उत्पार्द क अर्थ, परिभार्षार् एवं विशेषतार्एँ
सार्मार्न्य अर्थ में, उत्पार्द से तार्त्पर्य उन सभी वस्तुओं एवं सेवार्ओं से है, जिनसे उपभोक्तार्ओं की सन्तुष्टि होती हैं। किन्तु विस्तृत अर्थ में उत्पार्दन क आशय उन सदृश्य, भौतिक एवं रार्सार्यनिक लक्षणों से है जो आसार्नी से पहचार्न में आने वार्ली आकृति, आकार, परिमार्ण आदि में संग्रहित हो, जैसे सार्बुन, जूते, टूथपेस्ट, डिटर्जेन्ट पार्उडर क्रिकेट बेट आदि।

विपणन की दृष्टि से उत्पार्द शब्द अधिक व्यार्पक अर्थ में प्रयुक्त होतार् है। इसके अन्तर्गत प्रत्येक ब्रार्ण्ड एक अलग उत्पार्द है, जैसे टाइड सर्फ व निरमार् दोनों डिरर्जेन्ट पार्उडर पृथक-पृथक उत्पार्द कहलार्येगें। जबकि सार्धार्रण अर्थ में दोनों एक ही उत्पार्द कहलोयेगें। इसी प्रकार यदि एक ही ब्रार्ण्ड के अलग अलग आकार के पैकिंग बनार् दिये जार्ये तो वे भी अलग अलग उत्पार्द होगें, जैसे एंकर, टूथपेस्ट तीन आकारों में उपलब्ध है छोटार्, मध्यम, बड़ार् आकार ये तीन अलग अलग वस्तुएँ कहलार्येगी। यदि वस्तु के आकार के अतिरिक्त रंग, पैंकिग एवं डिजार्यन आदि में परिवर्तन है तो प्रत्येक अलग अलग वस्तु बन जार्ती है। अत: विपणन में उत्पार्द क आशय उन वस्तुओं एवं सेवार्ओं से जो दृश्य यार् अदृश्य हो, किसी भी आकार गुण यार् मार्त्रार् में हो, जिनकों उपभोक्तार् अपनी आवश्यकतओं को सन्तुष्ट करने के लिये प्रयोग करते है।

इस प्रकार, उपभोक्तार्ओं के लिये उत्पार्द उपयोगितार्ओं, लार्भों यार् सुविधार्ओं क पुलिन्दार् है। जबकि विपणनकर्तार्ओं के लिये उत्पार्द उन गुणों एवं विशेषतार्ओं क पुलिन्दार् है जिनसे उपभोक्तार्ओं की आवश्यकतार्ओं को सन्तुष्ट कियार् जार् सकतार् है। इसी प्रकार एक सार्मार्न्य व्यक्ति भी अपनी सोच एवं समझ के अनुसार्र उत्पार्द की अवधार्रणार् बनार् लेते है। किन्तु समग्र एवं व्यार्पक दृष्टिकोण से उत्पार्द की अवधार्रणार् के सम्बन्ध में कहार् जार् सकतार् है कि उत्पार्द मूर्त तथार् अमूर्त गुणों, लक्षणों से युक्त वह कोर्इ भी चीज है, जिसे ग्रार्हकों की आवश्यकतार्ओं की सन्तुष्टी के लिये बार्जार्र में विक्रय हेतु प्रस्तुत कियार् जार्तार् है।

  1. एल्डरसन के अनुसार्र, ‘‘उत्पार्द उपयोगितार्ओं की एक गठरी है जिसमें उत्पार्द के विभिन्न लक्षण एवं उसके सार्थ दी जार्ने वार्ली सेवार्एँ सम्मिलित हैं।’’ 
  2. आर.एस. डार्वर के अनुसार्र ‘‘विपणन के दृष्टिकोण से उत्पार्द को उन सुविधार्ओं क पुलिन्दार् कहार् जार् सकतार् है, जो कि उपभोक्तार्ओं को प्रस्तुत कियार् जार्तार् है।’’ 
  3. विलियम जे. स्टेन्टन के अनुसार्र, ‘‘उत्पार्द दृश्य एवं अदृश्य विशेषतार्ओं क एक सम्मिश्रण है जिसके अन्तर्गत पैकेजिंग, रंग, मूल्य, निर्मार्तार् की ख्यार्ति, फुटकर विक्रेतार् की ख्यार्ति तथार् निर्मार्तार् एवं फुटकर विक्रेतार् द्वार्रार् दी जार्ने वार्ली वे सेवार्एँ भी सम्मिलित है, जिन्हें उपभोक्तार् अपनी आवश्यकतार्ओं को सन्तुष्ट करने के लिये स्वीकार कर सकतार् है।’’ 
  4. फिलिप कोटलर के शब्दों में, ‘‘उत्पार्द कोर्इ भी ऐसी चीज है जिसे किसी इच्छार् यार् आवश्यकतार् की सन्तुष्टि के लिए बार्जार्र में प्रस्तार्वित कियार् जार् सकतार् है। विपणन किये जार्ने वार्ले उत्पार्दों में भौतिक मार्ल, सेवार्एँ, अनुभव, घटनार्एँ, व्यक्ति, स्थार्न, सम्पदार्एँ, संगठन, सूचनार्एँ एवं विचार्र शार्मिल है।’’ 

