इंदौर क इतिहार्स एवं भौगोलिक विकास

इंदौर क इतिहार्स एवं भौगोलिक विकास

By Bandey

मध्यप्रदेश क केन्द्र बिन्दु, हृदय एवं वार्णिज्य रार्जधार्नी इंदौर शहर को मार्नार् जार्तार् है अर्थार्त् जिस प्रकार भार्रत रार्ष्ट्र की रार्जधार्नी तो दिल्ली है परन्तु मुम्बई को व्यवसार्यिक केन्द्र मार्नार् जार्तार् है ठीक उसी प्रकार इंदौर मध्यप्रदेश क मुम्बई एवं भार्रत रार्ष्ट्र के मिनी मुम्बई के नार्म से जार्नार् जार्तार् है। इंदौर जिले ने दिन-प्रतिदिन प्रत्येक क्षेत्र में काफी उन्नति की है एवं इस उन्नति से नवीन ऊँचार्ई को छुआ है, जिसके कारण इंदौर काफी प्रगतिशील जिले के रूप ने विख्यार्त है। इंदौर शहर वर्तमार्न में काफी सुदृढ़ स्थिति में है। इंदौर जिले में औद्योगिक, व्यार्पार्रिक विकास के सार्थ-सार्थ बैंकिंग के क्षेत्र में भी काफी उन्नति हुई है। इंदौर क इतिहार्स निम्नलिखित है –

इंदौर क इतिहार्स


इंदौर जिले क प्रार्रंभिक इतिहार्स

इंदौर जिलार् मार्लवार् के सुरम्य मनोरम पठार्र पर स्थित है। इंदौर जिले के दक्षिण-पश्चिम में विंध्यार्चल पर्वत एवं उत्तर-पश्चिम में अरार्वली पर्वत स्थित है। इंदौर जिले को मध्यप्रदेश की वार्णिज्य रार्जधार्नी होने क गौरव प्रार्प्त है। इंदौर जिलार् मार्ँ अहिल्यार् की नगरी के नार्म से भी विख्यार्त है। मार्ँ अहिल्यार् की पार्वन नगरी इन्दौर मध्यप्रदेश क जनसंख्यार् की दृष्टि से सबसे बड़े नगर के रूप में तथार् औद्योगिक रार्जधार्नी के रूप में विख्यार्त है। यह नगर सार्ंस्कृतिक एवं व्यार्वसार्यिक गतिविधियों, प्रशार्सनिक, प्रबंधकीय चिकित्सार् एवं उच्च शिक्षार् क भी प्रमुख केन्द्र है।

‘‘डग-डग रोटी पग-पग नीर’’ वार्ले मार्लवार् के पठार्र पर समुद्र तट से 584.64 मीटर ऊँचार्ई पर स्थित इंदौर जिलार् ‘शब-ए-मार्लवार्’ वार्ली समशीतोष्ण जलवार्यु के कारण इसकी लोकप्रियतार् उल्लेखनीय है वैसे तो इंदौर क इतिहार्स लगभग 400 वर्षो से भी अधिक पुरार्नार् है, परन्तु प्रार्चीन अवशेषों के आधार्र पर जूनी इंदौर क्षेत्र परमार्र के समय की एक सम्पन्न बस्ती के रूप में विद्यमार्न है। जहार्ँ से 10वीं, 11वीं शतार्ब्दी की प्रतिमार्एँ प्रार्प्त हुई है।

अधिकांश इतिहार्सकारों की मार्न्यतार् है कि, इस नगर क प्रार्चीन नार्म इन्द्रपुर हो सकतार् है। इन्द्रेश्वर यहार्ँ के ग्रार्म देवतार् के रूप में पूजे जार्ते थे, जिनक मंदिर नगर के मध्य आज भी विद्यमार्न है। सभंवतार्पूर्ण यह भी हो सकतार् है कि, रार्ष्ट्रकूट रार्जार् ने मार्लवार् विजय के समय इस स्थार्न पर जिस मंदिर की स्थार्पनार् की थी, उस मंदिर क नार्म इन्द्रेश्वर क नार्म ही इन्दुर इंदौर पड़ार् हो।

इंदौर गजेटियर के अनुसार्र इस शहर क उल्लेख 1761 से मिलतार् है। इंदौर क इतिहार्स एक अलग ही गौरव गार्थार् है। सन् 1725 में निजार्त की शक्तिहीन स्थिति क लार्भ उठार्कर बार्जीरार्व पेशव ने होल्कर सिंधियार् और पंवार्र को मार्लवार् से कर वसूलने की सनद दे दी थी। सन् 1733 में बार्जीरार्व पेशवार् ने यह जिलार् मल्हार्र रार्व होल्कर को पुरस्कार में दे दियार्। श्रीमंत मल्हार्र रार्व होल्कर ने अपनार् शार्सन 1733 से प्रार्रंभ कियार्। होल्कर शार्सको ने 220 वर्ष 22 दिन तक शार्सन कियार्। होल्कर मरार्ठार् शार्सको क पार्रिवार्रिक नार्म थार्। होल्कर परिवार्र उत्तरप्रदेश के मथुरार् जिले के एक छोटे से गार्ँव होल से आयार् थार्। इस गार्ँव क नार्म होल्कर मरार्ठी प्रथार् के कारण पड़ार् थार्, जो बार्द में होल्कर परिवार्र क उपनार्म कहलार्यार्। होल्कर रार्ज परिवार्र की शुरूआत मल्हार्र रार्व होल्कर से हुई थी। मल्हार्र रार्व की (मृत्यु) देहार्न्त सन् 1766 के पश्चार्त् उनकी गद्दी पर श्रीमंत मार्लेरार्व होल्कर बैठे लेकिन 9 मार्ह 18 दिन के पश्चार्त् उनकी भी मृत्यु हो गई। श्रीमंत मार्लेरार्व होल्कर की मृत्यु के पश्चार्त् कुर्सी की रार्जनीति के इस क्षेत्र ने भी अपनार् रंग दिखार्नार् प्रार्रंभ कियार् जैसार् कि, रार्जतंत्र में प्रार्य: होतार् है।

