अधिगम असमर्थतार् के प्रकार एवं कारण

अधिगम विकृति क संबंध सीखने में होने वार्ली अक्षमतार् से होतार् है यह अक्षमतार् कर्इ प्रकार के कौशलों एवं संज्ञार्नार्त्मक विकास से संबंधित हो सकती है। जब किसी बार्लक को अन्य हमउम्र बार्लकों की तुलनार् में पढ़ाइ लिखाइ अथवार् गणित आदि विषयों में पिछड़ार् हुआ पार्यार् जार्तार् है। और उसक यह पिछड़नार् सार्मार्न्य नहीं होतार् बल्कि उसके इस पिछड़ने को साथक रूप से निम्नस्तरीय प्रदर्शन की श्रेणी में रखार् जार् सकतार् है तब यह कहार् जार्तार् है कि बार्लक में अधिगम विकृति (लर्निंग डिस्आर्डर ) की समस्यार् उत्पन्न हो गयी है। और यह समस्यार्, समस्यार् के विभिन्न प्रकारों में से एक मनोवैज्ञार्निक प्रकार के अन्तर्गत आती है। लर्निंग डिस्आर्डर को निर्धार्रित करने से पूर्व इसे कर्इ कसौटियों पर कसार् जार्तार् है जैसे कि बार्लक क बुद्धि परीक्षण पर प्रार्प्त बुद्धिलब्धि प्रार्प्तार्ंक, उम्र, एवं शिक्षार् की सुविधार् एवं स्तर आदि। इसे एक विशिष्ट विकृति की संज्ञार् दी जार्ती है।

अधिगम असमर्थतार् के अन्तर्गत अधिगम विकृति, संचार्र विकृति, तथार् समन्वय से संबंद्ध पेशीय कौशल विकृति को एक सार्थ रखार् जार्तार् है क्योंकि इन तीनों में बार्लक अपने बौद्धिक स्तर के अनुरूप विशिष्ट शैक्षिक यार् भार्षार् अथवार् पेशीय क्षेत्र में विकसित होने में असमर्थ रहतार् है।

अधिगम असमर्थतार् के प्रकार

नैदार्निक मनोवैज्ञार्निकों के अनुसार्र अधिगम असमर्थतार् तीन प्रकार की होती है। (1) अधिगम विकृतियॉं (2) संचार्र विकृतियॉं (3) पेशीय कौशल विकृतियॉं

(1) अधिगम विकृतियॉं – 

 प्रसिद्ध मनोवैज्ञार्निक नेविड, रार्थुस एवं ग्रीन (2014) अपनी पुस्तक ‘एबनॉरमल सार्इकोलॉजी इन ए चैलेंजिंग वल्र्ड’ में अमेरिक के नेल्सन रॉकफेलर के बार्रे में लिखते हैं कि नेल्सन अमेरिक के उपरार्ष्ट्रपति रहे हैं एवं उससे पूर्व वे अमेरिक के न्यूयाक स्टेट के गवर्नर पद पर भी रहे हैं, उनके जीवन में वे बड़े ही दिलचस्प मोड़ से गुजर चुके हैं। वे बहुत ही प्रतिभार्शार्ली थे तथार् उन्होंने उच्च शिक्षार् प्रार्प्त की थी। दुनियार् के सबसे अच्छे शिक्षकों के उपलब्ध होने के बार्द भी उन्हें पार्ठन में बड़ी ही परेशार्नी होती थी। वार्स्तव में रॉकफेलर डिस्लेक्सियार् नार्मक बीमार्री से ग्रस्त थे जो कि एक अधिगम विकृति कहलार्ती थी। इसे कर्इ बार्र अधिगम असमर्थतार् भी सीधे सीधे कह दियार् जार्तार् है क्योंकि यह बहुत ही आम बीमार्री है एवं अधिगम विकृति के 80 प्रतिशत व्यक्तियों में यह पार्यी जार्ती है। डिस्लेक्सियार् के मरीजों में पढ़ने हेतु अपेक्षित बौद्धिक योग्यतार् होने के बार्वजूद उन्हें पार्ठ्य सार्मग्री क पार्ठन करने अथवार् पार्ठ दोहरार्ने में कठिनाइ होती है। अधिगम विकृति एक ऐसी विकृति है जो कि दीर्घस्थार्यी होती है एवं व्यक्ति के विकास को उसकी वयस्कावस्थार् में भी अच्छे से प्रभार्वित करती है। अधिगम विकृति से ग्रस्त बच्चों क औसत बुद्धि एवं आयु होने के बार्वजूद स्कूल में निम्नस्तरीय प्रदर्शन रहतार् है। उनके मार्तार् पितार् इस समस्यार् को समझ नहीं पार्ते एवं अधिकांशत: इसे बच्चों की असफलतार् मार्नार् जार्तार् है। अतएव ऐसे बच्चों में आगे चलकर निम्न आत्मसम्मार्न जैसी अन्य मनोवैज्ञार्निक समस्यार्यें जन्म ले लेती हैं। इनमें ADHD से ग्रस्त होने की संभार्वनार् भी काफी बढ़ी चढ़ी होती है। डार्यग्नोस्टिक स्टेटिस्टिकल मैनुअल के आधार्र पर अधिगम विकृति के तीन प्रकार निर्धार्रित किए हैं-