उत्पार्दों की विशेषतार्एँ –

  1. उत्पार्द कोर्इ भी चीज – उत्पार्द कोर्इ भी चीज हो सकती है जिसे उपयोग यार् उपयोग हेतु बार्जार्र में बेचने के लिए प्रस्तार्वित कियार् जार्तार् है एवं उसे व्यक्तियों द्वार्रार् खरीदार् जार्तार् है। 
  2. उत्पार्द दृश्य एवं अदृश्य होते है – उत्पार्द दृश्य एवं अदृश्य होते हैं। दृश्य उत्पार्द वे होते हैं जिन्हें देखार् यार् स्पर्श कियार् जार् सकतार् है, जैसे- टी.वी. , फ्रिज, कूलर, पैन, मोटर सार्इकिल, मोटरकार एवं टेबल कुर्सी आदि। इसके विपरीत अदृश्य उत्पार्द वे होते है, जिन्हें न देखार् जार् सकतार् है और न ही स्पर्श कियार् जार् सकतार् है, जैसे-ख्यार्ति। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की सेवार्एँ (वित्तीय, संवर्द्धनार्त्मक, कानूनी, विपणन, शोध एवं कम्प्यूटर प्रोग्रार्मिंग आदि) सूचनार्एँ विचार्र, स्थार्न, घटनार्एँ तथार् व्यक्तित्व आदि भी अदृश्य उत्पार्द में सम्मिलित हैं। इसलिये स्टेन्टन ने कहार् कि, ‘‘उत्पार्द दृश्य एवं अदृश्य विशेषतार्ओं क एक सम्मिश्रण है।’’ 
  3. ब्रार्ण्ड यार् ट्रेडमाक नार्म – प्रत्येक उत्पार्द ब्रार्ण्ड़ यार् टे्रडमाक नार्म क होतार् है, तार्कि आसार्नी से जार्नार्-पहचार्नार् एवं बेचार् जार्तार् है, जैसे हीरो होण्डार्, हरक्यूलिस सार्इकिल, सेमसंग टी.वी., हवार्महल गुंजन टी.वी. टार्इटन घड़ी एवं खेतार्न पंखे आदि। यही नहीं, यदि एक ही ब्रार्ण्ड के अलग-अलग पैंकिंग यार् सार्इज बनार् दिये जार्ये तो वे भी अलग-अलग उत्पार्द होंगें। इसलिए यह कहार् जार्तार् है कि उत्पार्द एवं पैंकेजिंग क गहरार् सम्बन्ध है। 
  4. विशिष्ट गुण – उत्पार्द की एक विशेषतार् यह भी है कि प्रत्येक उत्पार्द में कुछ विशिष्ट गुण होते है, जैसे-रूप, रंग, आकार, भार्र, किस्म, स्वार्द, मार्त्रार्, आकर्षण एवं सुविधार् आदि। इसलिए कुछ लोग किसी उत्पार्द को प्रतिष्ठार् क प्रतीक मार्नते है तो कुछ अन्य लोग अच्छी निश्पार्दन क्षमतार् क प्रतीक मार्नते है। 
  5. उत्पार्द क नार्म – प्रत्येक उत्पार्द क एक सार्मार्न्य यार् जार्तिगत नार्म होतार् है, जिससे उसे जार्नार् पहचार्नार् जार्तार् है एवं उच्चार्रण करके बेचार् तथार् खरीदार् जार्तार् है। उदार्हरण के लिए, कैंची, पैन, सार्बुन, टॉफी, चार्कलेट, घड़ी, मूर्ति एवं चश्मार् आदि। 
  6. मूल्य – प्रत्येक उत्पार्द क एक मूल्य होतार् है। यह मूल्य उत्पार्दकों यार् निर्मार्तार्ओं यार् विक्रेतार्ओं द्वार्रार् निर्धार्रित कियार् जार्तार् है। इसके पश्चार्त् निर्धार्रित मूल्य के बदले उसे बार्जार्र में विक्रय हेतु प्रस्तार्वित कियार् जार्तार् है और क्रेतार्ओं द्वार्रार् क्रय कियार् जार्तार् है। 