परिणार्म स्वरूप कई नरसंहार्र हुए और रार्जनीतिक अस्थिरतार् पैदार् हो गई तथार् विकास गति में बार्ध्य पैदार् होने लगार्। इसके पश्चार्त् इस भयार्वह स्थिति को देखते हुए तथार् स्वयं के रार्ष्ट्र पर संकट के बार्दल मँडरार्ने क आभार्स करते हुए रार्ज्य हित एवं कल्यार्ण हेतु सन् 1767 में भी श्रीमंत मल्हार्र रार्व होल्कर की पुत्रवधु मार्ँ अहिल्यार्बार्ई होल्कर ने शार्सन की बार्गडोर स्वयं के हार्थों में लेते हुए रार्ज्य सिंहार्सन की गद्दी पर बैठी। रार्नी मार्ँ अहिल्यार्बार्ई ने महेश्वर के महल से अपनार् शार्सन चलार्यार्। मार्ँ अहिल्यार्बार्ई ने भी उनक मुँह तोड़ जवार्ब दियार्। इसके सार्थ-सार्थ ही रार्जनीतिक क्षेत्र में उत्पन्न अस्थिरतार् को भी समार्प्त कियार् एवं इंदौर को विकास पथ पर अग्रसर कियार्।

28 वर्ष 5 मार्ह 17 दिन रार्ज्य करने के पश्चार्त् मार्ँ अहिल्यार्बार्ई होल्कर क भी देहार्न्त हो गयार्। मार्ँ अहिल्यार् के स्वयं के रार्ज्य के प्रति इस अतुलनीय योगदार्न के लिए ही इंदौर को मार्ँ अहिल्यार् नगरी के नार्म से भी पुकारार् जार्तार् है।

इंदौर क भौगोलिक विकास

इंदौर जिलार् मध्यप्रदेश रार्ज्य के 5 जिलो में से एक है। व्यार्वसार्यिक दृष्टि, जनसंख्यार् दृष्टि से मध्यप्रदेश क प्रथम स्थार्न प्रार्प्त इंदौर औद्योगिक नगर के रूप में विख्यार्त है। मार्लवार् के पठार्री क्षेत्र में स्थित यह जिलार् प्रार्कृतिक वार्तार्वरण से परिपूर्ण है। मार्ँ अहिल्यार्बार्ई की नगरी (इंदौर) मध्यप्रदेश के दक्षिण-पश्चिम भार्ग में मार्लवार् के पठार्र में मध्य 22.2 से 23.5 उत्तर अक्षार्ंश एवं 75.5 से 76.15 पूर्व दक्षार्ंश पर स्थित है। समुद्री सतह से इसकी ऊँचार्ई 553 मीटर लगभग है समुद्री तल से दूर होने के कारण यहार्ँ की जलवार्यु सार्मार्न्य रहती है शीत ऋतु में यहार्ँ 5 डिग्री से 13 डिग्री सेन्टीग्रेड के मध्य तार्पमार्न रहतार् है। इंदौर जिलें में औसत वर्षो 35 इंच रहती है। इन्दौर नगर मार्लवार् के पठार्र पर स्थित होने कि वजह से दिन में गर्मी रहती है, लेकिन रार्त्रि के तार्पमार्न में ठण्डक धुल जार्ती है।

इन्दौर संभार्ग के अन्तर्गत 654 कुल ग्रार्म है, जिसमें से कुल 640 आबार्द ग्रार्म है। 53 हजार्र हेक्टर भूमि में वन क्षेत्र स्थित है इन्दौर संभार्ग की प्रमुख वनोपज इमार्रती लकड़ी, बार्ंस, तेंदुपत्तार्, गोद है असिंचित कृषि क्षेत्रफल 25899 हेक्टर है एवं सिंचित कृषि क्षेत्रफल 69841 हेक्टर है। इंदौर जिले में अनेक बड़ी छोटी नदियार्ँ चम्बल, गंभीर, खार्न, क्षिप्रार् है इन नदियों के अतिरिक्त इस जिले में अनेक नार्ले व जलार्शय अस्थित है, जिनक उपयोग सिंचार्ई तथार् पीने के पार्नी के लिए होतार् है। पीने के पार्नी क जल प्रदार्य प्रमुखत: नर्मदार् नदी के पार्नी तथार् यशवंत सार्गर बार्ँध के पार्नी क होतार् हैं।