  1. पठन विकृति 
  2. गणित विकृति
  3. लेखन अभिव्यक्ति की विकृति

1. पठन विकृति (reading disorder)- 

पठन-पार्ठन में होने वार्ली विकृति को पठन विकृति की संज्ञार् दी जार्ती है। इसे डी.एस.एम-4 में डिस्लेक्सियार् कहार् गयार् है। हार्लार्ंकि डी.एस.एम.-5 में डिस्लेक्सियार् शब्द क प्रयोग पठन विकृति हेतु नहीं कियार् गयार् है परन्तु यह आज भी मनोवैज्ञार्निकों, क्लीनिशियन तथार् शिक्षकों के बीच में अत्यधिक प्रचलित है। इस तरह की विकृति में बच्चों को पार्ठ पढ़ने में बड़ी ही कठिनाइ होती है। ऐसे बच्चें प्रार्य: पार्ठ को रूक रूक कर पढ़ते हैं इससे उनके पार्ठन गति धीमी होती है तथार् इसके सार्थ ही उन्हें मूल शब्दों को पहचार्नने एवं पढ़े गये शब्दों के अर्थ को समझने में भी कठिनाइ होती है। मनोवैज्ञार्निक रटर एवं उनके सहयोगियों (2004) के अनुसार्र स्कूली उम्र के लगभग 4 प्रतिशत बच्चों में डिस्लेक्सियार् की समस्यार् होती है एवं यह लड़कों में लड़कियों की अपेक्षार् ज्यार्दार् पार्यी जार्ती है।

डिस्लेक्सियार् से ग्रस्त बच्चे पार्ठ को बहुत ही कठिनतार् से एवं धीरे-धीरे पढ़ते हैं तथार् जब वे जल्दी जल्दी अथवार् ऊॅंची आवार्ज में पढ़ने की कोशिश करते हैं तो शब्दों को तोड़-मरोड़कर पढ़ते हैं, इसमें कर्इ बार्र वार्क्य के बीच के शब्द उनसे छूट जार्ते हैं एवं कर्इ बार्र वे उन्हें गलत भी पढ़ जार्ते हैं तथार् कभी कभी तो उनकी जगह पर दूसरे शब्दों क उच्चार्रण कर बैठते हैं। उन्हें शब्दों में बीच अक्षर विभार्जन में भी समस्यार् हो सकती है कर्इ बार्र तो वे अक्षरों के संयोजन को समझने में भी दिक्कत महसूस करते हैं। परिणार्मस्वरूप वे शब्द क समुचित स्वर में पार्ठन नहीं कर पार्ते हैं। कभी कभी उनमें कुछ अक्षरों को उल्टार् प्रत्यक्षित करने की समस्यार् भी होती है जैसे कि अंग्रेजी के अक्षर W को M के रूप में प्रत्यक्षित करनार्। इसके अलार्वार् उन्में अक्षरों की दिशार् पलटने की भी समस्यार् होती है जैसे कि b को d के रूप में पढ़नार्। डिस्लेक्सियार् अधिकांशत: 6-7 वर्ष की उम्र में पहचार्न में आतार् है। इसे बच्चों की ग्रेड 2 कक्षार् से भी जोड़कर देखार् जार्तार् है। डिस्लेक्सियार् से ग्रस्त बच्चों व किशोरों में डिप्रेशन, निम्नआत्ममूल्य एवं ADHD विकसित होने क खतरार् काफी ज्यार्दार् होतार् है।

