अभिक्रमित अनुदेशन क अर्थ, परिभार्षार्, विशेषतार्एँ एवं सिद्धार्न्त

अभिक्रमित अनुदेशन क अर्थ, परिभार्षार्, विशेषतार्एँ एवं सिद्धार्न्त


By Bandey

स्मिथ व मूरे (Smith and moore) के शब्दों में, अभिक्रमित अनुदेशन किसी अधिगम सार्मग्री को क्रमिक पदों की श्रृंखलार् में व्यवस्थित करने वार्ली एक क्रियार् है, जिसके द्वार्रार् छार्त्रों को उनकी परिचित पृष्ठभूमि से एक नवीन तथार् जटिल प्रत्ययों, सिद्धार्ंतों तथार् अवबोधों की ओर ले जार्यार् जार्तार् है।’’

जेम्स. ई. एस्पिच तथार् बिर्ल विलियम्स के अनुसार्र, अभिक्रमित अनुदेशन अनुभवों क वह नियोजित क्रम है जो उद्दीपक-अनुक्रियार् सम्बन्ध के रूप में सक्षमतार् (proficiency) की ओर ले जार्तार् है।’’ स्टोपफल (Stoffel) ने, ‘‘ज्ञार्न के छोटे अंशों को एक ताकिक क्रम में व्यवस्थित करने को अभिक्रम तथार् इसकी सम्पूर्ण प्रक्रियार् को अभिक्रमित अनुदेशन कहार् है।’’

लीथ (Leith) के अनुसार्र, अभिक्रमित अनुदेशन, अनुदेशन सार्मग्री के छोटे-छोटे पदों अथवार् पे्रफमों की एक श्रृंखलार् है। इन पदों में से अधिकांश में अनुक्रियार् के लिये किसी वार्क्य में रिक्त स्थार्न की पूख्रत करनी होती है। अपेक्षित अनुक्रियार्ओं के लिये किसी संकेत प्रणार्ली क प्रयोग कियार् जार्तार् है और प्रत्येक अनुक्रियार् की पुष्टि परिणार्मों के तत्काल ज्ञार्न द्वार्रार् की जार्ती है।

एन. एस. मार्वी (N.S.Mavi) कहते हैं अभिक्रमित अनुदेशन, सजीव अनुदेशार्त्मक प्रक्रियार् को ‘स्वयं-अधिगम’ अथवार् ‘स्वयं-अनुदेशन’ में परिवर्तित करने की वह तकनीक है जिसमें विषय-वस्तु को छोटी-छोटी कड़ियों में विभार्जित कियार् जार्तार् है, जिन्हें सीखने वार्ले को पढ़कर अनुक्रियार् करनी होती है, जिसके सही अथवार् गलत होने क उसे तुरन्त पतार् चल जार्तार् है।

सूसन मावफले (Susan Markle) के अनुसार्र, अभिक्रमित अनुदेशन पुन: प्रस्तुत की जार् सकने वार्ली क्रियार्ओं की श्रृंखलार् को संरचित करने की वह विधि है, जिसकी सहार्यतार् से व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक छार्त्र के व्यवहार्र में मार्पनीय और विश्वसनीय परिवर्तन लार्यार् जार् सके।

जेम्स ई. एस्पिच तथार् बिर्ल विलियम्स ने अभिक्रमित अनुदेशन की परिभार्षार् इस प्रकार दी है, अभिक्रमित अनुदेशन अनुभवों क वह नियोजित क्रम है, जो उद्दीपक अनुक्रियार् सम्बन्ध के रूप में वुफशलतार् की ओर ले जार्तार् है।

शिक्षार्शार्स्त्री डी. एल. वुक (D.L. Cook) के मतार्नुसार्र, अभिक्रमित अधिगम, स्व-शिक्षण विधियों के व्यार्पक सम्प्रत्यय को स्पष्ट करने के लिये प्रयुक्त एक विधार् है।