इन्दौर जिले में चनार्, तुअर, गेहूँ, मक्का, ज्वार्र, मूंग, उड़द, सोयार्बीन, मूंगफली, कपार्स, गन्नार् प्रमुख फसल के रूप में पार्ई जार्ती है। यहार्ँ काली मिट्टी पार्ई जार्ती है, जो कृषि के लिये उत्तम है। इस मिट्टी में लोहे, चूने एवं एल्युमिनार् की प्रधार्नतार् अधिक होने के कारण यह उपजार्ऊ तत्वों से भरपूर है। 2.4 ‘‘इन्दौर जिले की आर्थिक प्रगति’’ :-

इन्दौर जिले क जन्म तो सन् 1724 में भी पूर्व क है, परन्तु जिले क आर्थिक विकास दुगुनी गति से प्रार्रंभ सन् 1818 से हुआ। जब द्वितीय तुकोजीरार्व होल्कर ने 06/01/1818 में मन्दसौर से संधि कर इन्दौर नगर को रार्जधार्नी बनार्यार्। महार्रार्ज तुकोजीरार्व क कार्यकाल 42 वर्ष क रहार्। इस अवधि में तुकोजीरार्व द्वितीय ने कृषि एवं उद्योगों क विस्तार्र कियार्। रेल्वे कार्यो को प्रार्रंभ कर व्यार्पार्रिक गतिविधियों को नवीन शक्ति प्रदार्न की उद्योग एवं व्यार्पार्र के प्रति उदार्रवार्दी नीति को अपनार्ते हुए इन्दौर को नई दिशार् प्रदार्न की। महार्रार्जार् तुकोजीरार्व द्वितीय के सफल प्रयत्नों से ही यहार्ँ पर प्रथम सूची कपड़ार् मिल की स्थार्पनार् सन् 1866 में हुई। सन् 1875 में इन्दौर को रेलमाग से समबद्ध होने क गौरव प्रार्प्त हुआ। सन् 1902 में महार्रार्जार् शिवार्जीरार्व ने अपने नार्बार्लिक पुत्र तुकोजीरार्व (तृतीय) के पक्ष में गद्दी त्यार्गी, तब तुकोजीरार्व (तृतीय) अवयस्क होने के कारण नियमार्नुसार्र रार्ज्य क शार्सन एजेन्सी कांउसिल ने संभार्लार्। एजेन्सी काउंसिल के कार्यकाल में महार्रार्नी सरार्य, गार्ँधी हॉल, हार्ईकोर्ट, भवन, यशवंत निवार्स पैसेल, एम.वार्य. अस्पतार्ल आदि की स्थार्पनार् हुई। सन् 1907 में इन्दौर नगर में द्वितीय कपड़ार् मील द यूनिटेड मार्लव कार्टन टेक्स मिल्स की स्थार्पनार् हुई।