ऑंचलिक एवं देशीय भार्षार्ओं के अनुसार्र डिस्लेिक्यार् की दर विभिन्न देशों में क्षेत्रों में भिन्न पार्यी जार्ती है। अंग्रेजी एवं फ्रेंच बोलने वार्ले देशों में जहॉं कि भार्षार् में अलग अलग प्रकार की स्पेलिंग क उच्चार्रण एक समार्न प्रतीत होने वार्ले स्वरों से कियार् जार्तार् है डिस्लेक्सियार् के रोगियों की संख्यार् काफी अधिक है। वहीं इटली में इसक विपरीत होने की वजह से डिस्लेक्सियार् की दर कम है।

2. गणित विकृति – 

गणित विकृति की पहचार्न तब होती है जब बच्चों की बौद्धिक क्षमतार् की तुलनार् में बच्चों क अंकगणितीय प्रदर्शन काफी निम्नस्तरीय होतार् है। तथार् उसकी शैक्षिक उपलबिधयॉं उससे प्रभार्वित होती हैं। ऐसे बच्चों में लिखित समस्यार्ओं को गणितीय संकेतों में कूटबद्ध करने में भी परेशार्नी होती है जिससे उनमें भार्षाइ कौशल से संबंधित कठिनाइ भी उत्पन्न हो जार्ती है। ऐसे बच्चों में संख्यार्त्मक संकेतों (numerical symbols) को समझने में भी समस्यार् हो सकती है। ऐसे बच्चों में मूल गणितीय संक्रियार्ओं को सम्पार्दित करने में भी कठिनाइ हो सकती है जैसे कि जोड़-घटार् एवं गुणार्-भार्ग। यह समस्यार् वैसे तो छ: वर्ष की आयु से ही प्रार्रम्भ हो सकती है परन्तु बच्चे के कक्षार् दो यार् तीन में पहुचने पर ही इसकी समुचित पहचार्न हो पार्ती है। यह लड़के एवं लड़कियों में समार्न रूप से पार्यी जार्ती है।

3. लेखन अभिव्यक्ति में विकृति – 

इस विकृति की पहचार्न बच्चों द्वार्रार् उनके द्वार्रार् लिखे गये कार्य में होने वार्ली स्पेलिंग, व्यार्करण, एवं पन्क्चुएशन में होने वार्ली त्रुटियों के मार्ध्यम से की जार्ती है। जब बच्चार् अपनी बौद्धिक क्षमतार् एवं आयु के स्तर से कहीं निम्नस्तर पर अत्यधिक त्रुटियॉं करतार् है तो इसे लेखन अभिव्यक्ति में विकृति की संज्ञार् दी जार्ती है। ऐसे बच्चे वार्क्यों को लिखने में काफी त्रुटियॉं करते हैं एवं वार्क्यों को पैरार्ग्रार्फ में ठीक से समार्योजित भी नहीं कर पार्ते हैं। अधिकांशत: सार्त वर्ष की उम्र में अथवार् कक्षार्-2 में इस विकृति की पहचार्न हो जार्ती है। कुछ केसेज जो कि मार्इल्डर केसेज कहे जार् सकते हैं में इनकी पहचार्न 10 वर्ष की उम्र अथवार् पार्ंचवी कक्षार् में पहुचते पहुचते हो जार्ती है।