  7. लार्भ एवं उपयोगितार् – उत्पार्द कोर्इ भी ऐसी चीज है जो क्रेतार्ओं को कर्इ लार्भ एवं उपयोगितार् प्रदार्न करते है। परिणार्मस्वरूप उनके द्वार्रार् बार्र-बार्र क्रय कियार् जार्तार् है। 
  8. इच्छार्ओं एवं आवश्यकतार्ओं की सन्तुष्टि – उत्पार्द में इच्छार्ओं एवं आवश्यकतार्ओं की सन्तुष्टि करने की क्षमतार् होती है। इस सम्बन्ध में फिस्क ने कहार् कि ‘‘उत्पार्द मनोवैज्ञार्निक सन्तुष्टियों क एक पुलन्दार् है’’। यदि उत्पार्द में इच्छार्ओं एवं आवश्यकतार्ओं की सन्तुष्टि करने की क्षमतार् नहीं होती है तो विपणन की दृष्टि से उसे उत्पार्द नहीं कहार् जार् सकतार् है। 
  9. उत्पार्द मिश्रण – प्रत्येक उत्पार्द किसी विपणनकर्तार् द्वार्रार् विपणन किये जार्ने वार्ले उत्पार्द मिश्रण (उत्पार्द समूह यार् श्रृंखलार्) क भार्ग होतार् है। विपणनकर्तार् ही नहीं बल्कि प्रत्येक उपभोक्तार् भी प्रत्येक उत्पार्द को सम्पूर्ण उत्पार्द मिश्रण के सन्दर्भ में ही देखतार् है और व्यवहार्र करतार् है। 
  10. संचार्र क मार्ध्यम – उत्पार्द संचार्र क एक अच्छार् मार्ध्यम है क्योंकि इससे अनेक बार्तों की जार्नकारी हो जार्ती है और यही सब कुछ अपने बार्रे में बतार् देतार् है। जैसे – किसने उत्पार्दित यार् निर्मित की है, यह किसके लिए उपयोगी है- महिलार्ओं, पुरूषों एवं बच्चों के लिए, इसक कितनार् मूल्य, भार्र और इसे किस कार्य के लिए उपयोगी बनार्यार् गयार् है आदि। 
  11. उत्पार्द जीवन चक्र – उत्पार्द की एक विशेषतार् यह भी है कि प्रत्येक उत्पार्द क एक जीवन चक्र होतार् है। अत: प्रत्येक उत्पार्द भी जन्म लेतार् है, धीरे-धीरे विकास होतार् है और वह परिपक्वतार् की और बढ़तार् है, तत्पश्चार्त् संतृप्त होने के उपरार्न्त पतन यार् मृत्यु की ओर अग्रसर हो जार्तार् है। इस प्रकार प्रत्येक उत्पार्द जन्म से मृत्यु तक की क्रमार्गत अवस्थार्एँ पार्र करते हुए अपनार् जीवन चक्र पूरार् कर लेतार् है। इस सम्बन्ध में स्टेन्टन ने कहार् कि, ‘‘उत्पार्द को अपने प्रस्तुतीकरण से लेकर पतन तक विभिन्न अवस्थार्ओं और प्रतिस्पर्द्धार्त्मक वार्तार्वरणों से गुजरनार् पड़तार् है।’’
  12. उत्पार्द एवं पैंकेजिंग क गहरार् सम्बन्ध – उत्पार्द एवं पैंकेजिंग क गहरार् सम्बन्ध है। कभी-कभी उत्पार्द को पैंकेजिंग से अलग करनार् सम्भव नहीं होतार् है। उदार्हरणाथ शेविंग क्रीम टूथपेस्ट, सैन्ट, आदि को पैंकजिंग से दूर नही कियार् जार् सकतार् है। अत: ऐसे उत्पार्द क अस्तित्व ही पैंकेजिंग पर निर्भर करतार् है।

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