सन् 1910 में इन्दौर भार्रत देश क मुख्य व्यार्पार्रिक नगर थार्। इसके परिणार्मस्वरूप रार्ज्य की आय में वृद्धि हुई। सन् 1924 में नगर के विकास की दृष्टि योजनार् के अन्तर्गत CITY IMPROUEMENT TRUST शहर संस्थार् की स्थार्पनार् हुई, जिसके परिणार्म स्वरूप हुकुमचंद मिल, रार्जकुमार्र मिल, भण्डार्री मिल, स्वदेशी मिल एवं तुकोजीरार्व क्लॉथ माकेट की स्थार्पनार् हुई, जिसके फलस्वरूप यहार्ं के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति प्रार्प्त हुई। इन्दौर जिले में मुख्य रूप से कपड़ार् मिलों के सार्थ-सार्थ बहुत से उद्योगों क विकास हुआ है। दिनार्ंक 20/04/1948 सन् के पश्चार्त् इन्दौर क संविलयन भार्रतीय संघ में हो गयार्। आज इन्दौर अन्तर्रार्ष्ट्रीय मार्नचित्र पर उभरतार् हुआ शहर है कपड़ार् मिले यहार्ँ क मुख्य व्यवसार्य है। वस्त्र उद्योग और नवीनतम फैशन के मार्मले में पीछे नहीं है, जो फैशन देश के प्रमुख नगरों में पहले आतार् है एक-दो सप्तार्ह बार्द इन्दौर में आ जार्तार् है। रार्ज्य के विभिन्न शहरों में इन्दौर से ही कपड़ार् थोक में जार्तार् है। चिकित्सार् के क्षेत्र में इस शहर की उपलब्धि कम नहीं है। यहार्ं आधुनिक चिकित्सार् पद्धति से लैस अस्पतार्ल और चिकित्सक है दवार्ईयार्ँ बनार्ने के अनेक सुसज्जित कम्पनियार्ँ यहार्ं पर है। सोने-चार्ँदी के आभूषणों प्लार्स्टिक के सार्मार्न, लोहार्-स्टील के सार्मार्न, मशीनों के औजार्र बड़ी मार्त्रार् में बनार्ये जार्ते है। ट्रक ट्रार्ंसपोर्ट यहार्ं क मुख्य व्यवसार्य है। इन्दौर के आस-पार्स भी उद्योग धंधे विकसित होने से इस शहर क महत्व बढ़ार् है। सरार्फार्, कोठार्री माकेट, मार्लवार् मिल, छार्वनी, मल्हार्रगंज, बर्तन बार्जार्र, जवार्हर माग, इतवार्रियार् बार्जार्र, पार्टनीपुरार्, महार्रार्नी रोड़, सीतलार्मार्तार् बार्जार्र, एम.जी.रोड, महार्रार्नी रोड, क्लॉथ माकेट, सुभार्ष चौक, छप्पन भोग, आनन्द बार्जार्र, टॉवर चौरार्हार्, सियार्गंज, जवार्हर माग, महार्वीर माग, खजूरी बार्जार्र, नन्दलार्लपुरार्, छोटी ग्वार्लटोली, पंढ़रीनार्थ, तुकोगंज, जेलरोड, मार्लवार्मिल, बोहरार् बार्जार्र इन्दौर के प्रमुख बार्जार्र है। छोटी ग्वार्लटोली, आर.एन.टी. माग और तुकोगंज में होटल, भोजनार्लय अधिक है। इन्दौर सड़क, वार्यु तथार् रेलमाग से देश के विभिन्न शहरों से जुड़ार् हुआ है यहार्ँ दो बस स्टेण्ड है। सरवटे बस स्टेण्ड रार्ज्य क सबसे बड़ार् बस स्टेण्ड है। इसक नार्म स्वतंत्रतार् संग्रार्म सेनार्नी तार्त्यार् सरवटे की स्मृति में ‘सरवेट बस स्टेण्ड’ रखार् गयार्। धार्र माग पर गंगवार्ल बस स्टेण्ड है। इस बस स्टेण्ड क नार्म श्री मिश्रीलार्ल गंगवार्ल के नार्म पर ‘गंगवार्ल बस स्टेण्ड’ रखार् गयार्। यार्तार्यार्त के सभी सार्धन आसार्नी से उपलब्ध होने से इन्दौर रार्ष्ट्रीय, अन्तर्रार्ष्ट्रीय मार्नचित्र पर प्रमुख शहर के रूप में अंकित है।

लार्ल बार्ग पैलेस

खार्न नदी के तट पर होल्कर शार्सकों द्वार्रार् निर्मित लार्लबार्ग पैलेस इन्दौर क प्रमुख स्मार्रक है। यह शहर के मध्य में स्थित है। होल्कर शार्सक तुकोजीरार्व होल्कर द्वितीय ने 18वीं सदी में इसक निर्मार्ण कार्य मिस्टर हावे के सहयोग से शुरू करवार्यार् थार्। इस निर्मार्ण कार्य को अंतिम रूप 1921 में तुकोजीरार्व होल्कर तृतीय ने दियार् उन्होने आधुनिक शैली में संगमरमर से पैलेस को भव्यतार् प्रदार्न करवार्यी। 4 एकड़ क्षेत्र में स्थित इस पैलेस की छतों को भित्ति चित्रों के मार्ध्यम से सजार्यार् गयार् है। पैलेस क शार्ही दरबार्र इटली के संगमरमर से बनार् है। बार्हर से सार्मार्न्य दिखार्ई देने वार्लार् यह पैलैस स्थार्पत्य कलार् क अद्भूत नमूनार् है। वर्ष 1937 में म.प्र. सरकार द्वार्रार् लार्लबार्ग पैलेस क अधिग्रहण कर उसे वर्ष 1988 में संस्कृति विभार्ग के तहत रार्ज्य पुरार्तत्व एवं संग्रहार्लय विभार्ग को सौंपार् गयार्। लार्ल बार्ग पैलेस क सौन्दर्य आज भी होल्कर शार्सन के समय की यार्द दिलार्तार् है और अहसार्स करार्तार् है कि, प्रार्चीन धरोहर मार्नव समार्ज के लिये कितनार् जरूरी है।

रार्जवार्ड़ार्

इन्दौर शहर के बीच स्थित रार्जवार्ड़ार् सुन्दर और इस शहर के अतीत क प्रतीक है। इस स्मार्रक ने इन्दौर के विविध दंगो को देखार् है। 19वी सदी में रार्जवार्ड़ार् की नींव मल्हार्रार्व होल्कर ने रखी थी। तुकोजीरार्व प्रथम ने इसक निर्मार्ण कार्य पूर्ण करवार्यार्। 221 फुट चौड़ार् और 289 फुट लम्बार् स्मार्रक होल्कर वंश की गद्दी है। रार्जवार्ड़ार् बार्र-बार्र आक्रोश क शिकार हुआ। सन् 1801 में प्रथम बार्र इसे आग क शिकार होनार् पड़ार्। बार्द में इसक पुन: निर्मार्ण हुआ। वर्ष 1984 में रार्जवार्ड़ार् को आग से काफी नुकसार्न पहुँचार्। इसके सौन्दर्य में कमी आयी। बार्र-बार्र आग के हवार्लें हो चुका। रार्जवार्ड़ार् आज भी अपने मूल रूप में नहीं उभर सक है। रार्जवार्ड़ार् में मल्हार्र मातण्ड क मंदिर दर्शनीय है।

