकर बेइज्जत करनार् यार् परेषार्न करनार् तार्कि उसको नीचार् दिखार्यार् जार्ए; 
  11.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति की किसी महिलार् पर उसक अपमार्न यार् बलार्त्कार की नीयत से प्रहार्र करनार् यार् उसके खिलार्फ तार्कत क इस्तेमार्ल करनार्; 
  12.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति की महिलार् की इच्छार् शक्ति पर हार्वी होने की स्थिति में होते हुए, इस स्थिति क इस्तेमार्ल करके उसक यौन शोषण करनार्, जिसके लिए अन्यथार् वह रार्जी न हो; 
  13.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्यों द्वार्रार् सार्धार्रणतयार् प्रयोग में लार्ये जार्ने वार्ले पार्नी के झरने, जलार्षय यार् किसी अन्य स्रोत के जल को दूशित करनार् यार् गंदलार् करनार् तार्कि वह सार्मार्न्य प्रयोग के लिए पूर्णतयार् उपयोगी न रहे; 
  14.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्यों को किसी सावजनिक स्थल जार्ने के लिए मनार् करनार् यार् उस सदस्य को किसी सावजनिक स्थार्न क प्रयोग करने से रोकने जहार्ँ जनसार्मार्न्य के अन्य सदस्यों यार् किसी एक वर्ग के लोगों क उसे प्रयोग करने क अधिकार हो;
  15.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य को अपनार् घर गार्ँव यार् आवार्स क अन्य स्थार्न छोड़ने के लिए मजबूर करनार् यार् ऐसी किसी कार्रवाइ में भार्ग लेनार्; 
  16.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के किसी सदस्य को किसी अपरार्धार् जो तत्काल कानून के मुतार्बिक मृत्यु दण्डनीय अपरार्ध हो, में फंसार्ने की नीयत से झूठे सबूत पेश करने यार् जार्लसार्जी करने पर, उस व्यक्ति को आजीवन कारार्वार्स और जुर्मार्ने क दण्ड दियार् जार् सकतार् है, ऐसे झूठे यार् जार्लसार्जी के सबूत के परिणार्मस्वरूप अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति क कोर्इ निर्दोश सदस्य अपरार्धी घोशित करके सूली पर चढ़ार् दियार् जार्तार् है, तो जो व्यक्ति वह झूठार् सबूत पेश करतार् है यार् जार्लसार्जी करतार् है तो उसको मृत्यु दण्ड दियार् जार्एगार्; 
  17.  अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के किसी सदस्य को किसी अपरार्धार् जिसके लिए मृत्यदण्ड की जगह सार्त सार्ल यार् इससे अधिक के कारार्वार्स की सजार् दी जार् सकती है, में फंसार्ने की नियत से झूठे सबूत पेश करने यार् जार्लसार्जी करने पर, ऐसे व्यक्ति को कारार्वार्स जो छ: महीने से कम नहीं होगार्, लेकिन सार्त सार्ल यार् उससे अधिक हो सकतार् है और जुर्मार्न के दण्ड क भार्गी होगार्; 
  18. अगर कोर्इ व्यक्ति अग्नि यार् विस्फोटक पदाथ के द्वार्रार् कोर्इ ऐसी “ार्रार्रत करतार् है, यह जार्नते हुए और मंषार् रखकर कि उससे वह किसी अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्य की सम्पत्ति को हार्नि पहुँचार्एगार्, तो वह कम से कम छ: महीने और अधिकतम सार्त वर्ष के कारार्वार्स और जुर्मार्ने के दण्ड क भार्गी होगार्; 
  19.  अगर कोर्इ व्यक्ति अग्नि यार् विस्फोटक पदाथ के द्वार्रार् कोर्इ ऐसी शरार्रत करतार् है, यह जार्नते हुए और मंषार् रखकर कि उससे कोर्इ ऐसी इमार्रत ध्वस्त यार् नश्ट हो जार्एगी जिसक सार्मार्न्यतयार् उपयोग पूजार् पार्ठ के लिए यार् मनुष्यों के आवार्स के लिए यार् सम्पत्ति रखने के लिए अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति के सदस्यों द्वार्रार् कियार् जार्तार् है, तो वह व्यक्ति आजीवन कारार्वार्स और जुर्मार्ने के दण्ड क भार्गी होगार्; 
  20.  अगर भार्रतीय दंड संहितार् (1860 क 45)के तहत किसी व्यक्ति यार् संपत्ति के विरूद्ध कोर्इ ऐसार् अपरार्ध करतार् है जो दस वर्ष यार् इससे अधिक अवधि के कारार्वार्स से दण्डनीय हो इस आधार्र पर कि वह व्यक्ति अनुसूचित जार्ति यार् अनुसूचित जनजार्ति क सदस्य है, यार् वह सम्पत्ति ऐसे सदस्य की है, तो वह व्यक्ति आजीवन कारार्वार्स और जुर्मार्ने के दण्ड क भार्गी होगार्; 
  21.  जार्नबूझकर यार् कुछ कारणों से यह विश्वार्स रखते हुए कि इस अध्यार्य के तहत कोर्इ अपरार्ध कियार् गयार् है उस अपरार्ध के सबूत को नश्ट करतार् है तार्कि कानून सजार् न दे सके यार् कोर्इ जार्नकारी देतार् है जो कि वह जार्नतार् है कि झूठी है, तो वह उस अपरार्ध के लिए दिए जार्ने वार्ल दण्ड क भार्गी होगार्; 
  22.  एक सरकारी कर्मचार्री होते हुए इस धार्रार् के अधीन कोर्इ अपरार्ध करतार् है। 