(2) संचार्र विकृतियॉं – 

भार्षार् को, समझने एवं इस्तेमार्ल करने में तथार् स्पष्ट रूप से तथार् धार्रार्प्रवार्ह बोलने में होने वार्ली विकृति को संचार्र विकृति कहार् जार्तार् है। दैनिक जीवन में भार्षार् एवं भार्षण की अत्यधिक महत्तार् होने की वजह से यह विकृति जीवन में व्यक्ति की सफलतार् को उसके स्कूल जीवन, कार्यस्थल एवं सार्मार्जिक परिस्थितियों को काफी गंभीर रूप से प्रभार्वित करती है। यह विकृति कर्इ प्रकार की होती है। आइये इनके बार्रे में जार्नें।

1. भार्षार् विकृति – 

भार्षार् विकृति में बोलचार्ल की भार्षार् को उत्पन्न कर पार्ने की क्षमतार् में विकृति एवं बोलचार्ल की भार्षार् को समझ पार्ने की क्षमतार् में विकृति को सम्मिलिति कियार् गयार् है। इसके अन्तर्गत एक बार्लक में उसकी उम्र विशेष के परिप्रेक्ष्य में शब्दकोष के विकास क धीमार् होनार्, वार्क्य विन्यार्स में गड़बड़ी, शब्दों के प्रत्यार्ह्वार्न में कठिनाइ एवं उपयुक्त लम्बाइ तथार् जटिल वार्क्यों को निर्मित कर पार्ने में परेशार्नी जैसी विशिष्ट विकृतियॉं शार्मिल हैं। इसके अलार्वार् इस विकृति से ग्रस्त बच्चों में शब्दों के उपयुक्त उच्चार्रण में भी कमी पार्यी जार्ती है जिसे स्पीच सार्उुंड डिस्आर्डर कहार् जार्तार् है।

भार्षार् विकृति से ग्रस्त बच्चों में वार्क्यों अथवार् शब्दों को अर्थ को न समझ पार्ने की समस्यार्यें भी पार्यी जार्ती हैं। कुछ केसेज में ऐसे बच्चे कुछ विशेष प्रकार के शब्दों को समझने में संघर्ष करते पार्ये जार्ते हैं उदार्हरण के लिए ऐसे शब्द जो पदाथ अथवार् वस्तु की मार्त्रार् में अन्तर को अभिव्यक्त करते हैं जैसे कि large, big or huge । यार् फिर ऐसे शब्द जो कि लम्बाइ, चौड़ाइ, ऊॅंचाइ, अथवार् दूरी यार् निकटतार् को अभिव्यक्त करते हैं जैसे कि दूर (far) अथवार् पार्स (near) । ये हमेशार् वार्क्यों को छोटार् कर देते हैं। श्रव्य सूचनार्ओं को संसार्धित करने में भी कठिनाइ महसूस करते हैं।

2. भार्षण आवार्ज विकृति – 

इस विकृति को ध्वनिक विकृति (phonological disorder) भी कहार् जार्तार् है। वैसे बच्चों को जो उपयुक्त उम्र तथार् संभार्षण प्रक्रम में किसी प्रकार क दोष न होने के बार्वजूद शब्दों अथवार् वार्क्यों को सही सही ढंग से बोल यार् उच्चार्रित नहीं कर पार्ते हैं उन्हें भार्षण-आवार्ज विकृति यार् ध्वनिक विकृति क रोगी मार्नार् जार्तार् है। ऐसे बच्चों की भार्षार् में बोले गये शब्दों में अस्पष्टतार् होती है, ये शब्दों क प्रतिस्थार्पन करते हैं अर्थार्त् बोले जार्ने वार्ले शब्द के स्थार्न पर कोर्इ अन्य शब्द बोल देते हैं। कर्इ बार्र ये वार्क्यों में से कुछ शब्दों को छोड़कर वार्क्य बोलते हैं जिससे उनकी बार्तचीत एक बहुत छोटे बच्चे की बार्तचीत के समार्न हो जार्ती है। कुछ विशेष प्रकार के शब्द जिनक बहुत बढ़ियार् उच्चार्रण सार्धार्रण बच्चे नर्सरी, अथवार् केजी की कक्षार् में पहुचने से पूर्व ही भली भॉंति कर पार्ते हैं इस विकृति से ग्रस्त बच्चे उन शब्दों जैसे कि ch, f, l, r, sh एवं th की ध्वनियों क स्पष्ट उच्चार्रण करने में त्रुटियॉं करते हैं। जिन बच्चों में यह विकृति ज्यार्दार् गंभीर होती है वे तो b, d, t, m, n, एवं h क भी उच्चार्रण ठीक से नहीं कर पार्ते हैं। इस प्रकार के बच्चों को यदि स्पीच थेरेपी प्रदार्न की जार्ती है तो सार्मार्न्यतयार् 8 वर्ष की उम्र से पहले ही यह समस्यार् दूर हो जार्ती है।