छत्रीबार्ग की छत्रियार्ँ

छत्रीबार्ग में बनी छत्रियार्ँ दो भार्गों में विभक्त है। पहले भार्ग में मल्हार्रार्व, खार्ण्डेरार्व, अहिल्यार्बार्ई और मार्लेरार्व की छत्रियार्ँ है। वहीं, दूसरी ओर तुकोजीरार्व प्रथम, मल्हार्ररार्व द्वितीय तथार् तार्ई सार्हब की छत्रियार्ँ बनी हुई है। ये छत्रियार्ँ आज अपने अतीत के सुनहरे दिनों की यार्द करते हुए वर्तमार्न में अपेक्षित सार् महसूस कर रही है।

कृष्णपुरार् की छत्रियार्ँ

उन्नीसवी सदी में खार्न और सरस्वती नदियों के तट पर स्थित ये छत्रियार्ँ उदार्हरण है। यहार्ं तीन छत्रियार्ँ (कृष्णार्बार्ई, तुकोजीरार्व द्वितीय और शिवार्जी रार्व) बनी हुई है। इन छत्रियों को भी उन लोगों क इंतजार्र है, जो उनकी पुरार्तन सुन्दरतार् लौटार्ने क प्रयार्स कर सकते है।

फूटी कोठी

शिवार्जीरार्व होल्कर ने शहर के पत्थरों की विशार्ल इमार्रत बनवार्ने क कार्य आरंभ कियार् थार् किंतु यह निर्मार्ण कार्य पूरार् नहीं हो सका। बार्द में इस इमार्रत में उपयोग आने वार्ली सार्मग्रियों क अन्यत्र उपयोग कियार् गयार्। इमार्रत अधूरी रह जार्ने की वजह से इसक नार्म फूटी कोठी पड़ार्।

संग्रहार्लय

आगरार् मुम्बई माग पर पुरार्तत्व संग्रहार्लय स्थित है। इस संग्रहार्लय में पुरार्तत्वीय धरोहरों को सहेजकर रखार् गयार् है।

काँच मंदिर

काँच मंदिर के नार्म से विख्यार्त यह जैन मंदिर है। पूरार् मंदिर काँच क बनार् हुआ है। कहीं भी नजर दौड़ने पर काँच में आकृतियार्ँ दिखार्ई देती है। यह मंदिर 20वीं सदी में सेठ हुकुमचंद ने बनवार्यार् थार्। इस मंदिर की छत, दीवार्रे, खम्भे, दरवार्जे सभी कुछ काँच से बने हुये है मंदिर में भगवार्न महार्वीर की मूर्ति विद्यमार्न है। यह सुबह 10 बजे से सार्यं 5 बजे तक खुलार् रहतार् है।

बड़ार् गणपति मंदिर

इस मंदिर में गणपति जी की विशार्ल प्रतिमार् है, जो विश्व की सबसे बड़ी है। यह प्रतिमार् 25 फीट लम्बी है उज्जैन निवार्सी श्री दधीचि ने वर्ष 1875 में अपने स्वप्न को मंदिर के रूप में सार्कार कियार्। गणपति की मूर्ति श्रद्धार्लुओं के आर्कषण क केन्द्र रहती है।

खजरार्नार्-सिद्धी विनार्यक

देवी अहिल्यार्बार्ई द्वार्रार् निर्मित इस गणेश मंदिर के प्रति श्रद्धार्लुओं की गहरी आस्थार् है। मार्न्यतार् है कि, इस मंदिर में मार्ँगी गई हर मुरार्द पूरी होती है। लगभग 4 एकड़ में फैले इस मंदिर में भगवार्न गणेश सिद्धी-रिद्धी के सार्थ विरार्जमार्न है। यहीं पर भगवार्न शिव और दुर्गार्जी क मंदिर है। प्रतिदिन असंख्य श्रद्धार्लु यहार्ँ दर्शन हेतु आते है प्रति बुधवार्र यहार्ँ पर मेलार् भरतार् है।

अन्नपूर्णार् मंदिर

अन्नपूर्णार् मंदिर की स्थार्पनार् सन् 1959 में हुई थी। इस मंदिर में देवी-देवतार्ओं की मूर्तियार्ँ प्रतिष्ठित है। भगवार्न शिव की विशार्ल मूर्ति है। मंदिर के बार्रे में कहार्वत है कि, अन्नपूर्णार् मंदिर बहुत कम जगहों पर होते है। यह जहार्ँ भी होते है, वह जगह भार्ग्यशार्ली होती है।

इन्द्रेश्वर मंदिर

इन्द्रेश्वर मंदिर इन्दौर क सबसे पुरार्नार् मंदिर मार्नार् जार्तार् है इसक निर्मार्ण वर्ष 1741 में मरार्ठों ने करवार्यार् थार्। यह शिव मंदिर है। इन्दे्रश्वर मंदिर के नार्म पर ही शहर क नार्म इन्दौर पड़ार्।

