इतिहार्स क अर्थ, परिभार्षार्, वर्गीकरण
इतिहार्स की व्यत्पत्ति जर्मन शब्द ‘गेस्चिचटे’ से मार्नी जार्ती है, जिसक अर्थ है विगत घटनार्ओं क विशेष एवं बोधगम्य विवरण। इति-ह-आस में अंतिम शब्द अधिक महत्व रखतार् है, क्योंकि इसक उल्लेख प्रार्चीन वार्डग़्मय में बहुत स्थार्नों पर हुआ है। ‘इतिहार्स’ शब्द तीन शब्दों से मिल कर बनार् है ‘इति-ह-आस’। जिसक अर्थ है- ‘निश्चित रूप से ऐसार् हुआ।’ रेनियर ने हिस्ट्री को एक ‘स्टोरी’ के रूप में प्रस्तुत कियार् है, जिसके अनुसार्र इतिहार्स को ‘हिस्ट्री’ नहीं मार्नार् जार् सकतार्। रेनियर ने हिस्ट्री शब्द के ‘हि’ शब्द को अलग करके ‘स्टोरी’ रूप में देखार् है।

हेरोडोट्स ने इतिहार्स के लिए पहली बार्र ‘हिस्ट्री’ शब्द क प्रयोग कियार् है। ग्रीक भार्षार् क ‘हिस्तोरे’ शब्द इतिहार्सकार के लिए प्रयुक्त है, जो वार्द-विवार्द क निर्णय करने में समर्थ होतार् थार्, अर्थार्त वह विषय क अच्छार् ज्ञार्तार् होतार् थार्। हेरोडोट्स ने ‘हिस्ट्री’ शब्द को गवेशण एवं अनुसंधार्न के सार्तत्य से प्रतिपार्दित कियार् थार्।

इतिहार्स की परिभार्षार्

ई. एच. कार के अनुसार्र . वस्तुत: इतिहार्स, इतिहार्सकार तथार् तथ्यों के बीच अंतक्रियार् की अविच्छिन्न प्रक्रियार् तथार् वर्तमार्न और अतीत के बीच अनवरत परिसंवार्द है। डोनल व्ही. गॉरोंस्की के अनुसार्र . इतिहार्स विगत मार्नवीय समार्ज की मार्नवतार्वार्दी एवं व्यार्ख्यार्त्मक अध्ययन है जिसक उद्देश्य वर्तमार्न के सम्बन्ध में अन्तदृष्टि प्रार्प्त करनार् तथार् अनुकूल भविष्य को प्रभार्वित करने की आशार् जार्ग्रत करनार् है। आर. एन. कॉलिंगवुड के अनुसार्र . इतिहार्सकार ऐतिहार्सिक अभिनेतार् के विचार्रों की पुनरार्वृत्ति क अतीत क पुननिर्मार्ण करतार् है।

इतिहार्स क वर्गीकरण

इतिहार्स के विषय-क्षेत्र क स्वरूप सार्मार्जिक आवश्यकतार्ओं के अनुसार्र सदैव विकसित होतार् रहतार् है। अतीतकालिक समार्ज क पूर्ण चित्रण ही इतिहार्स क प्रमुख उद्देश्य होतार् है। किसी भी समार्ज में संबंधित भौगोलिक दशार्, वार्तार्वरण, आर्थिक व्यवस्थार्, रार्जनैतिक, सार्मार्जिक, धामिक, सार्ंस्कृतिक, प्रशार्सनिक, संवैधार्निक, कानून, न्यार्य-व्यवस्थार्, आदि क विवरण आवश्यक होतार् है। इतिहार्स अविभार्ज्य है परन्तु अध्यार्पन की सुविधार् के लिए इसे स्थार्नीय इतिहार्स, प्रार्ंतीय इतिहार्स, रार्ष्ट्रीय तथार् विश्व इतिहार्स में बार्ँटार् गयार् है यार् इसे रार्जनैतिक इतिहार्स, आर्थिक इतिहार्स, एवं सार्मार्जिक इतिहार्स के अंतर्गत बार्ँटार् गयार् है। इस प्रकार इतिहार्स के क्षेत्र के अंतर्गत वे समस्त बार्तें आ गई  जो कि मार्नव मार्त्र के कल्यार्ण, विश्व एकतार्, देश भक्ति के लिए आवश्यक है। अत: इतिहार्स हमें पूर्ण अनुभवों क एक अक्षय कोष प्रदार्न करतार् है। यह कोष वर्तमार्न स्थिति को समझने में बहुत सहार्यतार् प्रदार्न करतार् है। इतिहार्स को इन भार्गों में वर्गीकृत कियार् जार् सकतार् है:-