 कैदी 

कारार्गृह अधिनियम,1894 : इस अधिनियम क उद्देश्य है कैदियों के लिए उपयुक्त और स्वस्थ वार्तार्वरण प्रदार्न करनार्। यार् अधिनियम मार्ंग करतार् है:-

  1. निम्नलिखित के कारार्वार्स में पृथक स्थार्न की व्यवस्थार् की जार्ए:- 
  1. पुरूष और महिलार् कैदियों के लिए अलग-अलग,
  2. 21 वर्ष से कम आयु के पुरूष कैदियों के लिए, अन्य पुरूष कैदियों से अग, 
  3. छीवार्नी कैदियों के लिए आपरार्धिक कैदियों से अलग,  गैर सजार्यार्फतार् अपरार्धिक कैदियों के लिए सजार्यफतार् आपरार्धिक कैदियों से अलग। 
  1.  एक दीवनी कैदी यार् गैर-सजार्यफतार् आपरार्धिक कैदी को अपनार् रख-रखार्व स्वयं करने की अनुमति दी जार्ए और वह अपने लिए भोजन, कपड़े, बिस्तार्र यार् अन्य आवश्यक वस्तुएं निजी स्रोतों से खरीद, सके, 
  2.  एक दीवार्नी कैदि यार् गैर-सजार्यफतार् अपरार्धिक कैदी अगर निजी स्रोतों से आवश्यक कपड़े और बिस्तर की व्यवस्थार् नहीं कर सकते तो उन्हें इन वस्तुओं की आपूर्ति की जार्ए, 
  3. छीवार्नी कैदियों को अपनार् व्यार्पार्र यार् पेशार् रखने की इजार्जत दी जार्ए; 
  4. बीमार्र कैदियों के लिए किसी मेडिकल सबाडिनेट द्वार्रार् यार् अस्पतार्ल में आवश्यक औशधियों और चिकित्सार् की व्यवस्थार् की जार्ए। इसके अतिरिक्त, बंधक अधिनियम 1900 की यह मार्ंग है कि उन्मार्दी (पार्गल) कैदियों को किसी पार्गलखार्ने यार् किसी अन्य सुरक्षित स्थार्न पर रखार् जार्ए।

निर्धनों के लिए कानूनी सहार्यतार् 

अधिवक्तार् अधिनियम, 1961 रू इस अधिनियम में बार्र काउंसिल ऑफ इंडियार् और स्टेट बार्र काउंसिल स्थार्पित करने की व्यवस्थार् है जो प्रार्थमिक तौर पर भार्रत में कार्यरत वकीलों की कार्यवार्ही को नियमित करे और भार्रत में कानून के व्यवसार्य के विकास और उत्थार्न क काम करें। इस क्षेत्र में बार्र काउंसिलों को कुछ खार्स सार्मार्जिक जिम्मेदार्रियार्ं भी सौंपी गर्इ उनसे यह अपेक्षार् की जार्ती है कि:-

  • कानून के विषयों पर प्रसिद्ध विधि-वेतार्ओं के सहयोग से सेमिनार्र क आयोजन करे और सीधे बार्तचीत की व्यवस्थार् करे और कानूनी सहार्यतार् की व्यवस्थार् करें, 
  •  निर्धनों के लिए विनिर्दिश्ट तरीके में कानूनी सहार्यतार् की व्यवस्थार् करें, निम्नलिखित के लिए फंड स्थार्पित करें:- 
    •  दरिद्र, विकलार्ंग यार् अन्य एडवोकेटों के लिए कल्यार्णकारी योजनार्ओं के संचार्लन के लिए वित्तीय सहार्यतार् देनार्; 
    •  कानूनी सहार्यतार् और परार्मर्ष प्रदार्न करनार् इस संदर्भ में बने नियमों के अनुसार्र; 
    •  कानूनी पुस्तकालयों की स्थार्पनार् करनार्; 
  •  एक यार् एक से अधिक कानूनी सहार्यतार् समितियार्ं गठित करें। 

सावजनिक सम्पत्ति 

सावजनिक सम्पत्ति को नुकसार्न से रोकथार्म अधिनियम, 1984 :जो व्यक्ति सावजनिक सम्पत्ति के संबंध में कोर्इ शरार्रती कार्रवाइ करतार् है, वह दण्ड क भार्गी होगार्। सावजनिक सम्पत्ति उस चल यार् अचल सम्पत्ति को कहते हैं, जो निम्नलिखित की मिल्कीयत हो यार् उसके कब्जे में हो यार् उसके नियंत्रण में हो-

  1.  केन्द्रीय सरकार; 
  2.  रार्ज्य सरकार; 
  3. कोर्इ स्थार्नीय प्रार्धिकरण; 
  4. कोर्इ वैधार्निक निगम; 
  5. कोर्इ सरकारी कम्पनी; यार् 
  6.  कोर्इ अधिसूचित संस्थार्न, फर्म यार् उद्यम। 

सूचनार् क अधिकार 

सूचनार् क अधिकार कानून, सार्मार्जिक न्यार्य के लिए एक वरदार्न है और इसक प्रयोग आम आदमी और खार्स करके एन0 जी0 ओ0 इस अधिकार को विशेष रूप से विभिन्न सरकारी योजनार्ओं के उचित रूप से अनुपार्लन और समार्ज के निर्धन, पिछड़े और कमजोर वर्गो के लार्भ के लिए निर्धार्ुरित किए गए कार्यो के अनुपार्लन को सुनिश्चित करने के लिए कियार् जार् सकतार् है।

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