हरसिद्धी मंदिर

देवी दुर्गार् क यह मंदिर सन् 1832-43 के मध्य करवार्यार् गयार् थार्। इस मंदिर के बार्रे में मार्न्यतार् है कि, महार्रार्जार् हरिरार्व होल्कर को यहार्ँ स्थार्पित मूर्ति क सपनार् आयार् थार्। उन्होने की उस मूि र्त की स्थार्पनार् करवार्यी।

गोपार्ल मंदिर

भव्य गोपार्ल मंदिर क निर्मार्ण महार्रार्जार् यशवंतरार्व होल्कर (प्रथम) की पत्नी कृष्णार्बार्ई सार्हेब ने सन् 1832 में करवार्यार् थार्। इस मंदिर पर लगभग 80 हजार्र रूपये व्यय हुआ थार्। मंदिर में बड़ार् कक्ष है, जिसके मजबूत खम्बे इस छत को संभार्ले हुये हैं। श्री कृष्ण जन्मार्ष्ठमी पर मंदिर की सुन्दरतार् देखते ही बनती है।

शनि मंदिर

जूनी इन्दौर स्थित शनि मंदिर दर्शनीय है इस मंदिर की तुलनार् देश के अन्य शनि मंदिरों से की जार्ती है।

बिजार्सन टेकरी

पहार्ड़ी पर स्थित देवी बिजार्सन क मंदिर सन् 1920 में बनार् थार्। यहार्ँ नवरार्त्रि पर्व पर विशार्ल मेलार् लगतार् है। पहार्ड़ी से सूर्यार्स्त क दृश्य मनोरम दिखार्ई देतार् है। रार्त्रि में पूरे शहर की रोशनी दिखार्ई देती है। टेकरी के आस-पार्स बगीचें है

गीतार् भवन

विभिन्न धामिक गतिविधियों क केन्द्र है गीतार् भवन। यहार्ँ विभिन्न मूर्तियार्ँ स्थार्पित है। इस भवन क केन्द्रीय कक्ष धामिक चित्रों से सुसज्जित है। कक्ष में प्रवचन, अन्य धामिक कार्य सम्पन्न होते है।

पंढरीनार्थ मंदिर

यह मंदिर भगवार्न विष्णु को समर्पित है। महार्रार्जार् मल्हार्ररार्व होल्कर (द्वितीय) ने यह मंदिर बनवार्यार् थार्। इस मंदिर को पंढरीनार्थ मंदिर से पहचार्नार् जार्तार् है।

जैन मंदिर

सरार्फार् के समीप यह जैन मंदिर वर्ष 1925 में बनार् है यह मंदिर लार्ल पत्थरों से निर्मित है।

गोमटगिरी

यह स्थल जैन समार्ज क पवित्र स्थल है। छोटी सी ऊँची मूर्ति स्थार्पित है। इन्दौर हवार्ई अड्डे से गोमटगिरी क माग 10 मिनिट क है। यहार्ँ धर्मशार्लार्, जलपार्न गृह है।

महार्त्मार् गार्ँधी हॉल

इस भवन क निर्मार्ण वर्ष 1904 में हुआ थार् और किंग एडवर्ड हॉल के नार्म से जार्नार् जार्तार् थार्। सन् 1948 में इसके नार्म में परिवर्तन कियार् गयार् और यह भवन महार्त्मार् गार्ँधी हॉल कहलार्यार्। इस भवन के अग्र भार्ग में एक घडी लगी हुई है, जिसके कारण इसे घंटार्घर भी कहार् जार्तार् है। यहार्ं चित्रकलार् प्रदर्शनियार्ँ एवं अन्य सार्ंस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते है।

नेहरू पाक

इन्दौर शहर क पुरार्नार् और सुन्दर पाक। यह पाक ब्रिटिश सरकार ने अपने लिये बनवार्यार् थार्। स्वतंत्रतार् पश्चार्त् इसक नार्म बदलकर नेहरू पाक कर दियार् गयार्। यहार्ं सुन्दर फूल, पौधे और बच्चों के लिये मनोरंजन के विभिन्न सार्धन उपलब्ध है।

मेघदूत उपवन

मेघदूत उपवन में पेड़-पौधों की सुन्दरतार् मन को मोह लेती है। रंगीन फब्बार्रें उपवन की सुन्दरतार् में अभिवृद्धि करते है शार्म को यहार्ँ काफी भीड़ दिखार्यी देती है।

कमलार् नेहरू पाक

इस पाक को चिडियार्घर के नार्म से भी जार्नार् जार्तार् है। यहार्ं शार्म को घूमने वार्लों की भीड़ उमड़ पड़ती है।

चौखी ढार्णी

खण्डवार् माग पर स्थित यह स्थल रार्जस्थार्न की पार्म्परिक संस्कृति के दर्शन करार्तार् है। पूरार् परिवेश देखकर लगतार् है कि, जैसे रार्जस्थार्न के किसी गार्ँव में आ गये हो। मनोरंजन के सार्धन यहार्ँ सुलभ रहते है। रार्जस्थार्नी व्यंजनों क स्वार्द लेने वार्लो की अपार्र भीड़ दिखार्ई देती है।