3. चार्इल्डहुड-ऑनसेट-फ्लूयेन्सी विकृति – 

इस विकृति को हकलार्नार् विकृति (Stuttering) भी कहार् जार्तार् है। डी.एस.एम.-4 में इसे हकलार्नार् विकृति के रूप में ही अभिव्यक्त कियार् जार्तार् थार्। डी.एस.एम-5 के संस्करण में इसे चार्इल्डहुड-ऑनसेट-फ्लूयेन्सी विकृति के नार्म से वर्गीकृत कियार् गयार् है। इस विकृति से ग्रस्त बच्चे अपने बोलचार्ल के सार्मार्न्य प्रवार्ह तथार् बोलने में लगने वार्ले समय के पैटर्निंग में परेशार्नी क अनुभव करते हैं। वे किसी अक्षर अथवार् शब्द को कभी-कभी दोहरार् देते हैं, यार् कभी उसे लम्बे समय तक खींचकर बोलते हैं, यार् कभी शब्द को बीच में ही बोल देते हैं, एक शब्द के भीतर एक अक्षर बोल कर रूक जार्ते हैं और फिर पुन: बोलते हैं, आवार्ज को अवरूद्ध कर देते हैं तथार् अन्य कठिन शब्दों की जगह पर दूसरे शब्द बोलने लगते हैं, यार् फिर यदि मूल शब्दों को बोलते समय काफी तनार्व क अनुभव करते हैं। एक ही पद में पूरार् शब्द बोल देते हैं, आदि आदि। लगभग 1 प्रतिशत बच्चों में हकलार्ने की विकृति पार्यी जार्ती है इनमें 75 प्रतिशत लड़के होते हैं। हकलार्ने की समस्यार् प्रार्य: दो से सार्त वर्ष की उम्र में प्रार्रम्भ होती है और इनमें जसे तकरीबन 75 प्रतिशत बच्चे बिनार् उपचार्र के ही 15-16 वर्ष की उम्र तक आते आते अपने आप ही ठीक हो जार्ते हैं।

4. सार्मार्जिक संचार्र विकृति – 

सार्मार्जिक संचार्र विकृति डी.एस.एम-5 में संचार्र विकृति के अन्तर्गत सम्मिलित की गयी एक नये प्रकार की विकृति है जो कि इससे पूर्व डी.एस.एम. के किसी अन्य पूर्व संस्करण में वर्गीकृत नहीं की गयी थी। इस विकृति की डार्यग्नोसिस किसी बार्लक के संबंध में तब की जार्ती है जब कि कोर्इ बच्चार् जीवन की स्वार्भार्विक परिस्थितियों जैसे कि, स्कूल, घर, खेल आदि में अन्य व्यक्तियों के सार्थ शार्ब्दिक अथवार् अशार्ब्दिक रूप से दूसरे लोगों के सार्थ बार्तचीत नहीं कर पार्तार् है एवं यह लम्बे समय से एवं स्पष्ट रूप में चल रहार् होतार् है। इन बच्चों में बार्तचीत को लम्बे समय तक करने में कठिनाइ होती है तथार् वे कभी कभी बच्चों के समूह में होने पर अपनी इस कठिनाइ के चलते चुप रह जार्ते हैं। उन्हें बोलचार्ल एवं लिखने वार्ली भार्षार् दोनों को ही सीखने में कठिनाइ होती है। इस प्रकार की समस्यार् होने के बार्वजूद उनकी अन्य भार्षाइ एवं मार्नसिक योग्यतार् में औसत रूप से कोर्इ भी कमी दृष्टिगोचर नहीं होती है जिससे कि कहार् जार् सके कि भार्षार् के ज्ञार्न के औसत से निम्नस्तर क होने एवं मार्नसिक योग्यतार् क औसत से निम्नस्तर होने की कमी के कारण वे बोलचार्ल में पिछड़े हुए हैं। हार्लॉंकि बोलचार्ल की यह सार्मार्जिक अक्षमतार् जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सफलतार् एवं उन्नति को गंभीर रूप से प्रभार्वित अवश्य करती है।