अभिक्रमित अध्ययन सार्मग्री की विशेषतार्एँ

  1. अभिक्रमित सार्मग्री व्यक्तिनिष्ठ (Individual) होती है और इसमें एक समय में केवल एक ही व्यक्ति सीखतार् है।
  2. इसमें पार्ठ्य-सार्मग्री को छोटे से छोटे अंशों में विभार्जित कियार् जार्तार् है।
  3. फिर छोटे-छोटे अंशों को श्रृंखलार्बद्ध कियार् जार्तार् है।
  4. अभिक्रमित सार्मग्री में प्रत्येक पद अपने आगे वार्ले पद से ताकिक क्रम में स्वार्भार्विक रूप से जुड़ार् होतार् है।
  5. सीखने वार्ले को सक्रिय सतत् प्रयार्स (अनुक्रियार्) करने पड़ते हैं।
  6. छार्त्रों को तत्काल उनकी प्रगति के विषय में सूचनार् दी जार्ती है कि उनक प्रयार्स सही थार् यार् गलत। इस प्रकार तत्काल पृष्ठ-पोषण (Feedback) उन्हें मिलतार् रहतार् है।
  7. छार्त्रों को अपनी गति से विषय-वस्तु सीखने के अवसर प्रार्प्त होते हैं। (Principle of Self Pacing)
  8. अभिक्रमित सार्मग्री पूर्ण-परीक्षित तथार् वैध होती है।
  9. इसमें छार्त्रों के पूर्व व्यवहार्रों तथार् धार्रणार्ओं क विशिष्टीकरण कियार् जार्तार् है। इन व्यवहार्रों में भार्षार् की सरलतार् तथार् बोधगम्यतार् क स्तर, उपलब्धि स्तर, पृष्ठभूमि तथार् मार्नसिक स्तर को भी ध्यार्न में रखार् जार्तार् है।
  10. इसमें उद्दीपन, अनुक्रियार् तथार् पुनर्बलन, ये तीनों तत्व क्रियार्शील रहते हैं।
  11. इसमें सीखने में अपेक्षार्कृत त्रुटियों की दर (Error Rate) तथार् गलतियों की दर (Fault Rate) काफी कम रहती है।
  12. क्योंकि इसमें पृष्ठपोषण (Feedback) तुरन्त मिलतार् है, अत: छार्त्रों की सही अनुक्रियार्यें पुनर्बलित (Reinforced) हो जार्ती हैं, जिससे प्रभार्वशार्ली शिक्षण में सहार्यतार् मिलती है। छार्त्र की प्रत्येक अनुक्रियार् उसे एक नयार् ज्ञार्न प्रदार्न करती है।
  13. छार्त्रों में अनुदेशन सार्मग्री के अध्ययन के समय अधिक तत्परतार् तथार् जिज्ञार्सार् रहती है, जिससे वे विषय-वस्तु जल्दी समझ जार्ते हैं।
  14. छार्त्रों की अनुक्रियार्ओं के मार्ध्यम से अभिक्रमित अनुदेशन सार्मग्री क मूल्यार्ंकन कियार् जार्तार् है और तद्नुसार्र उनमें सुधार्र तथार् परिवर्तन भी कियार् जार्तार् है।
  15. अभिक्रमित अनुदेशन छार्त्रों की कमजोरियों तथार् कठिनार्इयों क निदार्न कर उपचार्रार्त्मक अनुदेशन की भी व्यवस्थार् करतार् है।
  16. अभिक्रमित अनुदेशन प्रणार्ली मनोवैज्ञार्निक अधिगम सिद्धार्न्तों पर आधार्रित है।

अभिक्रमित अनुदेशन के सिद्धार्न्त

उपर्युक्त विशेषतार्ओं की विवेचनार् से स्पष्ट है कि अभिक्रमित अनुदेशन निम्नार्ंकित सिद्धार्न्तों पर आधार्रित है-

  1. व्यवहार्र-विश्लेषण क सिद्धार्न्त,
  2. छोटे-छोटे अंशों क सिद्धार्न्त,
  3. सक्रिय सहभार्गितार् क सिद्धार्न्त,
  4. तत्काल पृष्ठ-पोषण क सिद्धार्न्त,
  5. स्व-गति से सीखने क सिद्धार्न्त,
  6. सार्मग्री की वैधतार् क सिद्धार्न्त,
  7. छार्त्र परीक्षण तथार् प्रगति ज्ञार्न क सिद्धार्न्त,
  8. छार्त्र अनुक्रियार्ओं क सिद्धार्न्त।

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