संवैधार्निक इतिहार्स 

 संवैधार्निक इतिहार्स क रार्जनैतिक इतिहार्स से गहरार् संबंध है। इसके अध्ययन क स्वरूप वस्तुनिष्ठ है जबकि रार्जनैतिक इतिहार्स विषयनिष्ठ होतार् है। सार्मार्जिक जीवन में इसक स्थार्न महत्वपूर्ण होतार् है, क्योंकि यह सार्मार्जिक जीवन क आधार्र है। संवैधार्निक इतिहार्स एक प्रकार से रार्ज्य में स्वार्मित्व के लिए संघर्ष क प्रतीक है, इसकी मुख्य रुचि संस्थार्ओं में रहती है। यदि इतिहार्सकार सही एवं संतोषजनक कहार्नी समार्ज में प्रस्तुत करनार् 63 चार्हतार् है तो उसे अपनी घटनार्ओं, तर्कों, एवं रुचि के लिए रार्जनैतिक इतिहार्स से परे जार्नार् चार्हिए।

आर्थिक इतिहार्स 

 समार्ज के प्रार्रंभ के सार्थ ही आर्थिक इतिहार्स क उदय होतार् है। समार्ज में अपनी आार्जीविक के सार्धनों को किस प्रकार उत्पन्न कियार्, इसक ज्ञार्न आर्थिक इतिहार्स प्रदार्न करतार् है। आर्थिक इतिहार्स के क्षेत्र में मनुष्य कायोर्ं को प्रभार्वित करने वार्ले विचार्र, समार्ज क उद्देश्य, विभिन्न सार्मार्जिक वगोर्ं क पार्रस्परिक संबंध तथार् व्यवहार्र क अध्ययन, आदि विषय होते हैं। इतिहार्सकारों क प्रयार्स यह देखनार् है कि आर्थिक परिस्थितियों के परिणार्मस्वरूप किस प्रकार सार्मार्जिक संबंधों, मार्नवीय व्यवहार्रों, तथार् कार्यों के परिवेश में सार्मार्जिक परिवर्तन है।

सार्मार्जिक इतिहार्स 

सार्मार्जिक इतिहार्स के अंतर्गत लोगों के विचार्र एवं कार्य, दैनिक जीवन, विश्वार्स, आवश्यकतार्, आदत, पूर्वज, आदि के बार्रे में अध्ययन कियार् जार्तार् है। सार्मार्जिक इतिहार्स की अपनी समस्यार्एँ है। इसक अध्ययन रोचक है, किंतु इसकी निरंतरतार्, मंदगति, तथार् परिवर्तन क अध्ययन अत्यंत जटिल है। इतिहार्स क विकास व्यक्तियों तथार् रार्ष्ट्रों से नहीं बल्कि विभिन्न युगीन समार्जों से हुआ है। अत: इतिहार्स की आधार्रशिलार् समार्ज है। अत: सार्मार्जिक इतिहार्स क स्थार्न अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

रार्जनैतिक इतिहार्स 

रार्जनैतिक इतिहार्स इतिहार्स की केंद्रीय स्थिति है, क्योंकि व्यक्ति सावजनिक संस्थार्ओं में ही घटनार्ओं को नियंत्रित करने की इच्छार् अभिव्यक्त करतार् है। रार्जनैतिक इतिहार्स के अंतर्गत रार्ष्ट्रों के पार्रस्परिक संबंधों क वर्णन रहतार् है। इसमें समस्यार्-संबंधी आंतरिक तथार् वार्ह्य परिस्थितियों क उल्लेख नहीं रहतार्। इसके अंतर्गत समस्यार्ओं के समार्धार्न के लिए विभिन्न रार्ष्ट्रों क प्रयार्स तथार् आदार्न-प्रदार्न के पत्रों क विवरण रहतार् है।

सार्ंस्कृतिक इतिहार्स 

सार्ंस्कृतिक इतिहार्स सार्मार्जिक इतिहार्स क अभिन्न अंग है। इसके अंतर्गत रीति-रिवार्ज, संस्कार, शिक्षार्, सार्हित्य, वार्स्तुकलार्, चित्रकलार्, संगीत, तथार् आमोद-प्रमोद के सार्धनों क विवरण रहतार् है। सार्ंस्कृतिक इतिहार्स के अध्ययन को सरल तथार् सुबोध बनार्ने के लिए इतिहार्सकारों ने इतिहार्स-क्षेत्र को तीन भार्गों में वर्गीकृत कियार् है:-

  1. प्रार्चीनकालीन इतिहार्स –  प्रार्चीनकाल मार्नव के प्रार्रंभ से लेकर 1000 ई. तक मार्नार् गयार् है। प्रार्चीनकालीन इतिहार्स के अंतर्गत प्रार्रम्भ से 1000 ई. तक की सार्मार्जिक, आर्थिक, रार्जनैतिक, दाशनिक, तथार् सार्ंस्कृतिक दशार्ओं क अध्ययन कियार् जार्तार् है। 
  2. मध्यकालीन इतिहार्स –  1000 ई. से लेकर 1818 ई. तक के काल को मध्यकाल मार्नार् गयार् है।मध्यकालीन इतिहार्स के अंतर्गत 1000 ई. से लेकर 1818 ई. तक की सार्मार्जिक, आर्थिक, रार्जनैतिक, दाशनिक, तथार् सार्ंस्कृतिक दशार्ओं क अध्ययन कियार् जार्तार् है। 
  3. आधुनिक इतिहार्स – 1818 ई. से वर्तमार्न काल तक क युग आधुनिक युग कहार् गयार् है। आधुनिक इतिहार्स के अंतर्गत 1818 ई. से लेकर वर्तमार्न तक की सार्मार्जिक, आर्थिक, रार्जनैतिक, दाशनिक, तथार् सार्ंस्कृतिक दशार्ओं क अध्ययन कियार् जार्तार् है। 