(3) पेशीय कौशल विकृतियॉं –

इसे विकासार्त्मक समन्वय विकृति (developmental coordination disordrer) भी कहार् जार्तार् है। इस प्रकार की डार्यग्नोसिस तब की जार्ती है जब कि बच्चों में पेशीय समन्वय (motor coordination) में कोर्इ ऐसार् दोष हो जिसकी व्यार्ख्यार् मार्नसिक दुर्बलतार् यार् किसी ज्ञार्त फिजियोलॉजिकल डिस्आर्डर के रूप में नहीं की जार् सकती है। इस प्रकार की विकृति होने पर बच्चे को अपनी कमीज के बटन लगार्ने में परेशार्नी हो सकती है, क्रिकेट खेलने, कैरम खेलने, निशार्नेबार्जी, हार्थ से लिखने, जूते क फीतार् बॉंधने आदि में कठिनाइ हो सकती है। इस विकृति की डार्यग्नोसिस तभी की जार्ती है जब कि इस प्रकार की समस्यार्ओं से बच्चे की शैक्षिक उपलब्धि यार् दैनिक क्रियार्यें गंभीर रूप से प्रभार्वित हो रही हों।

अधिगम असमर्थतार् के कारण

वैसे तो कारण एवं कारक कर्इ हो सकते हैं परन्तु जो प्रमुख हैं एवं जिनकी आपको जार्नकारी होनी चार्हिए – अधिगम असमर्थतार् के अंतर्गत अधिगम विकृति पर किये गये शोध अनुसंधार्नों एवं सिद्धार्न्तों के अनुसार्र इस विकृति के कारकों में जैविक (genetic), न्यूरोबार्यलॉजिकल (neurobiological), एवं वार्तार्वरणीय (environmental) कारक प्रमुख हैं। इनक समवेत विवेचन इस प्रकार है।

उपरोक्त तीनों प्रकार के कारकों में आनुवॉंशिक कारकों क विश्लेषण सर्वार्धिक जटिल है। यद्यपि वैज्ञार्निक फ्लेचर एवं उनके सहयोगियों के अनुसार्र जुड़वॉं युग्मों तथार् उन्नत परिवार्रों पर किये गये अध्ययन स्पष्ट करते हैं कि अधिगम विकृति परिवार्रों में वृक्ष की शार्खार्ओं के समार्न फैलती है एवं पार्यी जार्ती है तथार्पि इस विकृति के लिए जिम्मेदार्र जीन्स क विश्लेषण करने पर ज्ञार्त होतार् है कि अलग अलग प्रकार के अधिगम विकृति के लिए अलग अलग प्रकार के कौन से जीन्स इसके विकसित होने के लिए उत्तरदार्यी हैं उनक विशिष्ट रूप से अभी तक प्रकाशन नहीं हो पार्यार् है। उदार्हरण के लिए पठन विकृति (reading disorder) यार् गणित विकृति (mathematics disorder) के लिए विशिष्ट रूप से जिम्मेदार्र जीन्स की पहचार्न वैज्ञार्निक अभी तक नहीं कर पार्ये हैं। हार्लॉंकि यह अधिगम विकृति के लिए जिम्मेदार्र जीन्स की पहचार्न अवश्य हो गयी है जो कि पठन विकृति आदि अन्य सभी प्रकार की अधिगम विकृति के लिए जिम्मेदार्र हो सकते हैं।