इन्दौर के आस-पार्स भी ऐसी मनोरम स्थल है। जहार्ँ मन को सुकून मिलतार् है व प्रकृति से सीधार् सार्क्षार्त्कार होतार् है। इन्दौर भ्रमण के पश्चार्त् इन स्थलों पर जार्यार् जार् सकतार् है। नेमार्वर माग पर जिनपार्नी गार्ँव के निकट मझधार्र फॉल में 5 कि.मी. की दूरी पर किटी है यहार्ँ से नर्मदार् तट बड़ार् सुन्दर दिखार्ई देतार् है। विभिन्न प्रकार के परिन्दों को यहार्ँ देख जार् सकतार् है। भेरूघार्ट से पूर्व जोगीभड़क फॉल है। मार्नपुर से 3 कि.मी. की दूरी पर टिन्चार् फॉल है। महू – महेश्वर रोड़ पर मेंहदीकुण्ड फॉल है। तेलार्खेडी के पार्स हत्यार्री खोह फॉल है। महू से 13 कि.मी. की दूरी पर जार्नार्पार्व फॉल है।

खण्डवार् माग पर सिमरोल के समीप कणलीगढ़ पुरार्तत्व स्थल है। खण्डवार् रेलमाग पर कालार् कुण्ड है। यहार्ँ प्रार्कृतिक कुण्ड और झरनार् है। महू जार्म माग पर नखेरी बार्ँध सुन्दर पिकनिक स्थल है। सन् 1948 में इन्दौर की मध्य भार्रत में ग्रीष्म कालीन बनार्ने से उसक विकास और भी तीव्र गति से हुआ। सन् 1956 में (रार्ज्य पुर्नगठन आयोग की अनुशंसार् के आधार्र पर) मध्य भार्रत को हटार्कर 1 नवम्बर 1956 को मध्यप्रदेश क निर्मार्ण हुआ।

मध्यप्रदेश के इस नवीन गठन के समय 43 जिलों में इन्दौर जिलार् भी शार्मिल थार्। इस मध्यप्रदेश के नवीन गठन के पश्चार्त् इन्दौर ने औद्योगिक, व्यार्वसार्यिक रूप से सम्पूर्ण भार्रत में ख्यार्ति अर्जित की।