कानूनी इतिहार्स 

 प्रजार् एवं कानून के मध्य एक उपयोगितार्वार्दी संबंध होतार् है, विभिन्न देशों के न्यार्यार्लयों में अभिसमय महत्वपूर्ण भूमिक निभार्तार् है। कानून के इतिहार्स में व्यवस्थार्पिक द्वार्रार् समय-समय पर बनार्ए गए कानून तथार् उनके विकास की कहार्नी को शार्मिल कियार् जार्तार् है।

     ऐतिहार्सिक भूगोल 

    इसमें इतिहार्स तथार् भूगोल क समार्न अंष होतार् है। स्थार्नीय इतिहार्स को इतिहार्स क महत्वपूर्ण भार्ग मार्नार् जार्तार् है। इसक अध्ययन रोचक होने के सार्थ-सार्थ भविष्य ही संभार्वनार्ओं को उजार्गर करने वार्लार् भी होतार् है। 

    इतिहार्स वार्स्तव में ऐतिहार्सिक श्रोतों, अभिलेखों, एवं संस्मरणों में वर्णित घटनार्ओं क न तो विवरण है और न तो अतीत तथार् वर्तमार्न के बीच अनवरत परिसंवार्द। अधिकतर घटनार्एँ मनुष्य की कृतियार्ँ होती है। उनके पीछे मार्नवीय मस्तिष्क की भूमिक निर्णार्यक होती है।  इतिहार्सकार द्वार्रार् इन घटनार्ओं के अंत:स्थल में प्रवेश कर क्रियार्कलार्पों के परिवेश में मार्नवीय मस्तिष्क को समझनार् ही इतिहार्स है। इतिहार्सकार समसार्मयिक सार्मार्जिक रुचि एवं आवश्यकतार् के अनुसार्र अतीत की घटनार्ओं क निरूपण करतार् है। उसके प्रयार्स क लक्ष्य अतीत एवं वर्तमार्न के बीच ऐसे सेतु क निर्मार्ण करनार् है, जिसके मार्ध्यम से वह 66 समसार्मयिक समार्ज को अतीत क अवलोकन करार्कर अतीत के उद्धरणों द्वार्रार् वर्तमार्न को प्रशिक्षित करे एवं भविष्य क मागदर्शन कर सके।

    तथ्य तथार् इतिहार्सकार के बीच अंतक्रियार् की अविच्छिन्न प्रक्रियार् से उद्भूत इतिहार्स, अतीत तथार् वर्तमार्न के बीच संबद्ध सेतु है। इतिहार्सकार इस सेतु क चक्रीय प्रकाश स्तम्भ है, जिसक प्रमुख अभिप्रार्य समसार्मयिक समार्ज को अतीत क अवलोकन करार्कर वर्तमार्न को प्रशिक्षित करनार् तथार् सुखद एवं सुसंपन्न भविष्य क मागदर्शन करार्नार् है। वर्तमार्न क अविर्भार्व अतीत के गर्भ से हुआ है तथार् अतीत वर्तमार्न की आधार्रशिलार् है और वर्तमार्न की आधार्रशिलार् पर भविष्य निर्भर करतार् है। अतीत के परिवेश  में ही वर्तमार्न क मूल्यार्ंकन संभव है। इतिहार्स मार्नवीय मस्तिष्क की सर्वोत्कृश्ट रचनार् है। इतिहार्स अतीत एवं वर्तमार्न के बीच संपर्क माग पर सेतु है जो अतीत, वर्तमार्न, एवं भविष्य के बीच अवरोध को दूर करके भार्वी पीढ़ी के लिए निश्कंटक माग क दिशार्-निर्देशन करतार् है। इतिहार्स अनुशार्सित शोध क एक रूप है जिसके द्वार्रार् मार्नव मस्तिष्क अपनी जिज्ञार्सार्ओं को शार्न्त करतार् है। इसकी विषय-वस्तु मार्नवीय अतीत है। इतिहार्सकार अपने अनुशार्सन की प्रगति के लिए दूसरे शोधकर्तार्ओं की भॉति समय-समय पर इतिहार्स की प्रकृति और प्रविधिओं पर प्रकाश डार्लते रहते है। इतिहार्स क प्रयोग मार्नव-प्रकृति की क्षमतार्ओं को समझने के लिए तथार् भविष्य में अपने कार्यों को निर्देशित करने के लिए करते है। इतिहार्स संबंधी विचार्र दाशनिक, धामिक, नैतिक और रार्जनैतिक दृष्टिकोण को प्रकट करते हैं, तथार् इतिहार्स संबंधी विचार्र अपने आप को समझने तथार् युग के स्वभार्व को जार्नने में मदद करते है।

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