मनोवैज्ञार्निकों के अनुसार्र अधिगम विकृति से जुड़ी हुर्इ अलग-अलग प्रकार की समस्यार्ओं के लिए अलग अलग कारण हो सकते हैं। उदार्हरण के लिए बच्चों में पठन विकृति से संबंधित विभिन्न समस्यार्ओं जैसे कि शब्द पहचार्न (word recognition), शब्द प्रवार्ह (fluency) एवं समझ (comprehension) के लिए अलग अलग कारक हो सकते हैं। टैनोक (2009) के अनुसार्र शब्द पहचार्न से संबंधित विकृति के लिए अभी तक हुए अनुसंधार्नों से दो प्रकार के प्रमार्ण मिलते हैं एक प्रकार के प्रमार्ण इस विकृति के लिए आनुवार्ंशिक कारकों यार्नि कि जीन्स को इसके लिए प्रमुख कारक सिद्ध करते हैं वही दूसरे तरह के प्रमार्ण इसमें वार्तार्वरणीय असर को प्रदर्शित करते हैं। टैनोक यह भी कहते हैं कि इस प्रकार की विकृति के लिए क्रोमोसोम्स में स्थित जीन संख्यार् 1, 2, 3, 6, 11, 12, 15 एवं 18 को विभिन्न अनुसंधार्नों में बार्र-बार्र संबंधित पार्यार् गयार् है। वहीं पेट्रिल एवं उनके सहयोगी (2006) ने अपने शोध अनुसंधार्नों में वार्तार्वरणीय प्रभार्वों को इस विकृति से सहसंबंधित पार्यार् है। उनके अनुसार्र परिवार्रों में पढ़ने क वार्तार्वरण बच्चों की पठन आदत को महत्वपूर्ण रूप में प्रभार्वित करतार् है उनके अनुसार्र जिन परिवार्रों में पठन विकृति होने के बार्वजूद रीडिंग आदत को कुशलतार्पूर्वक बच्चों में स्थार्पित कियार् गयार् है उन परिवार्रों में अन्य परिवार्रों के बच्चों की अपेक्षार् पठन विकृति की समस्यार् साथक रूप से कम विद्यमार्न होती है। यहॉं तक कि यदि योजनार्बद्ध रीति से यदि पठन विकृति से ग्रस्त बच्चों में घर के स्नेहिल वार्तार्वरण में पठन-पार्ठन क अभ्यार्स करार्यार् जार्ये एवं उनमें इस आदत को विकसित कियार् जार्ये तो विशेष रूप से उनके शब्द पहचार्न की समस्यार् के खतरे को कम कियार् जार् सकतार् है।

सूक्ष्म मस्तिष्कीय विघटन अथवार् क्षति को भी अधिगम विकृति से जोड़ार् जार्तार् रहार् है। एवं वैज्ञार्निक हिन्सेलवुड (1996) जैसे पूर्ववर्ती विद्वार्न इसकी न्यूरोलॉजिकल व्यार्ख्यार् भी करते रहे हैं। शेविट्ज एवं उनके सहयोगियों (2006) के अनुसार्र अधिगम असमर्थतार् से ग्रस्त रोगियों के मस्तिष्क में संरचनार्त्मक (structural) एवं प्रकार्यार्त्मक (functional) विभिन्नतार्ओं के प्रमार्ण उपलब्ध हैं खार्सतौर पर शब्द पहचार्न समस्यार् यार्नि की डिस्लेक्सियार् की व्यार्ख्यार् हेतु बॉंये हिमेस्फियर के तीन प्रमुख हिस्सों के मार्ध्यम से की जार्ती है। इन तीन हिस्सों में पहलार् है ब्रोक एरियार् (Broca’s area) जो कि शार्ब्दिक अभिव्यंजनार् एवं शब्द विश्लेषण को प्रभार्वित करतार् है, तथार् दूसरार् एरियार् बॉंयार् पैरार्इटोटेम्पोरल (left- parietotemporal) एरियार् है जो कि शब्द विश्लेषण को प्रभार्वित करतार् है तथार् तीसरार् एरियार् बॉंयार् ऑक्सीटिपोटेम्पोरल (left- occitipotemporal) एरियार् है जो कि शब्द के स्वरूप की पहचार्न (recognition of word form) को प्रभार्वित करतार् है।