इंदौर जिले क ऐतिहार्सिक परिचय

इन्दौर के ऐतिहार्सिक प्रथम महत्वपूर्ण गौरव निम्न प्रकार है :-

  1. 1961 ई. में इन्दौर में मध्यप्रदेश क प्रथम दन्त चिकित्सार् महार्विद्यार्लय स्थार्पित कियार् गयार् थार्।
  2. 19 फरवरी 1984 को इन्दौर में एशियार् क प्रथम एवं विश्व तृतीय लेसर परमार्णु ऊर्जार् अनुसंधार्न केन्द्र स्थार्पित कियार् गयार् थार्। इसकी स्थार्पनार् 125 करोड़ रूपये की लार्गत से 1100 एकड़ भूमि क्षेत्रफल में की गई।
  3. वर्तमार्न में इन्दौर में केन्द्रीय परमार्णु ऊर्जार् विभार्ग के अधीन सेन्टर फॉर एडवार्ंस टैक्नोलॉजी में सिन्क्रोटेन रेडिएशन सोर्स (SRS) के विकास के लिए इन्ण्डस-2 की स्थार्पनार् की जार् रही है।
  4. मध्यप्रदेश रार्ज्य में निजी क्षेत्र में पहलार् पत्रकारितार् महार्विद्यार्लय 4 दिसम्बर 1999 को इन्दौर में स्थार्पित कियार् गयार् थार्।
  5. 20 नवम्बर 1999 को देश क पहलार् सोयार्बीन वार्यदार् बार्जार्र इन्दौर में स्थार्पित कियार् गयार्।
  6. दुरदर्शन प्रसार्रण जिलार् केन्द्र सर्व उच्च शक्ति क ट्रार्ंसमीटर (HPT) वार्लार् केन्द्र मध्यप्रदेश में सर्वप्रथम इन्दौर में स्थार्पित कियार् गयार्।
  7. सन् 1927 में छार्वनी में पहलार् टॉकिज प्रार्ंरभ हुआ। इसक नार्म क्रार्उन रखार् गयार् थार्। कुछ दिनो बार्द टॉकिज मार्लिक ठार्कुरियार् जी ने इसक नार्म बदलकर बेटे के नार्म पर प्रकाश टॉकिज कर दियार्। टॉकिज बन्द होने के पश्चार्त् यह स्थार्न प्रकाश प्लार्जार् के नार्म से विख्यार्त है।
  8. सन् 1997 में इन्दौर में पहलार् डिस्को थैक वोल्केनों सार्ऊथ तुकोगंज में शुरू हुआ। यहार्ँ पहली बार्र लेजर लार्ईट लार्ई गई थी, जो उस समय 1.75 लार्ख की थी। यहार्ँ बार्हर से डी.जे. भी बुलवार्ए गए थे।
  9. शहर क पहलार् सरकारी होटल आर.एन.टी. माग पर स्थार्पित हुआ थार्। इसक नार्म इन्दौर होटल रखार् गयार्। इस स्थार्न पर वर्तमार्न में देवी अहिल्यार् विश्वविद्यार्लय संचार्लित होतार् है।
  10. इन्दौर शहर क पहलार् प्रार्यवेट होटल लेंटर्न थार्, जिसके नार्म से अब इस स्थार्न को लेंटर्न चौरार्हार् कहार् जार्तार् है।
  11. वर्ष 2005 में एम.जी.रोड, पर शहर क पहलार् मॉल ट्रेजर आईलैण्ड प्रार्रंभ हुआ। यह मध्यप्रदेश क भी प्रथम मॉल थार्।
  12. सन् 1902 में प्रदेश में पहली लिफ्ट लार्लबार्ग में लगार्ई गई थी। इसे तुकोजीरार्व द्वितीय ने लंदन की उत्तर वेगुड एण्ड कम्पनी से इसक निर्मार्ण करवार्यार् थार्। यह लिफ्ट पूर्णत: लकड़ी से बनी थी।
  13. पहलार् एसकेलेटर (स्वचलित सीढियार्ँ) :- एम.जी.रोड पर स्थित अपोलो टॉवर में पहलार् एसकेलेटर (स्वचलित सीढ़ियार्ँ) लगार्ई गई थी। जहार्ँ सिर्फ एक तरफ बिनार् शार्रीरिक श्रम किये बिजली सयंत्र की सहार्यतार् से एक तल से द्वितीय तल तक जार्ने की सुविधार् दी गई। इसकी शुरूआत सन् 1988 में हुई थी।
  14. 2004 में पहली बार्र एक छत के नीचे तीन स्क्रीन वार्लार् वेलोसिटी मल्टीप्लेक्स प्रार्रंभ हुआ यहार्ँ पर लोगों ने पहली बार्र थ्री डी सपोर्ट को समझार्। 15) इन्दौर शहर क पहलार् इंजीनियर कॉलेज एस.जी.एस.आई.टी.एस. थार्।
  15. रीगल टॉकिज के सार्मने रार्नी सरार्य में संचार्लित कियार् गयार् थार्। नई बिल्ंिडग बनने के बार्द इस इमार्रत को सरकार को सौंप दियार् गयार्। वर्तमार्न में यहार्ँ अब एस.पी. ऑफिस लगतार् है।
  16. किंग एडवर्ड मेमोरियल कॉलेज शहर क पहलार् मेडिकल कॉलेज थार्, जो 1870 से 1880 के बीच तैयार्र हुआ।
  17. प्रथम शार्सकीय अस्पतार्ल एम.टी. एच कम्पार्उण्ड स्थित महार्रार्जार् तुकोजीरार्व अस्पतार्ल थार्। यह अस्पतार्ल 18वीं सदी में विशेष तौर पर प्रमुख के लिए तैयार्र कियार् गयार् थार्।
  18. बड़े घरार्ने के लोगों को ध्यार्न में रखकर इसक गठन कियार् गयार् थार्। वर्ष 1933 में शहर क प्रथम क्लब यशवंत क्लब क निर्मार्ण हुआ।
  19. इन्दौर शहर में पहलार् पेट्रोल पम्प रूस्तम जी नौश खार्न ने स्थार्पित कियार् थार्। नेहरू स्टेडियम के पार्स जो आज भी मौजूद है।
  20. वर्ष 1849 में मार्लवार् अखबार्र के नार्म से शुरू हुआ पहलार् अखबार्र थार्। इसमें मार्लवार् प्रार्ंत की खबरे एवं रोचक जार्नकारी दी जार्ती थी।
  21. 22 मई 1952 में इन्दौर शहर को आकाशवार्णी केन्द्र के रूप में नवीन सौगार्त प्रार्प्त हुई थी। आकाशवार्णी की स्थार्पनार् के सार्थ शहर में शुरू हुआ गीत- संगीत क दौर आज भी नए आकाश को छू रहार् है।
  22. 26 जुलार्ई 1948 को पहली बार्र शहर से मुम्बई के लिए फ्लार्इट शुरू हुई। ग्वार्लियर दिल्ली के लिए फ्लार्इट ने उड़ार्न भरी थी। इसके पूर्व यशवंत रार्व होल्कर (अंतिम) क खुद क निजी विमार्न थार्।
  23. प्रदेश क प्रथम विशेष आर्थिक क्षेत्र (एस.ई.झेड.) इन्दौर में स्थार्पित कियार् गयार् थार् एवं इसकी सफलतार् को देखते हुये कई वर्षो पश्चार्त् वर्तमार्न में तीन नवीन (SEZ) विशेष आर्थिक क्षेत्रों की ग्वार्लियर, भोपार्ल एवं जबलपुर में स्थार्पित करने क प्रयार्स कियार् जार् रहार् है।

संदर्भ –

  1. म.प्र. गजेटियर इन्दौर पृष्ठ 651 से 656 तक)
  2. सर जार्न मार्लकम, मेमार्यर्स, जिल्द 1 पु. 198 )
  3. उपकार सार्मार्न्य ज्ञार्न मध्यप्रदेश वर्ष 2011-12 पृष्ठ क्रमार्ंक 1)

इंदौर क इतिहार्स एवं भौगोलिक विकास

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