फ्लेचर एवं उनके सहयोगियों (2007) के अनुसार्र संख्यार् ज्ञार्न के विकसित होने में मस्तिष्क के बॉंये हिमेस्फियर क इन्ट्रार्पैरार्इटल सलकस (intra-parietal sulcus) एक ऐसार् एरियार् है जो कि इसमें महत्वपूर्ण रूप से जुड़ार् हुआ है तथार् इसकी गणित विकृति में अहम् भूमिक होती है।

उपरोक्त सभी प्रकार की अधिगम विकृति की तुलनार् में लेखन अभिव्यक्ति विकृति के संबंध में अभी तक कोर्इ भी विशिष्ट कारक संबंधी प्रमार्ण नहीं मिले हैं। इसके अलार्वार् संचार्र विकृति के प्रमुख प्रकार चार्इल्ड-ऑनसेट-फ्लूयेन्सी विकृति (हकलार्नार् विकृति) के संबंध में फिबिगर एवं उनके सहयोगियों (2010) क कहनार् है कि इसक प्रमुख कारण आनुवार्ंशिक है। उनके अनुसार्र अनुमार्नत: कहार् जार् सकतार् है कि इस विकृति के लिए संभार्षण करने के लिए जो मार्ंसपेशियॉं सम्मिलित होती हैं उन्हें नियंत्रित करने वार्ले जीन्स ही इसके लिए जिम्मेदार्र होते हैं। वैज्ञार्निक कांग एवं उनके सहयोगियों (2010) के अनुसार्र एक विशेष प्रकार के जीन के म्यूटेशन को हकलार्ने वार्ले बच्चों में विभिन्न वैज्ञार्निकों के शोध अनुसंधार्नों में रिपोर्ट कियार् गयार् है संभवतयार् वह म्यूटेशन भी हकलार्ने की विकृति से संबंधित हो सकतार् है। हार्लॉंकि इसकी वैधतार् के संबंध में अनुसंधार्न जार्री हकलार्ने की इस विकृति के कारण कर्इ सार्ंवेगिक प्रभार्व एवं परिणार्म भी इससे ग्रस्त बच्चों में अधिकांशत: देखने को मिलते हैं। करार्स एवं उनके सहयोगियों के अनुसार्र इस विकृति से ग्रस्त बच्चे जब तनार्व अथवार् चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में फंस जार्ते हैं यार् उनसे उनक सार्मनार् होतार् है तब वे सार्मार्न्य बच्चों के तुलनार् में कहीं अधिक उत्तेजित एवं क्षुब्ध हो जार्ते हैं। इसके अलार्वार् इनमें नहीं हकलार्ने वार्ले बच्चों के अपेक्षार् सार्ंवेगिक प्रतिक्रियार् वृत्ति भी काफी अधिक होती है। क्रार्इमार्त एवं उनके सहयोगियों (2002) के अनुसार्र हकलार्ने वार्ले बच्चों में इस विचार्र को लेकर कि उनके हकलार्ने को देखकर दूसरे लोग क्यार् कहेंगे अथवार् उनकी हंसी उड़ार्येंगे सोचकर, सार्मार्जिक चिंतार् (social anxiety) की संमस्यार् भी काफी मार्त्रार् में उत्पन्न हो जार्ती है। हकलार्ने वार्ले बच्चों में प्रार्य: उनकी इस समस्यार् के सार्थ बोलने के संबंध में चिंतार् की समस्यार्, वैसी परिस्थितियॉं जहॉं बोलने की आवश्यकतार् पड़ती है क परिहार्र करने की प्रवृत्ति भी पार्यी जार्ती है। यह प्रवृत्ति प्रार्य: व्यार्कुलतार् से उत्पन्न होती है।

उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट होती है कि अधिगम असमर्थतार् अथवार् अधिगम विकृति, संचार्र विकृति आदि के कर्इ कारण होते हैं अभी इस क्षेत्र में पर्यार्प्त शोध अनुसंधार्न नहीं हो पार्यें है जिन्हें किये जार्ने की महती आवश्यकतार् है।

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